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Business Idea: बिना दुकान-मशीन के 15 हजार में शुरू होगा ये एवरग्रीन बिजनेस, गांव-कस्बे तक में भी है इसकी बड़ी डिमांड

Used cooking oil collection business: रसोई में बेकार समझकर फेंका जाने वाला जला हुआ तेल कमाई का जरिया बन सकता है. होटल, ढाबे और कैंटीन से यूज्ड कुकिंग ऑयल जुटाकर अधिकृत कलेक्शन नेटवर्क तक पहुंचाने का कारोबार कम पूंजी में शुरू हो सकता है. जानिए लागत, कमाई, नियम और सरकारी सहायता.

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Business Idea: बिना दुकान-मशीन के 15 हजार में शुरू होगा ये एवरग्रीन बिजनेस, गांव-कस्बे तक में भी है इसकी बड़ी डिमांड

₹15000 लगेंगे, मेहनत आपकी होगी और कमाई का रास्ता तैयार (फोटो एआई)

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जिस तेल को लोग कचरा समझकर फेंक देते हैं, उसी से कमाई का रास्ता खुल सकता है. खासकर गांव और छोटे शहरों में रहने वाले ऐसे लोगों के लिए यह मॉडल दिलचस्प है, जिनके पास बड़ा कारोबार शुरू करने के लिए लाखों रुपये नहीं हैं. यूज्ड कुकिंग ऑयल यानी बार बार इस्तेमाल हो चुका खाना पकाने का तेल बायोडीजल बनाने के काम आता है. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई के आरयूसीओ मॉडल में ऐसे तेल को फूड चेन से बाहर निकालकर बायोडीजल या दूसरे उपयोगों की तरफ भेजने की व्यवस्था है. यहीं से गांव स्तर पर कलेक्शन और एग्रीगेशन का छोटा कारोबार खड़ा किया जा सकता है.

जला हुआ तेल कचरा नहीं, कमाई का माल कैसे बनेगा?

इस बिजनेस का सबसे आसान मॉडल मैन्युफैक्चरिंग नहीं बल्कि कलेक्शन और एग्रीगेशन है. यानी आपको खुद बायोडीजल बनाने की फैक्ट्री लगाने की जरूरत नहीं होगी. आसपास के होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैंटीन और स्ट्रीट फूड कारोबारियों से इस्तेमाल किया हुआ तेल इकट्ठा करना होगा और उसे अधिकृत कलेक्शन नेटवर्क या बायोफ्यूल से जुड़े खरीदारों तक पहुंचाना होगा.

एफएसएसएआई के आरयूसीओ नेटवर्क में एग्रीगेटर फूड बिजनेस से यूज्ड कुकिंग ऑयल लेते हैं और आगे बायोडीजल या साबुन बनाने वाली इकाइयों तक पहुंचाते हैं. इस मॉडल की खास बात यह है कि कमाई के लिए आपके पास अपनी रिफाइनरी होना जरूरी नहीं है. आपका असली कारोबार कलेक्शन, स्टोरेज, छंटाई और भरोसेमंद खरीदार तक सप्लाई का होगा.

15 से 30 हजार रुपये में कैसे शुरू हो सकता है काम?

दिए गए बिजनेस मॉडल के मुताबिक इसकी शुरुआती लागत करीब 15000 से 30000 रुपये रखी जा सकती है. इसमें तेल रखने के लिए कंटेनर और ड्रम, छोटे स्तर का स्टोरेज, परिवहन और शुरुआती कलेक्शन से जुड़ा खर्च शामिल हो सकता है. अगर आपके पास पहले से साइकिल या दोपहिया वाहन है तो शुरुआती पूंजी और घट सकती है. शुरुआत में बड़ा गोदाम या भारी मशीनरी लगाने के बजाय एक छोटे इलाके को अपना कलेक्शन एरिया बनाना ज्यादा व्यावहारिक होगा.

मसलन, पहले 20 से 30 होटल, ढाबे और फूड स्टॉल से संपर्क किया जा सकता है. हर कारोबारी से नियमित कलेक्शन का समय तय करके आप तेल एक जगह जमा कर सकते हैं. जैसे जैसे मात्रा बढ़ेगी, खरीदार के साथ बेहतर रेट और नियमित सप्लाई पर बातचीत की गुंजाइश भी बन सकती है.

कमाई का असली गणित कहां छिपा है?

इस बिजनेस में सबसे अहम बात यह है कि कमाई का कोई एक फिक्स रेट मानकर चलना सही नहीं होगा. यूज्ड ऑयल की कीमत उसकी क्वालिटी, मात्रा, लोकेशन, ट्रांसपोर्ट खर्च और खरीदार के समझौते पर निर्भर करेगी.

