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Largest gold reserves by country: वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव के बीच 2026 में दुनिया के शीर्ष 10 स्वर्ण भंडार वाले देशों की नई रैंकिंग सामने आई है. इन देशों नें महंगाई के महासंकट में भी भर-भर के अपनी तिजोरियों में गोल्ड भरें हैं. इस कड़ी में भारत को लेकर भी एक अच्छी खबर है.
दुनिया में डॉलर की बादशाहत और महंगाई के बीच अपनी जेब को सुरक्षित रखने की जंग हर कोई लड़ रहा है. ऐसे में क्या आपने कभी सोचा है कि जिस सोने को आप अपनी तिजोरी में मुश्किल वक्त का साथी मानकर रखते हैं, वही सोना पूरी देश की अर्थव्यवस्था को डूबने से बचाता है? साल 2026 में दुनिया के केंद्रीय बैंकों ने सोने की खरीद में एक नया रिकॉर्ड बनाया है. वैश्विक बाजार की उथल-पुथल के बीच जारी हुई नई रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि आने वाले समय में किस देश की करेंसी कितनी मजबूत रहेगी और इसका सीधा असर आपकी रोजमर्रा की जिंदगी, महंगाई और निवेश पर कैसे पड़ने वाला है.
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की 'सेंट्रल बैंक गोल्ड रिजर्व सर्वे 2026' और 'गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स' के आंकड़ों के अनुसार 2026 में सोना खरीदने के मामले में भारत को चौथे पायदान (4th Rank) पर रहा है. लेकिन आधिकारिक वैश्विक रैंकिंग की बात करें कि गोल्ड रिजर्व के मामले में भारत कहां हैं तो इसकी रैंकिंग 9वें स्थान पर है.

वैश्विक स्तर पर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) को एक संस्था के रूप में इस लिस्ट में शामिल किया जाता है. अगर सिर्फ व्यक्तिगत देशों की बात करें, तो लगभग 880.52 टन सोने के साथ भारत दुनिया में 9वें स्थान पर आता है (क्योंकि अमेरिका, जर्मनी, इटली, फ्रांस, रूस और चीन जैसे देश मात्रा के मामले में भारत के सरकारी खजाने से आगे हैं). यदि भारतीय परिवारों और मंदिरों के पास मौजूद 25,000 से 40,000 टन निजी सोने को मिला दिया जाए, तो व्यावहारिक रूप से पूरी दुनिया में भारत से आगे कोई नहीं है!
सोना खरीदने की रफ्तार (Top Buyers): पिछले 2-3 सालों में सबसे ज़्यादा सोना खरीदने वाले देशों में चीन, पोलैंड और तुर्की के बाद भारत चौथे स्थान पर रहा है. यानी कुल भंडार में भले ही हम 9वें हों, लेकिन नया सोना बाजार से बटोरने की रेस में आरबीआई (RBI) चौथे नंबर पर चल रहा है.
एशिया में स्थान: अगर हम पश्चिमी देशों (अमेरिका और यूरोप) को हटा दें और सिर्फ एशियाई देशों या उभरती अर्थव्यवस्थाओं (Emerging Markets) की बात करें, तो चीन, रूस और जापान के बाद भारत चौथे नंबर पर आ जाता है.
जून 2026 में जारी आरबीआई (RBI) का आधिकारिक डेटा, जिसमें स्पष्ट किया गया कि भारत का कुल भौतिक स्वर्ण भंडार 880.52 मीट्रिक टन पर मजबूती से टिका हुआ है (जो कि देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का करीब 16.85% है).
आज के डिजिटल और क्रिप्टो के दौर में भी दुनिया के सबसे ताकतवर देशों का भरोसा सिर्फ और सिर्फ चमचमाते पीले सोने पर ही टिका हुआ है. वैश्विक आर्थिक मंदी और मुद्रास्फीति के इस दौर में केंद्रीय बैंक किसी भी कागजी मुद्रा या विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) के मुकाबले सोने को सबसे सुरक्षित एसेट मान रहे हैं. इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई भू-राजनीतिक तनाव या वित्तीय संकट आता है, तो सोने की कीमतें तेजी से भागती हैं, जो किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच का काम करती हैं.
