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सोना-चांदी खरीदने का सही वक्त कौन सा? भाव गिरने के बाद निवेशक और खरीदार क्या करें, जानें Buy, Hold या Wait का फॉर्मूला

Gold-Silver Buying Strategy: सोना और चांदी हाल की तेज रैली के बाद नरम पड़े हैं. 14 अगस्त को दिल्ली में 24 कैरेट सोना ₹1,52,100 और 999 चांदी ₹2,33,360 पर रही. निवेशकों के लिए चरणबद्ध खरीदारी, जबकि खरीदारों के लिए final bill की तुलना अहम है.

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सोना-चांदी खरीदने का सही वक्त कौन सा? भाव गिरने के बाद निवेशक और खरीदार क्या करें, जानें Buy, Hold या Wait का फॉर्मूला

सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट ने दिया मौका या बढ़ा दिया जोखिम? (फोटो एआई)

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  • सोने की तेजी पर लगी ब्रेक
  • चांदी में पांच हजार की गिरावट
  • निवेशक अभी क्या रणनीति अपनाएं
  • गहना खरीदने वालों के लिए जरूरी गणित

सोना और चांदी कुछ दिनों की तेज रैली के बाद अब नरम पड़े हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि आज भाव कितना है, बल्कि यह है कि आम खरीदार और निवेशक अब क्या करें.

14 अगस्त को दिल्ली में 24 कैरेट सोना ₹1,52,100 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना ₹1,39,425 प्रति 10 ग्राम रहा. वहीं 999 शुद्धता वाली चांदी ₹2,33,360 प्रति किलो पर थी. MCX पर सोना करीब 0.55 फीसदी गिरकर ₹1,52,750 प्रति 10 ग्राम और चांदी करीब 0.98 फीसदी नीचे ₹2,34,480 प्रति किलो पर कारोबार कर रही थी.  

यानी बाजार ने हाल की तेजी के बाद सांस ली है. लेकिन क्या यह गिरावट खरीदारी का मौका है या अभी थोड़ा इंतजार करना बेहतर होगा? इसका जवाब इस बात पर निर्भर करेगा कि आप सोना-चांदी निवेश के लिए ले रहे हैं या गहने खरीदने के लिए.

तेजी के बाद क्यों थमा सोने-चांदी का रफ्तार?

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना गुरुवार को 5 जून के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा था. इसके बाद मुनाफावसूली शुरू हुई. Reuters के मुताबिक 14 अगस्त को स्पॉट गोल्ड 0.1 फीसदी नीचे $4,344.24 प्रति औंस पर था. इससे एक दिन पहले इसमें 1.3 फीसदी की गिरावट आई थी. 

अमेरिका की महंगाई के आंकड़ों के बाद सितंबर में फेड की ब्याज दर बढ़ने की संभावना भी कम हुई है. CME FedWatch के मुताबिक सितंबर में दर बढ़ने की संभावना करीब 33 फीसदी आंकी जा रही थी, जो पिछले सप्ताह करीब 44 फीसदी थी. कम ब्याज दरों की उम्मीद आम तौर पर सोने के लिए सकारात्मक मानी जाती है, क्योंकि सोना खुद ब्याज नहीं देता.  

यहीं निवेशक के लिए असली पेच है. एक तरफ ब्याज दरों और वैश्विक अनिश्चितता से सोने को सपोर्ट मिल रहा है, दूसरी तरफ तेजी के बाद मुनाफावसूली भाव को नीचे खींच रही है.

भारत में सोना महंगा हुआ तो खरीदार पीछे हटने लगे

महंगे सोने का सीधा असर आम खरीदार की जेब पर पड़ रहा है. Reuters की रिपोर्ट के अनुसार भारत में इस सप्ताह फिजिकल गोल्ड पर डिस्काउंट दो महीने से ज्यादा समय के सबसे ऊंचे स्तर तक पहुंच गया. रिपोर्ट में इसकी वजह ऊंची कीमतों से खपत पर पड़ा दबाव बताया गया है.  

इसका मतलब यह है कि बाजार में भाव बढ़ने के बावजूद हर खरीदार ज्यादा कीमत पर खरीदने को तैयार नहीं है. शादी या त्योहार के लिए गहना खरीदने वाले परिवारों के लिए यह खास मायने रखता है, क्योंकि सोने के भाव में थोड़ी सी गिरावट भी बड़ी खरीद पर हजारों रुपये का फर्क डाल सकती है.

लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है. अगर खरीदारी की जरूरत तय है, तो केवल इस उम्मीद में पूरी खरीद को टालना कि सोना बहुत सस्ता हो जाएगा, हमेशा सही रणनीति नहीं होती. सोने की कीमत पर अमेरिकी ब्याज दर, डॉलर, महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव जैसे कई कारक एक साथ असर डालते हैं.

निवेशक के लिए Buy, Hold या Wait में क्या बेहतर?

अगर आपका मकसद निवेश है और पूरी रकम अभी लगानी है, तो मौजूदा उतार-चढ़ाव में एकमुश्त खरीदारी के बजाय चरणबद्ध निवेश का रास्ता जोखिम को कम कर सकता है. यानी उपलब्ध रकम को एक ही दिन लगाने के बजाय अलग-अलग स्तरों पर बांटकर निवेश किया जा सकता है.

इसका फायदा यह है कि अगर कीमत और नीचे आती है तो अगली खरीद कम भाव पर की जा सकती है. वहीं अगर बाजार फिर तेजी पकड़ लेता है तो आपकी कुछ रकम पहले ही निवेश हो चुकी होगी.

Economic Times की 14 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक MCX Gold में नजदीकी अवधि में profit booking की संभावना बताई गई है. उसी रिपोर्ट में IndusInd Securities के Jigar Trivedi ने MCX Gold के लिए ₹1,54,000 का support level बताया है. चांदी के लिए रिपोर्ट में ₹2,40,000 प्रति किलो तक जाने की संभावना भी बताई गई, हालांकि profit booking का जोखिम भी बना हुआ है. ([The Economic Times][3])

इसलिए निवेशक के लिए सबसे अहम बात यह है कि एक-दो दिन की गिरावट को अंतिम bottom मानकर पूरी रकम लगाने से बचें. सोना लंबी अवधि का asset है, short-term prediction का खेल नहीं.

चांदी में गिरावट आई तो क्या यह खरीदारी का मौका है?

चांदी का मामला सोने से थोड़ा अलग है. इसमें निवेश मांग के साथ industrial demand भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. हालिया तेजी के बाद इसमें भी profit booking दिखाई दी है.

Economic Times के अनुसार 14 अगस्त को MCX Silver September futures करीब ₹2,32,910 प्रति किलो तक आ गए थे और दो दिनों में चांदी करीब ₹5,000 प्रति किलो नीचे आई थी.   IBJA के 14 अगस्त के सुबह के indicative retail rates में 999 चांदी ₹2,31,920 प्रति किलो थी, जबकि 13 अगस्त के शाम के रेट में यह ₹2,34,228 प्रति किलो थी. यानी एक ही दिन के अंतर में ₹2,308 प्रति किलो की गिरावट दर्ज हुई.  

यहां निवेशक को सावधान रहने की जरूरत है. चांदी में तेज रैली और तेज correction दोनों देखने को मिल सकते हैं. इसलिए केवल यह देखकर खरीदारी करना कि भाव कुछ हजार रुपये नीचे आ गया है, पर्याप्त कारण नहीं है.

24K, 22K या 18K, किसके लिए कौन सा सोना?

अगर आपका उद्देश्य निवेश है तो शुद्धता और खरीदने के तरीके को समझना ज्यादा जरूरी है. 24 कैरेट को सबसे शुद्ध सोना माना जाता है, जबकि 22 कैरेट सोना ज्यादा टिकाऊ होने के कारण आभूषणों में आमतौर पर इस्तेमाल होता है.  14 अगस्त को IBJA के indicative retail selling rates के अनुसार Fine Gold 999 ₹15,149 प्रति ग्राम, 22 KT ₹14,786, 20 KT ₹13,483, 18 KT ₹12,271 और 14 KT ₹9,771 प्रति ग्राम था. 999 चांदी का रेट ₹2,31,920 प्रति किलो था.  

गहना खरीदने वाले को सिर्फ प्रति ग्राम सोने का रेट देखकर फैसला नहीं करना चाहिए. अंतिम बिल में making charges, GST और अन्य लागू शुल्क भी जुड़ सकते हैं. Economic Times ने भी अलग-अलग ज्वेलर्स में एक ही purity के सोने की कीमत अलग होने की बात कही है. यानी ₹1 लाख का सोना खरीदते समय असली तुलना केवल gold rate की नहीं, बल्कि final bill की होनी चाहिए.

