बिजनेस
Subscription Based Rental Furniture: क्या आप कुछ ऐसा बिजनेस करना चाहते हैं जो शुरू करने के अगले दिन से ही कमाई शुरू करा दें तो आपके लिए एक बेहतरीन आइडिया बिजनेस कोच वरुन लेकर आए हैं. ये वो आइडिया है जो किराए से जुड़ा है और इस फील्ड में अभी कुछ ही कंपनियां उतरी हैं.
New formula for earning from WFH: जब भी हम किसी नए शहर में नौकरी के लिए जाते हैं, तो सबसे बड़ा सिरदर्द होता है अपना घर बसाना. एक फ्रिज, बेड या वॉशिंग मशीन खरीदने में हम अपनी जमा-पूंजी के हजारों रुपए लगा देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि यही फर्नीचर कुछ समय बाद हमारे लिए एक बड़ी मुसीबत बन जाता है? अगर अचानक ट्रांसफर हो जाए, तो भारी-भरकम सोफा किसे बेचें? उसे उठाकर ले जाना या उसे स्टोर करना, यह सिर्फ पैसों की नहीं, बल्कि समय की भी बर्बादी है.
लोगों के दर्द की इसी नब्ज को रेंटोमोजो ने पकड़ा है और इसे एक ऐसा बिजनेस मॉडल बना दिया है जो आज करोड़ों का मुनाफा छाप रहा है. आप भी रेंटोमोजो जैसी कंपनी बनाकर लोगों को रेंट पर सामान दे सकते हैं. चलिए बिजनेस कोच वरुन से समझते हैं इस पूरे कारोबार का असली फायदा.
मिडिल क्लास अक्सर चीजों को अपनी संपत्ति (एसेट) मानकर खरीदती है, जबकि हकीकत यह है कि फर्नीचर जैसे सामान समय के साथ अपनी कीमत खो देते हैं. रेंटोमोजो ने इस गेम को पूरी तरह से पलट दिया है. कंपनी आपसे सामान खरीदने के लिए नहीं कहती, बल्कि आपको सब्सक्रिप्शन मॉडल का हिस्सा बनाती है. आप बस एक छोटा मासिक शुल्क देते हैं और फर्नीचर का इस्तेमाल करते हैं. अगर सोफा खराब हो या उसे शिफ्ट करना हो, तो यह टेंशन आपकी नहीं, बल्कि कंपनी की है. यह मॉडल उन लोगों के लिए वरदान है जो अस्थिर जीवनशैली जी रहे हैं.
रेंटोमोजो की असली चालाकी उनके कैश-फ्लो में छिपी है. जिस सोफे को आप एक बार खरीदकर जिंदगी भर ढोते हैं, वही सोफा रेंटोमोजो के लिए एक एसेट है. उनका सिस्टम कुछ ऐसा है कि एक ही सोफा करीब सात सालों में दस अलग-अलग ग्राहकों के घरों का चक्कर लगाता है. हर बार जब वह वापस वेयरहाउस आता है, उसे रफर्बिश किया जाता है और फिर से किराए पर चढ़ा दिया जाता है. सोचिए, एक बार की खरीदारी और बार-बार की कमाई! यही वजह है कि वित्त वर्ष 2025 में कंपनी ने 266 करोड़ का रेवेन्यू और 43 करोड़ का शुद्ध मुनाफा कमाया है.
इस पूरी कहानी से हमें एक बहुत बड़ी सीख मिलती है. जो कंपनियां खुद को फर्नीचर स्टोर बताती हैं, असल में वे एक सर्विस प्रोवाइडर होती हैं. रेंटोमोजो फर्नीचर नहीं, बल्कि 'सुविधा' बेच रही है. एक आम आदमी जो फर्नीचर खरीदकर अपनी बचत खत्म कर रहा है, वहीं स्मार्ट कंपनियां उस फर्नीचर की 'अर्निंग कैपेसिटी' को पहचान रही हैं. यह बिजनेस मॉडल सिर्फ फर्नीचर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन सभी क्षेत्रों में लागू हो सकता है जहां लोग ओनरशिप के झंझट से बचना चाहते हैं.
वरुन बताते हैं कि आज के दौर में फ्लेक्सिबिलिटी ही सबसे बड़ी दौलत है. यदि आप आज किराए पर सामान ले रहे हैं, तो आप अपना पैसा उस जगह इन्वेस्ट कर सकते हैं जहां से आपको बेहतर रिटर्न मिले, जैसे शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड. रेंटोमोजो जैसे स्टार्टअप्स ने यह साबित कर दिया है कि ओनरशिप के बोझ से मुक्त होना ही भविष्य का लाइफस्टाइल है. यह महज एक कंपनी नहीं, बल्कि एक आर्थिक बदलाव है जिसने यह सिखाया है कि स्मार्ट बने रहना ही सबसे बेहतर तरीका है.
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