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योगी सरकार की महिलाओं को 50 हजार रुपये देने वाली खबर का सच, पैसा मिलेगा या रोजगार का मौका? जानिए पूरा नियम

UP women employment scheme: उत्तर प्रदेश की बीसी सखी योजना में महिलाओं को सीधे 50 हजार रुपये नकद देने का सरकारी नियम नहीं मिला है. चयनित बीसी सखी को छह महीने तक 4,000 रुपये मासिक सहायता, प्रशिक्षण और उपकरण के लिए वित्तीय सहायता मिलती है. आवेदन फिलहाल बंद है.

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योगी सरकार की महिलाओं को 50 हजार रुपये देने वाली खबर का सच, पैसा मिलेगा या रोजगार का मौका? जानिए पूरा नियम

50 हजार रुपये के नाम पर कहीं हो न जाए गलती, यूपी की इस योजना का असली नियम पढ़ें (फोटो सोशल मीडिया)

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  • महिलाओं को 50 हजार रुपये का सच समझें
  • महिलाओं को कैसे मिलेगा कमाई का मौका?
  • छह महीने 4000 रुपये मासिक सहायता
  • 75 हजार तक आसान ऋण
  • अभी आवेदन प्रक्रिया फिलहाल बंद

BC Sakhi Yojana apply online: क्या उत्तर प्रदेश की महिलाओं को योगी सरकार सीधे 50 हजार रुपये देने वाली है? सोशल मीडिया और कई वेबसाइटों पर इस तरह की जानकारी तेजी से सामने आती रही है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड की पड़ताल करने पर तस्वीर कुछ अलग दिखाई देती है.

UPSRLM के अनुसार उत्तर प्रदेश में बीसी सखी योजना (Banking Correspondent Sakhi Scheme)के तहत महिलाओं को बैंकिंग प्रतिनिधि के रूप में काम करने का मौका मिलता है. इसमें 6 महीने तक हर महीने 4,000 रुपये का मानदेय और काम शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान है. सरकारी रिकॉर्ड में 50 हजार रुपये की सीधी नकद राशि देने का नियम नहीं मिलता.  

50 हजार रुपये वाली बात कहां से आई, पहले यह समझना जरूरी है

बीसी सखी योजना को लेकर 50 हजार रुपये की रकम का जिक्र कई जगह मिलता है, लेकिन इसे सीधे महिलाओं के खाते में मिलने वाली 50 हजार रुपये की सरकारी मदद समझना सही नहीं होगा. उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन यानी UPSRLM के सरकारी दस्तावेज में बीसी सखी को उपकरण और स्थापना के लिए 75,000 रुपये तक की आसान ऋण सहायता का प्रावधान दर्ज है. 

यानी यहां सबसे बडी बात यह है कि 50 हजार रुपये को मुफ्त नकद सहायता मानकर आवेदन करने से पहले योजना के वास्तविक नियम समझना जरूरी है. सरकारी दस्तावेज में बीसी सखी को काम करने के लिए जरूरी उपकरण उपलब्ध कराने और 75,000 रुपये की सहायता का प्रावधान बताया गया है.

बीसी सखी योजना में महिलाओं को क्या मिलता है?

उत्तर प्रदेश सरकार ने मई 2020 में बीसी सखी कार्यक्रम शुरू किया था. इसका उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग सेवाओं को लोगों के घर तक पहुंचाना और महिलाओं को रोजगार से जोड़ना है. UPSRLM के मुताबिक बीसी सखी को छह महीने तक हर महीने 4,000 रुपये की सहायता दी जाती है. इसके बाद कमाई का प्रमुख जरिया बैंकिंग लेनदेन पर मिलने वाला कमीशन होता है. सरकारी वेबसाइट के अनुसार यह कमीशन सामान्य तौर पर लेनदेन की रकम का करीब 0.20 से 0.32 फीसदी होता है.  

