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Silver investment strategy: ₹6,000 टूट चुकी है. अमेरिकी रोजगार आंकड़ों से ब्याज दर बढ़ने की चिंता बढ़ी है. अब ₹2.33 लाख का सपोर्ट और ₹2.40 लाख का रेजिस्टेंस बेहद अहम होगा. निवेशक ही नहीं आम लोग भी नहीं समझ पा रहे चांदी खरीदने का ये सही वक्त है या बेचने का?
चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार ने एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. एमसीएक्स पर सितंबर डिलीवरी वाली चांदी 7 सितंबर को ₹2,36,423 प्रति किलो तक फिसल गई. दो कारोबारी सेशन में इसमें करीब ₹6,000 प्रति किलो की गिरावट आ चुकी है. ऐसे में सवाल है कि क्या ₹2.35 लाख के आसपास चांदी खरीदना समझदारी है या अभी और सस्ती चांदी का इंतजार करना चाहिए.
अमेरिका के मजबूत रोजगार आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बाजार की चिंता बढ़ा दी है. अब इस हफ्ते आने वाले महंगाई के आंकड़े चांदी की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं. चलिए कमोडिटी एंड शेयर मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय से समझते हैं की अगली चाल सिल्वर में क्या हो सकती है.
एमसीएक्स पर सितंबर 2026 डिलीवरी वाली चांदी सोमवार को ₹1,235 की गिरावट के साथ ₹2,36,423 प्रति किलो पर आ गई. पिछले दो सेशन में चांदी करीब ₹6,000 प्रति किलो टूट चुकी है. यानी जिसने कुछ दिन पहले चांदी खरीदी थी, उसके निवेश पर छोटी अवधि में दबाव बढ़ा है.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी की कीमत करीब 0.2 फीसदी गिरकर $66.03 प्रति औंस पर आ गई. इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ता है, क्योंकि घरेलू चांदी की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय भाव और रुपये की चाल दोनों का असर होता है.
अमेरिका के अगस्त रोजगार आंकड़े उम्मीद से मजबूत रहे. बेरोजगारी दर 4.1 फीसदी पर बनी रही और रोजगार बाजार की मजबूती ने फेड की सितंबर बैठक में ब्याज दर बढ़ने की संभावना को फिर चर्चा में ला दिया. सीएमई फेडवॉच के मुताबिक 15 और 16 सितंबर की बैठक में दर बढ़ने की संभावना करीब 58.4 फीसदी आंकी जा रही थी.
चांदी जैसे ऐसे एसेट पर ऊंची ब्याज दरों का दबाव पड़ता है, जिससे निवेशकों को बिना ब्याज देने वाली धातु रखने की तुलना में ब्याज देने वाले विकल्प ज्यादा आकर्षक लग सकते हैं.
अब इस हफ्ते अमेरिका के पीपीआई और सीपीआई आंकड़े बेहद अहम हैं. अगर महंगाई के आंकड़े ज्यादा गर्म रहे और ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद मजबूत हुई तो चांदी पर दबाव बढ़ सकता है. इसके उलट महंगाई में नरमी से चांदी को राहत मिल सकती है.
कमोडिटी बाजार के तकनीकी विश्लेषण में फिलहाल एमसीएक्स चांदी के लिए ₹2,35,000 से ₹2,33,300 का सपोर्ट जोन देखा जा रहा है. दूसरी तरफ ₹2,40,000 से ₹2,42,400 का इलाका अहम रेजिस्टेंस माना जा रहा है.
देव कहते हैं इसका मतलब आम खरीदार के लिए सीधी भाषा में यह है कि ₹2.35 लाख के आसपास चांदी को संभलते हुए देखना होगा. अगर यह सपोर्ट जोन टिकता है तो कीमत में वापसी की कोशिश हो सकती है. लेकिन अगर ₹2.33 लाख के आसपास का सपोर्ट भी टूटता है तो नीचे के स्तरों पर नई कमजोरी देखने को मिल सकती है.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब $66 प्रति औंस की चांदी के लिए $62.50 का सपोर्ट और $68 का रेजिस्टेंस अहम माना जा रहा है. अगर चांदी $68 के ऊपर मजबूती से निकलती है तो करीब $71.30 तक जाने की संभावना बन सकती है.
