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नेहरू, इंदिरा, नरसिम्हा राव से लेकर मोदी तक राहुल बजाज ने प्रत्येक राजनेता की सरकार की मुख्यता से आलोचना की है.
डीएनए हिंदी: भारतीय दोपहिया मार्केट के स्टार बिजनेसमैन माने जाने वाले बजाज समूह (Bajaj Group) के संस्थापक राहुल बजाज (Rahul Bajaj) का 83 वर्ष की उम्र में पुणे में दिन हो गया है. उन्हें आम आदमी बजाज के पहले स्कूटर चेतक (Chetak) के कारण शायद ही कभी भूल पाएगा जो कि 'हमारा बजाज’ कैंपेन से सबके दिल में जगह बना चुके थे लेकिन उनकी एक आदत यह भी थी कि वो एक मुखर शख्सियत थे और राजनेताओं की भी खुलकर आलोचना करते थे.
राहुल बजाज के परिवार के पूर्व पीएम पंडित जवाहरलाल नेहरू से अच्छे संबंध थे और गांधी जमनालाल को उनका पांचवा पुत्र तक कहते थे. एक कार्यक्रम के दौरान राहुल बजाज ने बताया था कि उनका नामकरण पूर्व पीएम नेहरू ने ही किया था. यह दर्शाता है कि उनकी गांधी परिवार से भी करीबियां थीं लेकिन यह उन पर भारी भी पड़ा.
दरअसल, वीके कृष्ण मेनन नेहरू के करीबी थे और यह माना जाता था कि मेनन का विरोध करने वाला नेहरू का भी विरोधी है. उस दौरान वीके कृष्ण मेनन को मुंबई से प्रत्याशी बनाया गया थो राहुल बजाज के चाचा कृष्णलाल ने इसका विरोध किया था लेकिन यह विरोध बजाज परिवार को भारी पड़ा था. 1975 से लागू एमरजेंसी के दौरान राहुल बजाज के परिवार को भी परेशान किया गया था. इसकी वजह राहुल के पिता कमलनयन भी थे क्योंकि इंदिरा गांधी की नजरों में वो खटकते थे.
इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) और संजय गांधी (Sanjay Gandhi) जैसे कद्दावर नेताओं के सत्ता में होने के दौरान उनके खिलाफ बोलना दर्शाता है कि बजाज परिवार कभी भी सत्ता के डर चुप नहीं रहा है. ये राहुल बजाज ही थे जिन्होंने साल 2013 में यूपीए सरकार पर भारतीय अर्थव्यवस्था से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया था तो वहीं 2016 में मोदी सरकार (Modi Government) द्वारा की गई नोटबंदी का विरोध करते हुए कहा था कि इसके परिणाम बुरे होंगे. राहुल बजाज ने ही नरसिम्हा राव की सरकार की उदारीकरण की नीतियों का विरोध किया था.
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राहुल बजाज उन चंद उद्योगपतियों में से थे जिन्होंने सत्ता का विरोध करने में कभी हिचक नहीं दिखाई और ना ही किसी सरकार की आलोचना पार्टी देखकर की. यही कारण है कि उनकी पहचान अमर रहेगी.
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