बिजनेस
Will flying taxis arrive in 2028? भारत में फ्लाइंग टैक्सी का सपना अब टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन के चरण तक पहुंच चुका है. सरला एविएशन की शुन्य छह यात्रियों और एक पायलट के लिए डिजाइन है. 2028 लक्ष्य जरूर है, लेकिन कमर्शियल सर्विस की अंतिम तारीख अभी तय नहीं है.
सोचिए, जिस रास्ते पर सड़क से पहुंचने में 2 से ढाई घंटे लगते हैं, वहां आप कुछ ही मिनटों में आसमान के रास्ते पहुंच जाएं. दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे ट्रैफिक से परेशान शहरों के लिए यह किसी फिल्मी कहानी जैसा लग सकता है, लेकिन भारत में फ्लाइंग टैक्सी की तैयारी अब सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है.
बेंगलुरु की सरला एविएशन अपनी इलेक्ट्रिक फ्लाइंग टैक्सी शुन्य पर काम कर रही है. कंपनी को डीजीसीए से डिजाइन ऑर्गनाइजेशन अप्रूवल मिल चुका है और टेक्नोलॉजी डेमॉन्स्ट्रेटर के 500 से ज्यादा टेस्ट भी किए जा चुके हैं. हालांकि आम लोगों के लिए इसकी सर्विस कब शुरू होगी, इसका जवाब अभी पूरी तरह पक्का नहीं है.
सरला एविएशन ने फ्लाइंग टैक्सी के अपने प्रोजेक्ट में महत्वपूर्ण प्रगति की है. कंपनी को डीजीसीए यानी डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन से डीओए यानी डिजाइन ऑर्गनाइजेशन अप्रूवल मिल चुका है. यह मंजूरी किसी एयरक्राफ्ट को सीधे यात्रियों के साथ उड़ाने की अनुमति नहीं देती, बल्कि सर्टिफाइड एयरक्राफ्ट की दिशा में एक अहम शुरुआती कदम है.
कंपनी ने सायला नाम के हाफ-स्केल ईवीटीओएल टेक्नोलॉजी डेमॉन्स्ट्रेटर के साथ बड़े पैमाने पर टेस्टिंग की है. सरला एविएशन के मुताबिक अब तक 500 से ज्यादा टेस्ट और 18 घंटे से अधिक की उड़ान पूरी हो चुकी है. जुलाई 2026 में कंपनी ने सायला 1.0 की फ्लाइट टेस्ट कैंपेन पूरी होने की जानकारी दी थी.
यही वह सवाल है जिस पर आम यात्री को थोड़ा सावधान रहना चाहिए. सरला एविएशन ने 2028 तक भारत के प्रमुख शहरों में शुन्य और अपनी सर्विस को कमर्शियलाइज करने का रोडमैप रखा है. लेकिन 2028 को अभी पक्की कमर्शियल लॉन्च डेट मानना सही नहीं होगा.
कारण साफ है. यात्रियों को लेकर नियमित उड़ान शुरू करने से पहले एयरक्राफ्ट को कई टेस्ट, सर्टिफिकेशन और रेग्युलेटरी प्रक्रियाओं से गुजरना होगा. मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक नागरिक उड्डयन मंत्री केआर राममोहन नायडू ने डीओए कार्यक्रम के दौरान अगले दो वर्षों में भारत में ईवीटीओएल इकोसिस्टम के तेजी से विकसित होने की उम्मीद जताई थी. ([mint][2])
यानी 2028 का सपना अब पहले से ज्यादा वास्तविक दिखता है, लेकिन इसे सड़क पर चलने वाली कैब की तरह तय तारीख वाली सर्विस समझना अभी जल्दबाजी होगी.
सरला एविएशन का प्रमुख एयर टैक्सी मॉडल शुन्य छह यात्रियों और एक पायलट के लिए डिजाइन किया जा रहा है. कंपनी के मुताबिक इसकी रेंज 300 किलोमीटर से ज्यादा होगी. इसकी पहली उड़ान अगले 18 से 24 महीनों में कराने का लक्ष्य रखा गया है.
शुन्य की खासियत यह है कि इसे पारंपरिक विमान की तरह लंबे रनवे की जरूरत नहीं होगी. ईवीटीओएल तकनीक की मदद से यह हेलिकॉप्टर की तरह सीधे ऊपर उड़ान भरने और नीचे उतरने में सक्षम होगा. आगे की उड़ान के दौरान इसके विंग इस्तेमाल किए जाएंगे.
