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एनएसई के आईपीओ का प्राइस बैंड 1,700 से 1,785 रुपये प्रति शेयर तय हुआ है. 17 सितंबर से सब्सक्रिप्शन खुलेगा और 21 सितंबर को बंद होगा. एक लॉट में 8 शेयर होंगे, यानी अपर प्राइस पर न्यूनतम बोली 14,280 रुपये की होगी.
एनएसई के आईपीओ में पैसा लगाने का मौका अब तारीख और कीमत दोनों के साथ सामने आ गया है. लेकिन यहां सबसे अहम सवाल सिर्फ यह नहीं है कि शेयर कितने रुपये में मिलेगा, बल्कि यह भी है कि निवेशक को न्यूनतम कितनी रकम लगानी होगी और आईपीओ से कंपनी को कितना पैसा मिलेगा.
11 सितंबर को सामने आई जानकारी के मुताबिक एनएसई के आईपीओ का प्राइस बैंड 1,700 से 1,785 रुपये प्रति इक्विटी शेयर रखा गया है. सब्सक्रिप्शन 17 सितंबर को खुलेगा और 21 सितंबर को बंद होगा. एंकर निवेशकों के लिए अलॉटमेंट 16 सितंबर को होगा.
एनएसई आईपीओ में एक लॉट 8 इक्विटी शेयरों का होगा. इसके बाद निवेशक 8 शेयरों के गुणक में बोली लगा सकेंगे. अगर कोई निवेशक अपर प्राइस बैंड यानी 1,785 रुपये पर न्यूनतम एक लॉट के लिए आवेदन करता है, तो उसकी बोली रकम 14,280 रुपये होगी.
वहीं 1,700 रुपये के निचले प्राइस बैंड पर यही न्यूनतम लॉट 13,600 रुपये का पड़ेगा. इसका मतलब यह है कि रिटेल निवेशक को आवेदन से पहले कम से कम इतनी रकम अपने बैंक खाते में उपलब्ध रखनी होगी, हालांकि वास्तविक राशि अलॉटमेंट और आवेदन के तरीके पर निर्भर करेगी.
यही वह हिस्सा है जो आम निवेशक के लिए सबसे ज्यादा काम का है. सिर्फ 1,785 रुपये प्रति शेयर देखकर आईपीओ सस्ता या महंगा मान लेना ठीक नहीं होगा. एक लॉट में 8 शेयर होने की वजह से वास्तविक आवेदन राशि करीब 14 हजार रुपये से शुरू होती है.
एनएसई आईपीओ में एक शेयर का प्राइस बैंड 1,700 से 1,785 रुपये तय किया गया है और एक लॉट में 8 शेयर होंगे.
1,700 रुपये × 8 शेयर = 13,600 रुपये
1,785 रुपये × 8 शेयर = 14,280 रुपये
यानी एक लॉट के लिए निवेशक को प्राइस बैंड के हिसाब से 13,600 रुपये से 14,280 रुपये तक लगाने होंगे.
आईपीओ में सभी निवेशकों के लिए एक जैसा हिस्सा नहीं रखा गया है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स यानी क्यूआईबी के लिए अधिकतम 50 फीसदी शेयर रिजर्व हैं.
नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स यानी एनआईआई के लिए कम से कम 15 फीसदी हिस्सा रखा गया है. वहीं रिटेल निवेशकों के लिए कम से कम 35 फीसदी ऑफर रिजर्व है.
आम निवेशक के नजरिए से रिटेल कोटे का 35 फीसदी से कम न होना अहम है, क्योंकि इसी हिस्से में छोटे व्यक्तिगत निवेशक आवेदन करते हैं. हालांकि अंतिम अलॉटमेंट इस बात पर निर्भर करेगा कि हर कैटेगरी में आईपीओ को कितनी सब्सक्रिप्शन मिलती है.
इस आईपीओ की सबसे महत्वपूर्ण और शायद सबसे कम समझी जाने वाली बात यह है कि यह फ्रेश इश्यू नहीं है. पूरा ऑफर मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी बेचने यानी ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस के जरिए है.
एनएसई के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस के मुताबिक ऑफर का आकार घटाकर 12.644 करोड़ शेयर कर दिया गया है. पहले जून 2026 में दाखिल ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी डीआरएचपी में 14.89 करोड़ शेयरों की पेशकश प्रस्तावित थी. इस तरह शेयरों की संख्या करीब 15 फीसदी कम हुई है.
क्योंकि ओएफएस में मिलने वाली रकम कंपनी के कारोबार में नए निवेश के लिए सीधे एनएसई के पास नहीं जाती. ऑफर से जुड़ी लागत घटाने के बाद नेट रकम बेचने वाले शेयरधारकों को मिलेगी.
