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Protein brand business story: दिल्ली के फिटफीस्ट ने 60 लाख रुपये की शुरुआती पूंजी से शुरू होकर हर महीने 2 करोड़ रुपये से ज्यादा का रेवेन्यू हासिल किया है. कंपनी की 65 से 70 फीसदी सेल्स नॉन मेट्रो शहरों से आती हैं और अब वह 100 करोड़ रुपये का लक्ष्य बना रही है.
क्या प्रोटीन सिर्फ जिम जाने वालों और बॉडी बनाने वालों के लिए है? दिल्ली के एक 27 साल के युवा ने इसी सोच को चुनौती देने के लिए 60 लाख रुपये लगाए और ऐसी कंपनी खड़ी कर दी, जिसका प्रोटीन अब सिर्फ महानगरों तक सीमित नहीं है.
दिल्ली बेस्ड फिटफीस्ट अब हर महीने 2 करोड़ रुपये से ज्यादा का रेवेन्यू कर रही है. खास बात यह है कि कंपनी की 65 से 70 फीसदी सेल्स नॉन मेट्रो शहरों से आ रही हैं. यानी भारत के छोटे शहरों में भी लोग स्वाद और कीमत के बीच बेहतर प्रोटीन विकल्प तलाश रहे हैं. स्टार्टअपपेडिया की 27 अगस्त 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट में दी गई है, जिसमें फिटफीस्ट के फाउंडर आदित्य पोद्दार से बातचीत के आधार पर कंपनी की पूरी कहानी बताई गई है.
नई दिल्ली के रहने वाले आदित्य पोद्दार की उम्र 27 साल है. उन्होंने जेआईआईटी नोएडा से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया और एएक्सए में दो साल एनालिटिक्स रोल में काम किया. लेकिन उनकी जिंदगी का एक निजी अनुभव आगे चलकर बिजनेस आइडिया बन गया. अपनी फिटनेस जर्नी के दौरान आदित्य ने 20 किलो वजन कम किया. इस दौरान उन्हें महसूस हुआ कि वजन घटाने के बाद शरीर और मसल्स को बनाए रखने के लिए पर्याप्त प्रोटीन जरूरी है.
यहीं से उन्होंने प्रोटीन मार्केट को समझना शुरू किया. आदित्य के मुताबिक, भारत में तीन में से चार लोग प्रोटीन की कमी से जूझ रहे हैं. लेकिन बाजार में उपलब्ध ज्यादातर प्रोडक्ट गंभीर जिम यूजर्स और फिटनेस फ्रीक्स को ध्यान में रखकर बनाए गए थे.
आम ग्राहक के सामने तीन बड़ी दिक्कतें थीं. कीमत ज्यादा थी, स्वाद हर किसी को पसंद नहीं आता था और प्रोटीन लेने का तरीका भी रोजमर्रा की जिंदगी के लिए आसान नहीं था. यही गैप फिटफीस्ट का बिजनेस मॉडल बन गया.
आदित्य पोद्दार ने 2022 में फिटफीस्ट की शुरुआत की. इसके लिए उन्होंने 60 लाख रुपये की बूटस्ट्रैप्ड कैपिटल लगाई. यह पैसा उनकी अपनी सेविंग्स और दोस्तों तथा परिवार के योगदान से आया.
कंपनी ने तुरंत प्रोडक्ट लॉन्च नहीं किया. शुरुआत के 6 से 12 महीने रिसर्च और डेवलपमेंट में लगाए गए. आदित्य ने भारतीय फूड टेक्नोलॉजिस्ट के साथ मिलकर काम किया और 50 से ज्यादा फॉर्म्युलेशन तैयार किए. इन प्रोडक्ट्स को अलग अलग फोकस ग्रुप पर भी टेस्ट किया गया. इनमें जेन जेड, कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स और शुरुआती जिम जाने वाले लोग शामिल थे.
इसके बाद भी एक और बड़ी समस्या सामने आई. जब आदित्य थर्ड पार्टी मैन्युफैक्चरर की तलाश कर रहे थे तो ज्यादातर कंपनियां कम एमओक्यू यानी मिनिमम ऑर्डर क्वांटिटी पर काम करने को तैयार नहीं थीं.
कई महीनों की तलाश के बाद उन्हें एक ऐसा मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर मिला, जो उनकी जरूरत के मुताबिक काम करने को तैयार था. बाद में यही पार्टनर कंपनी में इन्वेस्टर भी बन गया. फिटफीस्ट ने सबसे पहले प्रोटीन चिप्स लॉन्च किए. कंपनी का मकसद था कि हाई प्रोटीन स्नैक सिर्फ हेल्थ फूड जैसा महसूस न हो, बल्कि उसे सामान्य स्नैक की तरह भी खाया जा सके.