सरकार ने 2019 में यूज्ड कुकिंग ऑयल से बने बायोडीजल की खरीद को प्रोत्साहित करने के लिए ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की पहल की थी. उस समय यूसीओ आधारित बायोडीजल की एक्स फैक्ट्री कीमत पहले साल 51 रुपये प्रति लीटर, दूसरे साल 52.7 रुपये और तीसरे साल 54.5 रुपये प्रति लीटर तय की गई थी. यह बायोडीजल की कीमत थी, कच्चे यूज्ड कुकिंग ऑयल की खरीद कीमत नहीं. इसलिए इसे आज के कलेक्टर की कमाई का रेट समझना गलत होगा.

यानी इस बिजनेस में असली फायदा मात्रा और कलेक्शन नेटवर्क बढ़ाने से आएगा. जितना ज्यादा इस्तेमाल किया हुआ तेल आप नियमित रूप से जुटा पाएंगे, उतनी ही मजबूत आपकी खरीदारों के साथ सौदेबाजी की स्थिति हो सकती है.

एक बड़ा मौका पहले से मौजूद है

इस कारोबार के पीछे सिर्फ बिजनेस आइडिया नहीं बल्कि एक बड़ी वेस्ट मैनेजमेंट जरूरत भी है. सरकार के एक पुराने आकलन के मुताबिक भारत में लगभग 22.7 मिलियन टन यानी करीब 2700 करोड़ लीटर कुकिंग ऑयल इस्तेमाल होता था. इसमें से लगभग 1.2 मिलियन टन यानी करीब 140 करोड़ लीटर यूज्ड कुकिंग ऑयल बड़े उपभोक्ताओं जैसे होटल, रेस्टोरेंट और कैंटीन से कलेक्ट किया जा सकने का अनुमान था. इससे लगभग 110 करोड़ लीटर बायोडीजल बनने की संभावना बताई गई थी.

हालांकि यह आंकड़ा पुराना सरकारी अनुमान है, इसलिए इसे आज की मार्केट साइज नहीं माना जाना चाहिए. लेकिन इससे यह जरूर समझ आता है कि यूज्ड ऑयल कलेक्शन के पीछे संभावित कच्चे माल का बेस कितना बड़ा हो सकता है.

2025 में सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक 6 जुलाई 2025 तक आरयूसीओ के तहत 55 लाख लीटर से ज्यादा यूज्ड कुकिंग ऑयल कलेक्ट किया जा चुका था और 39 लाख लीटर बायोडीजल में बदला गया था.

होटल और ढाबों से तेल लेने से पहले यह बात जरूर समझें

यह कारोबार केवल तेल उठाकर बेच देने का नाम नहीं है. इस्तेमाल किए गए तेल को फूड चेन में दोबारा जाने से रोकना इस पूरी व्यवस्था का अहम हिस्सा है. एफएसएसएआई ने वेजिटेबल ऑयल में टोटल पोलर कंपाउंड यानी टीपीसी की सीमा 25 प्रतिशत तय की है. इससे ज्यादा टीपीसी वाला तेल इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. एफएसएसएआई की आरयूसीओ व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे तेल को फूड चेन से बाहर निकालना है.

सरकार ने ऐसे फूड बिजनेस ऑपरेटरों के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं जिनका फ्राइंग ऑयल कंजम्पशन 50 लीटर प्रतिदिन से ज्यादा है. उन्हें इस्तेमाल किए गए तेल का रिकॉर्ड रखने और इसे अधिकृत एग्रीगेटर के जरिए आगे भेजने की व्यवस्था बताई गई है. इसलिए कारोबार शुरू करने वाले व्यक्ति को सबसे पहले यह देखना चाहिए कि जिस कंपनी या नेटवर्क को वह तेल बेच रहा है, वह अधिकृत व्यवस्था का हिस्सा है या नहीं.

सरकारी मदद से लागत का बोझ कम हो सकता है

कम पूंजी वाले व्यक्ति के लिए सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि शुरुआती पैसा कहां से आएगा. यहां पीएमईजीपी जैसी योजना उपयोगी हो सकती है, लेकिन सब्सिडी को सीधे हाथ में मिलने वाला कैश समझना ठीक नहीं है.

पीएमईजीपी के आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार सामान्य श्रेणी के लाभार्थियों के लिए सब्सिडी दर शहरी क्षेत्र में 15 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र में 25 प्रतिशत है. विशेष श्रेणी के लाभार्थियों के लिए यह शहरी क्षेत्र में 25 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र में 35 प्रतिशत है. विशेष श्रेणी में एससी, एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक, महिलाएं, पूर्व सैनिक, दिव्यांग और कुछ अन्य श्रेणियां शामिल हैं.

