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चांदी ₹3 लाख तक पहुंचेगी या फिर आएगी बड़ी गिरावट? सराफा बाजार में आगे का रास्ता तय करेंगे ये 5 फैक्टर

चांदी अभी करीब ₹2.50 लाख किलो पर है और ₹3 लाख का स्तर फिर चर्चा में है. इंडस्ट्रियल डिमांड तेजी को सहारा दे सकती है, लेकिन मजबूत डॉलर, ब्याज दरों में बढ़ोतरी और ग्लोबल सप्लाई कीमतों पर दबाव डाल सकते हैं.

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चांदी ₹3 लाख तक पहुंचेगी या फिर आएगी बड़ी गिरावट? सराफा बाजार में आगे का रास्ता तय करेंगे ये 5 फैक्टर

चांदी खरीदने वालों सावधान! ₹3 लाख के रास्ते में खड़ी हैं ये 5 बड़ी चुनौतियां (फोटो एआई)

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  • चांदी पहुंची ₹2.50 लाख किलो के पास
  • ₹3 लाख का स्तर फिर चर्चा में आया
  • इंडस्ट्रियल डिमांड दे सकती है सहारा
  • डॉलर मजबूत हुआ तो बढ़ेगा दबाव
  • ब्याज दरें तय करेंगी अगली बड़ी चाल

चांदी फिर से ₹3 लाख किलो के पार जाने की तैयारी कर रही है या इस तेजी के बाद बड़ी गिरावट आने वाली है. फिलहाल घरेलू बाजार में चांदी करीब ₹2.50 लाख प्रति किलो पर है, लेकिन इसके आगे का रास्ता सिर्फ मांग से तय नहीं होगा. डॉलर, ब्याज दरें, इंडस्ट्रियल डिमांड और ग्लोबल सप्लाई भी कीमत की दिशा तय करेंगे. चलिए कमोडिटी एंड शेयर मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय से समझते हैं कि सराफा बाजार की अगली चाल कैसी होगी?

चांदी ₹3 लाख तक पहुंचेगी या फिर आएगी बड़ी गिरावट?

चांदी की कीमत इस समय ऐसे मोड़ पर है, जहां तेजी और गिरावट दोनों की वजहें मौजूद हैं. गुडरिटर्न्स के मुताबिक 5 सितंबर को भारत में चांदी का भाव ₹2,50,000 प्रति किलो था. सितंबर में अब तक इसका सबसे ऊंचा भाव भी ₹2,50,000 और सबसे निचला भाव ₹2,45,000 प्रति किलो रहा है. 

देव कहते हैं फिलहाल चांदी एक सीमित दायरे में घूम रही है. लेकिन तस्वीर को सिर्फ आज के भाव से समझना सही नहीं होगा. अगस्त में चांदी ₹2,35,000 प्रति किलो से बढ़कर महीने के अंत में ₹2,55,000 तक पहुंची थी. अगस्त की सबसे ऊंची कीमत ₹2,60,000 रही थी. यहीं से ₹3 लाख का सवाल पैदा होता है. अगर तेजी के प्रमुख कारण फिर मजबूत होते हैं तो चांदी ऊपर जा सकती है, लेकिन इसके रास्ते में कई बड़े रिस्क भी हैं.

पहला संकेत इंडस्ट्रियल डिमांड का होगा

देव के अनुसार चांदी को सिर्फ जेवर या निवेश की धातु समझना अब पुरानी बात हो चुकी है. इसकी बड़ी मांग इंडस्ट्री से आती है. सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिफिकेशन और एआई से जुड़े सेक्टरों में चांदी का इस्तेमाल इसकी लंबी अवधि की मांग को सपोर्ट करता है. फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट में भी सोलर और इलेक्ट्रिफिकेशन सेक्टर से बढ़ती मांग को चांदी के स्ट्रक्चरल सपोर्ट के तौर पर बताया गया है. 

यही वह फैक्टर है जो चांदी को सोने से अलग बनाता है. अगर ग्लोबल इंडस्ट्रियल एक्टिविटी मजबूत रहती है, तो चांदी की खपत बढ़ सकती है और कीमत को सपोर्ट मिल सकता है. आम खरीदार के लिए इसका मतलब यह है कि चांदी की कीमत में तेजी सिर्फ निवेशकों की खरीदारी से नहीं आती. अगर इंडस्ट्री की खपत मजबूत रही तो ऊंचे भाव पर भी इसके लिए वास्तविक डिमांड बनी रह सकती है.

दूसरा संकेत डॉलर बताएगा चांदी की अगली चाल

चांदी की कीमत पर अमेरिकी डॉलर का सीधा असर पड़ता है. आम तौर पर डॉलर कमजोर होता है तो डॉलर में कीमत वाली कमोडिटीज को सपोर्ट मिलता है. इसके उलट मजबूत डॉलर चांदी जैसी धातुओं पर दबाव बना सकता है.

भारत में इसका असर और दिलचस्प हो जाता है. गुडरिटर्न्स के मुताबिक घरेलू चांदी की कीमत इंटरनेशनल कीमत के साथ रुपये की चाल से भी प्रभावित होती है. अगर रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है और इंटरनेशनल चांदी की कीमत स्थिर रहती है, तब भी भारत में चांदी महंगी हो सकती है. इसलिए सिर्फ इंटरनेशनल सिल्वर चार्ट देखकर भारतीय खरीदार को फैसला नहीं लेना चाहिए. डॉलर-रुपया रेट भी उतना ही अहम है.

