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India US LPG import deal 2027: भारत अब रसोई गैस की सप्लाई में मिडिल ईस्ट पर निर्भरता घटाने की तैयारी कर रहा है. सरकार ने इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को 2027 के LPG आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, जिससे सप्लाई सुरक्षा मजबूत हो सकेगी.
आपके घर में इस्तेमाल होने वाला LPG सिलेंडर भले ही रोजमर्रा की चीज लगे, लेकिन उसके पीछे पूरी दुनिया की सप्लाई चेन काम करती है. अब इस चेन में अमेरिका की हिस्सेदारी और बढ़ाने की तैयारी है. सरकार ने इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को 2027 में होने वाले कुल LPG आयात का कम से कम 15 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका के लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट के जरिए लाने का स्पष्ट निर्देश दिया है.
यह कदम केवल अमेरिका से गैस खरीदने का मामला नहीं है. इसके पीछे भारत की ऊर्जा सुरक्षा, मिडिल ईस्ट पर निर्भरता कम करने और भविष्य में सप्लाई बाधित होने के जोखिम को घटाने की रणनीति भी जुड़ी है.
सरकार के इस निर्देश के बाद इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को अपनी LPG खरीद रणनीति में अमेरिका की हिस्सेदारी बढ़ानी होगी. लक्ष्य है कि 2027 में कुल LPG आयात का कम से कम 15 प्रतिशत हिस्सा अमेरिकी लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट से आए.
इसका सीधा मतलब यह है कि भारत रसोई गैस के लिए किसी एक इलाके पर अत्यधिक निर्भर नहीं रहना चाहता. साल 2025 में भारत के कुल 21.85 मिलियन टन LPG आयात में करीब 90 प्रतिशत हिस्सा मिडिल ईस्ट से आया था. सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए Reuters ने बताया था कि देश की LPG खपत का करीब 66 प्रतिशत हिस्सा आयात से पूरा होता है. यानी विदेश से आने वाली गैस में बड़ा बदलाव सीधे भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा मामला है.
भारत ने इस दिशा में कदम इसी साल की शुरुआत से उठाना शुरू कर दिया था. साल 2026 के लिए भारत की सरकारी तेल कंपनियों ने अमेरिका से करीब 22 लाख टन LPG मंगाने का एक साल का लॉन्ग टर्म सौदा किया था. यह मात्रा भारत के सालाना LPG आयात का करीब 10 प्रतिशत थी.
यह अमेरिका से LPG के लिए भारत का पहला स्ट्रक्चर्ड टर्म कॉन्ट्रैक्ट था. S&P Global के अनुसार, इस सौदे में करीब 2.2 मिलियन मीट्रिक टन LPG की खरीद तय हुई थी और इसे भारत के सालाना LPG आयात के लगभग 10 प्रतिशत के बराबर बताया गया था. इस सौदे के बाद अब 2027 के लिए अमेरिका से LPG खरीद बढ़ाने की तैयारी को अगले चरण के रूप में देखा जा रहा है.
आपके दिए ताजा अपडेट के मुताबिक, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के शीर्ष अधिकारी फिलहाल अमेरिका में मौजूद हैं और LPG की नई सप्लाई डील को लेकर बातचीत कर रहे हैं.
इस बातचीत का महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि LPG खरीद केवल कीमत पर निर्भर नहीं करती. लंबी अवधि के सौदे में सप्लाई की विश्वसनीयता, शिपिंग, कीमत तय करने का फॉर्मूला और डिलीवरी की शर्तें भी अहम होती हैं.
2026 के पहले अमेरिकी LPG टर्म कॉन्ट्रैक्ट में कीमत के लिए Mount Belvieu को बेंचमार्क बनाया गया था. S&P Global के मुताबिक, उस सौदे का मकसद LPG खरीद के स्रोतों में विविधता लाना भी था.
भारत के लिए LPG की सप्लाई का बड़ा हिस्सा लंबे समय से मिडिल ईस्ट से आता रहा है. लेकिन 2026 में ईरान संघर्ष और Strait of Hormuz में पैदा हुए व्यवधानों ने इस निर्भरता का जोखिम सामने ला दिया.
Reuters के अनुसार, इसी साल भारत को LPG की भारी कमी का सामना करना पड़ा था. हालात ऐसे बने कि सरकार को उद्योगों के लिए इस्तेमाल होने वाले LPG फीडस्टॉक को घरेलू उपभोक्ताओं की तरफ मोड़ना पड़ा.
