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Gold buying strategy festive season: 15 सितंबर 2026 को सोने की कीमतों में हाल के ऊंचे स्तरों से नरमी आई है. 24 कैरेट सोना करीब 1.50 से 1.51 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम है. कच्चा तेल, अमेरिकी फेड का फैसला और डॉलर आगे कीमतों की दिशा तय करेंगे.
15 सितंबर 2026 को सोने के भाव में हाल के ऊंचे स्तरों से कुछ नरमी देखने को मिल रही है, लेकिन कीमत अभी भी आम खरीदार की पहुंच से काफी दूर है. 24 कैरेट सोना करीब 1.50 से 1.51 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि दिवाली और शादी के सीजन से पहले आई इस नरमी को खरीदारी का मौका माना जाए या कुछ और दिन इंतजार किया जाए. चलिए कमोडिटी और शेयर मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय से सराफा बाजार की हलचल को समझते हैं.
15 सितंबर 2026 के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 24 कैरेट सोना 10 ग्राम के लिए करीब 1,50,388 रुपये से 1,51,305 रुपये के बीच कारोबार कर रहा है. वहीं 22 कैरेट सोने का भाव करीब 1,37,856 रुपये से 1,38,696 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास है.
यानी सोने में नरमी जरूर आई है, लेकिन इसे अभी बड़ी गिरावट कहना सही नहीं होगा. दिल्ली में 14 सितंबर को 24 कैरेट सोने का भाव 1,54,730 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया था, जो एक दिन पहले के 1,54,560 रुपये से 170 रुपये ज्यादा था. शहर, सराफा बाजार और कीमत के अपडेट समय के हिसाब से रेट में अंतर भी हो सकता है.
खरीदार के लिए इसका मतलब सीधा है. अगर आप केवल यह सोचकर खरीदारी रोक रहे हैं कि सोना अचानक बहुत सस्ता हो जाएगा, तो फिलहाल ऐसा संकेत साफ तौर पर नहीं दिख रहा. लेकिन अगर खरीदारी जरूरी नहीं है, तो बाजार में आने वाली अगली गिरावट पर नजर रखना फायदेमंद हो सकता है.
सोने की मौजूदा चाल को समझने के लिए सिर्फ घरेलू भाव देखना काफी नहीं है. इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी महंगाई और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति तीन बड़े फैक्टर बन गए हैं.
14 सितंबर को कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया. इससे महंगाई बढ़ने की चिंता मजबूत हुई और बाजार में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीद भी बढ़ी. ब्याज दर ज्यादा रहने पर सोना जैसे ऐसे एसेट पर दबाव आता है, जिससे नियमित ब्याज या यील्ड नहीं मिलती. यही वजह है कि तेल की तेजी और महंगाई की चिंता ने सोने की कीमतों पर दबाव बनाया है.
रॉयटर्स के मुताबिक 14 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 0.8 फीसदी गिरकर 4,312.59 डॉलर प्रति औंस पर आ गया और अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स करीब 1.3 फीसदी नीचे रहे. बाजार की नजर अब 15 से 16 सितंबर की फेड बैठक पर है.
इस समय सोने के खरीदारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण तारीख 15 और 16 सितंबर है. इसी दौरान अमेरिकी फेडरल रिजर्व की फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की बैठक हो रही है.
अगर फेड का रुख ब्याज दरों को लेकर सख्त रहता है, तो सोने पर आगे भी दबाव बन सकता है. दूसरी तरफ अगर बाजार को नरम रुख के संकेत मिलते हैं, तो सोने में फिर से खरीदारी लौट सकती है. टाइम्स ऑफ इंडिया ने पीटीआई के हवाले से बताया है कि फेड का रुख, कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी डॉलर, महंगाई की उम्मीद और भू-राजनीतिक घटनाक्रम आगे सोने की दिशा के प्रमुख कारक रहेंगे.
