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Right Time to Buy Gold-Silver:14 अगस्त को सोना करीब ₹1.55 लाख और चांदी ₹2.55 लाख प्रति किलो के आसपास है. MCX Gold में शुरुआती कमजोरी दिखी. नरम अमेरिकी महंगाई और घटती Fed rate-hike उम्मीदें bullion को सपोर्ट दे रही हैं, लेकिन ऊंचे स्तर पर profit booking जारी है.
Gold-Silver Rate Today 14 August 2026: सोना और चांदी इस समय ऊंचे स्तरों पर कारोबार कर रहे हैं. घरेलू बाजार में 24 कैरेट सोना करीब ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी करीब ₹2.55 लाख प्रति किलोग्राम के आसपास है. हालांकि 14 अगस्त की सुबह MCX Gold में करीब 1 फीसदी की शुरुआती कमजोरी दिखी है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि मौजूदा कीमतों पर खरीदारी की जाए या थोड़ी गिरावट का इंतजार किया जाए?
कमोडिटी और शेयर मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय के बाजार विश्लेषण को इस सवाल के केंद्र में रखते हुए देखें तो फिलहाल सिर्फ कीमत बढ़ने को देखकर खरीदारी करने के बजाय ट्रेंड, सपोर्ट और अगले बड़े ग्लोबल ट्रिगर्स पर नजर रखना ज्यादा जरूरी है.
| धातु | उपलब्ध रेट |
|---|---|
| 24 कैरेट Gold | करीब ₹1,55,020/10 ग्राम |
| 22 कैरेट Gold | करीब ₹1,42,110/10 ग्राम |
| Silver | करीब ₹2,54,900–₹2,55,000/kg |
| MCX Gold | ₹1,53,373/10 ग्राम |
| MCX Gold पिछला बंद | ₹1,54,882/10 ग्राम |
| MCX Gold बदलाव | करीब -0.97% |
दिल्ली के उपलब्ध रिटेल डेटा के मुताबिक 24 कैरेट सोना ₹1,55,020 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना ₹1,42,110 के आसपास है. अगस्त की शुरुआत में 24 कैरेट Gold करीब ₹1,44,370 था. यानी महीने के दौरान सोने में अच्छी तेजी देखने को मिली है.
चांदी का उपलब्ध रिटेल बेंचमार्क करीब ₹2.55 लाख प्रति किलोग्राम है. शहर, ज्वेलर, टैक्स और स्थानीय प्रीमियम के कारण retail कीमतों में थोड़ा अंतर हो सकता है.
14 अगस्त की सुबह MCX Gold futures ₹1,53,373 प्रति 10 ग्राम पर था, जबकि पिछला बंद ₹1,54,882 था. यानी शुरुआती कारोबार में करीब 0.97 फीसदी की कमजोरी रही. यह गिरावट ऐसे समय आई है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में Gold हाल में दो महीने से ज्यादा के ऊंचे स्तर तक पहुंच चुका था. ऐसे में ऊंचे स्तर पर profit booking स्वाभाविक है. इसका मतलब यह नहीं है कि गोल्ड का पूरा बुलिश ट्रेंड खत्म हो गया. असली संकेत इस बात से मिलेगा कि गिरावट के दौरान कीमतें महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल के ऊपर टिकती हैं या नहीं.
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Gold की अगली चाल में इस समय अमेरिका की monetary policy सबसे बड़ा factor है. जुलाई के अमेरिकी CPI आंकड़ों के बाद बाजार में सितंबर में Fed की rate-hike संभावना को लेकर बदलाव आया. इसके बाद 13 अगस्त को जारी जुलाई PPI ने भी बाजार का ध्यान खींचा. Producer prices जुलाई में उम्मीद से कमजोर रहे.
कम ब्याज दरों की उम्मीद सामान्य तौर पर Gold के लिए सकारात्मक होती है, क्योंकि Gold खुद कोई ब्याज नहीं देता. अगर Treasury yields और Dollar में कमजोरी आती है तो bullion को अतिरिक्त support मिल सकता है. लेकिन यहां जोखिम भी है. अमेरिकी inflation अभी Fed के 2 फीसदी लक्ष्य से ऊपर है. इसलिए September Fed meeting को लेकर बाजार पूरी तरह एकतरफा नहीं हुआ है.
यहां निवेशकों के लिए सिर्फ Gold का आज का भाव देखना पर्याप्त नहीं है. अगले कुछ दिनों में तीन चीजें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण रहेंगी:
पहला-Support: अगर Gold ऊंचे स्तरों से फिसलता है तो वह किस स्तर पर buying support हासिल करता है, यह तेजी की मजबूती बताएगा.
दूसरा-Dollar और US yields: डॉलर और अमेरिकी bond yields में कमजोरी Gold के लिए supportive हो सकती है. इसके उलट दोनों में तेज उछाल bullion पर दबाव डाल सकता है.
