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सोना खरीदें या थोड़ा रुकें? ₹1.50 लाख के पार टिकेगा भाव या शुरू होगी मुनाफावसूली? इन 5 संकेतों पर रखें नजर

gold price forecast: आज सोना-चांदी सिर्फ सुरक्षित निवेश की मांग से नहीं, बल्कि अमेरिकी रोजगार आंकड़ों, Fed की दर नीति, डॉलर, रुपये, तेल और भू-राजनीतिक घटनाओं से दिशा लेंगे. सोना ₹1.50 लाख के ऊपर और चांदी ₹2.32 लाख के करीब पहुंच चुकी है, ऐसे में आगे तेजी टिकेगी या मुनाफावसूली आएगी, यही बड़ा सवाल है.

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सोना खरीदें या थोड़ा रुकें? ₹1.50 लाख के पार टिकेगा भाव या शुरू होगी मुनाफावसूली? इन 5 संकेतों पर रखें नजर

सोना अभी लेना ठीक या रुक जाना? (फोटो एआई)

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  • अमेरिका के कमजोर रोजगार आंकड़े बने ट्रिगर
  • सोना डेढ़ लाख के ऊपर टिकेगा या नहीं
  • चांदी की अगली परीक्षा पैंतीस लाख नहीं
  • रुपया बदल सकता है घरेलू भाव
  • तेल और ईरान देंगे अचानक झटका

सोने और चांदी की कीमतों को देखकर अभी सबसे आसान निष्कर्ष यही होगा कि दोनों धातुओं में तेजी लौट रही है. लेकिन 10 अगस्त के बाजार की असली कहानी इससे थोड़ी अलग है. सवाल यह नहीं है कि सोना ऊपर जाएगा या नीचे. बड़ा सवाल यह है कि हाल की तेजी के पीछे कितनी ताकत वास्तविक खरीद की है और कितना हिस्सा अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीद में बनी तेजी का है.

7 अगस्त यानी बीते शुक्रवार को बाजार बंद होने तक MCX पर अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना 1.02 फीसदी चढ़कर 1,50,381 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था और दिन का उच्च स्तर 1,50,487 रुपये रहा. सितंबर डिलीवरी वाली चांदी 2.95 फीसदी उछलकर 2,32,502 रुपये प्रति किलो के स्तर तक पहुंच गई. अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 4,262.39 डॉलर प्रति औंस और स्पॉट सिल्वर 62.27 डॉलर प्रति औंस तक पहुंची.  

मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय के नजरिये से 10 अगस्त की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब केवल भाव देखकर तेजी या मंदी का फैसला करना जोखिम भरा हो सकता है. बाजार में कई संकेत एक साथ बदल रहे हैं और इसी वजह से छोटी अवधि में उतार-चढ़ाव तेज रह सकता है.

अमेरिका का कमजोर रोजगार डेटा बना सोने का नया ट्रिगर

रॉयटर्स के मुताबिक अमेरिकी रोजगार आंकड़ों ने बुलियन बाजार को सबसे बड़ा संकेत दिया. जुलाई में अमेरिका में गैर-कृषि रोजगार में 23,000 की कमी दर्ज हुई, जबकि बाजार को करीब 80,000 नई नौकरियों की उम्मीद थी. मई और जून के आंकड़ों में भी कुल 1.03 लाख की कटौती हुई. इस कमजोर रोजगार तस्वीर ने अमेरिकी केंद्रीय बैंक के आगे ब्याज दर बढ़ाने की संभावना को कमजोर किया.  

यही वह जगह है जहां सोने की कहानी दिलचस्प बनती है. सोना खुद कोई ब्याज नहीं देता. जब ब्याज दरें ऊंची रहने की उम्मीद होती है तो निवेशक ब्याज देने वाली संपत्तियों को प्राथमिकता दे सकते हैं. लेकिन दरों में नरमी की उम्मीद बढ़ते ही सोने का अवसर लागत वाला नुकसान कम होता है.

रॉयटर्स के मुताबिक कमजोर रोजगार रिपोर्ट के बाद सितंबर में Fed की दर बढ़ाने की संभावना घटकर 43.9 फीसदी रह गई, जबकि दरों को बनाए रखने की संभावना 56.1 फीसदी हो गई. इसी प्रतिक्रिया में स्पॉट गोल्ड 2.3 फीसदी उछलकर 4,336.02 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचा और सप्ताह के दौरान 7 फीसदी से ज्यादा बढ़ा.  

10 अगस्त को इसलिए बाजार की नजर सिर्फ Gold Price पर नहीं बल्कि डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर भी रहेगी.

