बिजनेस
Best small business ideas: कम निवेश में अपना रोजगार शुरू करने वालों के लिए ब्रेकफास्ट ज्वाइंट, जूस पॉइंट, आइसक्रीम पार्लर, केटरिंग, फैशन और ऑर्गेनिक खेती जैसे कारोबार विकल्प हैं. सही लोकेशन, गुणवत्ता और मार्केटिंग के साथ इन बिजनेस को महानगरों के अलावा छोटे शहरों में भी बढ़ाया जा सकता है.
हर महीने की सैलरी का इंतजार करने के बजाय अगर अपना छोटा कारोबार शुरू किया जाए तो? खास बात यह है कि इसके लिए हमेशा बड़ी दुकान, भारी निवेश या लंबी-चौड़ी टीम की जरूरत नहीं होती. भारत में कुछ ऐसे स्मॉल बिजनेस हैं जिन्हें सीमित स्तर से शुरू करके धीरे-धीरे बड़ा किया जा सकता है.
ब्रेकफास्ट ज्वाइंट से लेकर जूस पॉइंट, आइसक्रीम पार्लर, केटरिंग तक कई ऐसे कारोबार हैं, जिनमें स्थानीय मांग के हिसाब से कमाई का रास्ता बनाया जा सकता है. इन कारोबारों की खासियत यह भी है कि इनके जरिए सिर्फ मालिक की आमदनी नहीं बढ़ती, बल्कि कुक, हेल्पर, डिलीवरी वर्कर, सेल्स स्टाफ और दूसरे लोगों के लिए भी रोजगार बन सकता है.
खाने-पीने का कारोबार छोटे स्तर पर बिजनेस शुरू करने वालों के लिए सबसे आसान विकल्पों में शामिल माना जाता है. ब्रेकफास्ट ज्वाइंट इसका एक अच्छा उदाहरण है. इसका सबसे बड़ा फायदा लोकेशन से जुड़ा है. ऑफिस, स्कूल और कॉलेज के आसपास ऐसी दुकान शुरू की जाए तो रोजाना ग्राहकों की जरूरत बनी रह सकती है.
शुरुआत में बड़ा मेन्यू रखने की जरूरत नहीं है. पारंपरिक नाश्ते के कुछ विकल्पों के साथ स्नैक्स रखकर भी कारोबार शुरू किया जा सकता है. ग्राहक मिलने लगें तो धीरे-धीरे मेन्यू बढ़ाया जा सकता है.
इसमें एक अहम बात यह है कि केवल खाना अच्छा होना काफी नहीं है. साफ-सफाई, तेज सर्विस और सही कीमत भी ग्राहक को दोबारा लाने में भूमिका निभाते हैं. यानी कम बजट में शुरुआत करने वाला व्यक्ति धीरे-धीरे इसे परिवार या दो-तीन कर्मचारियों के साथ चलने वाले कारोबार में बदल सकता है.
लोगों की बदलती पसंद ने जूस पॉइंट और शेक्स काउंटर जैसे कारोबारों के लिए भी जगह बनाई है. सॉफ्ट ड्रिंक्स के विकल्प के तौर पर ताजा जूस को स्वास्थ्य से जोड़कर देखा जाता है और यही वजह है कि जूस पॉइंट छोटे कारोबार के तौर पर अपनी जगह बना रहे हैं.
इस बिजनेस में भी लोकेशन बहुत मायने रखती है. बाजार, जिम, स्कूल, कॉलेज, ऑफिस या ज्यादा आवाजाही वाले इलाके संभावित ग्राहक दे सकते हैं.
रोजगार के लिहाज से देखें तो कारोबार बढ़ने पर फल काटने, जूस तैयार करने, काउंटर संभालने और डिलीवरी जैसे कामों के लिए लोगों की जरूरत पड़ सकती है. यानी छोटा काउंटर आगे चलकर एक से ज्यादा लोगों की कमाई का जरिया बन सकता है.
आइसक्रीम पार्लर भले ही खास मौसम पर ज्यादा निर्भर रहने वाला कारोबार है, लेकिन छोटे व्यवसायों में यह अभी भी एक लोकप्रिय विकल्प है. इस कारोबार के लिए किसी विशिष्ट आइसक्रीम ब्रांड की फ्रैंचाइजी खरीदने और पार्लर के लिए दुकान किराये पर लेने में निवेश करना होता है.
इसमें सबसे बड़ा सवाल निवेश और जगह का है. इसलिए दुकान लेने से पहले यह देखना जरूरी है कि उस इलाके में बच्चों, परिवारों और युवाओं की आवाजाही कितनी है.
सही लोकेशन मिलने पर सीजन के दौरान बिक्री बढ़ाने का मौका मिल सकता है. वहीं ऑफ सीजन में दूसरे संबंधित उत्पाद जोड़कर कारोबार को चलाए रखने की रणनीति बनाई जा सकती है.
अगर खाना बनाने का अनुभव है और लोगों से संपर्क अच्छा है तो केटरिंग कारोबार एक अलग रास्ता खोल सकता है. इसमें लेबर, कच्चे माल की खरीद के साथ टेंट, टेबल, कुर्सियां और बर्तनों की जरूरत होती है.
केटरिंग की खासियत यह है कि इसमें दुकान पर निर्भरता अपेक्षाकृत कम हो सकती है. शादी, जन्मदिन, धार्मिक कार्यक्रम, ऑफिस इवेंट और दूसरे समारोह संभावित ग्राहक बन सकते हैं.
इस कारोबार में कमाई का आधार सिर्फ खाना नहीं है. संपर्क, मार्केटिंग और तैयार किए गए भोजन की क्वालिटी भी अहम है. एक बड़ा ऑर्डर मिलने पर कुक, हेल्पर, सर्विस स्टाफ और दूसरे स्थानीय कामगारों को काम मिल सकता है. इस तरह यह कारोबार स्वरोजगार के साथ स्थानीय रोजगार भी पैदा कर सकता है.