यानी आज की गिरावट को देखकर यह मान लेना कि सोना अब लगातार सस्ता ही होता जाएगा, जोखिम भरा हो सकता है. इसी तरह एक-दो दिन की नरमी को देखकर पूरी रकम एक साथ लगा देना भी समझदारी नहीं होगी.
देव कहते हैं अब बात उस खरीदार की, जिसे निवेश नहीं बल्कि दिवाली, धनतेरस या शादी के लिए सोने के गहने खरीदने हैं. ऐसे खरीदार के लिए बाजार को बिल्कुल नीचे आने का इंतजार करना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि ज्वेलरी की कीमत केवल सोने के भाव से तय नहीं होती. मेकिंग चार्ज, जीएसटी और डिजाइन के हिसाब से अंतिम बिल काफी बदल सकता है. इसलिए अगर खरीदारी अगले एक से दो महीने में तय है, तो पूरी खरीदारी एक ही दिन करने के बजाय चरणों में करने की रणनीति अपनाई जा सकती है.
मसलन, जरूरी गहने का एक हिस्सा अभी बुक कराया जा सकता है और बाकी खरीदारी के लिए आने वाले दिनों के भाव देखे जा सकते हैं. इससे अगर कीमत और नीचे आती है तो औसत खरीद भाव कम करने का मौका मिलेगा. लेकिन अगर बाजार अचानक ऊपर चला जाता है तो पूरी खरीदारी महंगे भाव पर करने की मजबूरी भी नहीं रहेगी.
यहां एक दिलचस्प पहलू है. दिवाली और धनतेरस के आसपास सोने की खरीदारी बढ़ती है, लेकिन सिर्फ त्योहारी मांग के भरोसे यह कहना सही नहीं होगा कि कीमत जरूर बढ़ेगी. इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में सबसे बड़ा ट्रिगर फेड का फैसला है. इसके साथ कच्चे तेल की कीमत और डॉलर की चाल भी भारत में सोने के भाव को प्रभावित करेगी. हाल में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने और वैश्विक तनाव बढ़ने से बुलियन बाजार में उतार-चढ़ाव तेज हुआ है.
देव के अनुसार यही वह छिपा हुआ एंगल है जिसे गहने खरीदने वालों को समझना चाहिए. अगर अंतरराष्ट्रीय सोना सस्ता भी होता है, लेकिन रुपये में कमजोरी आती है, तो भारत में घरेलू सोने की कीमत में गिरावट सीमित रह सकती है. इसलिए केवल अंतरराष्ट्रीय गोल्ड प्राइस देखकर भारतीय बाजार में खरीदारी का फैसला करना सही नहीं होगा.
देव कहते हैं अगर आपकी खरीदारी जरूरी है और बजट पहले से तय है, तो मौजूदा नरमी में कुछ हिस्सा खरीदना ज्यादा व्यावहारिक रणनीति हो सकती है. वहीं अगर शादी या त्योहारी खरीदारी कुछ समय बाद करनी है और तत्काल जरूरत नहीं है, तो फेड के फैसले और अगले कुछ दिनों की बाजार चाल का इंतजार किया जा सकता है.
निवेश के नजरिए से भी पूरी रकम एक साथ लगाने के बजाय किस्तों में खरीदारी करने से कीमत के उतार-चढ़ाव का जोखिम कम किया जा सकता है. खासकर तब, जब सोना हाल के महीनों में बहुत ऊंचे स्तरों पर पहुंच चुका है और बाजार में रोजाना बड़ी हलचल देखने को मिल रही है.
सबसे जरूरी बात यह है कि 1.50 लाख रुपये से ज्यादा का भाव देखकर सिर्फ डर या लालच में फैसला न लें. गहने खरीदने वाले के लिए मेकिंग चार्ज और जरूरत की तारीख उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितना सोने का आज का भाव. वहीं निवेशक को अंतरराष्ट्रीय कीमत, डॉलर और फेड के रुख पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए.
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