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NSE IPO listing date 2026: सेबी ने 4 सितंबर को एनएसई के करीब ₹30,000 करोड़ के आईपीओ को मंजूरी दी है. इश्यू में 14.89 करोड़ शेयर ऑफर फॉर सेल के तहत आएंगे. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सितंबर में प्राइस बैंड और लिस्टिंग की घोषणा हो सकती है, जबकि जीएमपी ₹200 बताया गया है.
जिस एनएसई पर आप रोज शेयर खरीदते और बेचते हैं, अब उसी एक्सचेंज में हिस्सेदारी लेने का रास्ता खुल गया है. बाजार नियामक सेबी ने 4 सितंबर 2026 को बहुप्रतीक्षित एनएसई आईपीओ को मंजूरी दे दी है. करीब ₹30,000 करोड़ का यह इश्यू भारत के सबसे बड़े आईपीओ का नया रेकॉर्ड बना सकता है.
लेकिन कहानी सिर्फ रेकॉर्ड की नहीं है. ग्रे मार्केट में एनएसई आईपीओ का जीएमपी करीब ₹200 बताया जा रहा है, जिससे निवेशकों की दिलचस्पी साफ दिखाई दे रही है. हालांकि जीएमपी अनऑफिशियल होता है और इसे लिस्टिंग गेन की गारंटी नहीं माना जा सकता.
एनएसई ने 17 जून 2026 को सेबी के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी डीआरएचपी दाखिल किया था. अब सेबी की फाइनल ऑब्जर्वेशन मिलने के बाद एक्सचेंज के लंबे समय से अटके आईपीओ की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है.प्रस्तावित इश्यू में 14,89,05,525 शेयर यानी करीब 14.89 करोड़ शेयर शामिल हैं. इसकी कुल वैल्यू करीब ₹30,000 करोड़ आंकी जा रही है. अगर यह आकार बरकरार रहता है तो एनएसई भारत का सबसे बड़ा आईपीओ बन सकता है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एनएसई 11 सितंबर के आसपास आईपीओ का प्राइस बैंड घोषित कर सकता है और 25 सितंबर के आसपास शेयर लिस्ट होने की उम्मीद है. एक अन्य रिपोर्ट में 15 सितंबर से सब्सक्रिप्शन शुरू होने की संभावना बताई गई है. यानी अभी इन तारीखों को संभावित समझना चाहिए, फाइनल तारीख नहीं.
एनएसई के इस आईपीओ की एक अहम बात यह है कि यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस है. इसका सीधा मतलब है कि एनएसई खुद नए शेयर जारी करके पैसा नहीं जुटाएगा. मौजूदा शेयरहोल्डर अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचेंगे और आईपीओ से मिलने वाली रकम उन शेयर बेचने वालों को जाएगी.
इस ओएफएस में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एमएस स्ट्रेटेजिक मॉरीशस, कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड, अरंडा इन्वेस्टमेंट्स मॉरीशस पीटीई, बैंक ऑफ बड़ौदा, स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी जैसे शेयरहोल्डर शामिल हैं.
यानी आईपीओ से मिलने वाला लगभग ₹30,000 करोड़ सीधे एनएसई के कारोबार में नई पूंजी के तौर पर नहीं जाएगा. निवेशकों के लिए यह अंतर समझना काफी जरुरी है.
अगर एनएसई का इश्यू करीब ₹30,000 करोड़ का रहता है तो यह भारत के अब तक के सबसे बड़े आईपीओ का रेकॉर्ड तोड़ सकता है.
अभी भारत में सबसे बड़े आईपीओ का रेकॉर्ड हुंडई मोटर इंडिया के नाम है. कंपनी ने अक्टूबर 2024 में करीब ₹27,870 करोड़ जुटाए थे. इससे पहले मई 2022 में एलआईसी का ₹20,557 करोड़ का आईपीओ सबसे बड़ा था.
यानी एनएसई का इश्यू सिर्फ एक और आईपीओ नहीं होगा. इसका आकार इतना बड़ा है कि यह भारतीय प्राइमरी मार्केट में एक नया बेंचमार्क बना सकता है.
एनएसई आईपीओ को लेकर ग्रे मार्केट में अभी करीब ₹200 का जीएमपी बताया जा रहा है. इसका मतलब यह है कि अनऑफिशियल मार्केट में शेयर को इश्यू प्राइस से करीब ₹200 ऊपर के प्रीमियम पर लेकर चर्चा हो रही है.
