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Why copper demand is increasing: प्रसिद्ध लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने चेतावनी दी है कि एआई और इलेक्ट्रिक वाहनों की वजह से तांबे की मांग तेजी से बढ़ेगी और सप्लाई घटने से कीमतें आसमान छूएंगी. पारंपरिक बचत छोड़कर समझदार निवेशकों को अब कॉपर से जुड़े सेक्टर्स में स्मार्ट निवेश करना चाहिए.
क्या आपकी गाढ़ी कमाई बैंक के फिक्स डिपॉजिट में सड़ रही है और आपको लग रहा है कि आप पूरी तरह सुरक्षित हैं? अगर हां, तो दुनिया के जाने-माने वित्तीय विशेषज्ञ और 'रिच डैड पुअर डैड' के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी की यह चेतावनी आपकी नींद उड़ाने के लिए काफी है. अब तक सोने, चांदी और बिटकॉइन की बात करने वाले कियोसाकी ने एक ऐसा नया दांव खेला है जिसने ग्लोबल मार्केट में भूचाल ला दिया है. उनका साफ कहना है कि आने वाला दौर सोने या चांदी का नहीं, बल्कि तांबे यानी कॉपर का है.
4 अगस्त की Reuters रिपोर्ट के मुताबिक कॉपर की कीमत पिछले एक साल में 40% से ज्यादा बढ़कर करीब $14,000 प्रति टन पहुंच चुकी थी. पिछले एक साल में तांबे की कीमतों में करीब 50 फीसदी की तेजी आ चुकी है, लेकिन कियोसाकी का मानना है कि असली खेल तो अभी शुरू होना बाकी है और समझदार निवेशकों को वक्त रहते अपनी रणनीति बदल लेनी चाहिए. कॉपर की कीमतों में पिछले एक साल में 40 फीसदी से ज्यादा की तेजी आ चुकी है. अगस्त 2026 की शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 14,000 डॉलर प्रति टन के आसपास पहुंच गई और LME कॉपर ने भी इस स्तर को पार किया.
IEA के मुताबिक दुनिया में डेटा सेंटर की बिजली खपत 2030 तक दोगुनी से ज्यादा होकर करीब 945 TWh हो सकती है. 2024 से 2030 के बीच डेटा सेंटर की बिजली खपत करीब 15% सालाना की दर से बढ़ने का अनुमान है. AI-ऑप्टिमाइज्ड डेटा सेंटर की बिजली मांग इससे भी तेज बढ़ रही है. AI की असली कॉपर डिमांड सिर्फ चिप तक सीमित नहीं है. डेटा सेंटर जितने बढ़ेंगे, उतनी ही बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन, ग्रिड और बैकअप इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत बढ़ेगी. IEA के मुताबिक डेटा सेंटर की वैश्विक बिजली खपत 2030 तक करीब 945 TWh पहुंच सकती है.
IEA के कॉपर विश्लेषण के मुताबिक उसके एक परिदृश्य में कुल वैश्विक कॉपर डिमांड 2023 के 25.855 मिलियन टन से 2040 में 36.379 मिलियन टन तक पहुंच सकती है. इसी अवधि में क्लीन-टेक से जुड़ी कॉपर डिमांड 6.311 मिलियन टन से बढ़कर 16.343 मिलियन टन हो सकती है.
आज के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई और टेक्नोलॉजी का पहिया इतनी तेजी से घूम रहा है कि दुनिया भर में बड़े-बड़े डेटा सेंटर खड़े किए जा रहे हैं. इन सभी सेंटरों और तकनीक को चलाने के लिए बिजली के तारों और संचरण में सबसे ज्यादा जिस चीज की जरूरत पड़ती है, वह तांबा ही है. इसके अलावा, सड़कों पर दौड़ने वाली इलेक्ट्रिक गाड़ियां आम पेट्रोल-डीजल गाड़ियों के मुकाबले तीन से चार गुना ज्यादा तांबा खाती हैं. इतना ही नहीं, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और ग्रीन एनर्जी के लिए बनाए जा रहे नए विद्युत ग्रिडों के कारण तांबे की खपत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है. आंकड़ों पर नजर डालें तो तांबे की वैश्विक मांग जो फिलहाल 28 मिलियन टन प्रति वर्ष है, वह साल 2040 तक बढ़कर 42 मिलियन टन तक पहुंचने की उम्मीद है.