कम लागत वाले बिजनेस आइडिया में खाने-पीने से जुड़े कारोबारों की चर्चा इसलिए भी होती है क्योंकि महानगरों में फूड डिलीवरी का नेटवर्क काफी बड़ा हो चुका है. Swiggy और Zomato जैसे प्लेटफॉर्म ने छोटे फूड कारोबारों को ग्राहकों तक पहुंचने का एक अतिरिक्त माध्यम दिया है.
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर फूड बिजनेस अपने आप सफल हो जाएगा. प्लेटफॉर्म पर प्रतिस्पर्धा, कमीशन, पैकेजिंग और खाने की क्वालिटी जैसे कई पहलू कारोबार की लागत और कमाई को प्रभावित करते हैं.
फिर भी छोटे उद्यमी के लिए इसका फायदा यह हो सकता है कि केवल आसपास के पैदल ग्राहकों पर निर्भर रहने के बजाय डिलीवरी के जरिए ज्यादा लोगों तक पहुंच बनाई जा सके. हाल में Swiggy ने भी अपने फूड डिलीवरी कारोबार के साथ आगे बढ़ने की महत्वाकांक्षी योजनाएं बताई हैं, जो इस सेक्टर में बड़े बाजार की ओर इशारा करती हैं. ([Reuters]
1-पैसे की कमी छोटे कारोबार शुरू करने की सबसे बड़ी रुकावट होती है. लेकिन बिजनेस शुरू करने वाले लोगों के लिए सरकार की तरफ से कई योजनाएं मौजूद हैं. Startup India के आधिकारिक पोर्टल पर केंद्र सरकार की विभिन्न स्टार्टअप योजनाओं की जानकारी दी गई है.
2- Pradhan Mantri Mudra Yojana के तहत इनकम पैदा करने वाले माइक्रो एंटरप्राइजेज के लिए 20 लाख रुपये तक के माइक्रो क्रेडिट का प्रावधान है.
3-वहीं PMEGP यानी Prime Minister's Employment Generation Programme के जरिए भी पात्र लोगों को अपना रोजगार शुरू करने में वित्तीय सहायता मिल सकती है. सरकारी जानकारी के अनुसार इस योजना में बैंक फाइनेंस के साथ सब्सिडी का प्रावधान है.
इसका मतलब यह नहीं है कि लोन लेकर कोई भी कारोबार अपने आप सफल हो जाएगा. लोन लेने से पहले दुकान का किराया, कच्चा माल, बिजली, कर्मचारियों की सैलरी, मार्केटिंग और हर महीने की संभावित बिक्री का हिसाब लगाना जरूरी है.
इन छोटे व्यवसायों को दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, चेन्नई, मुंबई और कोलकाता जैसे प्रमुख महानगरीय शहरों के अलावा टियर 2 और टियर 3 शहरों में भी शुरू और मैनेज किया जा सकता है.
दिलचस्प बात यह है कि छोटे शहर में शुरुआत करने का फायदा कभी-कभी कम किराये और स्थानीय ग्राहकों की बेहतर समझ के रूप में मिल सकता है. वहीं महानगरों में ग्राहक ज्यादा मिल सकते हैं, लेकिन किराया और प्रतिस्पर्धा भी ज्यादा हो सकती है.
इसलिए कारोबार चुनते समय सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि कौन सा बिजनेस सबसे ज्यादा कमाता है. यह देखना ज्यादा जरूरी है कि आपके इलाके में किस चीज की मांग है, कितने प्रतिस्पर्धी हैं और कितनी लागत में आप कारोबार को कम से कम छह महीने चला सकते हैं.
इन सभी कारोबारों को एक अलग नजरिये से देखने पर एक बात सामने आती है. छोटा बिजनेस सिर्फ खुद के लिए कमाई का जरिया नहीं होता. कारोबार बढ़ने के साथ दूसरे लोगों के लिए भी काम बन सकता है.
एक छोटे ब्रेकफास्ट ज्वाइंट को ही लें. शुरुआत में मालिक खुद काम कर सकता है. ग्राहक बढ़ने पर कुक और हेल्पर की जरूरत होगी. डिलीवरी शुरू हुई तो डिलीवरी स्टाफ की जरूरत पड़ सकती है. इसी तरह केटरिंग में एक ऑर्डर के साथ कई लोगों को अस्थायी या नियमित काम मिल सकता है.
यही वजह है कि नौकरी की तलाश कर रहे लोगों के लिए इन बिजनेस आइडिया को सिर्फ कमाई के विकल्प के तौर पर नहीं, बल्कि रोजगार पैदा करने वाले छोटे उद्यम के रूप में देखना ज्यादा उपयोगी है.
बिजनेस शुरू करने के लिए सबसे पहले बड़ी रकम नहीं, सही मॉडल की जरूरत होती है. ब्रेकफास्ट ज्वाइंट, जूस पॉइंट, आइसक्रीम पार्लर, केटरिंग, फैशन एक्सेसरी और ऑर्गेनिक फल-सब्जियों जैसे विकल्पों में से चुनाव स्थानीय मांग और अपनी क्षमता देखकर करना चाहिए.
सबसे सुरक्षित तरीका यह है कि पहले छोटे स्तर पर मांग को परखा जाए, खर्च और बिक्री का हिसाब रखा जाए और ग्राहक बनने के बाद ही कारोबार को बड़ा किया जाए. कमाई का सपना जरूरी है, लेकिन कारोबार में टिके रहने के लिए लागत का हिसाब उससे भी ज्यादा जरूरी है.
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