इसका मतलब यह हुआ कि योजना को केवल 50 हजार रुपये की मदद के तौर पर देखना अधुरी तस्वीर होगी. असली फायदा उन महिलाओं के लिए है जो अपने गांव में बैंकिंग सेवा से जुड़कर नियमित कमाई का रास्ता बनाना चाहती हैं.

कौन महिला बीसी सखी बनने की हकदार है?

UPSRLM के अनुसार बीसी सखी का मॉडल ग्रामीण महिलाओं को बैंकिंग सेवा से जोड़ने के लिए बनाया गया है. उत्तर प्रदेश में इसका लक्ष्य प्रत्येक ग्राम पंचायत तक बीसी सखी की बैंकिंग सुविधा पहुंचाना रहा है. योजना में स्वयं सहायता समूह यानी SHG से जुड़ी महिलाओं को विशेष रूप से प्रशिक्षण देकर बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया जाता है. 

बीसी सखी बनने के लिए चयनित उम्मीदवार को प्रशिक्षण और बैंकिंग से संबंधित सर्टिफिकेशन प्रक्रिया से गुजरना होता है. UPSRLM के अनुसार RSETI के माध्यम से बीसीसखियों को प्रशिक्षण दिया गया और IIBF सर्टिफिकेशन की व्यवस्था की गई है.  

व्यावहारिक तौर पर यह योजना उन ग्रामीण महिलाओं के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है जो अपने क्षेत्र में रहकर रोजगार या कमाई का विकल्प चाहती हैं. उन्हें बैंक शाखा में नौकरी नहीं करनी होती, बल्कि निर्धारित क्षेत्र में ग्राहकों को बैंकिंग सुविधा उपलब्ध करानी होती है.

50 हजार नहीं, 75 हजार की सहायता का सरकारी रिकॉर्ड क्या कहता है?

UPSRLM के सरकारी आदेश में बीसी सखी को हार्डवेयर और स्थापना के लिए 75,000 रुपये की राशि आसान ऋण के रूप में उपलब्ध कराने का प्रावधान दर्ज है. साथ ही चयनित बीसी सखी को छह महीने तक हर महीने 4,000 रुपये का Honorarium Support देने की बात कही गई है.  

इसलिए 50 हजार रुपये को लेकर सबसे जरूरी सावधानी यही है कि इसे सरकार की तरफ से मिलने वाला मुफ्त कैश न समझें. योजना का ढांचा रोजगार, प्रशिक्षण, उपकरण और बैंकिंग कारोबार से जुड़ा हुआ है. सरकार के आधिकारिक रिकॉर्ड में 75,000 रुपये की सहायता का उल्लेख होने के कारण 50 हजार रुपये वाली जानकारी को बिना नियम पढ़े आगे बढ़ाना गलत जानकारी फैला सकता है.

अभी कितनी महिलाएं योजना से जुड़ी हैं?

UPSRLM की वेबसाइट के अनुसार उत्तर प्रदेश में बीसी सखी कार्यक्रम के तहत 58,000 ग्राम पंचायतों में बीसी सखी तैनात करने का लक्ष्य रखा गया था. सरकारी वेबसाइट पर वर्तमान में 38,435 बीसी सखियों के operational, trained और IIBF-certified होने की जानकारी दी गई है. UPSRLM के दूसरे आधिकारिक डैशबोर्ड पर 2,16,628 आवेदन, 64,085 preselected, 52,192 trained और 36,219 trained and certified उम्मीदवारों के आंकड़े भी प्रदर्शित होते हैं. सरकार की ओर से जारी एक अन्य आधिकारिक दस्तावेज में भी बताया गया है कि 50,000 से ज्यादा ग्रामीण महिलाओं को बीसी सखी के रूप में नियुक्त किया गया है और उनके जरिए 31,626 करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय लेनदेन हुए हैं. ये आंकड़े बताते हैं कि यह सिर्फ कागज पर चल रही योजना नहीं है. ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग सेवाओं और महिलाओं की कमाई, दोनों से इसका सीधा संबंध है.