एक तरफ जहां दुनिया भर में तांबे की मांग आसमान छू रही है, वहीं दूसरी तरफ जमीन से निकलने वाला तांबा तेजी से घटता जा रहा है. दुनिया के सबसे बड़े तांबा उत्पादक देश चिली में खनन उत्पादन में लगभग 9.5 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है. इसके साथ ही पिछले दो दशकों में खदानों से मिलने वाले तांबे के अयस्क की क्वालिटी भी काफी कमजोर हो चुकी है. इसका मतलब यह है कि पहले जितनी मात्रा में तांबा निकाला जाता था, अब उतनी ही मात्रा हासिल करने के लिए खदानों को 20 प्रतिशत ज्यादा मेहनत और काम करना पड़ रहा है. मांग में बेतहाशा तेजी और सप्लाई में आ रही इस भारी कमी को कियोसाकी ने 'तांबे की कैंची' का नाम दिया है, जो भविष्य में कीमतों को और ज्यादा ऊपर खींचने का पूरा दम रखती है.
Reuters की 15 जुलाई 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक चिली की सरकारी कंपनी Codelco ने 2025 में 1.33 मिलियन टन उत्पादन किया और आने वाले वर्षों में उत्पादन को मौजूदा स्तर के आसपास रखने की उम्मीद जताई है. कंपनी अभी गिरते ore grades और प्रोजेक्ट में देरी जैसी चुनौतियों से जूझ रही है.
S&P Global के मुताबिक मौजूदा खदानों का उत्पादन आने वाले वर्षों में उम्र बढ़ने के साथ दबाव में आ सकता है. उसके अध्ययन में अनुमान है कि mined copper production 2030 में 25.8 मिलियन टन के आसपास peak कर सकती है और 2040 तक करीब 22 मिलियन टन तक गिर सकती है.
5 अगस्त 2026 को कॉपर फ्यूचर्स ने करीब $6.703 प्रति पाउंड का रिकॉर्ड स्तर छुआ था. उसी समय LME कॉपर $14,000 प्रति टन से ऊपर चला गया था. 2026 में कॉपर फ्यूचर्स की बढ़त उस समय करीब 18.6% बताई गई थी.

आम आदमी के लिए इस पूरी खबर का सबसे बड़ा सबक यह है कि अगर आप अब भी अपनी सारी जमापूंजी पारंपरिक बैंकों की सावधि जमा यानी एफडी या पुरानी बचत योजनाओं तक सीमित रखते हैं, तो आप बहुत बड़ी भूल कर रहे हैं. बढ़ती महंगाई और बदलती वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के कारण आपका यह पैसा धीरे-धीरे अपनी कीमत खो रहा है. कियोसाकी ने साफ चेतावनी दी है कि सिर्फ पुरानी सोच के साथ बैंक में पैसे रख लेने से भविष्य के आर्थिक संकट से नहीं बचा जा सकता. महंगाई का यह दीमक आपकी सेविंग को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा है, इसलिए अब वक्त आ गया है कि निवेशक लीक से हटकर कुछ नया और स्मार्ट सोचें.
जब बात निवेश की आती है, तो अक्सर लोग यह अंदाजा लगाने में लग जाते हैं कि कौन सी छोटी या बड़ी खनन कंपनी रातोंरात सफल हो जाएगी. लेकिन कियोसाकी अपने अमीर पिता की सीख को याद करते हुए एक अलग ही सलाह देते हैं. उनका कहना है कि यह जुआ खेलने के बजाय कि कौन सी माइनिंग कंपनी ऊपर जाएगी, आपको उन सेक्टरों और मजबूत कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए जो किसी भी परिस्थिति में इन बदलते वैश्विक रुझानों से सीधे तौर पर मुनाफा कमा सकें. यानी बाजार के रुख को पहचानकर सही जगह पैसा लगाना ही आज के दौर की सबसे बड़ी बुद्धिमानी है, जिससे आम निवेशक खुद को भविष्य के बड़े वित्तीय संकट से सुरक्षित रख सकते हैं.
प्रसिद्ध लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने चेतावनी दी है कि एआई और इलेक्ट्रिक वाहनों की वजह से तांबे की मांग तेजी से बढ़ेगी और सप्लाई घटने से कीमतें आसमान छूएंगी. पारंपरिक बचत छोड़कर समझदार निवेशकों को अब कॉपर से जुड़े सेक्टर्स में स्मार्ट निवेश करना चाहिए.
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