फ्लाइंग टैक्सी का असली आकर्षण सिर्फ आसमान में उड़ना नहीं, बल्कि समय बचाना है. सरला एविएशन के मास्टरप्लान के मुताबिक पहले चरण में बेंगलुरु एयरपोर्ट से ई-सिटी जैसे हाई-ट्रैफिक रूट पर एयर टैक्सी चलाने की योजना है. कंपनी का दावा है कि जिस सफर में कार से करीब ढाई घंटे लग सकते हैं, उसे शुन्य के जरिए 20 मिनट से कम में पूरा किया जा सकता है.
अगर यह मॉडल सफल रहता है तो रोज ऑफिस आने-जाने वाले लोगों के लिए इसका मतलब सिर्फ जाम से बचना नहीं होगा. रोज के सफर में घंटों बचने से काम, परिवार और आराम के लिए ज्यादा समय मिल सकता है.
लेकिन एक बड़ा सवाल किराये का भी रहेगा. कंपनी ने फ्लाइंग टैक्सी को राइड-हेलिंग ग्राउंड ट्रांसपोर्टेशन के मुकाबले प्रतिस्पर्धी कीमत पर देने की बात कही है. फिर भी वास्तविक किराया सर्विस शुरू होने के बाद ही साफ होगा.
फ्लाइंग टैक्सी प्रोजेक्ट को सितंबर 2026 में एक और अहम सपोर्ट मिला. टाटा एल्क्सी और सरला एविएशन ने शुन्य के विकास पर साथ काम करने के लिए एमओयू किया है. टाटा एल्क्सी फ्लाइट-क्रिटिकल सिस्टम, एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, सॉफ्टवेयर, टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन से जुड़े काम में सहयोग करेगी.
टाटा एल्क्सी के साथ यह साझेदारी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि फ्लाइंग टैक्सी को सिर्फ उड़ने वाला प्रोटोटाइप बनाना पर्याप्त नहीं है. इसे सुरक्षित तरीके से यात्रियों को लेकर उड़ाने के लिए सिस्टम की टेस्टिंग, वेरिफिकेशन और सर्टिफिकेशन भी उतने ही जरूरी हैं.
भारत में फ्लाइंग टैक्सी आने की राह में सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ एयरक्राफ्ट बनाना नहीं है. असली परीक्षा तब होगी जब इसे नियमित यात्री सेवा के लिए प्रमाणित करना होगा.
यही वजह है कि सायला के सफल टेस्ट और डीजीसीए से डीओए मिलना महत्वपूर्ण पड़ाव हैं, लेकिन इन्हें कमर्शियल फ्लाइंग टैक्सी की शुरुआत नहीं समझना चाहिए. अभी शुन्य को आगे डेवलपमेंट, टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन के कई चरण पूरे करने होंगे.
यानी आने वाले समय में सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि भारत में टैक्सी उड़ सकती है या नहीं. सवाल यह भी होगा कि वह कितनी सुरक्षित, कितनी सस्ती और कितने शहरों में आम यात्रियों की पहुंच में होगी.
फिलहाल सबसे संतुलित जवाब यही है कि 2028 सरला एविएशन का लक्ष्य है, गारंटी वाली लॉन्च डेट नहीं. प्रोजेक्ट ने डिजाइन अप्रूवल, टेक्नोलॉजी डेमॉन्स्ट्रेशन और फ्लाइट टेस्टिंग जैसे महत्वपूर्ण चरण पार किए हैं. अब आगे का रास्ता सर्टिफिकेशन और रेग्युलेटरी अप्रूवल से होकर जाएगा.
अगर ये चरण तय समय पर पूरे होते हैं तो बेंगलुरु भारत के उन पहले शहरों में शामिल हो सकता है जहां लोग सड़क के बजाय हवा में सफर करने वाली टैक्सी देख सकेंगे. और अगर यह मॉडल सफल हुआ, तो आज का ट्रैफिक जाम कल के शहरी परिवहन की सबसे बड़ी वजह बन सकता है कि लोग आसमान की ओर देखें.
अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारे गूगल, फेसबुक, x, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से.