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How balanced hybrid funds work: मार्केट के बड़े उतार-चढ़ाव के बीच आम निवेशकों के लिए बैलेंस हाइब्रिड फंड एक बेहतरीन सुरक्षा कवच साबित हो रहे हैं. यह फंड इक्विटी और डेट में बराबर बैलेंस बनाकर आपके मुनाफे को सुरक्षित रखता है और तगड़े नुकसान के रिस्क को बहुत कम कर देता है.
शेयर बाजार का उतार-चढ़ाव अच्छे-अच्छे समझदार निवेशकों की रातों की नींद उड़ा देता है. जब मार्केट तेजी से ऊपर जाता है, तो हर कोई पैसा लगाने दौड़ता है, लेकिन जैसे ही गिरावट आती है, पसीने छूटने लगते हैं. अगर आप भी इस बात से परेशान हैं कि आपका गाढ़ी कमाई का पैसा कहीं डूब न जाए, तो म्यूचुअल फंड की दुनिया का एक खास फॉर्मूला आपकी इस टेंशन को हमेशा के लिए खत्म कर सकता है. इसे हम बैलेंस हाइब्रिड फंड के नाम से जानते हैं, जो आज के अस्थिर दौर में आम जनता के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. चलिए मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय से इसे समझते हैं.
देव कहते हैं कि सीधे शब्दों में समझें तो यह एक ऐसा म्यूचुअल फंड है जो आपके पैसे को एक ही जगह रखने की बजाय दो अलग-अलग टोकरियों में बांट देता है. इसमें फंड मैनेजर आपके पैसे का एक हिस्सा शेयर बाजार (इक्विटी) में लगाता है ताकि आपको अच्छा रिटर्न मिल सके, और दूसरा हिस्सा फिक्स्ड इनकम वाली जगहों (डेट) जैसे सरकारी बॉन्ड या सिक्योरिटीज में डालता है. नियम के मुताबिक, इसमें दोनों हिस्सों की हिस्सेदारी लगभग 40 से 60 प्रतिशत के बीच फिक्स होती है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि अगर शेयर मार्केट अचानक धड़ाम से गिर भी जाए, तो डेट वाला हिस्सा आपके पोर्टफोलियो को संभाल लेता है और आपको तगड़ा झटका नहीं लगता.
आजकल मार्केट जिस तरह एक दिन ऊपर और दूसरे दिन नीचे जा रहा है, उसमें बैलेंस हाइब्रिड फंड एक शॉक एब्जॉर्बर की तरह काम करता है. मान लीजिए आपने सारा पैसा सिर्फ शेयरों में लगा रखा है, तो मार्केट गिरते ही आपका पोर्टफोलियो लाल निशान में आ जाएगा. लेकिन इस बैलेंस फंड में डेट का सपोर्ट होने से नुकसान की गहराई बहुत कम हो जाती है. आम निवेशकों के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि उन्हें बाजार की रोज-रोज की उठापटक को देखकर पैनिक होने की जरूरत नहीं पड़ती और उनका पैसा शांत तरीके से बढ़ता रहता है.
इस फंड की सबसे बड़ी खासियत जो आम तौर पर लोग नोटिस नहीं करते, वो है इसकी ऑटोमैटिक रीबैलेंसिंग की खूबी. जब शेयर बाजार बहुत महंगा हो जाता है, तो फंड मैनेजर चालाकी से इक्विटी का कुछ हिस्सा बेचकर उसे डेट में ट्रांसफर कर देते हैं, यानी महंगे बाजार में आपका मुनाफा बुक हो जाता है. वहीं जब बाजार सस्ता होता है, तो डेट से पैसा निकालकर सस्ते शेयर खरीद लिए जाते हैं. एक आम इनवेस्टर के लिए खुद से ऐसा करना मुमकिन नहीं होता क्योंकि वहां भावनाएं और डर आड़े आ जाते हैं, लेकिन यह फंड आपके लिए यह काम अपने आप कर देता है.
निवेश करने से पहले हर कोई यह जरूर सोचता है कि टैक्स कटने के बाद हाथ में कितना पैसा आएगा. बजट के बदलते नियमों के बाद अब हाइब्रिड फंड्स पर टैक्स की गणना उनके एसेट एलोकेशन के आधार पर होती है. अगर आपका फंड इक्विटी की तरफ ज्यादा झुका है तो उस पर इक्विटी के हिसाब से टैक्स लगेगा. यही वजह है कि जानकार अब उन निवेशकों को इस फंड में आने की सलाह दे रहे हैं जो एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) से ज्यादा रिटर्न चाहते हैं लेकिन प्योर इक्विटी म्यूचुअल फंड जितना बड़ा रिस्क नहीं उठाना चाहते.
यह फंड उन नौकरीपेशा लोगों, मिडिल क्लास परिवारों और रिटायर्ड हो चुके सीनियर सिटीजंस के लिए बेस्ट है जो बाजार के रिस्क से डरते हैं पर महंगाई को मात देने वाला रिटर्न भी कमाना चाहते हैं. अगर आप अगले 3 से 5 साल के लिए पैसा पार्क करना चाहते हैं और चाहते हैं कि बाजार में गिरावट आने पर भी आपका मूलधन सुरक्षित रहे, तो बैलेंस हाइब्रिड फंड आपके निवेश के सफर को बेहद आसान और तनावरहित बना सकता है.
डिसक्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षणिक और सूचनात्मक उद्देश्यों (Educational Purposes) के लिए है. इसे किसी भी प्रकार की निवेश सलाह या वित्तीय गाइडेंस न माना जाए. म्यूचुअल फंड निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन हैं, जिसमें मूल धन का नुकसान भी शामिल है. अतीत का प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं देता है. कोई भी निवेश करने या वित्तीय निर्णय लेने से पहले कृपया अपने वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) या सेबी-पंजीकृत (SEBI-Registered) विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें. यह वेबसाइट/लेखक किसी भी प्रकार के वित्तीय लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
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