कैसे करें आवेदन और अभी क्या स्थिति है?

बीसी सखी योजना के लिए UPSRLM का आधिकारिक पोर्टल इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि वर्तमान में UPSRLM की आधिकारिक वेबसाइट पर vacant Gram Panchayat के लिए बीसी सखी आवेदन की स्थिति "Currently application is closed" बताई गई है. 

इसलिए अभी किसी निजी वेबसाइट, सोशल मीडिया लिंक या एजेंट को पैसे देकर 50 हजार रुपये पाने के नाम पर आवेदन करना समझदारी नहीं होगी. नई रिक्त ग्राम पंचायतों के लिए आवेदन खुलने पर जानकारी UPSRLM के आधिकारिक माध्यम से देखनी चाहिए.

योजना से जुड़ी सरकारी प्रक्रिया में चयन, प्रशिक्षण, सर्टिफिकेशन और बैंकिंग पार्टनर के साथ ऑनबोर्डिंग जैसे चरण शामिल हैं. UPSRLM ने बीसी सखी से जुड़े अलग-अलग सरकारी आदेश भी अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध कराए हैं. 

महिलाओं के लिए असली फायदा क्या है?

इस योजना का सबसे अहम पहलू 50 हजार रुपये की रकम नहीं बल्कि गांव में रहकर कमाई का अवसर है. बीसी सखी बैंक खाते से जुड़ी कई सेवाएं ग्रामीण ग्राहकों तक पहुंचाती है और हर लेनदेन पर कमीशन कमा सकती है. UPSRLM की वेबसाइट पर दर्ज उदाहरणों में कुछ बीसीसखियों ने वर्षों के काम के दौरान लाखों रुपये कमीशन कमाए हैं. उदाहरण के तौर पर सुल्तानपुर की ज्योति अग्रहरी के प्रोफाइल पर 1,12,324 बैंकिंग लेनदेन और 11,01,244 रुपये कमीशन की जानकारी दर्ज है.  

इसी तरह पीलीभीत की लक्ष्मी के प्रोफाइल पर 1,37,208 बैंकिंग लेनदेन और 12,12,090 रुपये कमीशन दर्ज है. ये व्यक्तिगत प्रदर्शन के उदाहरण हैं, इसलिए इन्हें हर बीसी सखी की तय कमाई नहीं माना जाना चाहिए.  यही इस योजना का छिपा हुआ एंगल है. सरकार की मदद शुरुआती दौर में महिला को कारोबार खड़ा करने में सहारा देती है, लेकिन आगे की कमाई उसके बैंकिंग कारोबार और लेनदेन पर निर्भर करती है.

आवेदन फिलहाल बंद है

उत्तर प्रदेश की बीसी सखी योजना में महिलाओं को सीधे 50 हजार रुपये नकद देने का सरकारी नियम नहीं मिला है. चयनित बीसी सखी को छह महीने तक 4,000 रुपये मासिक सहायता, प्रशिक्षण और उपकरण के लिए वित्तीय सहायता मिलती है. आवेदन फिलहाल बंद है. 

ये बात जरूर समझ लें

अगर आपने कहीं पढ़ा है कि योगी सरकार यूपी की हर महिला को 50 हजार रुपये देने वाली है, तो इसे सीधे नकद लाभ की खबर मानकर आवेदन न करें. आधिकारिक रिकॉर्ड बीसी सखी योजना में 4,000 रुपये मासिक सहायता और 75,000 रुपये तक की उपकरण एवं स्थापना संबंधी आसान ऋण सहायता का उल्लेख करता है. आवेदन की स्थिति भी फिलहाल बंद दिखाई गई है.  योजना की जानकारी और अगली आवेदन विंडो के लिए UPSRLM के आधिकारिक पोर्टल को ही प्राथमिकता दें. (UPSRLM का आधिकारिक पोर्टल-https://www.upsrlm.org)

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