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Mini Nandini Krishak Samriddhi Yojana: आप डेयरी बिजनेस करना चाहते हैं तो यूपी सरकार की मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना आपके लिए बड़ा मौका हो सकती है.
Dairy business subsidy for women in UP: यूपी सरकार की मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना में 10 उन्नत नस्ल की गायों की यूनिट पर 23.60 लाख रुपये की परियोजना लागत का 50 प्रतिशत यानी अधिकतम 11.80 लाख रुपये तक अनुदान मिल सकता है. 2026-27 के लिए भी योजना के लक्ष्य जारी किए जा चुके हैं.
उत्तर प्रदेश सरकार पशुपालन को सिर्फ पारंपरिक काम तक सीमित रखने के बजाय इसे कमाई और ग्रामीण रोजगार से जोड़ने पर जोर दे रही है. इसी कड़ी में नन्द बाबा दुग्ध मिशन के तहत मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना चलाई जा रही है.
इस योजना में 10 दुधारू स्वदेशी उन्नत नस्ल की गायों की डेयरी यूनिट स्थापित करने के लिए 23.60 लाख रुपये की परियोजना लागत निर्धारित है. इसका 50 प्रतिशत यानी अधिकतम 11.80 लाख रुपये अनुदान के रूप में दिया जा सकता है. अनुदान दो चरणों में दिया जाता है और रकम लाभार्थी के बैंक खाते में डीबीटी के जरिए भेजी जाती है. यानी यह सिर्फ गाय खरीदने पर मिलने वाली छोटी आर्थिक मदद नहीं है. सरकार की योजना एक व्यवस्थित डेयरी यूनिट खड़ी करने में पूंजी का बड़ा हिस्सा सपोर्ट करने की है.
मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना पूरे उत्तर प्रदेश में लागू है. इसमें साहीवाल, गिर और थारपारकर जैसी उन्नत नस्लों की 10 गायों की यूनिट स्थापित करने का प्रावधान है. योजना में 50 प्रतिशत महिला पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों को लाभ देने का प्रावधान भी है. इससे ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के लिए डेयरी को कमाई के साधन के रूप में बढ़ाने का रास्ता खुलता है.
हालांकि यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है. यह पैसा सभी आवेदकों को सीधे नहीं मिल जाता. आवेदन ज्यादा होने पर मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति ई-लॉटरी के जरिए लाभार्थियों का चयन कर सकती है. इसलिए आवेदन करना और लाभ मिलना दो अलग-अलग चरण हैं.
सरकार ने योजना में केवल गाय खरीदने की बात नहीं रखी है, बल्कि डेयरी यूनिट चलाने की क्षमता को भी महत्व दिया है. आधिकारिक दिशा-निर्देशों के मुताबिक आवेदक के पास गो पालन या महिष पालन का कम से कम तीन साल का अनुभव होना चाहिए. इसका प्रमाण संबंधित मुख्य पशु चिकित्साधिकारी से कराया जाता है.
यूनिट स्थापित करने के लिए लगभग 0.20 एकड़ यानी 8712 वर्ग फुट जमीन की जरूरत बताई गई है. इसके साथ पूरे साल हरे चारे की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी. स्थानीय चारा किसानों या सप्लायर से अनुबंध के जरिए चारे की उपलब्धता का इंतजाम किया जा सकता है. यह शर्त बताती है कि सरकार का फोकस सिर्फ सब्सिडी बांटने पर नहीं बल्कि ऐसी डेयरी यूनिट तैयार करने पर है जो लंबे समय तक चल सके.
अगर किसी पशुपालक ने पहले कामधेनु, मिनी कामधेनु, माइक्रो कामधेनु या नन्द बाबा दुग्ध मिशन के तहत नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना या मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना का लाभ लिया है तो वह मिनी नन्दिनी योजना के लिए पात्र नहीं होगा.
इसलिए आवेदन करने से पहले पुराने सरकारी लाभ की जानकारी जरूर जांच लें. गलत जानकारी के आधार पर आवेदन करने के बजाय पात्रता शर्तों को पहले पढ़ना ज्यादा सुरक्षित रहेगा.
यह योजना सिर्फ पुरानी घोषणा बनकर नहीं रह गई है. नन्द बाबा दुग्ध मिशन की वेबसाइट पर वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना के लक्ष्य से जुड़ी सूचना 18 जून 2026 को जारी की गई है. वेबसाइट पर इस योजना के लिए आवेदन पंजीकरण शुरू होने की सूचना भी दी गई है.
