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भारत में इन 3 बिजनेस की अचानक से बढ़ी मांग, कम पैसा लगाकर आप भी खड़ी कर सकते हैं अरबों के टर्नओवर वाली कंपनी

High profitable startup business with low investment: भारत में तेजी से बदलती लाइफस्टाइल और तकनीकी विकास के कारण कुछ नए बिजनेस आइडियाज की डिमांड अचानक बहुत बढ़ गई है. 3 तरह के यूनिक स्टार्टअप्स कम निवेश में शुरू होकर अरबों का टर्नओवर बना रहे हैं, जो भविष्य की बड़ी कंपनियां बन सकते हैं.

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भारत में इन 3 बिजनेस की अचानक से बढ़ी मांग, कम पैसा लगाकर आप भी खड़ी कर सकते हैं अरबों के टर्नओवर वाली कंपनी

भारत के इन 3 स्टार्टअप में पैसा लगाना जानिए क्यों है फायदेमंद? (फोटो एआई)

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आज के समय में हर कोई चाहता है कि उसका अपना एक खुद का काम हो, जहां उसे किसी बॉस की बातें न सुननी पड़ें. अगर आप भी नौकरी की घिसी-पिटी जिंदगी से परेशान हैं और कुछ ऐसा करना चाहते हैं जिससे आपकी किस्मत बदल जाए, तो यह खबर आपके लिए ही है. भारत में इस वक्त कुछ ऐसे यूनिक बिजनेस आइडियाज तेजी से ऊभर रहे हैं, जिनकी मांग बाजार में अचानक से बहुत ज्यादा बढ़ गई है. इन बिजनेस की सबसे खास बात यह है कि इन्हें बहुत बड़े बजट के बिना भी शुरू किया जा सकता है, लेकिन आने वाले समय में ये आपको करोड़पति या अरबपति बनाने का दम रखते हैं. वाणिज्य मंत्रालय और मार्केट एक्सपर्ट्स के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में इन सेक्टर्स में रिकॉर्ड तोड़ ग्रोथ देखी जा रही है.

पेट केयर और हॉस्पिटैलिटी का बढ़ता क्रेज

आजकल मेट्रो शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक में लोग अपने घरों में पालतू जानवर जैसे कुत्ता या बिल्ली रखना काफी पसंद कर रहे हैं. अब लोग इन्हें सिर्फ एक जानवर नहीं बल्कि अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं. यही वजह है कि पेट केयर, पेट ग्रूमिंग और पेट बोर्डिंग (जब लोग बाहर जाएं तो जानवरों की देखरेख का स्थान) का बिजनेस बहुत तेजी से बढ़ रहा है.

इस काम को शुरू करने के लिए आपको शुरुआत में करीब 2 लाख से 5 लाख रुपये तक के निवेश की जरूरत हो सकती है. इसकी सबसे ज्यादा डिमांड बड़े शहरों और उन इलाकों में है जहां कामकाजी कपल्स रहते हैं. जब लोग ऑफिस या वेकेशन पर जाते हैं, तो उन्हें अपने पेट्स के लिए एक सुरक्षित जगह चाहिए होती है. अगर आप बेहतरीन सर्विस देते हैं, तो यह छोटा सा स्टार्टअप आगे चलकर एक बड़े ब्रांड और अरबों रुपये की फ्रेंचाइजी कंपनी में तब्दील हो सकता है.

इको-फ्रेंडली और ग्रीन पैकेजिंग की भारी डिमांड

प्लास्टिक पर बढ़ती पाबंदियों और पर्यावरण के प्रति लोगों की जागरूकता ने एक नया बाजार तैयार कर दिया है. अब हर छोटी-बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी, रेस्टोरेंट और फूड डिलीवरी ऐप्स प्लास्टिक की जगह ग्रीन पैकेजिंग यानी बायो-डिग्रेडेबल और पेपर से बने पैकेट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं. सरकार की सख्त गाइडलाइंस के कारण इस क्षेत्र में अचानक से बूम आ गया है.

अगर आप ग्रीन पैकेजिंग का मैन्युफैक्चरिंग या सप्लाई बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, तो शुरुआत में 5 लाख से 10 लाख रुपये तक की मशीनरी और कच्चे माल में इनवेस्ट करना होगा. इसकी डिमांड हर उस जगह है जहां सामान की डिलीवरी या पैकिंग होती है. चूंकि हर कंपनी को अपनी ब्रांडिंग के लिए इको-फ्रेंडली विकल्पों की जरूरत है, इसलिए इस फील्ड में उतरने वाले शुरुआती स्टार्टअप्स बहुत जल्द बड़े कॉर्पोरेट ऑर्डर्स हासिल कर अरबों की कंपनी बन रहे हैं.

ई-कचरा रीसाइक्लिंग का भविष्य

हम सब हर साल नए मोबाइल, लैपटॉप और गैजेट्स खरीदते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पुराने खराब हो चुके इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों का क्या होता है? भारत में ई-वेस्ट यानी इलेक्ट्रॉनिक कचरा एक बहुत बड़ी समस्या बनता जा रहा है और इसी समस्या में छिपा है एक बड़ा बिजनेस आइडिया. ई-कचरा रीसाइक्लिंग के जरिए पुरानी डिवाइसेज से कीमती धातुएं जैसे तांबा, सोना और सिल्वर निकाला जाता है.

