बिजनेस
कच्चे तेल की कीमत 97 डॉलर के करीब पहुंचने और मिडिल ईस्ट तनाव बढ़ने से 7 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार दबाव में आ गया. दोपहर 12 बजे सेंसेक्स 412.17 अंक और निफ्टी 126.60 अंक टूट चुका था. इंफोसिस और टेक महिंद्रा सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में रहे.
शेयर बाजार खुलते ही निवेशकों को लगा था कि सोमवार की शुरुआत संभली हुई रह सकती है, लेकिन कुछ ही घंटों में तस्वीर बदल गई. सेंसेक्स 400 अंक से ज्यादा टूट गया और निफ्टी 23780 के अहम स्तर के नीचे फिसल गया.
सबसे बड़ा झटका कच्चे तेल से आया है. ब्रेंट क्रूड ऑयल फ्यूचर्स 0.5 फीसदी बढ़कर 96.8 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और मिडिल ईस्ट के दूसरे इलाकों में अमेरिका और ईरान के बीच हमलों से सप्लाई बाधित होने की चिंता बढ़ी है.
द हिंदू बिजनेसलाइन के 7 सितंबर के लाइव मार्केट अपडेट के मुताबिक, दोपहर 12 बजे सेंसेक्स 412.17 अंक यानी 0.54 फीसदी गिरकर 76103.26 पर आ गया था. निफ्टी 50 भी 126.60 अंक यानी 0.53 फीसदी की गिरावट के साथ 23771.10 पर कारोबार कर रहा था.
कच्चा तेल भारतीय बाजार के लिए सिर्फ पेट्रोल और डीजल की कीमत का मामला नहीं है. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयातित तेल पर काफी निर्भर है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होने का असर देश की कंपनियों की लागत, महंगाई और आगे ब्याज दरों की उम्मीद तक पहुंच सकता है.
सोमवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल फ्यूचर्स 96.8 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा. अमेरिका और ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और अन्य इलाकों में जहाजों को लेकर हुए हमलों ने लंबे समय तक सप्लाई बाधित रहने की आशंका बढ़ाई है.
आम निवेशक के लिए इसका मतलब यह है कि अगर तेल की कीमतें ज्यादा समय तक ऊंची रहती हैं तो बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है. पेट्रोल-डीजल और ट्रांसपोर्ट से जुड़ी लागत भी दबाव में आ सकती है.
शुक्रवार को सेंसेक्स 76515.43 पर बंद हुआ था. सोमवार को यह 76446.05 पर खुला और सुबह 9.23 बजे तक 76400.06 पर आ गया था. यानी उस समय 115.37 अंक या 0.15 फीसदी की गिरावट थी.
निफ्टी 50 शुक्रवार को 23897.70 पर बंद हुआ था. सोमवार को यह 23883.15 पर खुला और 9.23 बजे तक 23857.65 पर पहुंच गया. यह 40.05 अंक या 0.17 फीसदी नीचे था.लेकिन दोपहर तक गिरावट गहरी हो गई. 12 बजे सेंसेक्स 412.17 अंक टूटकर 76103.26 पर और निफ्टी 126.60 अंक गिरकर 23771.10 पर पहुंच गया.
यहां निवेशकों के लिए सबसे अहम लेवल 23780 है. टेक्निकल संकेतों के मुताबिक यह निफ्टी का तत्काल सपोर्ट है. इसके नीचे टिकने पर इंडेक्स 23700 तक फिसल सकता है.
निफ्टी 50 में सोमवार को इंफोसिस सबसे ज्यादा दबाव में रहा. इसके शेयर में 3.48 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई. टेक महिंद्रा 2.71 फीसदी, ट्रेंट 2.31 फीसदी, एचसीएल टेक 1.93 फीसदी और टाटा स्टील 1.74 फीसदी नीचे रहे.
