बिजनेस
Women clothing Exporter success stories: ग्वालियर की इस 'मिस एशिया टूरिज्म यूनिवर्स' का खिताब जीतने के बाद भी अपनी पहचान एक आंत्रप्रेन्योर के रूप में बनाई. घर की बंदिशों में मात्र ₹50 के हैंडमेड कार्ड से शुरू हुआ उनका ब्रांड 'हैंडमेड लव' आज 2 लाख से ज्यादा ग्राहकों तक पहुंच चुका है.
तान्या मित्तल ने साल 2018 में जब 'मिस एशिया टूरिज्म यूनिवर्स' का प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम किया तो हर किसी को लगा कि वह ग्लैमर की दुनिया में ही अपना करियर बनाएंगी. लेकिन ग्वालियर की इस बेटी के सपने सिर्फ रैंप वॉक तक सीमित नहीं थे. तान्या ने ब्यूटी क्वीन के ताज को अपनी असली मंजिल नहीं माना, बल्कि उन्होंने इसे अपने उस बड़े सपने की सीढ़ी बनाया जिसकी शुरुआत उन्होंने कभी अपने घर की एक बंदिशों भरी चारदीवारी से की थी. आज उनका नाम ग्लैमरस जगत के साथ-साथ देश के सफल युवा आंत्रप्रेन्योर्स की लिस्ट में बड़े गर्व से लिया जाता है.
जिस बिजनेस को तान्या ने कभी घर की ऊपरी मंजिल पर छुपकर, मात्र ₹50 से ₹500 के हैंडमेड कार्ड बनाने से शुरू किया था, आज वो एक बहुत बड़ा ब्रांड बन चुका है. उनके इस ब्रांड का नाम 'हैंडमेड लव' है, जो शुरुआत में सिर्फ ग्रीटिंग कार्ड्स और छोटे गिफ्ट्स तक सीमित था. तान्या बताती हैं कि शुरुआत में उनके पास न तो कोई बड़ा बजट था और न ही माता-पिता की इजाजत, लेकिन काम करने की एक ललक थी. आम लोगों के लिए यह कहानी एक सबसे बड़ा उदाहरण है कि अगर आपके काम में दम है, तो छोटी शुरुआत भी आपको एक दिन बहुत बड़े मुकाम पर पहुंचा सकती है.
तान्या ने अपने सपनों को सच करने के लिए महज ₹500 बचाकर आर्ट का कुछ बेसिक सामान खरीदा और एक नया इंस्टाग्राम पेज बनाकर हाथ से बने कार्ड्स की तस्वीरें पोस्ट कीं. किस्मत अच्छी थी कि एक हफ्ते में पहला ऑर्डर मिला, पर कड़वा सच यह रहा कि उन्हें उसकी पेमेंट ही नहीं मिली. इस पहले धोखे से निराश होकर तान्या ने काम बंद करने का मन बना लिया था. तभी रक्षाबंधन के त्योहार पर परिवार से शगुन के रूप में मिले ₹21,000 ने संजीवनी का काम किया. तान्या ने इन पैसों को फालतू खर्च करने के बजाय अपने डूबते सपनों को दोबारा जिंदा करने में लगा दिया.
इस बार तान्या ने अपनी स्ट्रैटेजी बदली. वह ग्वालियर से छुपकर दिल्ली के मशहूर थोक बाजार सदर बाजार पहुंचने लगीं. वहां से वो कुछ अनोखे और नए आइटम्स खरीदतीं और ग्वालियर लाकर बेच देती थीं. जब इस काम से हौसला बढ़ा, तो उन्होंने अपने असली पैशन यानी कपड़ों के बिजनेस में कदम रखा. वह लोकल मार्केट से बेहतरीन फैब्रिक चुनकर लाती थीं, खुद कपड़े डिजाइन करती थीं और सोशल मीडिया के जरिए सीधे ग्राहकों तक पहुंचाती थीं. यह आम लोगों को सिखाता है कि अगर एक आइडिया काम न करे, तो मार्केट की डिमांड देखकर खुद को तुरंत बदल लेना चाहिए.
