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UPI Payment Rules: यूपीआई कीजिए पर ध्यान से, NPCI ने बदले API नियम, तय की इन खास ट्रांजेक्शंस की लिमिट, जानिए पूरी बात

UPI Payment Rules: बैंकिंग प्लेटफॉर्म पर यूपीआई पेमेंट सुविधा देने वाले नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने एक नया सर्कुलर जारी किया है. इसमें कुछ खास ट्रांजेक्शंस पर निगरानी रखने का निर्देश बैंकों को दिया गया है.

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UPI Payment Rules: यूपीआई कीजिए पर ध्यान से, NPCI ने बदले API नियम, तय की इन खास ट्रांजेक्शंस की लिमिट, जानिए पूरी बात
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UPI Payment Rules: यदि आप यूपीआई के जरिये पेमेंट करते हैं तो यह खबर आपके लिए है. 31 जुलाई के बाद आपको यूपीआई करते समय कई तरह की बंदिशों का सामना करना पड़ सकता है, जिनमें अकाउंट बैलेंस चेक करने से लेकर ट्रांजेक्शन स्टेट्स देखने तक का काम शामिल है. दरअसल बैंकिंग प्लेटफॉर्म पर यूपीआई पेमेंट की सुविधा देने वाले नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (National Payments Corporation of India) ने अपने नियम बदल दिए हैं. NPCI ने बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स (PSP) को 21 मई को एक सर्कुलर भेजा है, जिसमें नए बदलाव की जानकारी दी गई है. इसमें बताया गया है कि NPCI के API यूजेज को बेहतर तरीके से मैनेज करने और पीक ऑवर्स में यूपीआई सर्विस को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए कुछ दिशा-निर्देश तय किए गए हैं. इनके तहत ही कई तरह की बंदिशें लागू की जा रही हैं.

10 तरह के ट्रांजेक्शन पर नजर रखने के निर्देश
एनपीसीआई ने बैंकों और सभी PSP को अपने यूपीआई नेटवर्क पर 10 तरह के हाई-फ्रीक्वेंसी वाले ट्रांजेक्शन पर नजर रखने का निर्देश दिया है. ET की रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें बैलेंस चेक, ऑटोपे मेंडेट प्रोसेसिंग, ट्रांजेक्शन स्टेट्स अपडेट्स और अकाउंट लिस्टिंग्स शामिल हैं. इन ट्रांजेक्शंस को बंद किया जा सकता है. कम से कम पीक ऑवर्स में इन पर रोक लगाई जा सकती है. सभी बैंकों और PSP को नए निर्देश हर हाल में 31 जुलाई से पहले ही अपने प्लेटफॉर्म पर लागू करने का निर्देश दिया गया है. ऐसा नहीं होने पर 31 जुलाई के बाद एनपीसीआई इसके लिए पेनल्टी लगाना शुरू कर देगा. पेनल्टी के अलावा एपीआई प्रतिबंध और नए कस्टमर जोड़ने तक पर रोक लगाने की कार्रवाई भी की जा सकती है.

ट्रांजेक्शन प्रति सेकंड को ध्यान में रखकर लेना होगा फैसला
सर्कुलर में कहा गया है कि बैंकों को यूपीआई सिस्टम के जरिये आ रही सभी API रिक्वेस्ट्स पर करीबी नजर रखनी होगी. ये रिक्वेस्ट चाहे बैंक के अपने सिस्टम से जारी हुई हों या कस्टमर की तरफ से आई हो, बैंकों व पीएसपी को यह सुनिश्चित करना होगा कि यूपीआई सिस्टम का सही उपयोग हो. इसके लिए यूपीआई सिस्टम की स्पीड और ट्रांजेक्शंस प्रति सेकंड की संख्या को ध्यान में रखते हुए इन रिक्वेस्ट पर फैसला लेना होगा. PSP को 31 अगस्त तक इस बारे में लिखित सहमति दाखिल करनी होगी कि सिस्टम से जारी होने वाली API रिक्वेस्ट को पूरी तरह कंट्रोल और मैनेज कर लिया गया है. 

एक ऐप से 50 बार ही बैलेंस चेक कर पाएगा कस्टमर
नए बदलाव में सबसे अहम बैलेंस चेक को लेकर लिया गया फैसला है. अब एक दिन में एक यूजर किसी एक यूपीआई ऐप के जरिये अधिकतम 50 बार ही बैलेंस चेक कर पाएगा. हालांकि यदि आप कई यूपीआई ऐप इस्तेमाल कर रहे हैं तो हर ऐप से एक दिन में बैलेंस चेक करने की लिमिट 50 के हिसाब से तय होगी यानी जितनी ऐप आपके पास हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, Ezeepay के COO मुशर्रफ हुसैन ने कहा,'इससे ट्रेडर्स को मुश्किल हो सकती है, जो एक दिन में असीमित बार अपना बैलेंस चेक करते हैं. हालांकि यह कदम यूपीआई इंफ्रास्ट्रक्चर कोर को स्थिर रखने और सभी के उपयोग के लिए यूपीआई सिस्टम पर लोड खाली रखने के मकसद से उठाया गया है.

बिजी ऑवर्स में आएगी बैलेंस चेक करने में दिक्कत
सर्कुलर में यूपीआई ऐप्स को बिजी ऑवर्स (सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक और शाम 5 बजे से रात 9.30 बजे तक) बैलेंस चेक करने की लिमिट तय करने के लिए कहा गया है. बैंकों को कहा गया है कि इसके बजाय आप हर सफल ट्रांजेक्शन के बाद बैलैंस इंफॉर्मेशन कस्टमर के मोबाइल पर भेज सकते हैं. माना जा रहा है कि इससे यूपीआई सिस्टम पर तो बोझ कम होगा, लेकिन यूजर्स को रियल टाइम बैलेंस अपडेट नहीं मिल पाएगा. NPST के CPO पवन कुमार ने कहा,'कस्टमर्स पीएसपी ऐप्स पर अपने अकाउंट्स का रियल टाइम अपडेटेड बैलेंस नहीं देख पाएंगे. हालांकि NPCI ने वादा किया है कि कस्टमर्स को इन बदलाव के बाद भी बैलेंस अपडेट्स मिलना जारी रहेगा.'

ऑटोपे मेंडेट भी नॉन-पीक ऑवर्स में ही प्रोसेस होंगे
जिन यूजर्स ने यूपीआई ऐप के जरिये अपनी SIP, मोबाइल बिल आदि जैसे रेगुलर पेमेंट्स का यूपीआई मेंडेट लगा रखा है, उनके लिए यह सुविधा अब नॉन-पीक ऑवर्स में ही प्रोसेस होगी. हाालंकि कस्टमर्स नए बदलाव के बाद भी जब चाहें मेंडेट सेट कर पाएंगे. ऑटोपे मेंडेट के लिए केवल एक प्रयास लागू होगा, जिसके साथ तीन रिट्राई भी दी जाएंगी, लेकिन यह केवल नॉन-पीक ऑवर्स में ही हो पाएगा. एक बार चेकिंग करने बाद दूसरी बार ट्रांजेक्शन स्टेट्स चेक करने के लिए 90 सेकंड का इंतजार करना होगा. साथ ही स्टेट्स चेक करने की लिमिट को भी 2 घंटे में तीन बार तक ही तय कर दिया गया है.

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