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Why copper replacing silver in china: चीन के कमोडिटी बाजार में मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट कम करने के लिए चांदी की जगह कॉपर का इस्तेमाल तेजी से बढ़ाया जा रहा है. इस बड़े बदलाव से ग्लोबल मार्केट में चांदी की मांग और उसकी कीमतों पर गहरा असर पड़ना तय माना जा रहा है.
चीन के कमोडिटी बाजार में ऐसा क्या हो रहा है जिसके चलते चांदी की चमक फीकी पड़ने लगी है और उसकी जगह तांबा यानी कॉपर तेजी से अपनी जगह बना रहा है, आइए जानते हैं इस चौंकाने वाले बदलाव की पूरी अंदरूनी कहानी. Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक चीन में सोलर पैनल निर्माता चांदी के विकल्प के रूप में कॉपर अपनाने की कोशिश तेज कर रहे हैं.
क्या आपने कभी सोचा है कि जिस चमकती हुई चांदी पर दुनिया आंख मूंदकर भरोसा करती है, अचानक किसी देश में उसे रिप्लेस करने की तैयारी चल रही हो? आज चीन के इंडस्ट्रियल बाजार में कुछ ऐसा ही बड़ा खेल चल रहा है, जिसे देखकर ग्लोबल मार्केट के बड़े-बड़े निवेशक भी हैरान हैं. चीन दुनिया का एक बहुत बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब है और वहां का हर एक फैसला दुनिया भर के बाजार की दिशा तय करता है. अब खबर आ रही है कि चीन में चांदी के इस्तेमाल का तरीका तेजी से बदला जा रहा है, और उसकी जगह तांबे का इस्तेमाल किया जा रहा है. यह बदलाव सिर्फ एक मामूली फेरबदल नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बहुत बड़ा आर्थिक गणित छिपा है जो सीधे तौर पर आम आदमी की जेब और ग्लोबल मार्केट को प्रभावित करने वाला है.
सिल्वर इंस्टीट्यूट के 2026 आउटलुक के मुताबिक पीवी सेक्टर में चांदी की बचत और एकमुश्त प्रतिस्थापन के चलते सौर ऊर्जा में चांदी की मांग घटने की उम्मीद है. 2026 में औद्योगिक चांदी निर्माण लगभग 2% जुड़ाव लगभग 650 मिलियन औंस रहने का अनुमान है. इस रिपोर्ट के मुताबिक पीवी इंडस्ट्री की चांदी की मांग 2025 में 186.6 मिलियन औंस रही और 2026 में इसके करीब 19% रिकॉर्ड 151 मिलियन औंस होने का अनुमान है. सिद्धांतों में चांदी की कीमत, चांदी लोडिंग कम करना और वैकल्पिक धातुकरण प्रौद्योगिकियां शामिल हैं.
pv-magazine की 9 जुलाई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार Longi चीन में 21 GW की बैक-कॉन्टैक्ट सोलर सेल उत्पादन लाइन शुरू हो गई है. इसकी मिश्र धातु संपर्क मैट्रिक्स तकनीक पारंपरिक चांदी पेस्ट की जगह तांबा-आधारित मिश्र धातु संपर्क प्रणाली का उपयोग करती है.
इंटरनेशनल कॉपर एसोसिएशन ऑस्ट्रेलिया चीन की सबसे बड़ी कंपनी जापान में से एक लॉन्गी ग्रीन एनर्जी ने शानक्सी में कॉपर आधारित सत्यो सेल का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया है. यह आपके पूरे कोण का सबसे स्पष्ट तथ्य है.