यही वजह है कि अब अमेरिका के साथ-साथ दूसरे देशों से भी LPG खरीदने की कोशिश हो रही है. लक्ष्य सिर्फ सस्ता गैस खरीदना नहीं, बल्कि ऐसी सप्लाई चेन तैयार करना है जिसमें किसी एक क्षेत्र में संकट आने पर भारत के पास दूसरे विकल्प मौजूद रहें.
आम उपभोक्ता के लिए इसका सबसे बड़ा फायदा सप्लाई सुरक्षा के रूप में सामने आ सकता है. अगर किसी एक क्षेत्र से LPG की सप्लाई अचानक बाधित होती है तो वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध होने पर देश में घरेलू गैस की कमी का जोखिम कम किया जा सकता है.
हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि अमेरिका से ज्यादा LPG खरीदने के बाद घरेलू सिलेंडर की कीमत अपने आप कम हो जाएगी. LPG की अंतिम कीमत पर अंतरराष्ट्रीय गैस कीमत, शिपिंग खर्च, टैक्स, सब्सिडी और सरकार की कीमत नीति जैसे कई फैक्टर असर डालते हैं.
खास तौर पर अमेरिका से LPG लाने में समुद्री दूरी ज्यादा होने के कारण फ्रेट कॉस्ट महत्वपूर्ण मुद्दा है. ORF की एक ऊर्जा रिपोर्ट में भी अमेरिकी LPG के लिए ज्यादा शिपिंग लागत को चुनौती बताया गया था.
Reuters के मुताबिक, जनवरी से जून 2026 के बीच भारत की LPG खपत करीब 8 प्रतिशत घटकर लगभग 14.7 मिलियन टन रह गई, जबकि आयात करीब 28 प्रतिशत घटकर लगभग 7.5 मिलियन टन रहा. सप्लाई सामान्य होने के साथ 2027 में मांग करीब 31 मिलियन टन तक पहुंचने और आयात लगभग 20 मिलियन टन होने का अनुमान बताया गया था. ([India Today][3])
इस गणित को समझना जरूरी है. भारत में LPG की मांग बढ़ती रहेगी, इसलिए सिर्फ घरेलू उत्पादन पर निर्भर रहना आसान नहीं होगा. आयात के स्रोतों में विविधता लाकर सरकार भविष्य की सप्लाई को ज्यादा लचीला बनाना चाहती है.
अमेरिका से ज्यादा LPG खरीदने का मामला केवल ऊर्जा सुरक्षा तक सीमित नहीं है. यह भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों से भी जुड़ा हुआ है. Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका से ऊर्जा खरीद बढ़ाना दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन को लेकर चल रही बातचीत में भी मददगार हो सकता है. भारत ने निकट भविष्य में अमेरिका से अपनी ऊर्जा खरीद 10 अरब डॉलर से बढ़ाकर 25 अरब डॉलर करने की प्रतिबद्धता जताई है. दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी रखा है. यानी रसोई गैस की यह खरीद भारत की घरेलू ऊर्जा जरूरत के साथ-साथ बड़े कारोबारी समीकरण का भी हिस्सा है.
2027 के लिए अमेरिकी LPG की नई खरीद को लेकर बातचीत आगे बढ़ने के बाद कंपनियों की ओर से टेंडर और कॉन्ट्रैक्ट की प्रक्रिया अहम होगी. इसके बाद यह साफ होगा कि कितनी मात्रा, किस कीमत फॉर्मूले और किन शर्तों पर अमेरिकी LPG भारत आएगी.
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत ने LPG सप्लाई को लेकर अपनी रणनीति में बदलाव शुरू कर दिया है. पहले जहां मिडिल ईस्ट प्रमुख स्रोत था, वहीं अब अमेरिका समेत दूसरे देशों को भी सप्लाई बास्केट में ज्यादा जगह दी जा रही है.
आम उपभोक्ता के लिए इसका मतलब फिलहाल इतना है कि सरकार LPG की उपलब्धता को भविष्य के भू-राजनीतिक झटकों से बचाने के लिए सप्लाई के नए रास्ते तैयार कर रही है. कीमत में तत्काल गिरावट की गारंटी नहीं, लेकिन सप्लाई संकट का जोखिम घटाना इसका बड़ा मकसद है.
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