इस बिजनेस को थोड़े बड़े स्तर पर शुरू करने के लिए लगभग 10 से 15 लाख रुपये के निवेश और कुछ सरकारी लाइसेंस की आवश्यकता होती है. इसकी डिमांड इंडस्ट्रियल एरिया और बड़े शहरों में सबसे ज्यादा है जहां इलेक्ट्रॉनिक कचरा भारी मात्रा में निकलता है. एक छिपी हुई बात यह भी है कि आने वाले समय में जो कंपनियां सही तरीके से ई-वेस्ट मैनेज करेंगी, उन्हें सरकार से भारी सब्सिडी भी मिलेगी. यही कारण है कि यह सेक्टर अरबों डॉलर की इंडस्ट्री बनने की राह पर है.

लोगों की जिंदगी पर इसका सीधा असर कैसे होगा?

इन नए बिजनेस आइडियाज का सबसे बड़ा प्रभाव यह है कि ये आम मध्यमवर्गीय युवाओं को नौकरी ढूंढने वाले से नौकरी देने वाला बना रहे हैं. ये बिजनेस सिर्फ पैसे कमाने का जरिया नहीं हैं, बल्कि ये समाज की उन जरूरतों को पूरा कर रहे हैं जिन्हें पहले नजरअंदाज कर दिया जाता था. कम लागत में शुरू होने के कारण इनमें रिस्क फैक्टर भी पुराने पारंपरिक बिजनेस के मुकाबले काफी कम होता है, जिससे एक आम इंसान भी बिना डरे कदम आगे बढ़ा सकता है.

 इन बिजनेस को लेकर क्या है फ्यूचर?

वाणिज्य मंत्रालय और विभिन्न प्रतिष्ठित मार्केट रिसर्च फर्मों (जैसे IMARC ग्रुप, P&S इंटेलिजेंस और मॉर्डन इंटेलिजेंस) के हालिया आधिकारिक आंकड़े इन तीनों सेक्टर्स की रिकॉर्ड तोड़ ग्रोथ की पुष्टि करते हैं. 

पेट केयर और हॉस्पिटैलिटी की आधिकारिक मार्केट रिसर्च रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2025 में भारत का पेट केयर प्रोडक्ट्स मार्केट करीब 8.6 अरब डॉलर (USD 8.6 Billion) के स्तर पर पहुंच गया है.  भविष्य की रफ्तार (Growth Rate): यह सेक्टर लगातार मजबूत हो रहा है और आने वाले समय (2026-2034) में इसके 5.24% की वार्षिक चक्रवृद्धि दर (CAGR) से बढ़कर लगभग 13.9 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.  प्रमुख वजह: मेट्रो शहरों में बढ़ती प्रति व्यक्ति आय, न्यूक्लियर फैमिली कल्चर और प्रीमियम पेट फूड व ग्रूमिंग सर्विसेज की मांग में सालाना 13% से अधिक का इजाफा देखा जा रहा है. 

वहीं, ग्रीन पैकेजिंग (Eco-Friendly Packaging) मार्केट डेटा की रिपोर्ट बताती है कि सिंगल-यूज प्लास्टिक पर सरकारी प्रतिबंधों के बाद साल 2025 में भारत का ग्रीन पैकेजिंग बाजार 11.1 अरब डॉलर (USD 11.1 Billion) आंका गया है.रिकॉर्ड तोड़ ग्रोथ स्टार्टअप्स के लिए यह सबसे तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र साबित हो रहा है, क्योंकि मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार साल 2026 से 2034 के बीच यह सेक्टर 20.73% की भारी-भरकम वार्षिक ग्रोथ रेट (CAGR) के साथ बढ़ने की राह पर है. यह इंडस्ट्री तेजी से छलांग लगाते हुए साल 2034 तक 63.7 अरब डॉलर के स्तर को छूने के लिए तैयार है, जो इस बात का सबूत है कि इसमें छोटे स्टार्टअप्स के लिए अरबों की कंपनी बनने का कितना बड़ा मौका है.  

उधर, ई-कचरा रीसाइक्लिंग (E-Waste Recycling) मार्केट डेटा बताता है कि भारत में केवल साल 2025 में ही लगभग 32 लाख टन (3.2 Million Tonnes) ई-कचरा पैदा होने का अनुमान लगाया गया. इस रीसाइक्लिंग और ई-वेस्ट मैनेजमेंट मार्केट की वैल्यू करीब 1.88 अरब डॉलर से 2.8 अरब डॉलर के बीच आंकी गई है.यह बाजार वर्ष 2026 से 2032 के बीच 10.1% की वार्षिक दर (CAGR) से आगे बढ़ने के लिए तैयार है, जिससे इसका कुल मूल्य 5.5 अरब डॉलर से ऊपर चला जाएगा. सरकारी नियमों और 'एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी' (EPR) के कड़े प्रावधानों के कारण, कॉर्पोरेट कंपनियों द्वारा रीसाइक्लिंग के लिए कचरा देने की मात्रा में सालाना 15% का उछाल आ रहा है. इसके अलावा, लेटेस्ट रीसाइक्लिंग टेक्नोलॉजी की मदद से पुराने गैजेट्स से कीमती धातुओं (सोना, चांदी, तांबा) को निकालने की क्षमता में 30% तक का सुधार देखा गया है, जो इस बिजनेस को बेहद मुनाफेदार बनाता है.

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