Advertisement

MBA और आर्किटेक्ट की कॉरपोरेट नौकरी छोड़ 3 सहेलियों ने खड़ा किया लग्जरी फर्नीचर ब्रांड, अब कर रही हैं करोड़ों कमाई

How medical waste turned into fabric: तीन सहेलियां-जन्नत, शेरोन और मल्लिका ने मिलकर दवा कंपनियों के 500 किलो कचरे को लग्जरी फर्नीचर में बदल दिया. 'दायरा X कैंसिल्ड प्लान्स' के जरिए उन्होंने पर्यावरण बचाने के साथ ही एक सफल सस्टेनेबल बिजनेस खड़ा कर दिया है.

Latest News
MBA और आर्किटेक्ट की कॉरपोरेट नौकरी छोड़ 3 सहेलियों ने खड़ा किया लग्जरी फर्नीचर ब्रांड, अब कर रही हैं करोड़ों कमाई

: MBA और आर्किटेक्ट सहेलियों का कमाल, नौकरी छोड़ वेस्ट मटेरियल से खड़ा किया करोड़ों का बिजनेस (फोटो एआई+सोशल मीडिया)

Add DNA as a Preferred Source

3 friends built multi-crore empire in waste management?क्या आप सोच सकते हैं कि जिन खाली दवाओं के पत्तों, रैपर्स और कतरनों को हम कचरा समझकर डस्टबिन में फेंक देते हैं, वे कभी किसी के आलीशान घर की शोभा बढ़ा सकते हैं? देश की तीन सहेलियों ने अपनी सूझबूझ और क्रिएटिविटी से इस नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया है. दिल्ली और हैदराबाद की रहने वाली जन्नत गिल, शेरोन सेठी और मल्लिका रेड्डी ने मिलकर न सिर्फ पर्यावरण को एक बड़े खतरे से बचाया, बल्कि कबाड़ से कमाल करते हुए एक ऐसा सस्टेनेबल बिजनेस खड़ा कर दिया है जो आज देश के युवाओं के लिए एक बड़ी इंस्पिरेशन बन चुका है.

लाखों के पैकेज वाली MNC जॉब छोड़ कॉर्पोरेट वूमन ने 10,000 से शुरू किया बिजनेस, आज हर महीने छाप रही हैं 10 लाख

सहेलियों की शादी की गपशप और करोड़ों का आइडिया

ज्यादातर बिजनेस आइडिया किसी शांत ऑफिस या मीटिंग रूम में आते हैं, लेकिन इस अनोखी सक्सेस स्टोरी की शुरुआत शादियों के माहौल में हुई थी. साल 2015 में जब शेरोन सेठी कैलिफोर्निया में अपनी नौकरी छोड़कर भारत अपनी सहेली जन्नत गिल की शादी में आईं, तो दोनों ने फैशन और इंटीरियर स्पेस में कुछ नया करने की प्लानिंग की. इसके बाद 2018 में उन्होंने 'दायरा' नाम से एक इंटीरियर और प्रोडक्ट डिजाइन स्टूडियो शुरू किया. कहानी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब 2019 में थाईलैंड में एक और शादी के समारोह के दौरान इन दोनों की मुलाकात आर्किटेक्ट मल्लिका रेड्डी से हुई. मल्लिका उस समय 'कैंसिल्ड प्लान्स' नाम का एक स्टार्टअप चला रही थीं, जो कचरे से धागा और कपड़ा बनाने का काम करता था. तीनों की सोच मिली और एक नए सफर की शुरुआत हुई.

मां के आंसू देख तड़पा दिल और नौकरी छोड़ खड़ा कर दिया ₹86,000 करोड़ का बिजनेस, ब्लिंकिट-जेप्टो के दौर में इस स्टार्टअप ने मारी बाजी

दवा कंपनियों के वेस्ट को बनाया अपना सबसे बड़ा हथियार

मल्लिका रेड्डी ने एमबीए करने के बाद एक फार्मास्युटिकल (दवा) कंपनी में काम किया था. वहां उन्होंने देखा कि फैक्ट्रियों में हर दिन टन के हिसाब से ऐसा कचरा निकलता है जो जहरीला तो नहीं होता, लेकिन पर्यावरण के लिए बहुत बड़ा बोझ बन जाता है. मल्लिका ने इसी समस्या को एक मौके में बदल दिया. उन्होंने अपनी पुरानी कंपनी और दिल्ली-हैदराबाद की अन्य फैक्ट्रियों से इस गैर-खतरनाक कचरे को इकट्ठा करना शुरू किया. इसमें दवाओं की एल्युमीनियम पैकेजिंग, कटी हुई प्लास्टिक स्ट्रिप्स, फैक्ट्रियों के प्लास्टिक रैप और खाली डिब्बे शामिल थे. इसके साथ ही कपड़ों की कतरनों और विज्ञापनों के पुराने होर्डिंग्स को मिलाकर एक बेहद मजबूत, लचीला और नया फैब्रिक (कपड़ा) तैयार किया गया. इस आइडिया से उन्होंने 500 किलोग्राम से ज्यादा कचरे को लैंडफिल में सड़ने से बचा लिया.

 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

A post shared by DAERA (@daeralife)

लोकल कारीगरों को दिया रोजगार और बनाई ग्लोबल पहचान

इस कचरे से बने फैब्रिक को आलीशान रूप देने के लिए इन सहेलियों ने भारत के पारंपरिक कारीगरों से हाथ मिलाया. मल्लिका की देखरेख में हैदराबाद के चारमीनार इलाके के पारंपरिक कढ़ाई करने वाले कारीगरों और तमिलनाडु के पोचमपल्ली के बुनकरों को काम पर रखा गया. इन कारीगरों ने अपनी कला से इस वेस्ट फैब्रिक को एक नया और चमकीला रूप दिया. इसके बाद जन्नत और शेरोन ने जर्मनी की मशहूर 'बाउहाउस' कला शैली से प्रेरणा लेकर बेहद मॉडर्न और मिनिमलिस्टिक फर्नीचर डिजाइन किए. आज इस ब्रांड के तहत बनाए गए लाउंज चेयर, वार्प चेयर, शटल बेंच, झूमर और ओरेकल मिरर जैसे लग्जरी होम डेकोर प्रोडक्ट्स की मांग पूरे देश में है.

ससुर के बंद बिजनेस को बनाया 15 करोड़ टर्नओवर वाली कंपनी, आज क्रिकेट बैट इंडस्ट्री पर राज कर रही ये कश्मीरी महिला

इस सफलता से आम इंसान को क्या सीख मिलती है?

यह सक्सेस स्टोरी हमें सिखाती है कि सफलता के लिए किसी महंगे रॉ मैटेरियल की जरूरत नहीं होती, बल्कि नजरिया बदलने की जरूरत होती है. आज जब पूरी दुनिया प्लास्टिक और प्रदूषण से परेशान है, तब इन तीनों महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि जिसे दुनिया 'रिजेक्ट' कर देती है, उसे भी रीसायकल करके एक कीमती ब्रांड बनाया जा सकता है. यह बिजनेस मॉडल न सिर्फ पर्यावरण को साफ रख रहा है, बल्कि हमारे देश के उन छोटे कारीगरों के घरों में भी खुशहाली ला रहा है जिनकी कला मशीनों के दौर में खोती जा रही थी. कचरे से करोड़ों का बिजनेस खड़ा करने की यह कहानी आत्मनिर्भर भारत की एक सच्ची और जीती-जागती मिसाल है.

अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारे गूगलफेसबुकx,   इंस्टाग्रामयूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से. 

Read More
Advertisement
Advertisement
Advertisement