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Zomato Tax Row: घर बैठे खाना खिलाने वाली फूड डिलीवरी ऐप जोमैटो (Zomato) पर जीएसटी डिपार्टमेंट (GST Department) ने टैक्स चोरी का आरोप लगाया है. इसके लिए कंपनी को डिमांड नोटिस भेजा गया है.
Zomato Tax Row: मोबाइल उठाकर एक क्लिक करते ही आपको घर बैठे मनपसंद खाना लाकर डिलीवर करने वाली फूड डिलीवरी ऐप जोमैटो (Zomato) मुश्किल में फंस गई है. केंद्र सरकार ने जोमैटो से तत्काल 803 करोड़ रुपये जमा कराने को कहा है. यह पैसा जोमैटो से टैक्स के तौर पर मांगा गया है, जिसकी चोरी का आरोप केंद्र सरकार ने फूड डिलीवरी कंपनी पर लगाया है. करीब 3 साल के दौरान टैक्स चोरी करने का आरोप जोमैटो पर लगा है, जिसकी वसूली के साथ ही सरकार ने कंपनी से उस पर पेनल्टी भी लगाई है. यह सारी रकम कुल मिलाकर लगभग 803 करोड़ रुपये बैठ रही है. उधर, जोमैटो ने इन आरोपों को गलत बताया है. कंपनी का दावा है कि वह अपना पूरा टैक्स भर रही है. सरकार की तरफ से भेजे गए डिमांड नोटिस के खिलाफ वह कानूनी सलाह ले रही है और उसके हिसाब से ही कार्रवाई करेगी.
खुद जोमैटो ने दी है शेयर बाजार को सूचना
सरकार की तरफ से भेजे गए टैक्स नोटिस की सूचना खुद जोमैटो ने ही शेयर बाजार नियामक सेबी (SEBI) को कंपनी फाइलिंग के जरिये दी है. कंपनी ने बताया है कि उसे नोटिस महाराष्ट्र के ठाणे जिले के माल व सेवा कल (GST) विभाग ने दिया है. इस नोटिस में कंपनी पर 2019 से 2022 के बीच टैक्स चोरी करने का आरोप लगाया गया है. जीएसटी विभाग का कहना है कि चुराए गए टैक्स की मांग के साथ ही इस नोटिस में समय पर टैक्स भुगतान नहीं करने के लिए लगाया गया जुर्माना और अब तक हुई देरी पर ब्याज की वसूली भी शामिल है. यह टैक्स कंपनी को डिलीवरी चार्ज के तौर पर कस्टमर्स से वसूली गई रकम पर चुकाना था. जोमैटो की कुल देनदारी 803.4 करोड़ रुपये बताई गई है.
यह है टैक्स नोटिस का पूरा हिसाब-किताब
जोमैटो ने शेयर बाजार को दी जानकारी में कहा, 'ठाणे के सीजीएसटी और केंद्रीय उत्पाद शुल्क के संयुक्त आयुक्त की तरफ से कंपनी को 12 दिसंबर, 2024 को एक आदेश भेजा गया है. इस आदेश में कंपनी से 29 अक्टूबर, 2019 से 31 मार्च, 2022 के बीच की अवधि के लिए टैक्स मांगा गया है. यह टैक्स 401,70,14,706 रुपये है, जिसमें ब्याज भी शामिल है. साथ ही इस पर 401,70,14,706 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.'
कानूनी लड़ाई लड़ेगी कंपनी
कंपनी ने कहा है कि वह इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ेगी, क्योंकि उसके हिसाब से उसका मामला मजबूत है. इस मामले में उचित प्राधिकारी के समक्ष अपील दायर की जाएगी. कंपनी के कानूनी व टैक्स सलाहकारों ने राय दी है कि अपील करने पर टैक्स से राहत पाने के लिए उसका पक्ष पूरी तरह मजबूत है.
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