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Neeru Yadav Hockey Wali Sarpanch: राजस्थान के एक छोटे से गांव की महिला सरपंच नीरू यादव ने अपनी अनूठी सोच से गाँव की तस्वीर बदलकर उसे ब्रिक्स (BRICS) जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुँचा दिया है. यह कहानी दिखाती है कि कैसे ज़मीनी स्तर का बदलाव वैश्विक स्तर पर देश का मान बढ़ा सकता है.
BRICS Women Ministerial Meeting 2026: क्या आपने कभी सोचा है कि किसी सुदूर गाँव में शुरू हुई एक छोटी सी मुहिम दुनिया के सबसे बड़े आर्थिक संगठनों में से एक 'ब्रिक्स' (BRICS) के एजेंडे का हिस्सा बन सकती है? अमूमन हम सोचते हैं कि नीतियाँ वातानुकूलित कमरों में बैठे बड़े अधिकारी तय करते हैं, लेकिन राजस्थान की एक सरपंच ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है. झुंझुनूं जिले की लंबी अहीर ग्राम पंचायत की सरपंच नीरू यादव ने यह साबित कर दिया है कि अगर नीयत साफ हो और प्रयास सच्चे हों, तो गाँव की चौपाल से निकला कोई आइडिया पूरी दुनिया के लिए एक मॉडल बन सकता है. कोच्चि में आयोजित ब्रिक्स महिला मंत्रिस्तरीय बैठक-2026 में जब उन्होंने भारत के ग्रामीण विकास मॉडल को रखा, तो हर कोई दंग रह गया.
नीरू यादव को देश आज 'हॉकी वाली सरपंच' के नाम से जानता है. उन्होंने अपने सरकारी मानदेय और 'आदित्री फाउंडेशन' के मिले-जुले प्रयासों से गाँव की बेटियों के लिए एक हॉकी टीम तैयार की. यह सिर्फ एक खेल की शुरुआत नहीं थी, बल्कि ग्रामीण समाज में लड़कियों को लेकर बनी रूढ़िवादी सोच पर एक करारा प्रहार था. आज इसका असर यह है कि गाँव की लड़कियों में गज़ब का आत्मविश्वास देखने को मिल रहा है. आम पाठकों के लिए इसमें सबसे बड़ी सीख यह है कि आपके घर या आसपास की बेटियाँ भी अगर सही मौका पाएं, तो वे खेल के मैदान से लेकर पढ़ाई और करियर के हर मोर्चे पर आपका सिर फक्र से ऊँचा कर सकती हैं.
हम रोज़ाना शादी-ब्याह या बड़े आयोजनों में थर्माकोल और सिंगल यूज़ प्लास्टिक का कचरा देखते हैं, लेकिन क्या कभी इसके समाधान पर काम करते हैं? नीरू यादव ने अपने गाँव में एक 'बर्तन बैंक' की शुरुआत की, जिसने प्लास्टिक प्रदूषण को जड़ से खत्म करने का काम किया. यह प्रयोग इतना कामयाब रहा कि राजस्थान सरकार को अपने बजट (वर्ष 2025-26) में इसे पूरे प्रदेश में लागू करने का एलान करना पड़ा. इसके अलावा, शादियों में पेड़ गिफ्ट करने की परंपरा और 'मेरा पेड़, मेरा दोस्त' अभियान से पर्यावरण को सीधे लोगों की भावनाओं से जोड़ दिया गया. यह मॉडल सिखाता है कि पर्यावरण बचाना सिर्फ सरकार का काम नहीं, बल्कि हमारी रोज़मर्रा की आदत होना चाहिए.
ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की सबसे बड़ी समस्या आर्थिक रूप से किसी और पर निर्भर होना है. इस समस्या को खत्म करने के लिए 'नारी दिशा' नाम का अभियान शुरू किया गया. इसके तहत महिलाओं को केवल सिलाई-कढ़ाई नहीं, बल्कि डिजिटल साक्षरता और वित्तीय समावेशन (पैसों का लेनदेन) की ट्रेनिंग दी गई. जब एक ग्रामीण महिला खुद का बैंक खाता संभालना और मोबाइल बैंकिंग सीख जाती है, तो पूरे परिवार की जीवनशैली बदल जाती है. इस पहल ने देश को यह मैसेज दिया है कि महिला सशक्तिकरण सिर्फ भाषणों में नहीं, बल्कि उनको आर्थिक रूप से आज़ाद बनाने से आता है.
नीरू यादव का यह सफर अचानक नहीं शुरू हुआ. साल 2023 में वो मशहूर टीवी शो 'कौन बनेगा करोड़पति' (KBC) में नज़र आई थीं, जहां से उनकी कहानी देश के सामने आई. इसके बाद साल 2024 में उन्हें संयुक्त राष्ट्र (UN) के 57वें पापुलेशन एंड डेवलपमेंट कमीशन में भारत की बात रखने का मौका मिला. और अब, 11 देशों के मंत्रियों और नीति विशेषज्ञों की मौजूदगी में ब्रिक्स मंच पर उनकी भागीदारी ने यह साफ कर दिया है कि असली भारत गाँवों में बसता है. जब भारत की एक महिला सरपंच वैश्विक मंच पर बैठकर विवेक भारद्वाज, शर्मिला मैरी जोसेफ और भक्ति शर्मा जैसे बड़े अधिकारियों के साथ नीतियाँ चर्चा करती है, तो यह देश के हर नागरिक के लिए एक प्रेरणा बन जाती है कि कोई भी काम छोटा नहीं होता.
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