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दिशा देखकर क्यों बिक रहे हैं फ्लैट्स? रियल्टी मार्केट के नए ट्रेंड से रीसेल में तगड़ा मुनाफा जानिए कैसे मिलेगा

East facing vs North facing property rates: भारतीय रियल एस्टेट बाजार में अब फ्लैट्स और घर की दिशा के आधार पर कीमतें तय हो रही हैं. गंगा रियल्टी के ताजा सर्वे के मुताबिक, भारी डिमांड के कारण पूर्वमुखी और उत्तरमुखी प्रॉपर्टीज पर डेवलपर्स 3% से 5% तक का सीधा प्रीमियम (अतिरिक्त कीमत) वसूल रहे हैं.

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दिशा देखकर क्यों बिक रहे हैं फ्लैट्स? रियल्टी मार्केट के नए ट्रेंड से रीसेल में तगड़ा मुनाफा जानिए कैसे मिलेगा

रियल्टी बाजार में 'दिशा' का दबदबा क्यों 93% खरीदारों की पसंद बनते ही महंगे हो गए ये खास मकान (फोटो एआई)

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  • दिशा के आधार पर प्राइसिंग
  • वास्तु सम्मत घरों पर प्रीमियम
  • 93 फीसदी खरीदार कतार में
  • रीसेल वैल्यू में भारी उछाल
  • डेवलपर्स का नया बिजनेस मॉडल

Vastu compliance property resale value: यदि आप सोचते हैं कि किसी मकान की कीमत सिर्फ उसके इलाके, स्क्वायर फीट और लग्जरी सुविधाओं से तय होती है, तो आप रियल्टी सेक्टर के एक बड़े आर्थिक बदलाव से अनजान हैं. भारतीय रियल एस्टेट बाजार में अब 'दिशा' एक बड़ा कमर्शियल टूल बन चुकी है. डेवलपर्स अब सिर्फ घर नहीं बेच रहे, बल्कि दिशाओं के आधार पर उसकी कीमतें निर्धारित कर रहे हैं. एक होलिया सर्वे से सामने आया है कि देश के टियर-1 और टियर-2 शहरों में 93 प्रतिशत घर खरीदार केवल वास्तु-अनुकूल संपत्तियों को ही प्राथमिकता दे रहे हैं, जिसने बिल्डर्स को एक नया बिजनेस मॉडल दे दिया है.

पूर्व और उत्तरमुखी प्रॉपर्टीज पर क्यों वसूला जा रहा है प्रीमियम?

गंगा रियल्टी द्वारा किए गए एक मार्केट सर्वे के अनुसार, इस समय प्रॉपर्टी बाजार में पूर्वमुखी और उत्तरमुखी मकानों की मांग सबसे ज्यादा है. स्थिति यह है कि अन्य दिशाओं के मुकाबले इन खास दिशाओं वाले फ्लैट्स और प्लॉट पर डेवलपर्स 3 से 5 प्रतिशत तक का सीधा प्रीमियम वसूल रहे हैं. बिजनेस के नजरिए से देखें तो पूर्वमुखी संपत्तियां मार्केट में पहले पायदान पर बनी हुई हैं, क्योंकि इन्हें स्वास्थ्य और पारिवारिक समृद्धि का प्रतीक मानकर खरीदार बड़ी रकम चुकाने को तैयार रहते हैं. वहीं, उत्तरमुखी संपत्तियां दूसरे स्थान पर हैं, जिन्हें आर्थिक तरक्की और व्यावसायिक लाभ से जोड़कर देखा जाता है.

रीसेल और रेंटल मार्केट का नया गणित क्या है?

इस ट्रेंड का असर सिर्फ नया घर खरीदते समय ही नहीं, बल्कि भविष्य में मिलने वाले रिटर्न पर भी पड़ता है. रियल्टी एक्सपर्ट्स का मानना है कि वास्तु के हिसाब से बने इन घरों की लिक्विडिटी यानी बाजार में आसानी से बिकने की क्षमता बहुत ज्यादा होती है. यदि कोई निवेशक आज 3 से 5 फीसदी अतिरिक्त कीमत देकर पूर्व या उत्तरमुखी घर खरीदता है, तो भविष्य में उसे रीसेल के वक्त कई गुना ज्यादा खरीदार मिलते हैं और रेंटल इनकम भी बेहतर होती है. घर के किसी एक सदस्य की आस्था न होने पर भी पूरा परिवार आर्थिक और भावनात्मक सुरक्षा के लिए इसी विकल्प को चुनता है.

इंटीरियर और लेआउट का कमर्शियल महत्व क्यों बढ़ा?