तान्या की कड़ी मेहनत रंग लाई और देखते ही देखते सोशल मीडिया पर उनके 6.5 लाख फॉलोअर्स हो गए. बिजनेस तेजी से दौड़ रहा था, लेकिन तभी एक रात उनका पूरा इंस्टाग्राम अकाउंट हैक हो गया. वर्षों की मेहनत से खड़ी की गई डिजिटल दुकान एक झटके में गायब हो गई. सबसे बड़ा झटका तब लगा जब वह इसकी शिकायत करने साइबर सेल गईं, लेकिन कंपनी रजिस्टर्ड न होने के कानूनी पेंच के कारण वे कोई आधिकारिक शिकायत भी दर्ज नहीं करा सकीं. यह आज के हर छोटे ऑनलाइन बिजनेस ओनर के लिए सबसे बड़ी सीख है कि काम शुरू करते ही उसका लीगल रजिस्ट्रेशन कराना कितना जरूरी है.
तान्या मित्तल का यह सफर सिर्फ उनकी निजी तरक्की की कहानी नहीं है, बल्कि यह आज के दौर में रोजगार पैदा करने की एक मिसाल भी है. फॉलोअर्स जीरो होने और कानूनी बेबसी के बावजूद तान्या ने रोने में वक्त बर्बाद नहीं किया. उन्होंने इस भारी नुकसान से सबक लिया, अपने काम को पूरी तरह से री-ब्रांड और रजिस्टर किया. आज उनका वही बिजनेस ग्वालियर में 2,500 स्क्वायर फीट के फ्लोर से ऑपरेट होता है और 300 से ज्यादा लोगों को रोजगार दे रहा है. तान्या की यह कहानी साफ करती है कि एक आंत्रप्रेन्योर की असली ताकत उसका सोशल मीडिया पेज या फॉलोअर्स नहीं होते, बल्कि उसका खुद का हुनर और कभी न हार मानने वाला जज्बा होता है.
कड़ी मेहनत, लगातार वीडियो बनाने की स्ट्रैटेजी और ग्राहकों के अटूट भरोसे ने तान्या को दोबारा बिजनेस में खड़ा कर दिया. इस बार उनकी रफ्तार पहले से दोगुनी थी. जिस काम को उन्होंने कभी एक छोटे से कमरे और ए4 साइज पेपर से शुरू किया था, आखिरकार तान्या को अपनी मेहनत के दम पर कपड़ों के बिजनेस के लिए एक बड़ी और खुद की फैक्ट्री मिल गई. अब उन्हें लोकल मार्केट पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं थी, क्योंकि उनके पास खुद का मैन्युफैक्चरिंग यूनिट तैयार हो चुका था.
आज तान्या मित्तल का बिजनेस सिर्फ ग्वालियर या भारत तक सीमित नहीं है. तान्या के मुताबिक, उनका यह फैशन ब्रांड आज दुनिया के 7 अलग-अलग देशों में अपनी साड़ियां एक्सपोर्ट करता है. जो लड़की कभी ₹500 का सामान खरीदने के लिए दिल्ली के सदर बाजार में छुपकर धक्का खाती थी, आज उसके बनाए डिजाइन सात समंदर पार विदेशी बाजारों की शोभा बढ़ा रहे हैं. तान्या की यह सक्सेस स्टोरी हर उस शख्स के लिए एक खुली किताब है जो यह सोचता है कि बुरे वक्त के बाद रास्ते हमेशा के लिए बंद हो जाते हैं.
तान्या मित्तल की यह सक्सेस स्टोरी हमारे समाज की सोच को एक नई दिशा देती है. यह कहानी बताती है कि ग्लैमर और बिजनेस, दोनों क्षेत्रों में एक साथ सफलता पाई जा सकती है बशर्ते आपके पास कड़ी मेहनत करने का माद्दा हो. आज जब लोग काम शुरू करने के लिए बड़ी-बड़ी जगहों और इंफ्रास्ट्रक्चर की तलाश करते हैं, तान्या ने ग्वालियर जैसे शहर से निकलकर यह मुकाम हासिल किया. उनकी कहानी से हर आम इंसान को यह सीख मिलती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, अगर आपके इरादे पक्के हैं तो आपकी सफलता को कोई भी ताकत रोक नहीं सकती.
अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारे गूगल, फेसबुक, x, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से.