लेकिन यहां निवेशकों को सबसे ज्यादा सावधानी बरतनी होगी. अभी फाइनल प्राइस बैंड घोषित नहीं हुआ है. इसलिए केवल ₹200 जीएमपी देखकर संभावित लिस्टिंग प्राइस या मुनाफे का हिसाब लगाना सही नहीं होगा.
जीएमपी बाजार की आधिकारिक कीमत नहीं है और आईपीओ खुलने से पहले इसमें बड़ा बदलाव भी हो सकता है. यही वजह है कि एनएसई आईपीओ में सिर्फ लिस्टिंग गेन की उम्मीद के बजाय कंपनी के वैल्यूएशन, कमाई और भविष्य के कारोबार को भी देखना जरुरी होगा.
एनएसई का आकर्षण सिर्फ उसके ब्रांड और शेयर बाजार में दबदबे की वजह से नहीं है. कंपनी के हालिया वित्तीय आंकड़े भी इस आईपीओ की कहानी का अहम हिस्सा हैं.
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक जून 2026 तिमाही यानी क्यू1 एफवाई27 में एनएसई का नेट प्रॉफिट ₹3,120 करोड़ रहा, जबकि एक साल पहले इसी तिमाही में यह ₹2,923 करोड़ था. इस दौरान ऑपरेशंस से रेवेन्यू ₹4,560 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी तिमाही के ₹4,032 करोड़ से ज्यादा है. हालांकि तिमाही आधार पर रेवेन्यू में 8 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई.
दूसरी तरफ, वित्त वर्ष 2026 में एनएसई का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स ₹10,302 करोड़ रहा, जो वित्त वर्ष 2025 के ₹12,188 करोड़ से कम था. कुल इनकम भी ₹19,177 करोड़ से घटकर ₹18,713 करोड़ रही.
यही वह एंगल है जिसे सिर्फ जीएमपी देखकर आईपीओ में पैसा लगाने वाला निवेशक मिस कर सकता है. कंपनी मजबूत है, लेकिन हर मजबूत कंपनी का शेयर किसी भी कीमत पर अच्छा निवेश हो, यह जरूरी नहीं.
एनएसई भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है और वित्त वर्ष 2001 से कैश मार्केट के कुल कारोबार तथा इक्विटी डेरिवेटिव्स में प्रमुख स्थान पर रहा है. ऐसे में इसकी लिस्टिंग से आम निवेशकों को पहली बार एक्सचेंज के कारोबार में सीधे हिस्सेदारी लेने का मौका मिल सकता है.
एक और दिलचस्प पहलू यह है कि एनएसई के साथ जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ भी बाजार में आने की तैयारी में है. सेबी ने जियो प्लेटफॉर्म्स के करीब ₹37,700 करोड़ के मेगा आईपीओ को भी मंजूरी दी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक जियो का इश्यू अक्टूबर के आखिर या नवंबर की शुरुआत तक बाजार में आ सकता है. इसका मतलब है कि 2026 के आखिरी महीनों में भारतीय शेयर बाजार में बड़े आईपीओ की वजह से निवेशकों के सामने काफी बड़ा प्राइमरी मार्केट एक्टिविटी देखने को मिल सकता है.
एनएसई आईपीओ की मंजूरी मिलना निश्चित तौर पर बड़ी खबर है, लेकिन अभी निवेश का फैसला करने की जल्दी नहीं होनी चाहिए. सबसे पहले फाइनल प्राइस बैंड, लॉट साइज, रिटेल निवेशकों के लिए आरक्षण और सब्सक्रिप्शन की आधिकारिक तारीख सामने आने दें.
इसके बाद सबसे अहम सवाल होगा कि करीब ₹30,000 करोड़ के इश्यू पर एनएसई का वैल्यूएशन कितना बैठता है. जीएमपी ₹200 है या नहीं, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह होगा कि आईपीओ की कीमत कंपनी की कमाई और भविष्य की ग्रोथ के मुकाबले कितनी महंगी या सस्ती है.
सीधी बात यह है कि सेबी की मंजूरी ने दरवाजा खोल दिया है, लेकिन निवेशक के लिए असली परीक्षा प्राइस बैंड आने के बाद शुरू होगी. ₹200 का जीएमपी उत्साह बढ़ा सकता है, मगर अंतिम फैसला सिर्फ ग्रे मार्केट के भरोसे करना जोखिम भरा हो सकता है.
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