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अगस्त 2026 में यूपीआई ने 24.51 अरब ट्रांजैक्शन का नया रिकॉर्ड बनाया. अब इसी तेज डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में एजेंटिक पेमेंट्स की तैयारी हो रही है, जहां एआई आपकी तय शर्तों के मुताबिक छोटे और रोजमर्रा के पेमेंट खुद कर सकता है.
भारत में डिजिटल पेमेंट की रफ्तार कितनी तेज हो चुकी है, इसका अंदाजा अगस्त के आंकड़ों से लगाया जा सकता है. नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी एनपीसीआई के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में यूपीआई पर 24.51 अरब ट्रांजैक्शन हुए. यह अब तक का सबसे ज्यादा मासिक ट्रांजैक्शन वॉल्यूम है.
जुलाई में यूपीआई पर 23.66 अरब ट्रांजैक्शन हुए थे. यानी सिर्फ एक महीने में ट्रांजैक्शन की संख्या करीब 3.6 फीसदी बढ़ गई. सालाना आधार पर भी अगस्त में वॉल्यूम करीब 22 फीसदी ज्यादा रहा.
इन ट्रांजैक्शन की कुल वैल्यू 29.82 लाख करोड़ रुपये रही. हालांकि, वैल्यू के मामले में जुलाई के 29.88 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले अगस्त में मामूली 0.2 फीसदी गिरावट आई. यानी लोग ज्यादा बार यूपीआई का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन हर ट्रांजैक्शन की औसत रकम बहुत तेजी से नहीं बढ़ रही. बिजनेस स्टैंडर्ड ने एनपीसीआई के आंकड़ों के हवाले से बताया कि अगस्त में औसतन हर दिन करीब 79.1 करोड़ यूपीआई ट्रांजैक्शन हुए.
अभी तक यूपीआई पर पेमेंट करने का मतलब था कि आप खुद क्यूआर कोड स्कैन करें, रकम डालें और पेमेंट को अधिकृत करें. लेकिन अगला बदलाव इससे काफी अलग हो सकता है.
भारत में अब एजेंटिक पेमेंट्स के लिए ऐसी व्यवस्था तैयार करने पर काम हो रहा है जिसमें एआई एजेंट यूजर की पहले से तय की गई शर्तों के आधार पर उसकी ओर से पेमेंट कर सके.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ऐसा फ्रेमवर्क तैयार कर रहा है जिसमें एआई एजेंट को हर छोटे ट्रांजैक्शन के लिए यूजर की अलग से मंजूरी लेने की जरूरत न पड़े. इसके शुरुआती इस्तेमाल में कम रकम वाले और रोजमर्रा के पेमेंट शामिल हो सकते हैं.
यानी कल को आपको सिर्फ इतना कहना पड़ सकता है कि महीने के लिए तय बजट में किराने का सामान खरीदना है. इसके बाद एआई अलग-अलग विकल्प देखकर आपकी तय लिमिट और नियमों के हिसाब से खरीदारी और पेमेंट की प्रक्रिया संभाल सकता है.
यहां सबसे जरूरी बात समझना जरूरी है. एजेंटिक पेमेंट्स की तैयारी का मतलब यह नहीं है कि आज से आपका एआई बिना पूछे बैंक खाते से पैसे निकालकर कुछ भी खरीद सकता है. रॉयटर्स के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था में खर्च की सीमा, नियम आधारित पेमेंट, पहचान की जांच और जिम्मेदारी तय करने जैसे सुरक्षा उपाय शामिल किए जाने की तैयारी है. इसके लिए यूपीआई सर्किल और रिजर्व पे जैसे सिस्टम का इस्तेमाल भी किया जा सकता है.
बिजनेस स्टैंडर्ड ने भी जुलाई में रिपोर्ट किया था कि एनपीसीआई यूनिफाइड एजेंट प्रोटोकॉल यानी यूएपी पर काम कर रहा है, जिसका मकसद भरोसेमंद एआई एजेंट्स को यूपीआई पेमेंट करने में सक्षम बनाना है. इसका सीधा मतलब है कि भविष्य में एआई को खुली छूट देने के बजाय उसे आपकी तय की हुई सीमाओं के अंदर काम करने दिया जाएगा.
एजेंटिक कॉमर्स का सबसे दिलचस्प हिस्सा सिर्फ पेमेंट करना नहीं है. असली बदलाव खरीदारी के फैसले से शुरू हो सकता है. मसलन, आप किसी प्रोडक्ट को खरीदने के लिए एआई को अपना बजट बता सकते हैं. एआई उपलब्ध विकल्पों की तुलना कर सकता है, कीमत और ऑफर देख सकता है और आपकी शर्तों के मुताबिक विकल्प चुनने के बाद पेमेंट की प्रक्रिया पूरी कर सकता है.
