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Business Idea: 5 हजार रुपये में शुरू करें ये स्टार्टअप जिनकी अचानक से बढ़ी है मांग, मंदी के दौर में भी नहीं डूबेगा पैसा

Zero risk small Startup amodels: भारत में कम बजट वाले 3 अनोखे बिजनेस आइडिया तेजी से उभर रहे हैं. ये वो बिजनेस है जो आप घर पर रहते हुए भी कर सकते हैं या इसके लिए बाहर भी सेटअप लगा सकते हैं. ये वो बिजनेस हैं जो आज के समय में बेहद डिमांडिंग हैं.

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Business Idea: 5 हजार रुपये में शुरू करें ये स्टार्टअप जिनकी अचानक से बढ़ी है मांग, मंदी के दौर में भी नहीं डूबेगा पैसा

भारत में कम बजट वाले कौन से 3 स्टार्टअप मॉडल्स तेजी से उभर रहे हैं? (फोटो एआई)

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आज के समय में जब हर दूसरी कंपनी से छंटनी की खबरें आ रही हैं और महंगाई आसमान छू रही है, तब खुद का काम शुरू करना सबसे समझदारी का फैसला लगता है. लेकिन आम इंसान के सामने सबसे बड़ी दीवार होती है- पैसा और डूबने का डर. अगर आपके पास लाखों का बैकअप नहीं है, तो क्या आप कभी अपना बिजनेस नहीं कर पाएंगे? ऐसा बिल्कुल नहीं है. बदलते भारत की लाइफस्टाइल ने कुछ ऐसी नई जरूरतें पैदा कर दी हैं, जहां आप बहुत कम पैसे लगाकर एक सुरक्षित और परमानेंट इनकम सोर्स खड़ा कर सकते हैं.

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समय की कमी ने खोला कमाई का नया रास्ता

मेट्रो शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक में अब पति-पत्नी दोनों वर्किंग हैं. इनके पास पैसा तो है पर समय की भारी किल्लत है. इसी मजबूरी से निकला है प्री-प्रिपेयर्ड वेजिटेबल और मील-किट का बिजनेस. मार्केट रिसर्च एजेंसी रेडसीर की ताजा रिपोर्ट बताती है कि भारत में रेडी-टू-कुक और कटी हुई सब्जियों का बाजार हर साल 15 से 20 फीसदी की रफ्तार से भाग रहा है. भारत में रेडी-टू-कुक (Ready-to-Cook) और फ्रेश-कट सब्जियों का बाजार सालाना 15-20% की रफ्तार से बढ़ रहा है."

आम लोगों के लिए इसमें फायदा यह है कि आपको कोई बड़ी फैक्टरी नहीं लगानी. आप अपने घर की रसोई से ताजी सब्जियां धोकर, काटकर और कॉम्बो पैक बनाकर सीधे कामकाजी लोगों तक पहुंचा सकते हैं. चूंकि आप ऑर्डर के हिसाब से ही माल लाते हैं, इसलिए इसमें नुकसान होने की गुंजाइश लगभग जीरो है. आप iD Fresh Food या Licious जैसी कंपनियों का उदाहरण दे सकते हैं, जिन्होंने शुरुआत छोटे स्तर से की थी और आज कटी हुई सब्जियों या रेडी-टू-कुक सेगमेंट में करोड़ों का बिजनेस कर रही हैं.

अकेलेपन को सहारा देकर खड़ा करें एक भरोसेमंद काम

भारत का एक सच यह भी है कि युवाओं की बड़ी आबादी नौकरी के सिलसिले में घर से दूर या विदेशों में रह रही है. पीछे छूट गए बुजुर्ग माता-पिता को पैसे से ज्यादा एक मददगार हाथ की जरूरत होती है. हेल्पएज इंडिया की रिपोर्ट्स अक्सर इस सामाजिक बदलाव की ओर इशारा करती हैं. इसी गैप को पूरा करने के लिए 'एल्डरली केयर असिस्टेंस' का आइडिया आया है. रतन टाटा के निवेश वाले स्टार्टअप 'गुडफेलो' ने इस मॉडल को देश में नई पहचान दी है.