अगर डॉलर कमजोर होता है और बॉन्ड यील्ड नीचे रहती है तो सोने को दोहरी मदद मिल सकती है. अगर इसके उलट डॉलर मजबूत होता है और अमेरिकी महंगाई के कारण Fed फिर सख्त रुख का संकेत देता है तो हाल की तेजी में मुनाफावसूली आ सकती है.

चांदी में मामला सोने से ज्यादा पेचीदा है

चांदी को सिर्फ सोने की छोटी बहन समझना इस समय बाजार की सबसे बड़ी भूल हो सकती है. चांदी की कीमत पर निवेश मांग के साथ औद्योगिक मांग का भी असर पड़ता है. यही वजह है कि चांदी तेजी के दौरान सोने से ज्यादा तेज भाग सकती है और गिरावट में ज्यादा तेजी से नीचे भी आ सकती है.

7 अगस्त को चांदी में करीब 3 फीसदी की तेजी के पीछे सिर्फ निवेश मांग नहीं थी. बाजार में भौतिक चांदी की उपलब्धता और औद्योगिक खपत भी महत्वपूर्ण कारक बने हुए हैं. SMC Global Securities की कमोडिटी रिसर्च हेड वंदना भारती के अनुसार औद्योगिक खपत करीब 650 मिलियन औंस सालाना आंकी जाती है, जबकि 67 मिलियन औंस के स्ट्रक्चरल डेफिसिट की बात सामने आई है.  यानी चांदी की कहानी में एक ऐसा हिस्सा है जो सोने में नहीं है. अगर सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे औद्योगिक इस्तेमाल से मांग बनी रहती है तो केवल ब्याज दरों में बदलाव के आधार पर चांदी की पूरी तस्वीर समझना मुश्किल होगा.

10 अगस्त को चांदी के लिए 2.35 लाख की दीवार क्यों अहम?

देव कहते हैं कि 7 अगस्त के बाजार विश्लेषण में MCX चांदी के लिए 2.26 लाख से 2.25 लाख रुपये का सपोर्ट और 2.30 लाख से 2.32 लाख रुपये का शुरुआती रेजिस्टेंस बताया गया था. तकनीकी स्तर पर 2.35 लाख रुपये के आसपास 100-डेमा को महत्वपूर्ण बाधा माना गया है. इसके ऊपर टिकाऊ ब्रेकआउट आने पर तेजी की रफ्तार और बढ़ सकती है. यही 10 अगस्त का एक महत्वपूर्ण यूनिक एंगल बनता है. चांदी का सवाल सिर्फ यह नहीं है कि वह 2.30 लाख पार करती है या नहीं. असली परीक्षा यह होगी कि 2.35 लाख के ऊपर बाजार कितनी देर टिकता है.

अगर भाव केवल कुछ समय के लिए इस स्तर के ऊपर जाता है और फिर नीचे लौट आता है तो इसे तेज उछाल के बाद मुनाफावसूली का संकेत माना जा सकता है. लेकिन अगर कीमत इस स्तर के ऊपर टिकती है और वॉल्यूम तथा अंतरराष्ट्रीय कीमतें भी साथ देती हैं तो चांदी में नई तेजी की जमीन बन सकती है.

भारत में रुपये की चाल भी छुपा हुआ फैक्टर

भारतीय खरीदार के लिए अंतरराष्ट्रीय सोने-चांदी की कीमत पूरी कहानी नहीं बताती. डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल भी घरेलू भाव को प्रभावित करती है.

7 अगस्त के बाजार में एक दिलचस्प बात सामने आई. अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी मजबूत होने के बावजूद MCX चांदी की चाल उतनी तेज नहीं थी. NDTV Profit के मुताबिक भारतीय रुपया करीब 1.5 फीसदी मजबूत हुआ और घरेलू स्पॉट बाजार में डिस्काउंट भी दिखा. इस वजह से घरेलू चांदी की कीमत पर अंतरराष्ट्रीय तेजी का पूरा असर नहीं आया.   यानी 10 अगस्त को अगर अंतरराष्ट्रीय चांदी चढ़ती है लेकिन रुपया मजबूत रहता है तो भारतीय बाजार में तेजी सीमित हो सकती है. वहीं कमजोर रुपया अंतरराष्ट्रीय भाव की तेजी को भारत में और बड़ा बना सकता है. यही वजह है कि भारतीय खरीदार को सिर्फ अंतरराष्ट्रीय Gold Price देखकर दुकान का भाव अनुमानित नहीं करना चाहिए.

