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जुलाई 2026 में सोना ₹80,000 के स्तर को बहुत पीछे छोड़ते हुए ₹1,47,000 से ₹1,57,000 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर कारोबार कर रहा है. मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां, रुपये की कमजोरी और वैश्विक तनाव इस ऐतिहासिक तेजी और उतार-चढ़ाव के मुख्य कारण हैं.
अगर आप अब भी इस इंतजार में बैठे हैं कि सोना कब ₹80,000 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आएगा, तो आपको बाजार की हकीकत हैरान कर सकती है. वर्तमान में सर्राफा बाजार एक ऐसे अभूतपूर्व दौर से गुजर रहा है जहां कीमतें आम आदमी की सोच से कहीं आगे निकल चुकी हैं. इस जुलाई 2026 में बुलियन मार्केट के समीकरण इतनी तेजी से बदले हैं कि कल तक जो स्तर रिकॉर्ड माने जा रहे थे, वे अब गुजरा वक्त बन चुके हैं. बाजार की इस गुप्त चाल और भविष्य के रुख को समझने के लिए हमने बात की देश के जाने-माने मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय से, जिन्होंने बाजार के अंदरूनी संकेतों को डिकोड किया है.
सोने-चांदी को टक्कर दे रहा ये लाल सोना, जानिए दुनिया के इस कीमती मेटल पर किस देश का है कब्जा
| धातु और शुद्धता | वजन / मात्रा | आज का अनुमानित भाव (रुपये में) |
| 24 कैरेट सोना (Pure Gold) | प्रति 10 ग्राम | ₹1,46,300 - ₹1,46,900 |
| 22 कैरेट सोना (Standard Gold) | प्रति 10 ग्राम | ₹1,34,000 - ₹1,34,600 |
| 18 कैरेट सोना (Jewelry Gold) | प्रति 10 ग्राम | ₹1,09,700 - ₹1,10,300 |
| चांदी (Pure Silver) | प्रति 1 किलोग्राम | ₹2,33,900 - ₹2,67,100 * |
नोट: प्रमुख शहरों (जैसे दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता) में स्थानीय टैक्स, वैट (VAT) और ज्वेलरी के मेकिंग चार्ज के कारण अंतिम खुदरा कीमतों में थोड़ा अंतर देखने को मिल सकता है. वहीं, चांदी की कीमतों में अलग-अलग राज्यों और औद्योगिक मांग के आधार पर शहरों के बीच भिन्नता देखी जा रही है.
मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय का कहना है कि जो लोग सोना ₹80,000 होने की उम्मीद कर रहे हैं, वे बाजार के वर्तमान डेटा को मिस कर रहे हैं. जुलाई 2026 में 24 कैरेट सोने का औसत भाव पहले ही ₹1,47,000 से ₹1,57,000 प्रति 10 ग्राम के बीच चल रहा है. श्री पांडेय के अनुसार, "अब सवाल यह नहीं है कि सोना ₹80,000 पर कब आएगा, बल्कि असली सवाल यह है कि क्या यह इस साल के अंत तक ₹1,60,000 या ₹1,70,000 के नए स्तर को पार कर जाएगा. घरेलू बाजार में आयात शुल्क (कस्टम ड्यूटी) में किए गए बदलाव और वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों द्वारा की जा रही आक्रामक खरीदारी ने कीमतों को एक मजबूत निचला स्तर (फ्लोर प्राइस) दे दिया है, जिससे बड़ी गिरावट की उम्मीद फिलहाल नजर नहीं आती.
bfsi.economictimes की रिपोर्ट के मुताबिक ग्लोबल मार्केट में इस समय अमेरिकी फेडरल रिजर्व के बयानों और ब्याज दरों को लेकर एक बड़ा सस्पेंस बना हुआ है. अमेरिकी नौकरियों के कमजोर आंकड़ों के बाद जैसे ही ब्याज दरों में कटौती की संभावनाएं बढ़ती हैं, सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तुरंत उछाल आ जाता है. इसके अलावा, दुनिया भर के केंद्रीय बैंक (विशेषकर चीन और भारत) अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए लगातार अपने भंडारों में सोना बढ़ा रहे हैं. जब बड़े वैश्विक खिलाड़ी लगातार खरीदारी मोड में हों, तो स्थानीय सर्राफा बाजारों में उसका सीधा असर कीमतों के यू-टर्न और अप्रत्याशित उछाल के रूप में देखने को मिलता है.
एनआई की रिपोर्ट बताती है कि बाजार के इस रुख का सीधा असर आपके और हमारे जैसे आम खरीदारों की जेब पर पड़ रहा है. देवकृष्ण पांडेय का विश्लेषण है कि भारत में शादियों और त्योहारों के सीजन में सोने की मांग परंपरागत रूप से बहुत ऊंची रहती है. लेकिन मौजूदा कीमतों को देखते हुए मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए गहने खरीदना एक बड़ी चुनौती बन गया है. इसका व्यावहारिक असर यह हो रहा है कि लोग अब भारी आभूषणों के बजाय हल्के वजन वाले कस्टमाइज्ड गहनों को प्राथमिकता दे रहे हैं. इसके साथ ही, चांदी की कीमतों में आ रही तेजी सीधे तौर पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और होम अप्लायंसेज की मैन्युफैक्चरिंग लागत को बढ़ा रही है, जिससे रोजमर्रा की तकनीक भी महंगी हो रही है.
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इस ऊंचे भाव वाले बाजार में आम निवेशकों को क्या करना चाहिए? देवकृष्ण पांडेय एक बेहद महत्वपूर्ण सलाह देते हैं. उनके मुताबिक, इस समय एकमुश्त (लम्प-सम) बड़ी रकम सोने में लगाने के बजाय 'सिप' (SIP) या टुकड़ों में निवेश करने की रणनीति अपनानी चाहिए. इसके अलावा, लॉकर में रखने वाले भौतिक सोने के बजाय डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ (ETF) या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड एक बेहतर जरिया बनकर उभरे हैं, क्योंकि इनमें मेकिंग चार्ज और शुद्धता की चिंता नहीं होती. जुलाई 2026 का यह बाजार भले ही उथल-पुथल भरा दिख रहा हो, लेकिन अनुशासित और समझदार निवेशकों के लिए यह अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने का एक बेहतरीन जरिया साबित हो सकता है.
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