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Stock Market-Sensex Monday Prediction :10 अगस्त को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत वीकेंड के अमेरिकी Russia sanctions bill के साये में हो सकती है. Nifty का ट्रेंड अभी मजबूत है, लेकिन तेल, रुपया, FII-DII फ्लो, US टैरिफ जोखिम और सेक्टर रोटेशन सोमवार को बाजार की दिशा तय कर सकते हैं.
शेयर बाजार में सोमवार को सिर्फ निफ्टी और सेंसेक्स देखना महंगा पड़ सकता है. पिछला सप्ताह दोनों मजबूत मजबूत बंद हुए, लेकिन शुक्रवार को बाजार में अचानक मजबूती आई. अब सप्ताहांत पर अमेरिका से आया रूस प्रतिबंध बिल इस तस्वीर में एक नया जोखिम जोड़ चुकाया गया है.
यानी 10 अगस्त को सवाल केवल यह नहीं होगा कि बाजार चढ़ेगा या गिरेगा. बड़ा सवाल यह होगा कि अगर निवेशकों के पास दबाव है तो सेक्टरों में पैसा कहां से आ सकता है. ये आम निवेशक के लिए सोमवार की सबसे अहम कहानी है.
इस फ्रेम में देखें तो मार्केट वैल्यूएशन देवकृष्ण पांडे के मार्केट एग्रीमेंट में स्थिर स्थिति में रैपिड का आधार पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन नई खरीदारी के लिए स्टॉक और सेक्टर का चुनाव पहले से ही सबसे महत्वपूर्ण हो गया है.
गुडरिटर्न्स के मुताबिक 10 अगस्त से शुरू होने वाले किसान सप्ताह से पहले बाजार के पास एक सकारात्मक आधार मौजूद है. 3 से 7 अगस्त के हफ्ते में निफ्टी 50 करीब 0.77 फीसदी बेंचमार्क 24,570.65 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 0.52 फीसदी तेजी के साथ 78,499.17 पर रहा. खास बात यह है कि निफ्टी स्मॉलकैप करीब 2.73 फीसदी और मिडकैप करीब 1 फीसदी चढ़ा. दोनों में रिकॉर्ड लेवल भी देखने को मिला.
[एचडीएफसी स्काई के मुताबिक इसका मतलब यह है कि घरेलू निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता अभी पूरी तरह से खराब नहीं हुई है. लेकिन शुक्रवार को बिजनेस की एक चेतावनी भी दे दी गई. दिन के दौरान निजी बैंकिंग और वित्तीय शेयरों पर दबाव रहा, जबकि आईटी और ऑटो ने बाजार को सहारा दिया. एनएसई पर 1,912 शेयर गिरावट में रहे, जबकि 1,790 शेयर बढ़ा. भारत VIX में 12.5 प्रतिशत की उछाल भी आई.
तुलना से 10 अगस्त का पहला अनोखा संकेत. बाजार की दिशा को सिर्फ निफ्टी से जाना अपूर्ण होगा, क्योंकि चौड़ाई और अस्थिरता दोनों बता रहे हैं कि बाजार की दिशा को पहले से तय नहीं किया गया है.
गुडरिटर्न्स की रिपोर्ट कहती है कि तकनीकी चित्रांकन पूरी तरह से मंदी नहीं है. उपलब्ध तकनीकी आकलन के अनुसार निफ्टी के लिए 24,300 का मजबूत समर्थन क्षेत्र और 24,100 का मजबूत समर्थन क्षेत्र है. दूसरी तरफ 24,800 बड़ा प्रतिरोध है. अगर निफ्टी 24,800 के ऊपर टिकता है तो 25,000 की ओर बढ़ने की संभावना मजबूत हो सकती है.
10 अगस्त को तीन स्तरों पर सबसे महत्वपूर्ण असेंबल. 24,800 के ऊपर जनसंख्या वृद्धि का चिन्ह देवी. 24,300 के आस-पास की गिरावट में खरीदारी आती है या नहीं, यह बाजार की ताकत बताती है. वहीं 24,100 क्रिएटर्स पर शॉर्ट टर्म सेंटीमेंट फेल हो सकता है.
