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Gold-Silver Price Target: सोने और चांदी की कीमतों में आ रही तेजी ने निवेशकों और आम खरीदारों को हैरत में डाल दिया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि ग्लोबल टेंशन और फेड रिजर्व के फैसलों के चलते सोना 1.10 लाख और चांदी 1.50 लाख रुपये का आंकड़ा छू सकती है.
अगर आप अपनी गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखने के लिए सोने या चांदी में पैसा लगाने की सोच रहे हैं, या घर में शादी-ब्याह के लिए जेवर खरीदने का प्लान है, तो यह खबर आपके होश उड़ा सकती है. बाजार के गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या सोना वाकई 1.10 लाख रुपये और चांदी 1.50 लाख रुपये के ऐतिहासिक स्तर को पार कर जाएगी? सराफा बाजार के इस नए तूफान ने आम आदमी से लेकर बड़े निवेशकों तक को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि उन्हें अब क्या करना चाहिए. चलिए मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय से समझत हैं कि क्या सोना-चांदी सच में अपने ऐतिहासिक स्तर को पार करेंगे?
बुलियन मार्केट में मौजूदा वैश्विक हालात ऐसे बन चुके हैं जो कीमती धातुओं की कीमतों को आसमान पर ले जा रहे हैं. दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) और केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की लगातार की जा रही खरीदारी ने इसकी डिमांड को बहुत बढ़ा दिया है. जब-जब दुनिया में अनिश्चितता का माहौल होता है, लोग शेयर बाजार से पैसा निकालकर सोने में लगाते हैं क्योंकि इसे सबसे सुरक्षित एसेट माना जाता है. इसी वजह से MCX पर भी सोने और चांदी के ट्रेंड लगातार मजबूती के संकेत दे रहे हैं.
सोने की कीमतों का सीधा कनेक्शन अमेरिकी डॉलर इंडेक्स और वहां के फेडरल रिजर्व (Fed) की नीतियों से होता है. अगर फेड रिजर्व ब्याज दरों में कटौती करता है, तो डॉलर कमजोर होता है. डॉलर कमजोर होने का सीधा मतलब है कि सोने की चमक और ज्यादा बढ़ेगी. एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले महीनों में डॉलर इंडेक्स में गिरावट आ सकती है, जिससे भारतीय बाजार में सोने और चांदी के दाम एक नया रिकॉर्ड बनाने की तरफ बढ़ेंगे. यह एक ऐसा चक्र है जिसे समझे बिना आप सोने में सही समय पर निवेश नहीं कर सकते.
अब सवाल उठता है कि इस भारी तेजी का एक आम खरीदार पर क्या असर पड़ेगा? अगर यह प्रेडिक्शन सच साबित होता है, तो मिडिल क्लास के लिए सोना खरीदना एक दूर का सपना बन जाएगा. शादियों के सीजन में जेवर बनवाना बजट से बाहर हो सकता है. लेकिन इसका एक दूसरा पहलू भी है. जिन लोगों ने पहले से सोना खरीदकर रखा हुआ है, उनके पोर्टफोलियो की वैल्यू बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी. यानी यह तेजी एक तरफ जेब पर भारी पड़ेगी, तो दूसरी तरफ पुरानी बचत को तगड़ा मुनाफा भी देगी.
आमतौर पर लोग सिर्फ बढ़ती कीमतों को देखते हैं, लेकिन इसके पीछे छिपे जोखिम को भूल जाते हैं. बाजार के कुछ विश्लेषकों का यह भी मानना है कि जब कीमतें बहुत तेजी से ऊपर जाती हैं, तो मुनाफावसूली (Profit Booking) के कारण अचानक बड़ी गिरावट भी आ सकती है. इसलिए, बिना सोचे-समझे इस ऊंचे स्तर पर अपनी पूरी पूंजी लगा देना समझदारी नहीं होगी. डिजिटल गोल्ड या गोल्ड ईटीएफ (ETF) के जरिए छोटे-छोटे टुकड़ों में निवेश करना इस समय सबसे सुरक्षित रास्ता हो सकता है.