फिटफीस्ट का सबसे अलग एंगल उसका टेस्ट फर्स्ट और वैल्यू फर्स्ट मॉडल है. आदित्य ने स्टार्टअपपेडिया को बताया कि कंपनी ने प्रोडक्ट डेवलपमेंट में पहले स्वाद पर फोकस किया और फिर न्यूट्रिशन को उसके हिसाब से बेहतर किया.
मसलन, प्रोटीन चिप्स में पाम ऑयल की जगह सोयाबीन या राइस ब्रान ऑयल का इस्तेमाल किया गया. इसके बाद फॉर्म्युलेशन को लगातार बदला गया, ताकि हेल्थ, स्वाद, आफ्टरटेस्ट, टेक्सचर और माउथफील के बीच संतुलन बनाया जा सके.
आज कंपनी प्रोटीन शेक, प्रोटीन बार, प्रोटीन चिप्स, प्रोटीन कुकीज और पीनट बटर बेचती है. प्रोटीन शेक सिंगल सर्व सैशे में उपलब्ध है. इसका बिल्ड योर ओन बॉक्स मॉडल ग्राहक को एक साथ अलग अलग फ्लेवर आजमाने का मौका देता है और खरीदारी का जोखिम भी कम करता है. आदित्य के मुताबिक, बिल्ड योर ओन बॉक्स फिलहाल कंपनी का बेस्टसेलर है. कॉफी और मलाई कुल्फी इसके सबसे ज्यादा बिकने वाले फ्लेवर हैं.
फिटफीस्ट के बिजनेस में प्रोटीन शेक की भूमिका सबसे बड़ी है. कंपनी के कुल रेवेन्यू में शेक की हिस्सेदारी 55 से 60 फीसदी है. इसके बाद चिप्स, पीनट बटर, बार और कुकीज का नंबर आता है. कंपनी की कीमत 50 रुपये से शुरू होकर 400 रुपये तक जाती है. इसका फोकस प्रोटीन की प्रति ग्राम कीमत को कम रखने पर है. यही रणनीति आम ग्राहक के लिए महत्वपूर्ण है. अगर प्रोटीन को रोजाना की डाइट का हिस्सा बनाना है तो सिर्फ हाई प्रोटीन होना पर्याप्त नहीं है. प्रोडक्ट का स्वाद, कीमत और उसे इस्तेमाल करने की सुविधा भी उतनी ही अहम हो जाती है. फिटफीस्ट की यही रणनीति उसे पारंपरिक फिटनेस ऑडियंस से बाहर निकालने में मदद कर रही है.
फिटफीस्ट ने अपनी ब्रांड बिल्डिंग में सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट को भी अलग तरीके से इस्तेमाल किया. क्रिकेटर शेन वॉटसन सिर्फ कंपनी का प्रचार नहीं करते. आदित्य के मुताबिक, वॉटसन ने कंपनी के साथ को क्रिएटेड प्रोटीन कुकी बनाई है और वह ब्रांड में इक्विटी भी रखते हैं.
इसी तरह अक्षर पटेल के पास भी कंपनी में हिस्सेदारी है.
आदित्य का कहना है कि कंपनी चाहती थी कि ब्रांड के साथ जुड़ने वाले बड़े नाम केवल विज्ञापन तक सीमित न रहें, बल्कि उनका भरोसा भी कंपनी के साथ जुड़ा हो. आम ग्राहक के लिए इसका मतलब यह है कि फिटफीस्ट ने सिर्फ विज्ञापन के जरिए भरोसा बनाने के बजाय क्रिकेट से जुड़े चेहरों को कंपनी की कहानी का हिस्सा बनाने की कोशिश की है.
प्रोटीन प्रोडक्ट खरीदते समय सबसे बड़ा सवाल सिर्फ कीमत का नहीं बल्कि क्वालिटी का भी होता है. फिटफीस्ट के मुताबिक, हर इंग्रीडिएंट बैच के साथ सर्टिफिकेट ऑफ एनालिसिस लिया जाता है. कंपनी थर्ड पार्टी टेस्टिंग भी कराती है और इसके लिए एनएबीएल एक्रेडिटेड लैब्स का इस्तेमाल किया जाता है.