तीसरा-Silver की relative strength: अगर Gold में correction आता है लेकिन Silver अपनी तेजी बनाए रखता है, तो यह precious metals के भीतर अलग तरह का momentum दिखा सकता है.
कमोडिटी और शेयर मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय के मुताबिक, Gold में मौजूदा तेजी के बाद ऊंचे स्तर पर profit booking से इनकार नहीं किया जा सकता. MCX पर ₹1.53 लाख के आसपास का स्तर short-term में अहम support है. अगर यह स्तर टूटता है तो ₹1.49 लाख के आसपास अगला मजबूत support देखा जा सकता है. वहीं ₹1.55 लाख के ऊपर टिकाऊ मजबूती Gold में दोबारा तेजी का momentum मजबूत कर सकती है और इसके बाद ₹1.60 लाख का स्तर महत्वपूर्ण resistance बन सकता है. इसलिए मौजूदा स्तर पर निवेशकों को एकमुश्त खरीदारी के बजाय गिरावट में चरणबद्ध खरीदारी पर नजर रखनी चाहिए.
Silver की कहानी Gold से थोड़ी अलग है. इसमें investment demand के साथ industrial demand भी कीमत को प्रभावित करती है. 14 अगस्त के लिए भारतीय retail market में Silver करीब ₹2.55 लाख प्रति किलोग्राम के आसपास है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में 13 अगस्त को Silver करीब $64.46 प्रति औंस पर था. यानी short-term में दबाव के बावजूद Silver का broader trend अभी मजबूत बना हुआ है. लेकिन यही तेजी इसका जोखिम भी बढ़ाती है. Silver की price volatility Gold से ज्यादा हो सकती है. इसलिए तेज उछाल देखकर बिना strategy के खरीदारी करना जोखिम बढ़ा सकता है.
कमोडिटी और शेयर मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय के मुताबिक, Silver में अभी Gold के मुकाबले ज्यादा momentum नजर आ रहा है, लेकिन इसकी volatility भी ज्यादा है. 14 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय बाजार में Silver करीब $64.26 प्रति औंस के आसपास है. Short term में $64 के आसपास का स्तर अहम support माना जा सकता है, जबकि $66 के ऊपर टिकाऊ मजबूती आने पर तेजी का momentum और मजबूत हो सकता है. अगले 7-15 दिनों में $66 के ऊपर breakout मिलने पर Silver में अगला upside zone खुल सकता है. वहीं $64 के नीचे लगातार कमजोरी आती है तो profit booking बढ़ सकती है और निवेशकों को नई खरीदारी में जल्दबाजी से बचना चाहिए.
मौजूदा बाजार को देखते हुए सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि Gold महंगा है या सस्ता. सवाल यह है कि क्या मौजूदा तेजी के बाद entry के लिए बेहतर स्तर मिल सकता है? अगर कोई निवेशक नया निवेश शुरू कर रहा है तो एकमुश्त खरीदारी के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करना volatility को संभालने का एक तरीका हो सकता है.
वहीं, जिनके पास पहले से Gold है, उनके लिए हर छोटी गिरावट को trend reversal मानना जरूरी नहीं है. ऊंचे स्तरों पर नई खरीदारी करने से पहले support और global triggers को देखना ज्यादा महत्वपूर्ण है. Silver में यह सावधानी और ज्यादा जरूरी है क्योंकि इसकी चाल ज्यादा तेज हो सकती है.
आने वाले सत्रों में Gold-Silver की दिशा तय करने वाले प्रमुख संकेत होंगे:
14 अगस्त की सुबह का बाजार यह संकेत नहीं दे रहा कि Gold-Silver की तेजी अचानक खत्म हो गई है. बल्कि तस्वीर यह है कि तेजी के बाद बाजार अब अपनी अगली दिशा की पुष्टि तलाश रहा है. MCX Gold में करीब 1 फीसदी की शुरुआती कमजोरी ऊंचे स्तरों पर profit booking दिखाती है, जबकि अमेरिका से आए inflation और PPI के संकेत bullion के लिए अभी भी supportive हैं.
इसलिए इस समय निवेशकों के लिए जल्दबाजी में यह फैसला करना कि “अभी खरीदो वरना मौका चला जाएगा”, उतना जरूरी नहीं है. ज्यादा अहम है कि सोना-चांदी अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल पर कैसा व्यवहार करते हैं. सोना-चांदी की तेजी में अगला बड़ा मौका सिर्फ नई ऊंचाई बनाने से नहीं, बल्कि गिरावट के दौरान मिलने वाले support से भी तय होगा. इसलिए अगले कुछ सत्रों में कीमत के साथ Dollar, US yields और Fed की अगली चाल, तीनों को साथ पढ़ना ज्यादा जरूरी होगा.
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