इसी संदर्भ में देवकृष्ण पांडे के दस्तावेज़ को देखें ताकि स्थिर बाज़ार में सीधे तेजी या मंदी के दांव से महत्वपूर्ण मूल्य कार्रवाई को देखा जा सके. अगर गिरावट में खरीदारी आती है तो तेजी से संरचना बनी रह सकती है, लेकिन समर्थन में गिरावट पर जोखिम तेजी से बढ़ता है.
रॉयटर्स के अनुसार सोमवार के बाज़ार में सबसे नया और सबसे अलग ट्रिगर अमेरिकी रूस प्रतिबंध बिल है. अमेरिकी सीनेट ने 86-11 वोटों से रूस प्रतिबंध विधेयक पारित किया है. राष्ट्रपति को रूस के बड़े ऊर्जा खरीदारों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रस्ताव है. भारत और चीन संयुक्त राष्ट्र में जिन पर इसका प्रभाव पड़ सकता है. हालाँकि यह प्रभावी रूप से लागू टैरिफ नहीं है और अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का बिल जापान से है. ये ही वस्तु के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. सोमवार को अगर बाजार इस खबर पर चिंतित है तो इसे 100 प्रतिशत टैरिफ लागू होने के रूप में नहीं देखना चाहिए. अभी यह नीतिगत जोखिम है, तत्काल टैरिफ झटका नहीं.
लेकिन बाजार में सबसे पहले कीमत को नुकसान हो सकता है. विशेष रूप से वे मुख्य आकर्षण अमेरिकी बाजार पर बड़ी शुरूआत हो सकते हैं. इसलिए सोमवार को पूरे सूचकांक में गिरावट के बजाय निर्यात-उन्मुख जेबों में भारी तेज अस्थिरता दिखाई दे सकती है. यही इस कहानी का सबसे बड़ा हिडन एंगल है. सोमवार का असर लगभग निफ्टी से अधिक व्यक्तिगत स्टॉक में दिखाई दे रहा है.
भारतीय शेयर बाजार के लिए कच्चा तेल एक बार फिर महत्वपूर्ण परिवर्तनशील बन गया है. शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 83 डॉलर प्रति डॉलर के ऊपर बना था. तेल की कम कीमत भारत के लिए चिंता का विषय है क्योंकि इससे आयात बिल, मुद्रास्फीति और चालू खाते पर दबाव बढ़ सकता है. एचडीएफसी स्काई के मुताबिक अगर सप्ताहांत की भूराजनीतिक खबरों के बाद कच्चे तेल में तेजी से पकड़ बनी रहती है तो इसका असर रुपये से लेकर कॉर्पोरेट मार्जिन तक दिखाई दे सकता है.
तेल की कीमत सबसे पहले संयुक्त राष्ट्र की नजर में आई है, जहां ईंधन या आयातित कच्चे माल की कीमत बड़ी है. विमानन, पेंट, रसायन और कुछ उपभोक्ता-सामना वाले व्यवसायों में मार्जिन दबाव बढ़ सकता है. दूसरी तरफ तेल से जुड़ी कंपनियों पर अलग-अलग असर हो सकता है, इसलिए पूरे ऊर्जा क्षेत्र को एक जैसा महसूस करना सही नहीं होगा. निवेशक के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि सोमवार को कच्चे तेल की शुरुआती प्रतिक्रिया देखे बिना सिर्फ इंडेक्स देखकर ट्रेड करने से जोखिम बढ़ सकता है.
कमोडिटी और मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय कहते हैं कि पिछले सप्ताह संस्थागत प्रवाह ने बाजार को एक महत्वपूर्ण सहारा दिया. मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों ने करीब 2,888 करोड़ रुपये की खरीदारी की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब 7,767 करोड़ रुपये का निवेश किया. यह आंकड़ा इसलिए अहम है क्योंकि अगर सोमवार को भू-राजनीतिक दबाव के बावजूद डीआईआई खरीदारी जारी रहती है तो बाजार में गिरावट सीमित रह सकती है. इसके उलट अगर टैरिफ जोखिम के बाद एफआईआई तेजी से बिक रही है और डीआईआई समर्थन जारी है तो 24,300 का समर्थन सबसे महत्वपूर्ण है.
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