बिजनेस
How a housewife built a 400 crore beauty brand: पति के लीवर ट्रांसप्लांट और डिप्रेशन के काले दौर से निकलकर एक साधारण हाउसवाइफ ने कमाल कर दिया. सिर्फ 2 लाख रुपये और घर के बेसमेंट से शुरू हुआ उनका कोरियन स्किनकेयर बिजनेस आज 400 करोड़ का बड़ा ब्रांड बन चुका है.
जब जिंदगी में अचानक दुखों का पहाड़ टूटता है, तो अच्छे-अच्छे लोग हिम्मत हार जाते हैं. अस्पताल के चक्कर, भारी कर्ज का डर और अपनों को खोने का खौफ किसी को भी तोड़ सकता है. लेकिन आज हम आपको एक ऐसी महिला की अनसुनी दास्तां सुनाने जा रहे हैं, जिसने आईसीयू (ICU) के बाहर आंसू बहाने के बजाय अपनी किस्मत को ही चुनौती दे दी. यह कहानी हर उस इंसान के लिए है जो सोचता है कि बुरे वक्त के बाद रास्ते हमेशा के लिए बंद हो जाते हैं.
दीपाली बंसल की शादीशुदा जिंदगी बेहद खूबसूरत चल रही थी, लेकिन अचानक उनके पति एक गंभीर बीमारी की चपेट में आ गए. इसके बाद शुरू हुआ अस्पतालों के अंतहीन चक्करों, डिप्रेशन और अनिश्चितता का एक ऐसा दौर जिसने परिवार को हिलाकर रख दिया. हालत इतनी नाजुक हो गई कि पति का लीवर ट्रांसप्लांट कराना पड़ा. उस मुश्किल घड़ी में दीपाली के सामने दो ही रास्ते थे—या तो वह किस्मत को कोसते हुए टूट जातीं, या फिर अपने परिवार की ढाल बन खड़ी हो जातीं. उन्होंने दूसरा रास्ता चुना और खुद को नए सिरे से तराशना शुरू कर दिया.
जब पूरी दुनिया कोविड के डर से घरों में कैद थी और लोगों की नौकरियां जा रही थीं, तब दीपाली अपने जीवन की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ रही थीं. इसी दौरान तनाव की वजह से उन्हें गंभीर स्किन प्रॉब्लम्स (त्वचा की समस्याएं) का सामना करना पड़ा. अपनी इस परेशानी का इलाज ढूंढते हुए उन्होंने कोरियन स्किनकेयर फॉर्मूलेशन पर रिसर्च करना शुरू किया. उनके पास कोई बहुत बड़ा बिजनेस बैकग्राउंड नहीं था, लेकिन उनके पास एक विजन था. उन्होंने अपनी जमा-पूंजी से सिर्फ 2 लाख रुपये निकाले और अपने घर के एक छोटे से बेसमेंट को ही अपनी लैब बना लिया. यहीं से जन्म हुआ 'सुरोस्की ब्यूटी' (Suroskie Beauty) का.
कहते हैं कि अगर नीयत साफ हो और मेहनत सच्ची हो, तो कायनात भी आपका साथ देती है. दीपाली ने जब अपना पहला प्रोडक्ट लॉन्च किया, तो वह पहले ही दिन पूरा का पूरा सोल्ड आउट (बिक गया) हो गया. कुछ ही दिनों में ग्राहकों के रिपीट ऑर्डर्स आने लगे, जिसने यह साबित कर दिया कि उनके प्रोडक्ट में दम था. जो काम घर के बेसमेंट से सिर्फ एक महिला ने शुरू किया था, वह आज 400 करोड़ से ज्यादा के टर्नओवर वाली कंपनी बन चुकी है, जहां 100 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं. यह सफलता बताती है कि एक बड़ा ब्रांड बनने के लिए बड़े ऑफिस की नहीं, बल्कि बड़े आइडिया की जरूरत होती है.
दीपाली बंसल की यह प्रेरक कहानी आज के दौर में हर उस गृहणी और आम इंसान के लिए एक बहुत बड़ा सबक है जो पैसे की कमी या पारिवारिक जिम्मेदारियों का बहाना बनाकर अपने सपनों को दबा देते हैं. यह खबर हमें सिखाती है कि मार्केट में मंदी हो या जिंदगी में कोई बड़ी पर्सनल क्राइसिस, अगर आप ग्राहकों की असली जरूरत को समझकर कोई कदम उठाते हैं, तो कामयाबी मिलकर ही रहती है. बिजनेस शुरू करने के लिए करोड़ों की फंडिंग की जरूरत नहीं होती, आपके घर का एक छोटा सा कोना और 2 लाख रुपये की छोटी बचत भी आपको फर्श से अर्श तक पहुंचा सकती है.
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