Advertisement

भारत के किन 4 राज्यों में इंडियंस भी बिना परमिट नहीं जा सकते? नहीं लिया तो अटक सकती है पूरी ट्रिप

Indian states where ILP is mandatory: भारत में कुछ जगह ऐसी हैं जहां भारतीय नागरिक होने के बावजूद सीधे एंट्री नहीं मिलती. अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम और मणिपुर जाने वाले बाहर के भारतीय नागरिकों को इनर लाइन परमिट लेना पड़ता है. परमिट की अवधि, फीस और आवेदन नियम राज्य के हिसाब से अलग हैं.

Latest News
भारत के किन 4 राज्यों में इंडियंस भी बिना परमिट नहीं जा सकते? नहीं लिया तो अटक सकती है पूरी ट्रिप

इन 4 राज्यों में बिना परमिट फंस सकती है यात्रा (फोटो एआई)

Add DNA as a Preferred Source

आमतौर पर भारतीय नागरिक देश के किसी भी राज्य में जाने के लिए अलग अनुमति नहीं लेते. लेकिन पूर्वोत्तर के चार राज्यों में इनर लाइन परमिट यानी आईएलपी व्यवस्था लागू है. इसका मतलब यह नहीं है कि भारतीय पर्यटकों के लिए इन राज्यों में घूमना प्रतिबंधित है. असल नियम यह है कि राज्य के बाहर से आने वाले भारतीय नागरिकों को तय प्रक्रिया पूरी करके एंट्री की अनुमति लेनी होती है. आजतक की 2 सितंबर 2026 की रिपोर्ट में भी अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम और मणिपुर को ऐसे चार राज्यों के तौर पर बताया गया है.  

इनर लाइन परमिट आखिर है क्या?

इनर लाइन परमिट राज्य सरकार की ओर से जारी किया जाने वाला आधिकारिक दस्तावेज है. यह किसी विदेशी देश का वीजा नहीं है और न ही इसका मतलब पर्यटन पर रोक है. इसका मकसद राज्य के बाहर से आने वाले भारतीय नागरिकों की एंट्री और सीमित अवधि के ठहराव को रेग्युलेट करना है. आजकल कई जगह इसके लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध है. 

इस व्यवस्था की शुरुआत 1873 के बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन से जुड़ी है. ब्रिटिश दौर में इसका इस्तेमाल मैदानी इलाकों और जनजातीय क्षेत्रों के बीच व्यापार और आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए किया गया था. आजादी के बाद व्यवस्था जारी रही और इसका एक प्रमुख उद्देश्य पूर्वोत्तर की स्थानीय संस्कृति, परंपराओं, भूमि अधिकारों और जनसांख्यिकीय हितों की सुरक्षा करना है. गृह मंत्रालय ने भी बताया है कि आईएलपी व्यवस्था की जड़ें 1873 के इसी रेगुलेशन में हैं. 

अरुणाचल प्रदेश में बिना आईएलपी के न जाएं

अरुणाचल प्रदेश जाने वाले भारतीय नागरिकों के लिए आईएलपी जरूरी है. राज्य के आधिकारिक ईआईएलपी पोर्टल के मुताबिक टूरिस्ट ईआईएलपी भारतीय नागरिकों के लिए लागू है और टूरिस्ट परमिट अधिकतम 14 दिन तक के ठहराव के लिए जारी किया जाता है. मौजूदा जानकारी के अनुसार 3 दिन तक के लिए फीस 300 रुपये और 3 दिन से ज्यादा तथा 14 दिन तक के लिए 500 रुपये है.  

राज्य के ईआईएलपी पोर्टल पर फोटो के साथ ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, राशन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड या आधार कार्ड जैसे दस्तावेजों में से मान्य दस्तावेज मांगा जाता है. इसका मतलब साफ है कि अरुणाचल की ट्रिप बनाते समय सिर्फ होटल और फ्लाइट की बुकिंग कर लेना काफी नहीं है, परमिट की प्रक्रिया भी पहले देखनी होगी.  

नागालैंड में घरेलू टूरिस्ट के लिए भी नियम लागू

नागालैंड में भी बाहर से आने वाले घरेलू पर्यटकों को आईएलपी की जरूरत होती है. आजतक की रिपोर्ट के अनुसार घरेलू पर्यटकों के लिए 30 दिन का परमिट ऑनलाइन लिया जा सकता है और इसकी फीस 200 रुपये बताई गई है. दीमापुर जैसे एंट्री प्वाइंट पर काउंटर की सुविधा का भी उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है.  

नागालैंड सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ इन्फॉर्मेशन एंड पब्लिक रिलेशंस की जानकारी भी घरेलू पर्यटकों के लिए 30 दिन के आईएलपी और 200 रुपये की फीस की पुष्टि करती है. इसके अलावा राज्य ने आईएलपी आवेदन प्रक्रिया को ऑनलाइन करने की दिशा में भी बदलाव किए हैं. 

