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सोने में गिरावट क्या दे रहा संकेत, क्या बदल रहा बाजार का ट्रेंड? एक्सपर्ट से जानें अभी खरीदें या बेहतर मौके का इंतजार करें 

Gold investment strategy in September: सोने की तेज रफ्तार पर अचानक ब्रेक लगा है. एमसीएक्स पर 5 अक्टूबर वायदा 10 सितंबर को 1,53,100 रुपये के आसपास बंद हुआ. अमेरिकी महंगाई, तेल और फेड की दरों की चिंता ने दबाव बढ़ाया है. अब 1.50 लाख से 1.55 लाख रुपये के लेवल बेहद अहम हैं.

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सोने में गिरावट क्या दे रहा संकेत, क्या बदल रहा बाजार का ट्रेंड? एक्सपर्ट से जानें अभी खरीदें या बेहतर मौके का इंतजार करें 

सोना अब किस मोड़ पर? तेजी के बाद आई गिरावट से खुला नया रास्ता, निवेशक इन नंबरों पर रखें नजर (फोटो एआई)
 

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सोने की कीमत ने जिस रफ्तार से हाल के दिनों में निवेशकों का ध्यान खींचा था, उसी बाजार में अब एक नया मोड़ दिखाई दे रहा है. सवाल सिर्फ यह नहीं है कि सोना आज कितना महंगा या सस्ता है, बल्कि बड़ा सवाल यह है कि आगे की चाल किस दिशा में जाएगी.

10 सितंबर को एमसीएक्स पर 5 अक्टूबर 2026 एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर्स दिन के दौरान 1,54,450 रुपये प्रति 10 ग्राम के हाई तक पहुंचा, लेकिन बाद में कमजोर होकर करीब 1,53,100 रुपये पर बंद हुआ. अपस्टॉक्स के आंकड़ों के मुताबिक इसमें दिनभर में 663 रुपये यानी 0.43 फीसदी की गिरावट रही. वहीं एक अन्य बाजार आंकड़े में 10 सितंबर के अंत में कीमत 1,52,342 रुपये भी दर्ज की गई है, यानी कारोबार के दौरान काफी उतार चढ़ाव रहा.

कमोडिटी और शेयर मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय कहते हैं कि आम खरीदार के लिए इसका मतलब यह है कि सोने में सिर्फ तेजी देखकर एकमुश्त बड़ी खरीदारी करना फिलहाल जोखिम भरा हो सकता है. बाजार अब हर बड़े अमेरिकी आंकड़े और ब्याज दर से जुड़े संकेत पर तेजी से प्रतिक्रिया दे रहा है.

अमेरिका की महंगाई ने क्यों बिगाड़ा सोने का मूड?

सोने पर सबसे बड़ा दबाव इस समय अमेरिका से आ रहा है. 10 सितंबर को जारी महंगाई से जुड़े आंकड़ों के बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीद मजबूत हुई है.

रॉयटर्स के मुताबिक अमेरिकी अगस्त पीपीआई में 0.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. इसके बाद फेड की दर बढ़ाने की संभावना सीएमई फेडवॉच के अनुसार 70 फीसदी तक पहुंच गई, जो पहले 62 फीसदी थी. बढ़ती दरों की आशंका से डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड मजबूत हुए, जिसका दबाव ऐसे सोने पर पड़ता है जिस पर नियमित ब्याज नहीं मिलता.

यानी सोने की कहानी इस समय सिर्फ भारत के सराफा बाजार की नहीं है. अमेरिका का महंगाई डेटा, फेड का अगला फैसला, डॉलर और बॉन्ड यील्ड मिलकर एमसीएक्स के भाव को प्रभावित कर रहे हैं.

1.50 लाख से 1.55 लाख के बीच असली मुकाबला

अब सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उन स्तरों का है जिन पर आने वाले दिनों में बाजार की दिशा बदल सकती है.  उपलब्ध प्रकाशित कमोडिटी विशेषज्ञ विश्लेषण में देवकृष्ण पांडेय के अनुसार एमसीएक्स गोल्ड के लिए 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर नजदीकी महत्वपूर्ण सपोर्ट बताया गया है. यदि यह स्तर टूटता है तो करीब 1.49 लाख रुपये अगला मजबूत सपोर्ट हो सकता है.

दूसरी तरफ 1.55 लाख रुपये के ऊपर सोना मजबूती से टिकता है तो तेजी दोबारा मजबूत होने की संभावना बन सकती है और 1.60 लाख रुपये का स्तर अगला बड़ा लक्ष्य बताया गया है. इसका सीधा मतलब यह है कि 1.53 लाख रुपये का इलाका अब सिर्फ एक नंबर नहीं है. यह बाजार की ताकत और कमजोरी के बीच एक अहम जोन बन गया है. इसके नीचे कमजोरी बढ़ सकती है और 1.55 लाख के ऊपर टिकाव तेजी की वापसी का संकेत दे सकता है.

10 सितंबर के आंकड़ों में भी यह उतार चढ़ाव साफ दिखाई दिया. एमसीएक्स गोल्ड का दिन का दायरा करीब 1,52,948 रुपये से 1,54,450 रुपये रहा. इसका मतलब एक ही कारोबारी दिन में बाजार ने करीब 1,500 रुपये का बड़ा अंतर दिखाया.

तेल की तेजी ने भी सोने को क्यों झटका दिया?

सोने की कहानी में एक और दिलचस्प कड़ी तेल की है. मध्य पूर्व में तनाव और शिपिंग रूट से जुड़ी चिंताओं के बीच तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है. रॉयटर्स के अनुसार 10 सितंबर को तेल की कीमतों में करीब 4 फीसदी की छलांग ने महंगाई की चिंता बढ़ाई.