इसलिए ग्रामीण इलाके में पात्र व्यक्ति के लिए यह मॉडल अपेक्षाकृत आकर्षक हो सकता है. लेकिन बैंक प्रोजेक्ट की व्यवहार्यता देखकर लोन स्वीकृत करता है और योजना की शर्तें पूरी करना जरूरी है.

पीएमईजीपी में आवेदन कैसे करना होगा?

पीएमईजीपी के लिए आधिकारिक पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध है. केवीआईसी, केवीआईबी और डीआईसी जैसी एजेंसियां प्रक्रिया में भूमिका निभाती हैं और बैंक प्रोजेक्ट का आर्थिक तथा तकनीकी मूल्यांकन करता है.

आधिकारिक पीएमईजीपी पोर्टल ने यह भी चेतावनी दी है कि केवीआईसी, केवीआईबी और डीआईसी ने प्रोजेक्ट स्वीकृत कराने या आर्थिक सहायता दिलाने के लिए किसी प्राइवेट एजेंसी, बिचौलिए या फ्रेंचाइजी को अधिकृत नहीं किया है. इसलिए किसी अनजान एजेंट को पैसे देने से बचना जरूरी है.

उद्यम रजिस्ट्रेशन से कारोबार को औपचारिक पहचान

अगर आप इस काम को नियमित कारोबार के रूप में शुरू करते हैं तो उद्यम रजिस्ट्रेशन भी कराया जा सकता है. एमएसएमई मंत्रालय के आधिकारिक उद्यम पोर्टल के अनुसार रजिस्ट्रेशन पूरी तरह मुफ्त, पेपरलेस और सेल्फ डिक्लेरेशन आधारित है. रजिस्ट्रेशन के लिए कोई फीस नहीं है और प्रक्रिया पूरी होने पर स्थायी उद्यम रजिस्ट्रेशन नंबर और ई-सर्टिफिकेट जारी होता है.

यहां एक जरूरी सावधानी है. रजिस्ट्रेशन के नाम पर किसी प्राइवेट वेबसाइट या एजेंट को फीस देने की जरूरत नहीं है. आधिकारिक पोर्टल खुद चेतावनी देता है कि केवल सरकारी उद्यम पोर्टल और अधिकृत सरकारी सिंगल विंडो सिस्टम ही इस प्रक्रिया के लिए मान्य हैं.

सबसे बड़ा छिपा फायदा कलेक्शन नेटवर्क हो सकता है

इस बिजनेस को सिर्फ जला हुआ तेल खरीदने और बेचने का काम समझना इसकी असली क्षमता को छोटा कर देगा. असल एसेट आपका कलेक्शन नेटवर्क होगा. अगर एक छोटे कस्बे में आप दर्जनों ढाबों, रेस्टोरेंट्स और कैंटीन से नियमित कलेक्शन शुरू कर देते हैं तो भविष्य में यही नेटवर्क बड़े बायोफ्यूल खरीदारों के लिए आपकी ताकत बन सकता है. यानी शुरुआत साइकिल या दोपहिया से हो सकती है, लेकिन मॉडल को आगे चलकर लोकल वेस्ट मैनेजमेंट सर्विस में बदला जा सकता है. यही इस बिजनेस का सबसे दिलचस्प पहलू है. मशीनरी खरीदने के बजाय आप सप्लाई चेन खड़ी करते हैं.

किसके लिए है यह कारोबार और किसे नहीं करना चाहिए?

यह मॉडल उन लोगों के लिए ज्यादा उपयुक्त हो सकता है जिनके पास सीमित पूंजी है, अपने इलाके में होटल और फूड कारोबारियों तक पहुंच है और रोजाना कलेक्शन का काम करने के लिए समय दे सकते हैं.

लेकिन इसे बिना खरीदार तय किए शुरू करना जोखिम भरा होगा. पहले यह पता करना जरूरी है कि आपके इलाके में कौन अधिकृत एग्रीगेटर, बायोडीजल निर्माता या संबंधित खरीदार यूज्ड कुकिंग ऑयल ले रहा है. इसके बाद ही ड्रम, स्टोरेज और परिवहन पर पैसा लगाना समझदारी होगी.

साफ शब्दों में कहें तो यह कोई रातोंरात अमीर बनाने वाला बिजनेस नहीं है. इसकी ताकत छोटे मार्जिन को लगातार बड़ी मात्रा में बदलने में है. जिस व्यक्ति के पास मजबूत लोकल नेटवर्क बन जाता है, उसके लिए यही छोटी शुरुआत आगे चलकर बड़ा कारोबार बन सकती है.

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