कंपनी का कहना है कि लैब रिपोर्ट उसकी वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाती हैं. टेस्टिंग में प्रोटीन कंटेंट, अमीनो एसिड प्रोफाइल, मैक्रोन्यूट्रिएंट्स, हेवी मेटल्स, पेस्टिसाइड रेजिड्यू, मेलामाइन और एडल्ट्रेंट्स की जांच शामिल है. मैन्युफैक्चरिंग के मामले में कंपनी एफएसएसएआई लाइसेंस, जीएमपी सर्टिफिकेशन, एफडीए अप्रूवल और हलाल सर्टिफिकेशन का भी उल्लेख करती है. यहां ग्राहक के लिए सबसे उपयोगी बात यह है कि प्रोटीन खरीदते समय केवल विज्ञापन या सेलिब्रिटी का नाम देखकर फैसला करने के बजाय लैब रिपोर्ट, इंग्रीडिएंट और न्यूट्रिशन लेबल देखना ज्यादा जरूरी है.
फिटफीस्ट की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा उसका नॉन मेट्रो बिजनेस है. कंपनी के मुताबिक, उसकी 65 से 70 फीसदी सेल्स नॉन मेट्रो शहरों से आती हैं. उसका मुख्य टारगेट 17 से 25 साल की उम्र के लोग हैं और कंपनी बॉडीबिल्डर्स के बजाय रोजाना प्रोटीन लेने वाले ग्राहकों पर ज्यादा फोकस कर रही है.
यही वह जगह है जहां फिटफीस्ट का मॉडल बड़ा बदलाव दिखाता है. भारत में प्रोटीन को लंबे समय तक जिम, सप्लीमेंट और मसल्स से जोड़कर देखा गया. लेकिन छोटे शहरों में बढ़ती मांग यह संकेत देती है कि प्रोटीन अब सिर्फ जिम बैग की चीज नहीं रहना चाहता.
आदित्य ने स्टार्टअपपेडिया को बताया कि उन्हें इन शहरों से ऐसे ग्राहक मिल रहे हैं जो अच्छी क्वालिटी का लेकिन वैल्यू फोकस्ड प्रोटीन खरीदने के लिए तैयार हैं. यानी फिटफीस्ट के लिए भारत का अगला बड़ा बाजार जरूरी नहीं कि सिर्फ दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु हो. छोटे शहर भी कंपनी की ग्रोथ का बड़ा इंजन बन चुके हैं.
फिटफीस्ट की बिक्री का करीब 85 फीसदी हिस्सा अकेले कंपनी की वेबसाइट से आता है. यह आंकड़ा इसलिए खास है क्योंकि कंपनी सिर्फ ऑनलाइन वेबसाइट पर निर्भर रहने की कोशिश नहीं कर रही. उसके प्रोडक्ट अमेजन, फ्लिपकार्ट, ब्लिंकिट और इंस्टामार्ट पर भी उपलब्ध हैं. इसके अलावा मॉडर्न रिटेल स्टोर्स, जिम, रेस्टोरेंट और स्मार्ट वेंडिंग मशीनों के जरिए भी बिक्री की जा रही है.
कंपनी का सबसे अच्छा कस्टमर एक्विजिशन चैनल इंस्टाग्राम है और इसके साथ मेटा एडवरटाइजिंग का इस्तेमाल किया जाता है. आदित्य के मुताबिक, कंपनी हर महीने 300 से ज्यादा यूजीसी स्टाइल क्रिएटिव बनाती है. इस रणनीति के साथ कंपनी का एवरेज ऑर्डर वैल्यू 600 रुपये से बढ़कर 1,300 रुपये हो गया.
करीब 30 फीसदी रेवेन्यू रिपीट कस्टमर्स से आता है. यही फिटफीस्ट की कहानी का छिपा हुआ बिजनेस एंगल है. कंपनी सिर्फ नए ग्राहक लाने पर निर्भर नहीं दिखना चाहती, बल्कि रोजाना इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट बनाकर उसी ग्राहक से बार बार खरीदारी कराने की कोशिश कर रही है.
फिटफीस्ट की ग्रोथ एकदम से नहीं हुई. कंपनी ने अपने ऑपरेशन के पहले महीने में सिर्फ 1 लाख रुपये का रेवेन्यू किया था. पहले फाइनेंशियल ईयर का रेवेन्यू 94 लाख रुपये रहा. इसके बाद कंपनी की नेट एनुअल रेवेन्यू 2025 में 2.4 करोड़ रुपये और 2026 में 7 करोड़ रुपये पहुंची. अब आदित्य पोद्दार के मुताबिक, कंपनी हर महीने 2 करोड़ रुपये से ज्यादा का रेवेन्यू कर रही है.