तेल और ईरान का मोर्चा क्यों बन सकता है अचानक गेमचेंजर

भू-राजनीति अब भी बुलियन बाजार के लिए बड़ा ट्रिगर है, लेकिन इसका असर हमेशा एक दिशा में नहीं होता. यही बात सोने के मौजूदा बाजार को बाकी सामान्य Safe Haven Rally से अलग बनाती है.रॉयटर्स के मुताबिक मध्य पूर्व में तनाव घटता है तो तेल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है. इससे महंगाई की चिंता घट सकती है और अमेरिकी ब्याज दरों के अनुमान बदल सकते हैं. दूसरी तरफ अगर संघर्ष फिर बढ़ता है या ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा आता है तो सुरक्षित निवेश की मांग अचानक बढ़ सकती है.

7 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय सोने की तेजी में कमजोर तेल कीमतों और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बदले अनुमान की भूमिका रही. उसी समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्ध जल्द समाप्त होने की उम्मीद भी जताई थी.  

इसलिए 10 अगस्त को Middle East की कोई बड़ी खबर सोने और चांदी में अचानक तेज मूवमेंट ला सकती है. यह वह जोखिम है जिसे सामान्य Gold Rate Today वाली खबरें अक्सर सिर्फ एक लाइन में छोड़ देती हैं.

सोने में 1.49 लाख और 1.50 लाख के बीच क्या देखना होगा?

7 अगस्त के उपलब्ध बाजार विश्लेषण में MCX गोल्ड के लिए करीब 1.49 लाख रुपये का सपोर्ट बताया गया था. अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4,220 से 4,180 डॉलर का क्षेत्र सपोर्ट और 4,280 से 4,320 डॉलर का क्षेत्र रेजिस्टेंस बताया गया था.  

अब बाजार के लिए अहम बात यह है कि 1.50 लाख के ऊपर भाव टिकता है या नहीं. 1.50 लाख के ऊपर स्थिरता बनी रहती है और अंतरराष्ट्रीय सोना भी मजबूत रहता है तो तेजी की धारणा मजबूत होगी. लेकिन अगर डॉलर मजबूत होता है, अमेरिकी यील्ड ऊपर जाती है और गोल्ड फिर 1.49 लाख के नीचे फिसलता है तो हाल की तेजी पर सवाल उठ सकते हैं.

यहां खरीदारों के लिए भी सबक है. शादी या त्योहारी खरीद के लिए पूरा सोना एक ही दिन खरीदना बाजार के तेज उतार-चढ़ाव में महंगा पड़ सकता है. कीमत में अस्थिरता बनी रहने पर चरणबद्ध खरीद का तरीका ज्यादा संतुलित हो सकता है.

चांदी का 2.10 लाख वाला बेस क्यों महत्वपूर्ण है

चांदी में लंबी अवधि की कहानी को नजरअंदाज करना भी ठीक नहीं होगा. 7 अगस्त के बाजार विश्लेषण में 2.10 लाख रुपये का क्षेत्र MCX चांदी के लिए महत्वपूर्ण बेस बताया गया था. अगर भौतिक बाजार में टाइट सप्लाई, ETF खरीद और औद्योगिक मांग बनी रहती है तो आने वाले हफ्तों में 2.50 लाख से 2.60 लाख रुपये तक की संभावित चाल का अनुमान भी सामने आया है.  

लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि 2.50 लाख रुपये तय लक्ष्य है. चांदी की अस्थिरता को देखते हुए यह एक संभावित तेजी का परिदृश्य है, गारंटी नहीं.

यही फर्क आम निवेशक के लिए समझना जरूरी है. जब बाजार में तेजी तेज होती है तो लक्ष्य देखकर खरीदारी करना आसान लगता है, लेकिन उसी बाजार में 5 से 10 फीसदी का तेज उतार-चढ़ाव भी असामान्य नहीं माना जाना चाहिए.

सोना और चांदी आखिर इतना उछलते-गिरते क्यों हैं?

बुलियन की कीमत एक ही कारण से नहीं बदलती. एक तरफ अमेरिकी ब्याज दरें हैं, दूसरी तरफ डॉलर, तीसरी तरफ बॉन्ड यील्ड, चौथी तरफ तेल और भू-राजनीतिक जोखिम. इसके ऊपर भारत में रुपया, आयात लागत, स्थानीय मांग, त्योहारी खरीद और घरेलू प्रीमियम अलग असर डालते हैं.

सोने में केंद्रीय बैंकों और निवेशकों की मांग बड़ा आधार बन सकती है, जबकि चांदी में औद्योगिक खपत अतिरिक्त उतार-चढ़ाव पैदा करती है. World Gold Council के जुलाई अपडेट के अनुसार भारत में जून में सोने की कुल उपभोक्ता मांग कमजोर रही थी, लेकिन कीमतों में गिरावट के बाद आभूषण खरीद में सुधार के संकेत मिले. ETF और डिजिटल गोल्ड की मांग मजबूत हुई, जबकि बार और कॉइन की मांग ठंडी रही. अगस्त से त्योहारी सीजन की तैयारी के लिए रिटेल ऑर्डर बुकिंग की बात भी सामने आई थी. यानी भारत में अगला चरण केवल निवेशकों की खरीद से नहीं चलेगा. अगर त्योहारी मांग वापस आती है तो ऊंचे भाव के बावजूद घरेलू मांग बाजार को नया सहारा दे सकती है.