इसका सीधा मतलब यह है कि इस आईपीओ को केवल कंपनी के लिए पूंजी जुटाने वाला इश्यू समझना सही नहीं होगा. इसका एक बड़ा उद्देश्य मौजूदा शेयरधारकों को अपनी हिस्सेदारी बेचने का रास्ता देना और एनएसई के इक्विटी शेयरों को बीएसई पर लिस्ट कराना है.
यही इस आईपीओ का एक छिपा हुआ एंगल है. निवेशक कंपनी की लिस्टिंग का मौका जरूर देख रहा है, लेकिन आईपीओ से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल एनएसई अपनी बैलेंस शीट मजबूत करने के लिए नहीं कर रहा है.
ओएफएस में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यानी एसबीआई सबसे बड़ा शेयर बेचने वाला शेयरधारक है. एसबीआई 1.59 करोड़ तक इक्विटी शेयर बेच रहा है.
इसके बाद कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड 1.18 करोड़ शेयर, अरांडा इन्वेस्टमेंट्स मॉरीशस 1.12 करोड़ शेयर और एमएस स्ट्रैटेजिक मॉरीशस 1.10 करोड़ शेयर बेचने वाले प्रमुख शेयरधारकों में हैं. न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी 1.05 करोड़ शेयर की पेशकश कर रही है.
10 सितंबर को दाखिल रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस के मुताबिक एसबीआई, एमएस स्ट्रैटेजिक मॉरीशस, बैंक ऑफ बड़ौदा, स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने अपनी प्रस्तावित बिक्री की संख्या घटाई है.
वहीं कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड, अरांडा इन्वेस्टमेंट्स मॉरीशस, न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी की प्रस्तावित शेयर बिक्री में बदलाव नहीं किया गया है.
नेशनल इंश्योरेंस कंपनी अब ओएफएस का हिस्सा नहीं है. दूसरी तरफ एसबीआई कैपिटल मार्केट्स को बेचने वाले शेयरधारकों की सूची में जोड़ा गया है और वह 87.8 लाख इक्विटी शेयर बेच रहा है.
एनएसई आईपीओ में एंकर निवेशकों का अलॉटमेंट 16 सितंबर को होगा. इसके अगले दिन यानी 17 सितंबर को आम निवेशकों के लिए सब्सक्रिप्शन खुलेगा.
21 सितंबर को आईपीओ बंद होगा. इसके बाद 22 सितंबर को शेयरों का बेसिस ऑफ अलॉटमेंट फाइनल होने की संभावित तारीख है.
23 सितंबर को रिफंड शुरू होने और अलॉटी निवेशकों के डीमैट अकाउंट में शेयर क्रेडिट होने की संभावित तारीख दी गई है. इसके बाद 24 सितंबर को एनएसई के शेयरों की बीएसई और एनएसई पर लिस्टिंग होने की संभावना है.
एनएसई जैसे बड़े बाजार संस्थान की लिस्टिंग निश्चित तौर पर बाजार के लिए बड़ा इवेंट है. लेकिन रिटेल निवेशक के लिए असली गणित प्राइस बैंड, लॉट साइज, अलॉटमेंट की संभावना और लिस्टिंग के बाद शेयर के प्रदर्शन से बनेगा.
14,280 रुपये की न्यूनतम बोली अपर बैंड पर देखने में बहुत बड़ी रकम नहीं लगती, लेकिन अगर आईपीओ में जबरदस्त सब्सक्रिप्शन आता है तो सिर्फ पैसा उपलब्ध होना अलॉटमेंट की गारंटी नहीं देता.
इसलिए निवेशक को केवल संभावित लिस्टिंग गेन देखकर फैसला नहीं करना चाहिए. ओएफएस होने का मतलब, शेयर बेचने वाले मौजूदा निवेशक, कंपनी के वैल्यूएशन और लिस्टिंग के बाद बाजार में कीमत का व्यवहार भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा.
एनएसई आईपीओ की खासियत सिर्फ इसका नाम नहीं है. 1,700 से 1,785 रुपये का प्राइस बैंड, 8 शेयरों का लॉट, 12.644 करोड़ शेयरों का ओएफएस और 24 सितंबर की संभावित लिस्टिंग इसे निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण इश्यू बनाते हैं.
सबसे अहम बात यह है कि यह फ्रेश इश्यू नहीं बल्कि पूरी तरह ओएफएस है. इसलिए निवेशक को यह समझना चाहिए कि आईपीओ में लगाई गई रकम का बड़ा हिस्सा कंपनी में नया कारोबार खड़ा करने के लिए नहीं जा रहा है.
आवेदन करने से पहले निवेशक को आईपीओ के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में दिए जोखिम, वैल्यूएशन और अंतिम शर्तों को जरूर पढ़ना चाहिए. केवल बड़े ब्रांड नाम या संभावित लिस्टिंग प्रीमियम के आधार पर फैसला लेना जोखिम भरा हो सकता है.
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