गहना खरीदना है तो अभी खरीदें या इंतजार करें?

कमोडिटी एंड शेयर मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय कहते हैं कि अगर शादी या किसी जरूरी समारोह के लिए अगले कुछ महीनों में गहने खरीदने हैं, तो पूरी खरीदारी एक ही दिन करने के बजाय जरूरत के हिसाब से हिस्सों में खरीदना एक व्यावहारिक तरीका हो सकता है.

मसलन, अगर परिवार को 10 तोला या उससे ज्यादा सोना खरीदना है तो पहले जरूरी हिस्से की खरीद की जा सकती है और बाकी खरीदारी भाव के उतार-चढ़ाव को देखते हुए बाद में की जा सकती है. इससे बाजार का सही स्तर पकड़ने का दबाव कम होता है.

लेकिन अगर खरीदारी केवल निवेश के लिए है तो भारी making charges वाले गहने खरीदना हमेशा सबसे कुशल विकल्प नहीं माना जाता. निवेशक को ऐसे विकल्पों की तुलना करनी चाहिए जिनमें कीमत का बड़ा हिस्सा सीधे सोने के भाव से जुड़ा हो.

Gold ETF और physical gold में क्या फर्क समझें

निवेश के लिए सोना खरीदने वाले के सामने अब सिर्फ गहना या सिक्का ही विकल्प नहीं है. Gold ETF जैसे बाजार आधारित विकल्प भी मौजूद हैं. वहीं physical gold में storage, purity, making charges और resale जैसे पहलू सामने आते हैं.

यही वह जगह है जहां आम खरीदार और निवेशक की जरूरत अलग हो जाती है. जिसे शादी में पहनने के लिए गहना चाहिए, उसके लिए jewellery का उपयोगिता मूल्य है. लेकिन जो व्यक्ति सिर्फ portfolio में gold exposure चाहता है, उसके लिए jewellery खरीदना जरूरी नहीं है.

इसलिए सवाल यह नहीं होना चाहिए कि सोना अच्छा है या चांदी. असली सवाल है कि पैसा किस उद्देश्य से लगाया जा रहा है.

अगले कुछ दिनों में किन चीजों पर नजर रखें

सोने-चांदी की कीमतों को समझने के लिए केवल भारतीय सराफा बाजार देखना पर्याप्त नहीं है. अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीद, डॉलर की चाल, महंगाई के आंकड़े, तेल की कीमत और ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी बाजार को प्रभावित कर रहे हैं.

Reuters के अनुसार 14 अगस्त को सोने की हालिया तेजी में profit-taking आई, जबकि ईरान को लेकर अमेरिकी दबाव और तेल आपूर्ति से जुड़ी चिंताओं ने बाजार में अनिश्चितता बनाए रखी.  यानी आने वाले दिनों में अगर वैश्विक जोखिम बढ़ता है तो सुरक्षित निवेश की मांग सोने को सहारा दे सकती है. इसके उलट अगर तेजी के बाद निवेशक लगातार मुनाफा निकालते हैं तो correction आगे भी जारी रह सकता है.

आम खरीदार के लिए सबसे जरूरी बात

इस समय सोना-चांदी खरीदने वाले के लिए सबसे बड़ा सबक यह है कि केवल आज का भाव देखकर फैसला न करें. निवेशक के लिए चरणबद्ध खरीदारी, खरीदार के लिए final jewellery bill की तुलना और चांदी में ज्यादा volatility को ध्यान में रखना ज्यादा जरूरी है.

14 अगस्त के आंकड़े बताते हैं कि बाजार में गिरावट जरूर आई है, लेकिन इसे अपने आप में यह संकेत नहीं माना जा सकता कि सोना या चांदी अब और नहीं गिरेंगे. इसी तरह आज की गिरावट को देखकर यह मान लेना भी सही नहीं होगा कि बड़ी तेजी खत्म हो गई है.

इसलिए Buy, Hold या Wait का फैसला आपकी जरूरत और निवेश अवधि पर होना चाहिए. शादी के लिए जरूरी खरीद और पांच साल के निवेश को एक ही तराजू पर तौलना सबसे बड़ी गलती हो सकती है.

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