रॉयटर्स की तकनीकी रिपोर्ट में भी $62.54 को अहम सपोर्ट बताया गया है. वहीं $71.54 जून का महत्वपूर्ण हाई रहा है. रिपोर्ट के अनुसार अगर $54.74 का पिछला लो टूटता है तो चांदी में $48.60 और फिर $45.51 तक कमजोरी का जोखिम खुल सकता है. यानी मौजूदा भाव पर सबसे बड़ा संकेत यही है कि चांदी अभी ऐसी जगह खड़ी है जहां तेजी और गिरावट दोनों के रास्ते खुले हैं.
देव कहते हैं सिर्फ इसलिए चांदी खरीद लेना कि भाव पहले के मुकाबले काफी नीचे आ चुका है, फिलहाल सही रणनीति नहीं मानी जा सकती. हाल की रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि जनवरी में ₹4 लाख प्रति किलो के ऊपर जाने के बाद चांदी 40 फीसदी से ज्यादा टूट चुकी है, लेकिन इतनी बड़ी गिरावट के बावजूद निवेशकों की नई मांग कमजोर बनी हुई है.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय बुलियन डीलरों और रिफाइनरों ने करीब 2,000 टन चांदी के ऑर्डर दिए हैं, जो रास्ते में है. भारत हर साल करीब 7,000 टन चांदी आयात करता है. ऐसे में अगर निवेश मांग कमजोर रही तो बाजार में स्टॉक बढ़ने का दबाव भी बन सकता है. देव के अनुसार यही वह छिपा हुआ पहलू है जिसे आम खरीदार को समझना चाहिए. भाव 40 फीसदी गिरने का मतलब यह नहीं कि नीचे जाने की गुंजाइश खत्म हो गई है.
लंबी अवधि में चांदी की कहानी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. इसका इस्तेमाल औद्योगिक क्षेत्र, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और दूसरी इंडस्ट्री में होता है. लेकिन अभी छोटी अवधि में अमेरिकी ब्याज दर, डॉलर, बॉन्ड यील्ड, तेल और भू-राजनैतिक घटनाएं कीमत पर ज्यादा असर डाल रही हैं.
फाइनेंशियल एक्सप्रेस की हालिया रिपोर्ट के अनुसार 2026 में अब तक सोना करीब 3.3 फीसदी ऊपर है, जबकि चांदी करीब 11 फीसदी नीचे है. रिपोर्ट ने मौजूदा अस्थिरता में एकमुश्त बड़ी खरीदारी के बजाय धीरे-धीरे पोजीशन बनाने की रणनीति पर सावधानी बरतने की बात कही है.
इसलिए अगर किसी व्यक्ति को शादी, त्योहार या लंबे समय की जरूरत के लिए चांदी खरीदनी ही है तो पूरी रकम एक ही दिन लगाने के बजाय खरीदारी को हिस्सों में बांटना ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है. वहीं केवल कुछ दिनों या हफ्तों में मुनाफा कमाने की उम्मीद से खरीदारी करना अभी ज्यादा जोखिम वाला है.
मौजूदा तस्वीर में ₹2.35 लाख से ₹2.33 लाख का सपोर्ट जोन और ₹2.40 लाख से ₹2.42 लाख का रेजिस्टेंस जोन सबसे अहम है. इन दोनों में से जिस तरफ निर्णायक ब्रेक मिलेगा, उसी तरफ अगली चाल मजबूत हो सकती है. आम खरीदार के लिए सीधी बात यह है कि चांदी में गिरावट जरूर आई है, लेकिन गिरावट को अपने आप खरीदारी का सिग्नल मानना ठीक नहीं होगा. फिलहाल बाजार में जल्दबाजी के बजाय स्तर देखकर और चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करना ज्यादा सतर्क तरीका दिखाई देता है.
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