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ऑनलाइन गेमिंग बिल राज्यसभा में पास हो चुका है और सभी कंपनियों ने अपनी रियल मनी गेमिंग सेवाएं बंद कर दी हैं. जिन यूज़र्स ने पहले ही पैसे जमा कर दिए हैं, क्या वे अपना पैसा निकाल पाएंगे? चलिए जानें.
क्या आपने कभी सोचा है कि दोस्तों के साथ मोबाइल पर लूडो, क्विज़ या फैंटेसी क्रिकेट खिलाते-खिलाते ये कंपनियां इतनी बड़ी कैसे हो गईं? करोड़ों लोग रोज़ाना ऐसे गेम खेलते हैं और पैसे लगाकर जीतने की उम्मीद भी रखते हैं. कुछ लोग जीतते हैं और लाखों हार जाते हैं. इसी तरह कंपनियां पैसा कमा रही हैं. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. सरकार ने एक नया कानून पारित किया है, जो पैसों के लिए खेले जाने वाले ऑनलाइन गेम्स पर प्रतिबंध लगाता है. इस फैसले का असर देश की बड़ी गेमिंग कंपनियों पर पड़ा है.
मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में ड्रीम11 की मूल कंपनी ड्रीम स्पोर्ट्स, गेम्सक्राफ्ट, मोबाइल प्रीमियर लीग (एमपीएल), ज़ूपी और प्रोबो जैसी प्रमुख ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों ने हाल ही में अपने उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध रियल मनी गेमिंग को बंद करना शुरू कर दिया है. यह कदम संसद में ऑनलाइन गेमिंग विधेयक 2025 के पारित होने के बाद उठाया गया है. इस कानून के अनुसार, अब कोई भी ऐसा खेल जिसमें खिलाड़ी पैसा जमा करता है और जीतने की उम्मीद करता है, अवैध माना जाएगा.
किस कंपनी ने कौन सी सेवाएं बंद कीं?
ड्रीम स्पोर्ट्स ने अपने नए ऐप्स ड्रीम पिक्स और ड्रीम प्ले पर चल रहे सभी पे-टू-प्ले टूर्नामेंट बंद कर दिए हैं. कंपनी ने कहा है कि सभी खिलाड़ियों का पैसा सुरक्षित है और ड्रीम 11 ऐप से कभी भी निकाला जा सकता है. आने वाले दिनों में यह प्रतिबंध मुख्य ड्रीम 11 ऐप पर भी लागू हो सकता है. गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2023 में कंपनी ने 188 करोड़ रुपये का मुनाफा और 6,384 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया था.
एमपीएल ने सभी कैश गेम्स भी बंद कर दिए हैं. दरअसल, जिन खिलाड़ियों के खाते में बैलेंस है, वे उसे आसानी से निकाल सकते हैं. कंपनी अब पूरी तरह से मुफ़्त गेमिंग अनुभव पर ध्यान केंद्रित करेगी. एमपीएल में क्विज़, पज़ल और बोर्ड गेम्स सहित 60 से ज़्यादा गेम हैं. कंपनी ने कहा कि उसका लक्ष्य अभी भी दुनिया का सबसे बड़ा "फ्री-टू-प्ले" गेमिंग प्लेटफ़ॉर्म बनना है.
गेमक्राफ्ट ने रमीकल्चर जैसे अपने रमी ऐप्स पर ऐड कैश और गेमप्ले सेवाएं भी बंद कर दी हैं. कंपनी ने साफ़ तौर पर कहा है कि खिलाड़ियों का पैसा पूरी तरह सुरक्षित है और उसे निकाला जा सकता है. कंपनी ने वित्त वर्ष 2024 में 947 करोड़ रुपये का मुनाफ़ा कमाया था.
ज़ूपी ने यह भी घोषणा की है कि वह 21 अगस्त से अपने पेड गेम्स बंद कर देगी, लेकिन लूडो सुप्रीम, स्नेक्स एंड लैडर्स और ट्रम्प कार्ड मेनिया जैसे उसके मुफ़्त गेम पहले की तरह चलते रहेंगे. कंपनी के 15 करोड़ से ज़्यादा यूज़र्स हैं, जो अब सिर्फ़ मुफ़्त गेम्स का ही आनंद ले पाएंगे.
प्रोबो ने भी अपने रियल मनी गेमिंग ऑपरेशन को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है. कंपनी ने कहा कि वह सरकार के फैसले का सम्मान करती है और भविष्य में भारत से नए इनोवेशन को दुनिया के सामने लाने के लिए काम करती रहेगी.
नए कानून का उल्लंघन करने पर तीन साल की जेल या एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. गौरतलब है कि रियल मनी गेमिंग इंडस्ट्री ने वित्त वर्ष 2024 में 2.4 अरब डॉलर की कमाई की, जो भारत के पूरे गेमिंग सेक्टर के 3.8 अरब डॉलर के राजस्व का एक बड़ा हिस्सा है.