कंपनी अब तक 3 लाख से ज्यादा ग्राहकों को सर्व कर चुकी है और करीब 20 हजार मंथली ऑर्डर पूरे कर रही है. फिटफीस्ट को अब तक दो राउंड में कुल 7 करोड़ रुपये की एक्सटर्नल फंडिंग मिल चुकी है. इसमें कंट्री डिलाइट के फाउंडर की भागीदारी, इन्फ्लेक्शन पॉइंट वेंचर्स की अगुवाई और मेटा, गूगल समेत दूसरी कंपनियों के टॉप सीएक्सओ की भागीदारी शामिल है. कंपनी की टीम में फिलहाल 22 लोग हैं.
फिटफीस्ट शार्क टैंक इंडिया के सीजन 4 में भी नजर आई थी. आदित्य के मुताबिक, शो के बाद शुरुआत में सेल्स में स्पाइक आया. लेकिन इसका असर सिर्फ तत्काल बिक्री तक सीमित नहीं रहा. उनके अनुसार, पहले कंपनी को नजरअंदाज कर चुके कुछ इन्वेस्टर्स दोबारा संपर्क में आए. रिटेल पार्टनर्स ने भी कंपनी से ज्यादा स्टॉक उपलब्ध कराने को कहा. यानी शार्क टैंक इंडिया से मिला सबसे बड़ा फायदा सिर्फ बिक्री नहीं बल्कि ब्रांड ट्रस्ट और बिजनेस कनेक्शन के रूप में सामने आया.
फिटफीस्ट की अगली महत्वकांक्षा काफी बड़ी है. आदित्य पोद्दार अगले दो साल में कंपनी को 100 करोड़ रुपये के रेवेन्यू ब्रांड में बदलना चाहते हैं.इसके लिए कंपनी नए प्रोटीन शेक फ्लेवर और रोजाना खाए जा सकने वाले हेल्दी स्नैक फॉर्मेट लॉन्च करने की तैयारी में है. ऑफलाइन विस्तार भी कंपनी की योजना में शामिल है.
आदित्य का लॉन्ग टर्म विजन सिर्फ एक और प्रीमियम प्रोटीन ब्रांड बनने का नहीं है. उनका कहना है कि वह प्रोटीन को मास मार्केट के लिए सुलभ और स्वादिष्ट बनाना चाहते हैं.
इस सोच का एक दिलचस्प उदाहरण उन्हें तब मिला जब उन्होंने देखा कि कुछ माएं अपने बच्चों के लिए भी फिटफीस्ट के प्रोडक्ट खरीद रही हैं. यही शायद कंपनी की सबसे बड़ी उपलब्धि है. प्रोटीन को जिम से निकालकर रोजमर्रा की डाइट तक पहुंचाना.
फिटफीस्ट की कहानी सिर्फ एक स्टार्टअप के 2 करोड़ रुपये महीने के रेवेन्यू तक पहुंचने की कहानी नहीं है. इसके पीछे भारत में बदलती फूड हैबिट और हेल्थ कंजम्पशन का संकेत भी दिखाई देता है. कंपनी ने जिस समस्या को पकड़ा, वह सीधी है. बहुत से लोग प्रोटीन लेना चाहते हैं, लेकिन महंगे प्रोडक्ट, सीमित फ्लेवर, स्वाद और इस्तेमाल की झंझट उन्हें रोकती है.
फिटफीस्ट ने इसी समस्या को कीमत, स्वाद और अलग अलग फॉर्मेट के जरिए हल करने की कोशिश की. हालांकि किसी भी प्रोटीन प्रोडक्ट को खरीदने से पहले ग्राहक को सिर्फ कीमत या सेलिब्रिटी प्रमोशन पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. न्यूट्रिशन लेबल, प्रोटीन कंटेंट, इंग्रीडिएंट, टेस्ट रिपोर्ट और अपनी डाइट की जरूरत को देखकर फैसला करना ज्यादा समझदारी है.
स्टार्टअपपेडिया की रिपोर्ट और आदित्य पोद्दार के अनुसार, फिटफीस्ट का सफर 60 लाख रुपये की शुरुआती बूटस्ट्रैप्ड कैपिटल से शुरू हुआ था और अब कंपनी 2 करोड़ रुपये से ज्यादा के मासिक रेवेन्यू पर पहुंच चुकी है. अगला लक्ष्य 100 करोड़ रुपये का है.
फिलहाल सबसे बड़ा संकेत यही है कि प्रोटीन का बाजार सिर्फ बड़े शहरों और जिम जाने वालों का बाजार नहीं रह गया है. अगर स्वाद और कीमत का संतुलन बना रहे, तो भारत के छोटे शहरों का ग्राहक भी इस कैटेगरी को तेजी से अपना सकता है.
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