देवकृष्ण पांडेय के अनुसार, सोने का 1.10 लाख रुपये और चांदी का 1.50 लाख रुपये के स्तर पर पहुंचना कोई असंभव बात नहीं है, लेकिन इसके लिए कुछ खास वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों का एक साथ होना जरूरी है. आइए उनके विश्लेषण के आधार पर समझते हैं कि इसके पीछे का असली गणित क्या है:
देवकृष्ण पांडेय का मानना है कि लॉन्ग टर्म (लंबी अवधि) में सोने और चांदी का इस टारगेट को छूना पूरी तरह मुमकिन है. इसके पीछे सबसे बड़ा हाथ वैश्विक अनिश्चितता और मुद्रास्फीति (महंगाई) का है. जब-जब दुनिया में आर्थिक मंदी या युद्ध जैसे हालात बनते हैं, तब-तब केंद्रीय बैंक (जैसे भारत का RBI या अमेरिका का फेड) सोने की खरीदारी बढ़ा देते हैं. यह मांग कीमतों को ऊपर की तरफ धकेलती है.
एक्सपर्ट के मुताबिक, चांदी में सोने से भी ज्यादा तेजी की संभावना है. इसका कारण यह है कि चांदी सिर्फ एक आभूषण (Jewelry) नहीं है, बल्कि एक प्रमुख औद्योगिक धातु (Industrial Metal) भी है. सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और इलेक्ट्रॉनिक्स में चांदी की मांग लगातार बढ़ रही है. यदि इंडस्ट्रियल डिमांड इसी तरह बढ़ती रही, तो चांदी का 1.50 लाख रुपये का टारगेट सोने से भी पहले हासिल हो सकता है.
यह कोई रातों-रात होने वाला चमत्कार नहीं होगा. एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय के अनुसार, इस लक्ष्य तक पहुँचने में **1.5 से 3 साल तक का समय** लग सकता है. यह इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) ब्याज दरों में कितनी कटौती करता है और डॉलर इंडेक्स कितना कमजोर होता है.
इस स्थिति में एक्सपर्ट ने दो अलग-अलग रणनीतियां सुझाई हैं:
आम खरीदार (शादी-ब्याह के लिए):अगर आपको घरेलू काम या शादी के लिए गहने खरीदने हैं, तो कीमतों के गिरने का इंतजार न करें. बाजार में जब भी 3-5% का छोटा करेक्शन (गिरावट) आए, अपनी जरूरत का हिस्सा खरीद लें.
निवेशक (Investors): इस ऊंचे स्तर पर एक साथ (Lumpsum) पूरा पैसा न लगाएं. बाजार में 'बाय ऑन डिप्स' (Buy on Dips) यानी हर गिरावट पर थोड़ा-थोड़ा खरीदने की रणनीति अपनाएं. इसके लिए डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ (ETF) या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB)** सबसे सुरक्षित और बेहतर विकल्प हैं, जहां मेकिंग चार्ज का नुकसान नहीं होता.
पते की बात (Takeaway): बाजार में तेजी का रुख जरूर है, लेकिन किसी भी झांसे या घबराहट (FOMO) में आकर अपनी क्षमता से अधिक कर्ज लेकर या जल्दबाजी में बड़ा निवेश करने से बचें.
देव कहते हैं कि अगर आप एक निवेशक हैं, तो मौजूदा माहौल में आपको "वेट एंड वॉच" यानी देखो और इंतजार करो की नीति अपनानी चाहिए. बाजार जब भी थोड़ा नीचे आए (Dip), तब खरीदारी करने का मौका तलाशें. एकमुश्त सारा पैसा लगाने के बजाय सिस्टेमैटिक तरीके से निवेश करें. चांदी में औद्योगिक मांग (Industrial Demand) भी बढ़ रही है, इसलिए चांदी में भी लंबी अवधि के लिए निवेश फायदेमंद हो सकता है. अपनी वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखकर और एक्सपर्ट्स की सलाह लेकर ही कोई बड़ा फैसला लें.
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