तीसरा संकेत ब्याज दरों का खेल बदल सकता है

अभी चांदी के लिए सबसे बड़ा शॉर्ट टर्म रिस्क अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति है. हाल में फेड चेयर केविन वॉर्श के हॉकिश रुख के बाद सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद बढ़ी, जिसका असर चांदी पर पड़ा. फाइनेंशियल एक्सप्रेस के अनुसार अगस्त के हाई से चांदी करीब 6 फीसदी नीचे आई और करीब 66 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही थी. 

1 सितंबर को भी बढ़ते अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और ब्याज दर बढ़ने की आशंका के बीच चांदी में करीब 2.6 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई थी. उसी दिन एमसीएक्स पर चांदी वायदा करीब 1.3 फीसदी गिरकर ₹2,40,121 प्रति किलो पर बंद हुआ. यानी ₹3 लाख की तरफ जाने से पहले चांदी को सबसे बड़ी परीक्षा ब्याज दरों के मोर्चे पर देनी पड़ सकती है.

चौथा संकेत ग्लोबल सप्लाई और डिफिसिट का है

चांदी की कहानी में सप्लाई भी बेहद अहम है. अगर इंडस्ट्रियल डिमांड लगातार बढ़ती है और उसके मुकाबले सप्लाई पर्याप्त तेजी से नहीं बढ़ती, तो लंबे समय में कीमतों को सहारा मिल सकता है.

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट में विश्लेषकों ने चांदी के सप्लाई डिफिसिट और सोलर एनर्जी तथा इलेक्ट्रिफिकेशन से बढ़ती मांग को लंबी अवधि के लिए सकारात्मक फैक्टर माना है. हालांकि यही रिपोर्ट यह भी बताती है कि शॉर्ट टर्म में ब्याज दरों और डॉलर से चांदी में तेज उतार चढ़ाव बना रह सकता है. 

यानी यहां एक दिलचस्प विरोधाभास है. लंबी अवधि में सप्लाई की कमी तेजी की वजह बन सकती है, लेकिन अगले कुछ हफ्तों में वही चांदी कमजोर भी पड़ सकती है.

पांचवां संकेत एमसीएक्स का ट्रेंड सबसे पहले देगा

भारतीय निवेशकों के लिए एमसीएक्स चांदी का ट्रेंड सबसे उपयोगी संकेतों में से एक है. हालिया कारोबार में यह साफ दिखा है कि चांदी में तेजी के साथ अचानक तेज मुनाफावसूली भी हो सकती है.

फाइनेंशियल एक्सप्रेस के अनुसार 1 सितंबर को एमसीएक्स सिल्वर फ्यूचर्स ₹2,40,121 प्रति किलो पर बंद हुआ था. वहीं सितंबर की शुरुआत में घरेलू हाजिर बाजार में चांदी करीब ₹2.45 लाख से ₹2.50 लाख के दायरे में रही.  

इसका मतलब यह है कि ₹3 लाख का लक्ष्य तभी ज्यादा भरोसेमंद लगेगा, जब एमसीएक्स पर चांदी लगातार ऊंचे स्तर बनाए और हर गिरावट के बाद खरीदारी लौटे. सिर्फ एक-दो दिन की तेज उछाल को ट्रेंड मानना जोखिम भरा हो सकता है.

₹3 लाख का सपना है तो ये गलती न करें

देव कहते हैं चांदी में सबसे बड़ी गलती यह हो सकती है कि निवेशक सिर्फ यह देखकर खरीदारी कर ले कि कीमत ₹3 लाख तक जा सकती है. बाजार में अनुमान और गारंटी दो अलग चीजें हैं.

हालिया आंकड़े खुद बताते हैं कि चांदी में उतार चढ़ाव कितना तेज हो सकता है. गुडरिटर्न्स के अनुसार मार्च में चांदी ₹3,15,000 प्रति किलो के हाई तक पहुंची थी, लेकिन 31 मार्च तक यह ₹2,50,000 पर आ गई. यानी कुछ ही समय में बहुत बड़ी गिरावट देखने को मिली. 

यही वजह है कि अगर कोई निवेशक चांदी खरीदना चाहता है तो पूरी रकम एक साथ लगाने के बजाय कीमतों और ट्रेंड को देखकर चरणबद्ध खरीदारी पर विचार कर सकता है. खासकर उन लोगों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए जिन्हें जल्द पैसे की जरूरत पड़ सकती है.

अभी चांदी में असली खेल ₹3 लाख नहीं बल्कि इन पांच संकेतों का है

चांदी के लिए लंबी अवधि की कहानी अभी भी दिलचस्प दिखती है. सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिफिकेशन से मांग को सपोर्ट मिल सकता है, जबकि सप्लाई डिफिसिट तेजी का आधार बन सकता है. लेकिन शॉर्ट टर्म में डॉलर, अमेरिकी ब्याज दरें और एमसीएक्स का ट्रेंड तस्वीर पलट सकते हैं. 

इसलिए ₹3 लाख प्रति किलो का सपना देख रहे निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि सिर्फ लक्ष्य कीमत पर नजर न रखें. चांदी अगर ₹2.50 लाख से ऊपर मजबूती बनाए रखती है और ग्लोबल संकेत भी साथ देते हैं, तभी अगली बड़ी तेजी की कहानी मजबूत होगी. वहीं डॉलर मजबूत हुआ, ब्याज दरों का दबाव बढ़ा और इंडस्ट्रियल डिमांड कमजोर पड़ी तो बड़ी गिरावट का जोखिम भी बना रहेगा.

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