बिल्डर्स अब इन प्रीमियम घरों को बेचने के लिए उनके आंतरिक लेआउट की ब्रांडिंग भी बेहद बारीकी से कर रहे हैं. पूर्वमुखी मकानों में सुबह की धूप का भरपूर फायदा उठाने के लिए मुख्य प्रवेश द्वार को उत्तर-पूर्वी हिस्से में रखा जाता है, जो परंपरा को पसंद करने वाले परिवारों को आकर्षित करता है. इसके विपरीत, उत्तरमुखी मकानों में दिनभर एकसमान रोशनी रहने के कारण इन्हें कॉरपोरेट प्रोफेशनल्स और व्यापारियों को टारगेट करके बेचा जाता है, जहां मुख्य द्वार उत्तरी दीवार पर होता है. दोनों ही लेआउट्स में रसोई को दक्षिण-पूर्व और बेडरूम को दक्षिण-पश्चिम में रखकर अधिकतम कीमत वसूली जा रही है.

क्या है खरीदारों के लिए फाइनल चेकलिस्ट?

इस कमर्शियल रेस में खरीदारों को भी चौकन्ना रहने की जरूरत है ताकि वे सही कीमत पर सही प्रॉपर्टी चुन सकें. बाजार में निवेश करने से पहले प्रोजेक्ट का वास्तु अनुपालन प्रमाणपत्र देखना जरूरी हो गया है. इसके अलावा, फ्लैट का ओरिएंटेशन, मुख्य द्वार की दिशा, किचन और मास्टर बेडरूम की सटीक लोकेशन की जांच की जानी चाहिए. प्रॉपर्टी के उत्तर-पूर्वी कोने में खुला स्थान होना इसकी वैल्यू को और बढ़ा देता है, जिसे डेवलपर्स अब अपने विज्ञापनों में मुख्य यूएसपी की तरह पेश कर रहे हैं.

किन दिग्गज डेवलपर्स ने बदला अपना प्रोजेक्ट डिजाइन?

बाजार के इस रुख को देखते हुए देश के बड़े रियल एस्टेट दिग्गजों ने अपनी रणनीति बदल ली है. अकेले बेंगलुरु शहर में इस समय लगभग 529 वास्तु-अनुरूप बड़ी परियोजनाएं चल रही हैं. huntvastuhomes.com के आंकड़ों के अनुसार, पूरे भारत में ऐसे प्रोजेक्ट्स की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है. गोदरेज प्रॉपर्टीज, शोभा लिमिटेड, प्रेस्टीज ग्रुप, ब्रिगेड समूह, दूतावास समूह, डीएलएफ, लोढ़ा और ओबेरॉय रियल्टी जैसे बड़े ब्रांड्स अब अपने आर्किटेक्चरल डिजाइन को इसी मांग के अनुरूप ढाल रहे हैं. इसके साथ ही सिग्नेचर, सुमाधुरा, जीएम एलिगेंस और पूर्वा जैसी कंपनियां भी इस दिशा-आधारित प्राइसिंग मॉडल का पूरा फायदा उठा रही हैं.

डेटा और मार्केट रिसर्च रिपोर्ट 2026 के आंकड़े क्या बता रहे?

रियल एस्टेट मार्केट रिसर्च विंग 'गंगा रियल्टी' और डेटा पार्टनर 'huntvastuhomes.com' द्वारा भारत के प्रमुख टियर-1 और टियर-2 शहरों (दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, मुंबई, पुणे, हैदराबाद और चेन्नई) में किए गए एक विस्तृत सर्वे में दिशाओं के इस कमर्शियल इम्पैक्ट की पुष्टि हुई है. इस रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, रियल्टी मार्केट में सक्रिय लगभग 93 प्रतिशत खरीदार अंतिम सौदा करने से पहले मकान के वास्तु ओरिएंटेशन, विशेषकर मुख्य प्रवेश द्वार को अनिवार्य रूप से चेक करते हैं.

इसी भारी डिमांड के चलते 'प्राइसिंग प्रीमियम इंडेक्स' में बड़ा उछाल देखा गया है, जहां पहली प्राथमिकता वाले पूर्वमुखी (East Facing) मकानों पर 3% से 5% और दूसरी सबसे बड़ी पसंद यानी उत्तरमुखी (North Facing) संपत्तियों पर 3% से 4.5% तक का सीधा प्रीमियम मूल्य (अतिरिक्त कीमत) वसूला जा रहा है. डेवलपर्स के बीच इस ट्रेंड की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मौजूदा समय में अकेले बेंगलुरु शहर में ही 529 से अधिक मान्यता प्राप्त आवासीय परियोजनाएं पूरी तरह से वास्तु-अनुरूप (Vastu-Compliant) लेआउट पर तैयार की जा रही हैं.

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