10 अगस्त को किन संकेतों पर सबसे पहले नजर रखें

सबसे पहले अमेरिकी डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की दिशा देखनी होगी. इसके बाद अंतरराष्ट्रीय गोल्ड और सिल्वर की कीमतों का रुख महत्वपूर्ण होगा. तीसरे नंबर पर रुपये की चाल आएगी, क्योंकि भारतीय बाजार में इसका सीधा असर पड़ता है. चौथा संकेत मध्य पूर्व और ईरान से जुड़ी कोई नई खबर होगी. पांचवां संकेत चांदी की भौतिक उपलब्धता और औद्योगिक मांग रहेगा. छठा संकेत भारतीय त्योहार और शादी की मांग का लौटना होगा.और सबसे महत्वपूर्ण संकेत यह रहेगा कि 7 अगस्त की तेज तेजी के बाद सोमवार को बाजार ऊंचे स्तर को बनाए रखता है या नहीं.

10 अगस्त के लिए संभावित तस्वीर क्या बनती है

मौजूदा आंकड़ों को देखते हुए सोने का रुख फिलहाल सकारात्मक लेकिन बेहद संवेदनशील नजर आता है. 1.50 लाख रुपये के आसपास का क्षेत्र मनोवैज्ञानिक स्तर बन चुका है. इसके ऊपर टिकाव तेजी को मजबूत कर सकता है, जबकि 1.49 लाख के आसपास कमजोरी बाजार में मुनाफावसूली का संकेत दे सकती है. यह बाजार-परिदृश्य है, निश्चित भविष्यवाणी नहीं.

चांदी में तेजी की कहानी अपेक्षाकृत ज्यादा आक्रामक है. 2.32 लाख के ऊपर की मजबूती और 2.35 लाख के तकनीकी स्तर की परीक्षा आगे की दिशा तय करने में अहम होगी. इसके ऊपर टिकाऊ ब्रेकआउट आने पर तेजी तेज हो सकती है, जबकि असफल ब्रेकआउट मुनाफावसूली बढ़ा सकता है. उपलब्ध विश्लेषण में 2.25-2.26 लाख का क्षेत्र निकट सपोर्ट और 2.10 लाख का क्षेत्र बड़ा आधार माना गया है. 

आम खरीदार के लिए इसका मतलब

अगर आपको शादी, त्योहारी खरीद या लंबे समय के लिए सोना लेना है तो सिर्फ सोमवार के भाव को देखकर पूरा पैसा लगाने के बजाय खरीद को हिस्सों में बांटना ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है. खासकर तब, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक ही आर्थिक आंकड़ा कीमत को कई हजार रुपये तक हिला सकता है.

निवेशक के लिए दूसरी अहम बात यह है कि MCX का भाव और ज्वेलर का अंतिम बिल एक जैसा नहीं होता. IBJA के प्रकाशित रेट भी 3 फीसदी GST और मेकिंग चार्ज के बिना होते हैं. इसलिए दुकान पर मिलने वाले अंतिम भाव की तुलना केवल स्क्रीन पर दिख रहे MCX भाव से करना सही तस्वीर नहीं देता. 

10 अगस्त का बुलियन बाजार सिर्फ सोने के 1.50 लाख और चांदी के 2.30 लाख रुपये पार करने की कहानी नहीं है. असली लड़ाई डॉलर, अमेरिकी ब्याज दरों, रुपये, तेल, ईरान और चांदी की भौतिक सप्लाई के बीच चल रही है.

देवकृष्ण पांडेय के मार्केट एंगल को ध्यान में रखते हुए सबसे अहम बात यही निकलती है कि इस समय तेजी को देखकर दौड़कर खरीदना और गिरावट देखकर घबरा जाना दोनों ही जोखिम भरे हो सकते हैं. अगले कदम का संकेत कीमत से ज्यादा उन आर्थिक संकेतकों से मिलेगा जो कीमत के पीछे काम कर रहे हैं.

अगर सोमवार को सोना 1.50 लाख के ऊपर टिकता है और चांदी 2.35 लाख की तकनीकी बाधा को मजबूती से पार करती है तो बुलियन बाजार में तेजी की अगली सीढ़ी बन सकती है. लेकिन डॉलर और अमेरिकी यील्ड अचानक मजबूत हुए तो यही बाजार मुनाफावसूली का भी गवाह बन सकता है.

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