नन्द बाबा दुग्ध मिशन के मुताबिक पूरे मिशन को उत्तर प्रदेश सरकार ने 1000 करोड़ रुपये की लागत से शुरू किया है. इसका उद्देश्य राज्य को दुग्ध उत्पादन में अग्रणी बनाए रखना और गांव स्तर पर दुग्ध उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है.
मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना के लिए आवेदन ऑनलाइन किया जाता है. नन्द बाबा दुग्ध मिशन की आधिकारिक वेबसाइट पर योजनाओं और आवेदन से जुड़े विकल्प उपलब्ध हैं. योजना की आधिकारिक साइट पर पंजीकरण और आवेदन से संबंधित जानकारी दी गई है.
आवेदन करने से पहले पात्रता, जमीन, पशुपालन अनुभव और पहले किसी योजना का लाभ लेने से जुड़ी शर्तें अच्छी तरह जांचनी चाहिए. आवेदन अधिक होने पर ई-लॉटरी के जरिए चयन की व्यवस्था है. चयन के बाद ही योजना के नियमों के मुताबिक यूनिट स्थापित करने और अनुदान प्राप्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है.
अगर कोई पशुपालक बड़े स्तर पर डेयरी यूनिट स्थापित करना चाहता है तो उत्तर प्रदेश में नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना भी चल रही है. इसमें 25 गायों की यूनिट के लिए परियोजना लागत 62.50 लाख रुपये होने पर 50 प्रतिशत यानी अधिकतम 31.25 लाख रुपये तक अनुदान का प्रावधान है. एक अन्य संरचना में 20 साहीवाल, गिर या थारपारकर और अधिकतम 5 गंगातीरी गायों वाली 25 पशुओं की यूनिट के लिए 61 लाख रुपये की लागत पर अधिकतम 30.50 लाख रुपये अनुदान का प्रावधान है. इस योजना में लाभार्थी अंश 15 प्रतिशत और बैंक ऋण 35 प्रतिशत रखा गया है, जबकि अधिकतम 50 प्रतिशत हिस्सा अनुदान के रूप में दिया जाता है.
इस योजना का सबसे अहम पहलू यह है कि डेयरी बिजनेस में शुरुआती पूंजी की सबसे बड़ी दिक्कत को कुछ हद तक कम किया जा सकता है. लेकिन 11.80 लाख रुपये को मुफ्त में मिलने वाली रकम समझना सही नहीं होगा. यूनिट की लागत, जमीन, चारा, पशुओं की देखभाल, श्रम, पशु चिकित्सा और दूध की बिक्री का पूरा हिसाब बनाना जरूरी है.
यानी सरकार की सब्सिडी शुरुआत आसान कर सकती है, लेकिन डेयरी की कमाई इस बात पर निर्भर करेगी कि पशुओं की उत्पादकता कितनी है, चारे की लागत कितनी बैठती है और दूध को किस कीमत पर बेच पाते हैं.
यही इस योजना का छिपा हुआ पहलू है. सब्सिडी बड़ी है, लेकिन यह बिजनेस अपने आप मुनाफे वाला नहीं बनाती. सही नस्ल, चारा प्रबंधन और दूध की नियमित बिक्री का नेटवर्क ही असली कमाई तय करेगा.
योजना के नियम समय और वित्तीय वर्ष के हिसाब से बदल सकते हैं. इसलिए किसी एजेंट को पैसा देने या डेयरी के लिए जमीन और पशु खरीदने से पहले नन्द बाबा दुग्ध मिशन की आधिकारिक वेबसाइट पर मौजूदा विज्ञप्ति और लक्ष्य जरूर देखें. आधिकारिक वेबसाइट पर चार प्रमुख योजनाओं की जानकारी और आवेदन प्रपत्र उपलब्ध हैं.
नन्द बाबा दुग्ध मिशन की आधिकारिक वेबसाइट पर पंजीकरण शुरू होने की सूचना उपलब्ध है.कुल मिलाकर, अगर आपके पास जमीन, पशुपालन का अनुभव और डेयरी चलाने की व्यावहारिक तैयारी है तो मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना आपके लिए बड़ी शुरुआती मदद बन सकती है. लेकिन आवेदन से पहले पात्रता और उस वित्तीय वर्ष के जिलेवार लक्ष्य की जांच करना सबसे जरूरी कदम है.
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