यही वजह है कि बाजार को डर है कि महंगाई ज्यादा समय तक ऊंची रह सकती है और केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख रख सकते हैं. इस माहौल में सोने पर शॉर्ट टर्म दबाव बढ़ता है.

भारत के लिए एक और अहम बात रुपये की कमजोरी है. रॉयटर्स के अनुसार 10 सितंबर को रुपया 95.44 प्रति डॉलर पर बंद हुआ और लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में कमजोर हुआ. तेल की तेजी और डॉलर की मांग ने रुपये पर दबाव बढ़ाया.

कमजोर रुपया घरेलू सोने की कीमत को अंतरराष्ट्रीय कीमतों की तुलना में ऊंचा बनाए रखने वाला फैक्टर बन सकता है. इसलिए अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना थोड़ा टूट भी जाए, तो भारत में उसकी गिरावट उतनी सीधी नहीं होनी जरूरी है.

चांदी में गिरावट सोने से ज्यादा तेज

इसी दौरान चांदी में दबाव और ज्यादा देखने को मिला है. 10 सितंबर को एमसीएक्स पर दिसंबर एक्सपायरी वाली चांदी करीब 2,43,574 रुपये प्रति किलो पर आ गई थी और इंट्राडे हाई 2,44,300 रुपये रहा.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में तस्वीर और ज्यादा कमजोर रही. रॉयटर्स के अनुसार स्पॉट सिल्वर करीब 4.6 फीसदी गिरकर 64.19 डॉलर प्रति औंस पर आ गई. इसी दिन सोने में एक फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई.

यानी अगर कोई निवेशक सोने और चांदी दोनों को एक जैसा सुरक्षित समझकर चल रहा है, तो उसे दोनों के व्यवहार में अंतर समझना होगा. चांदी में औद्योगिक मांग का भी बड़ा असर रहता है, इसलिए इसमें उतार चढ़ाव आम तौर पर ज्यादा तेज हो सकता है.

चांदी खरीदें या बेचें, बाजार का संकेत क्या है?

देवकृष्ण पांडेय के नाम से आज का कोई सत्यापित ताजा खरीद या बिक्री कॉल उपलब्ध नहीं मिला है, इसलिए उनके नाम पर 11 सितंबर का नया बाय या सेल कॉल देना सही नहीं होगा.

लेकिन मौजूदा बाजार आंकड़े चांदी में फिलहाल सावधानी का संकेत जरूर दे रहे हैं. एक ही सत्र में अंतरराष्ट्रीय चांदी के करीब 4.6 फीसदी टूटने और घरेलू एमसीएक्स कीमत के 2.43 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास आने से यह साफ है कि शॉर्ट टर्म में जोखिम बढ़ा हुआ है.

इसलिए चांदी में पहले से निवेश कर चुके लोगों के लिए सपोर्ट लेवल देखना ज्यादा महत्वपूर्ण है, जबकि नई खरीदारी करने वाले निवेशकों के लिए गिरती कीमत देखकर पूरा पैसा एक साथ लगाने के बजाय बाजार के स्थिर होने का इंतजार करना ज्यादा सावधानी वाला तरीका हो सकता है.

आम आदमी के लिए सोने की अगली चाल क्यों जरूरीय़

सोने की कीमत में हर 1,000 रुपये की चाल सिर्फ ट्रेडर को प्रभावित नहीं करती. ज्वेलरी खरीदने वाले परिवारों पर भी इसका सीधा असर पड़ता है. मसलन 10 ग्राम सोने के भाव में 3,000 रुपये का अंतर किसी शादी या बड़े आभूषण की खरीद में कई हजार रुपये का फर्क पैदा कर सकता है. इसके अलावा ज्वेलरी की कीमत केवल सोने के बाजार भाव से तय नहीं होती. मेकिंग चार्ज, जीएसटी और आभूषण की डिजाइन जैसे खर्च भी अंतिम बिल को प्रभावित करते हैं.

इसलिए मौजूदा बाजार में सबसे उपयोगी बात यह है कि ग्राहक सिर्फ आज का भाव देखकर फैसला न करे. अगर खरीदारी जरूरी है तो चरणबद्ध खरीदारी का तरीका जोखिम को कुछ कम कर सकता है. निवेश के लिए खरीदने वालों को एमसीएक्स के प्रमुख स्तरों और अंतरराष्ट्रीय संकेतों पर नजर रखना ज्यादा जरूरी है.

अब नजर किन तीन नंबरों पर होनी चाहिए?

देव कहते हैं मौजूदा तस्वीर में 1.49 लाख, 1.53 लाख और 1.55 लाख रुपये सोने के लिए बेहद अहम नंबर बनकर उभर रहे हैं. 1.53 लाख रुपये के आसपास सपोर्ट बना रहता है तो बाजार संभलने की कोशिश कर सकता है. इसके नीचे कमजोरी बढ़ने पर 1.49 लाख रुपये का स्तर महत्वपूर्ण हो जाएगा. वहीं 1.55 लाख रुपये के ऊपर टिकाव तेजी की वापसी का संकेत दे सकता है. उपलब्ध विशेषज्ञ विश्लेषण में 1.60 लाख रुपये को अगला बड़ा लक्ष्य बताया गया है.

इसलिए अभी सोने में सबसे बड़ी कहानी यह नहीं है कि कीमत गिरेगी या बढ़ेगी. असली कहानी यह है कि बाजार इन अहम स्तरों पर कैसा व्यवहार करता है. आने वाले कारोबारी सत्रों में यही नंबर निवेशकों को सोने की अगली दिशा समझने में मदद कर सकते हैं.

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