यानी आज की ऑनलाइन खरीदारी में इंसान को सर्च से लेकर पेमेंट तक कई कदम खुद करने पड़ते हैं. एजेंटिक सिस्टम में इन कदमों का बड़ा हिस्सा एआई संभाल सकता है.
रॉयटर्स के मुताबिक, शुरुआती फोकस कम वैल्यू और नियमित खरीदारी पर रहने की उम्मीद है. आगे चलकर इसका इस्तेमाल ज्यादा जटिल इंटरैक्शन तक बढ़ सकता है.
इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा समय की बचत हो सकता है. बार-बार होने वाले छोटे पेमेंट, सब्सक्रिप्शन या तय बजट वाली खरीदारी में यूजर को हर बार पूरी प्रक्रिया दोहराने की जरूरत कम हो सकती है.
सोचिए, हर महीने कुछ तय चीजें खरीदनी हैं और आपने एआई को बजट, पसंद और खर्च की अधिकतम सीमा बता रखी है. ऐसी स्थिति में एआई आपके निर्देशों के हिसाब से विकल्प खोजकर खरीदारी कर सकता है.
लेकिन सुविधा के साथ एक नया रिस्क भी आएगा. अगर एआई ने गलत प्रोडक्ट चुना, गलत रकम का पेमेंट किया या किसी धोखाधड़ी वाले सिस्टम के झांसे में आ गया तो जिम्मेदारी किसकी होगी, यह बड़ा सवाल है.
यही वजह है कि एजेंटिक पेमेंट्स में सिर्फ एआई की क्षमता नहीं, बल्कि सुरक्षा और जवाबदेही सबसे अहम मुद्दे होंगे.
यूपीआई की मौजूदा रफ्तार इस बदलाव के लिए बड़ा आधार तैयार कर रही है. अगस्त में 24.51 अरब ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड बताता है कि भारत में डिजिटल पेमेंट पहले ही रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है.
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया पहले से ही पेमेंट इकोसिस्टम में एआई के इस्तेमाल पर काम कर रहा है. एनपीसीआई ने यूपीआई हेल्प असिस्टेंट का पायलट भी शुरू किया था, जिसे डिजिटल पेमेंट से जुड़े सवालों और यूजर सपोर्ट के लिए एआई की मदद से तैयार किया गया है. फरवरी 2026 में एनपीसीआई ने एनवीडिया के साथ मिलकर भारत के पेमेंट इकोसिस्टम के लिए सॉवरेन एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को आगे बढ़ाने की जानकारी भी दी थी. इसका फोकस ट्रस्ट, सिक्योरिटी, डेटा सॉवरेनिटी और बड़े पैमाने पर पेमेंट सिस्टम में एआई के इस्तेमाल पर है.
इसके अलावा पाइन लैब्स ने जून 2026 में पी3पी यानी पाइन लैब्स पेमेंट प्रोटोकॉल लॉन्च किया था. कंपनी के मुताबिक, इसके जरिए एआई एजेंट यूपीआई पेमेंट को मानव प्रमाणीकरण के बिना पूरा कर सकता है.
यानी बदलाव सिर्फ भविष्य की कल्पना नहीं है. इसके शुरुआती प्रयोग और टेक्नोलॉजी अब सामने आने लगी है. हालांकि, आम यूजर के लिए बड़े पैमाने पर एजेंटिक यूपीआई पेमेंट कब और किस नियम के तहत उपलब्ध होगा, यह प्रोटोकॉल और नियामकीय ढांचे पर निर्भर करेगा.
यूपीआई का नया रिकॉर्ड सिर्फ इस बात का संकेत नहीं है कि भारतीय ज्यादा डिजिटल पेमेंट कर रहे हैं. इससे भी बड़ा बदलाव यह है कि पेमेंट सिस्टम अब ऐसे दौर की तरफ बढ़ रहा है जहां यूजर खुद हर क्लिक करने के बजाय एआई को काम सौंप सकता है.
लेकिन भविष्य का सबसे बड़ा सवाल यह नहीं होगा कि एआई पेमेंट कर सकता है या नहीं. सवाल होगा कि उसे कितनी रकम तक, किन दुकानों पर और किन परिस्थितियों में पेमेंट करने की इजाजत दी जाए.
यानी डिजिटल खरीदारी का अगला दौर सुविधा बनाम कंट्रोल की नई बहस लेकर आ सकता है. आपकी तरफ से फैसला एआई करेगा, लेकिन उसकी सीमा तय करने की जिम्मेदारी फिलहाल आपकी ही रहेगी.
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