दूसरी तरफ कुछ शेयरों ने गिरावट को सीमित करने की कोशिश की. अपोलो हॉस्पिटल्स 1.01 फीसदी, मारुति 0.64 फीसदी, टाटा कंज्यूमर 0.58 फीसदी, पावर ग्रिड 0.56 फीसदी और मैक्स हेल्थ 0.53 फीसदी ऊपर रहे.
इसका सीधा मतलब यह है कि बाजार में बिकवाली व्यापक थी, लेकिन हर सेक्टर एक जैसी हालत में नहीं था. आईटी शेयरों पर खास दबाव दिखा, जबकि कुछ डिफेंसिव और दूसरे चुनिंदा शेयरों में खरीदारी नजर आई.
भारतीय बाजार पर सिर्फ कच्चे तेल का दबाव नहीं है. अमेरिका की उम्मीद से बेहतर जॉब्स रिपोर्ट ने फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दर बढ़ाए जाने की आशंका फिर जगा दी है.
अगर अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहती हैं या बढ़ने की उम्मीद मजबूत होती है तो ग्लोबल निवेशकों के लिए अमेरिकी एसेट्स ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं. ऐसे माहौल में उभरते बाजारों से पैसा निकलने का डर बढ़ सकता है.
यही वजह है कि सोमवार की गिरावट को केवल घरेलू शेयरों की कमजोरी मानना सही नहीं होगा. क्रूड, मिडिल ईस्ट तनाव और अमेरिकी ब्याज दरों की चिंता एक साथ बाजार पर असर डाल रही हैं.
आज के कारोबार में निफ्टी के लिए 23780 का स्तर बेहद महत्वपूर्ण है. इसके नीचे कमजोरी बनी रहती है तो अगला सपोर्ट 23700 के आसपास देखा जा रहा है.
ऊपर की तरफ 23880 से 23915 का जोन तत्काल रेजिस्टेंस है. इसके बाद 23950 अहम स्तर है. निफ्टी को राहत की स्थिति में आने के लिए 23950 के ऊपर निर्णायक बढ़त बनानी होगी.
सितंबर निफ्टी फ्यूचर्स 23904 पर कारोबार कर रहा था और इसमें 0.58 फीसदी की गिरावट थी. फ्यूचर्स के लिए 23950 से 23970 का क्षेत्र रेजिस्टेंस माना जा रहा है. नीचे 23820 से 23800 का स्तर सपोर्ट है. 23800 के नीचे जाने पर 23700 तक गिरावट बढ़ सकती है.
24000 से 24050 का क्षेत्र भी बड़ा रेजिस्टेंस जोन है. फ्यूचर्स में पॉजिटिव रुख के लिए 24050 के ऊपर टिकाऊ बढ़त जरूरी मानी जा रही है.
शेयर बाजार की यह गिरावट सिर्फ स्क्रीन पर लाल नंबर देखने की कहानी नहीं है. कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी रहती है तो इसका असर अर्थव्यवस्था की कई परतों पर पड़ सकता है.
महंगा क्रूड कंपनियों की परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ा सकता है. इससे कुछ कंपनियों के मुनाफे पर दबाव आ सकता है. दूसरी तरफ महंगाई बढ़ने की स्थिति में ब्याज दरों को लेकर भी बाजार की चिंता बढ़ सकती है.
इसलिए इस समय केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि सेंसेक्स कितने अंक गिरा. निवेशकों को यह भी देखना होगा कि क्रूड 97 डॉलर के आसपास कितने समय तक रहता है, मिडिल ईस्ट तनाव कितना बढ़ता है और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर आगे क्या संकेत मिलते हैं.
आज की गिरावट से एक बात साफ है कि बाजार इस समय कई ग्लोबल संकेतों के बीच फंसा हुआ है. ऐसे में जल्दबाजी में खरीदारी करने के बजाय अपने निवेश का रिस्क, शेयर की क्वालिटी और बाजार के अहम लेवल देखना ज्यादा जरूरी हो जाता है.
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