मिजोरम में परमिट की अवधि पहले से समझ लें

मिजोरम जाने वाले घरेलू पर्यटकों के लिए भी इनर लाइन पास जरूरी है. मिजोरम हाउस की एंट्री फॉर्मेलिटीज के मुताबिक अस्थायी आईएलपी 15 दिन के लिए जारी किया जाता है और इसे एक बार और 15 दिन के लिए रिन्यू किया जा सकता है. एयर से पहुंचने वाले पर्यटक लेंगपुई एयरपोर्ट पर भी पास हासिल कर सकते हैं.  

मिजोरम सरकार के आधिकारिक ऑनलाइन सिस्टम की जानकारी के मुताबिक आईएलपी व्यवस्था अब ऑनलाइन सिस्टम के जरिए भी संचालित की जा रही है. इसलिए यात्रा की तारीख तय करने से पहले परमिट की मौजूदा फीस और आवेदन प्रक्रिया चेक करना समझदारी होगी. 

मणिपुर बना था चौथा राज्य

मणिपुर ने दिसंबर 2019 में इनर लाइन परमिट व्यवस्था अपनाई थी और इसी के बाद यह आईएलपी लागू करने वाला चौथा पूर्वोत्तर राज्य बना. आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक यहां बाहर से आने वाले लोगों के लिए 30 दिन का अस्थायी परमिट 100 रुपये में उपलब्ध है. 

मणिपुर के मौजूदा आधिकारिक आईएलपी पोर्टल पर भी टेम्पररी परमिट टूरिस्ट, बिजनेस ट्रैवलर और शॉर्ट टर्म विजिटर के लिए बताया गया है. इसकी सामान्य वैधता अधिकतम 30 दिन है और आवेदन के लिए सरकारी फोटो आईडी जरूरी है. पोर्टल पर आधार के जरिए ओटीपी आधारित आवेदन की सुविधा भी दी गई है. 

यात्रा से पहले किन बातों का रखें ध्यान?

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार आवेदन करते समय सरकारी फोटो पहचान पत्र, हालिया पासपोर्ट साइज फोटो, यात्रा से जुड़ी जानकारी और जरूरत पड़ने पर स्थानीय संपर्क की जानकारी देनी पड़ सकती है. इसलिए परिवार या दोस्तों के साथ ट्रिप प्लान करते समय सभी यात्रियों के दस्तावेज पहले से तैयार रखना बेहतर है.  

यहां सबसे अहम बात यह है कि आईएलपी को वीजा समझने की गलती न करें. यह भारतीय नागरिकों के लिए ही बनाई गई एक प्रवेश और ठहराव नियंत्रण व्यवस्था है. परमिट होने का मतलब यह नहीं कि राज्य में हर जगह जाने की स्वतः अनुमति मिल गई. स्थानीय नियम, संवेदनशील इलाके या अलग प्रतिबंध होने पर अतिरिक्त शर्तें लागू हो सकती हैं.

परमिट भूलने से असली नुकसान क्या होगा?

मान लीजिए आपने ट्रेन या फ्लाइट, होटल और कैब सब बुक कर लिया, लेकिन आईएलपी की जरूरत पहले नहीं देखी. ऐसी स्थिति में प्रवेश प्रक्रिया पर अड़चन आने से आपकी पूरी ट्रिप का टाइम टेबल बिगड़ सकता है. खासकर परिवार के साथ घूमने वालों के लिए यह परेशानी ज्यादा बड़ी हो सकती है क्योंकि होटल की बुकिंग, लोकल ट्रांसपोर्ट और वापसी की टिकट सब प्रभावित हो सकती हैं.

इसलिए इन चार राज्यों की ट्रिप में एक आसान नियम याद रखें. पहले परमिट की जरूरत चेक करें, फिर यात्रा की तारीख फाइनल करें. फीस और वैधता भी राज्य के हिसाब से अलग हो सकती है, इसलिए पुराने ट्रैवल ब्लॉग या सोशल मीडिया पोस्ट पर निर्भर रहने के बजाय संबंधित राज्य के आधिकारिक पोर्टल से ताजा जानकारी देखना सबसे सुरक्षित तरीका है.

बात जो जाननी चाहिए

अरुणाचल के आधिकारिक पोर्टल पर टूरिस्ट ईआईएलपी के लिए 3 दिन तक 300 रुपये और 3 से 14 दिन तक 500 रुपये की फीस दर्ज है. मणिपुर के आधिकारिक पोर्टल पर टेम्पररी आईएलपी की अधिकतम सामान्य वैधता 30 दिन बताई गई है. नागालैंड के सरकारी स्रोत में घरेलू टूरिस्ट आईएलपी की फीस 200 रुपये और वैधता 30 दिन बताई गई है. 

अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारे गूगल, फेसबुक, x,   इंस्टाग्राम, यूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से.  

Read More
Advertisement
Advertisement
Advertisement