रिपोर्ट्स के अनुसार भारत में बुजुर्गों की आबादी और उनकी अकेले रहने की समस्याओं बढ़ रही है और कई बार वर्किंग कपल या बच्चों के किसी दूसरे शहर या विदेश जाने वार बुजुर्गों को घर बैठे सर्विस देने की जरूरत बढ़ने लगी है.

आप भारत के पहले सीनियर-केयर कंपैनियनशिप स्टार्टअप 'Goodfellows' (जिसमें रतन टाटा ने भी निवेश किया है) का सोर्स दे सकते हैं कि कैसे भारत में इस तरह की सर्विसेज की मांग तेजी से बढ़ रही है.

खास बात ये है कि इस काम को शुरू करने के लिए आपको जेब से एक रुपया भी नहीं लगाना है. आपको बस अकेले रह रहे बुजुर्गों के लिए दवा लाना, उन्हें डॉक्टर के पास ले जाना या उनके छोटे-मोटे सरकारी काम निपटाने जैसी सर्विस देनी है. इस काम में कोई सामान नहीं खरीदना होता, इसलिए घाटा होने का डर नहीं है. एक बार अगर किसी परिवार का भरोसा जीत लिया, तो यह काम आपको जिंदगीभर की बंधी-बंधाई कमाई दे सकता है.

कंक्रीट के जंगलों में हरियाली बेचने का ट्रेंड

आजकल लोग घरों और दफ्तरों को खूबसूरत और इंस्टाग्राम-फ्रेंडली बनाना चाहते हैं, लेकिन पौधों की देखभाल करना हर किसी के बस की बात नहीं होती. फ्यूचर मार्केट इनसाइट्स के मुताबिक, कॉरपोरेट ऑफिसों और मॉडर्न कैफे में 'प्लांट रेंटल' और बालकनी मेकओवर का चलन बहुत तेजी से बढ़ा है.

नर्सरी ट्रेंड्स रिपोर्ट बताती है कि मेट्रो शहरों में 'Vertical Gardening' और 'Indoor Plant Rental' को लेकर आर्किटेक्ट्स और इंटीरियर डिजाइनर्स के इंटरव्यूज को सोर्स बनाया जा सकता है.  बढ़ते पॉल्यूशन और ग्रीनरी की कमी में ये बिजनेस माड्यूल भी हिट साबित होगा.

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आप मात्र सात से दस हजार रुपये में लोकल नर्सरी से सुंदर इनडोर प्लांट्स खरीदकर इस काम को शुरू कर सकते हैं. बैंकों, दफ्तरों और नए खुले कैफे को मासिक किराए पर पौधे दें और हफ्ते में एक दिन उनकी मेंटेनेंस के लिए जाएं. इस बिजनेस की सबसे खबसूरत बात यह है कि पौधा एक ऐसी संपत्ति है जो समय के साथ खराब नहीं होती बल्कि बढ़ती है. अगर कोई क्लाइंट सर्विस बंद भी करता है, तो आपका पौधा आपके पास सुरक्षित रहता है जिसे आप कहीं और इस्तेमाल कर सकते हैं.

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क्या है इस पूरे खेल की अंदरूनी हकीकत

इन तीनों बिजनेस की सबसे बड़ी यूएसपी यह है कि ये किसी लग्जरी पर नहीं बल्कि आम इंसान की रोजमार्रा की जरूरत पर टिके हैं. मंदी आए या महंगाई बढ़े, लोग खाना खाना नहीं छोड़ेंगे, बुजुर्गों की देखभाल बंद नहीं होगी और ऑफिसों का डेकोरेशन बंद नहीं होगा. ऐसे में अगर आप पारंपरिक दुकानों या बड़े शोरूम के चक्कर में पड़ने के बजाय इन छोटे लेकिन अनोखे रास्तों को चुनते हैं, तो आर्थिक मंदी के इस दौर में भी आपकी जेब कभी खाली नहीं रहेगी.

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