इस पूरे बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह है लागत यानी पैसों की बचत. जैसा कि हम जानते हैं कि चांदी एक बेहद कीमती धातु है और पिछले कुछ सालों में इसकी कीमतों में भारी उछाल आया है. ऐसे में चीन की इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर पैनल बनाने वाली कंपनियां अपनी प्रोडक्शन कॉस्ट को कम करने के लिए लगातार सस्ते विकल्पों की तलाश में जुटी हुई थीं. तांबा यानी कॉपर चांदी के मुकाबले काफी सस्ता पड़ता है और इंडस्ट्रियल कामों में इसकी कंडक्टिविटी भी काफी हद तक जरूरतों को पूरा कर देती है. जब अरबों की संख्या में प्रोडक्ट्स बनाने होते हैं, तो थोड़ा सा भी मैटेरियल बदलने से कंपनियों को करोड़ों रुपये का फायदा होता है, और यही वजह है कि कंपनियां चांदी की बजाय कॉपर पर दांव लगा रही हैं.
चीन की बड़ी-बड़ी सोलर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और टेक कंपनियां इस खेल की मुख्य खिलाड़ी हैं. खासकर सोलर फोटोवोल्टेक सेल बनाने वाले उद्योगों में इस बदलाव की शुरुआत बहुत तेजी से हुई है. ये कंपनियां अपने रिसर्च और डेवलपमेंट सेंटर्स के जरिए ऐसे नए तरीके ढूंढ रही हैं जिससे चांदी के इस्तेमाल को कम से कम किया जा सके या उसकी जगह तांबे के पेस्ट का इस्तेमाल किया जाए. चीन की सरकार भी ग्रीन एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग को और ज्यादा किफायती बनाने के लिए इस तरह के इन्नोवेशंस को बढ़ावा दे रही है ताकि ग्लोबल मार्केट में उनके प्रोडक्ट्स सबसे सस्ते और किफायती साबित हो सकें.
जब दुनिया का सबसे बड़ा खरीदार यानी चीन किसी धातु के इस्तेमाल में कटौती करेगा, तो जाहिर है कि उसका सीधा असर ग्लोबल मार्केट पर पड़ेगा. इस खबर के सामने आते ही कमोडिटी मार्केट में खलबली मच गई है. जानकारों का मानना है कि जब मांग घटेगी तो आने वाले दिनों में चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है. जो लोग चांदी में निवेश करने की सोच रहे थे या जिन्होंने पहले से पैसा लगा रखा है, उनके लिए यह चिंता का विषय हो सकता है. हालांकि दूसरी तरफ तांबे की मांग में अचानक बहुत तेजी आ गई है, जिससे कॉपर मार्केट में एक अलग ही भूचाल देखने को मिल रहा है.
दुनिया की कुल चांदी मांग का लगभग 17% हिस्सा सोलर सेक्टर से आता है. यदि चाइनीज कंपनियां बड़े पैमाने पर तांबा अपनाती हैं, तो चांदी की औद्योगिक मांग कम होगी. इससे चांदी के दामों में चल रही बेतहाशा तेजी पर लगाम लग सकती है. पिछले काफी समय से सोने की रहा पर चांदी भी निकल पड़ी थी लेकिन अब चांदी के दाम गिर सकते हैं अगर कॉपर का यूज बढ़ा तो और कॉपर के दाम बढ़ सकते हैं.
अब सवाल यह उठता है कि इस पूरी उठापटक से एक आम आदमी या छोटे निवेशक पर क्या असर पड़ेगा. अगर आप आभूषणों के शौकीन हैं या चांदी के जेवर खरीदते हैं, तो हो सकता है कि आने वाले समय में आपको थोड़ी राहत मिले क्योंकि इंडस्ट्रियल डिमांड कम होने से कीमतों में उतार-चढ़ाव आ सकता है. लेकिन दूसरी तरफ, जो लोग शेयर बाजार या कमोडिटी ट्रेडिंग में हाथ आजमाते हैं, उन्हें अपनी स्ट्रैटजी बदलने की जरूरत है. बाजार की चाल को समय रहते समझ लेना ही समझदारी है, क्योंकि चीन का यह फैसला आने वाले समय में ग्लोबल इकॉनमी की दशा और दिशा दोनों तय करने की ताकत रखता है.
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