आम जनता के नजरिए से देखें तो जब देश का स्वर्ण भंडार बढ़ता है, तो देश की मुद्रा (जैसे भारतीय रुपया) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिलती है. रुपया मजबूत होने से विदेशों से आयात होने वाली चीजें, जैसे कच्चा तेल और इलेक्ट्रॉनिक सामान सस्ते होते हैं, जिससे सीधे तौर पर घरेलू बाजार में महंगाई काबू में रहती है.
भारत का चौथा स्थान और आम जनता के लिए इसके असल मायने
इस पूरी वैश्विक होड़ में भारत ने एक बड़ी और ऐतिहासिक छलांग लगाई है. साल 2026 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी रणनीतियों में बड़ा बदलाव करते हुए अपने स्वर्ण भंडार को बढ़ाकर 880.52 टन तक पहुंचा दिया है. इस भारी-भरकम स्टॉक के साथ भारत अब दुनिया में सबसे ज्यादा सोना रखने वाले देशों की फेहरिस्त में चौथे पायदान पर मजबूती से काबिज हो गया है.
भारत के संदर्भ में एक छिपी हुई हकीकत यह भी है कि यह आंकड़ा तो सिर्फ सरकारी खजाने का है. अगर भारतीय परिवारों, महिलाओं के गहनों और देश के बड़े मंदिरों में मौजूद निजी सोने को जोड़ दिया जाए, तो भारत व्यावहारिक रूप से दुनिया में सबसे ऊपर बैठता है. आरबीआई द्वारा सोने की लगातार खरीद यह दर्शाती है कि देश अपनी अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने के लिए एक अभेद्य किला तैयार कर रहा है. आम नागरिकों के लिए इसका सीधा फायदा यह है कि उनका निवेश और बैंकों में जमा पैसा पूरी तरह सुरक्षित हाथों में है.
अगर वैश्विक स्तर पर आंकड़ों पर नजर डालें, तो अमेरिका आज भी सोने का सबसे बड़ा सिकंदर बना हुआ है. उसके पास 8,133.46 टन का विशाल स्वर्ण भंडार है, जो फोर्ट नॉक्स जैसी बेहद सुरक्षित जगहों पर रखा है. इसके बाद दूसरे नंबर पर इटली है, जिसके पास 2,451.84 टन सोना है. वहीं, चीन 2,313.46 टन के साथ तीसरे स्थान पर बना हुआ है जो लगातार डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए सोने की जमाखोरी कर रहा है.
भारत के बाद पांचवें नंबर पर जापान है, जिसके पास 845.97 टन सोना है. इसके बाद क्रमशः पोलैंड (581.64 टन), तुर्की (534.85 टन), उजबेकिस्तान (415.54 टन), कजाकिस्तान (353.59 टन) और दसवें स्थान पर यूनाइटेड किंगडम (310.29 टन) का नाम आता है. इन सभी देशों की कोशिश अपने फॉरेक्स रिजर्व को सिर्फ डॉलर के भरोसे न रखकर सोने के जरिए डाइवर्सिफाई करने की है.
एक आम आदमी के तौर पर जब आप अगली बार बाजार में सोने का भाव देखने जाएं या धनतेरस-अक्षय तृतीया पर निवेश की सोचें, तो यह बात ध्यान रखें कि सोना सिर्फ एक आभूषण नहीं है. भारत सरकार जिस तरह अपने खजाने में सोने की मात्रा बढ़ा रही है, उससे साफ है कि आने वाले समय में भी इस पीली धातु की चमक फीकी नहीं पड़ने वाली. विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय बैंकों की इस आक्रामक खरीदारी की वजह से आने वाले सालों में सोने के दाम घरेलू बाजार में और नए रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं. इसलिए, मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए सोने में किया गया छोटा सा भी निवेश भविष्य की आर्थिक असुरक्षा के खिलाफ सबसे बेहतरीन हथियार साबित होने वाला है.
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