बिजनेस
Why is there volatility in the bullion market? 10 जुलाई 2026 को सर्राफा बाजार में एक बेहद दिलचस्प और अनोखा मोड़ देखने को मिल रहा है.पारंपरिक तौर पर जब दुनिया में तनाव बढ़ता था, तो सोना आसमान छूता था. लेकिन आज का बाजार घिसे-पिटे फॉर्मूलों पर नहीं, बल्कि नए वैश्विक आर्थिक गणित पर चल रहा है.
Gold-Silver Rate today 10 July 2026: सोना हमेशा से भारतीय परिवारों के लिए केवल एक गहना नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त का सबसे भरोसेमंद साथी रहा है. लेकिन आज यानी 10 जुलाई 2026 को जब आप सराफा बाजार का रुख करेंगे, तो आपको एक अलग ही नजारा दिखेगा. शादियों का सीजन दूर होने के बावजूद सराफा बाजारों में सन्नाटा है और कीमतें किसी रोलरकोस्टर की तरह ऊपर-नीचे हो रही हैं. देश के आम मध्यमवर्गीय परिवारों के मन में इस समय सबसे बड़ा डर यही है कि क्या सोना उनकी पहुंच से पूरी तरह बाहर हो चुका है या फिर यह भारी गिरावट की तरफ बढ़ रहा है. चलिए मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय से समझते हैं कि आखिर क्या सच में सोना ₹1.5 लाख पार होने वाला है?
क्या सोना छुएगा ₹80,000 का स्तर? जानिए जुलाई में सराफा बाजार का सीक्रेट और एक्सपर्ट की राय
शॉर्ट-टर्म (अभी का हाल): जुलाई 2026 में सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव है और इनमें गिरावट आई है. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त नीतियों और बड़े निवेशकों की बिकवाली के कारण कीमतें अपने ऊंचे स्तरों से नीचे आई हैं. (विशेषकर चांदी में 52% की बड़ी गिरावट दर्ज हुई है).
लॉन्ग-टर्म (आगे का अनुमान): वहीं ये खबर भी है कि यह मंदी परमानेंट नहीं है. दुनिया में बढ़ते तनाव (मिडिल ईस्ट संकट) और चीन जैसे देशों द्वारा की जा रही सोने की जमाखोरी की वजह से आने वाले महीनों में कीमतें फिर से तेजी से बढ़ सकती हैं.
देव कहते है यह समय 'अलर्ट' रहने का है, सर्राफा बाजार अभी गिरा हुआ है, इसलिए घबराने के बजाय इस गिरावट का फायदा उठाकर थोड़ा-थोड़ा सोना-चांदी खरीद लेना चाहिए क्योंकि आगे चलकर इसके दाम फिर बढ़ेंगे.
इस समय भारतीय बाजार में 24 कैरेट शुद्ध सोने का भाव ₹1,44,750 प्रति 10 ग्राम के आसपास मंडरा रहा है, जबकि जेवर बनाने वाले 22 कैरेट सोने की कीमत ₹1,32,680 प्रति 10 ग्राम पर टिकी है. दूसरी तरफ, औद्योगिक मांग और सट्टेबाजी के बीच फंसी चांदी ₹2,33,180 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही है. ये आंकड़े डराने वाले जरूर हैं, लेकिन इसके पीछे की इनसाइड स्टोरी समझना आपके बजट के लिए बहुत जरूरी है.
| कमोडिटी | शुद्धता/मात्रा | आज का औसत भाव (रुपये में)* |
| सोना (24 कैरेट) | प्रति 10 ग्राम | ₹1,43,390 से ₹1,44,750 |
| सोना (22 कैरेट) | प्रति 10 ग्राम | ₹1,31,450 से ₹1,32,680 |
| चांदी | प्रति किलोग्राम | ₹2,33,180 |
नोट: ये भाव सांकेतिक हैं और इनमें स्थानीय स्तर पर मेकिंग चार्जेस और 3% GST शामिल नहीं है
देव बताते हैं कि अक्सर लोग सोचते हैं कि भारत में त्योहार या शादियों की खरीदारी से सोने का रेट तय होता है, लेकिन यह एक बहुत पुराना और घिसा-पिटा एंगल है. असलियत यह है कि इस समय सोने और चांदी की चाल को दिल्ली या मुंबई के बाजार नहीं, बल्कि सात समंदर पार अमेरिका और चीन की चालबाजियां तय कर रही हैं.
इस उथल-पुथल की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व के नए मुखिया केविन वॉर्श का सख्त नजरिया है. अमेरिकी बाजार से आ रहे संकेतों ने साफ कर दिया है कि वहां ब्याज दरें अभी ऊंची बनी रहेंगी. जब अमेरिका में ब्याज दरें ज्यादा होती हैं, तो दुनिया भर के बड़े निवेशक सोने से अपना पैसा निकालकर अमेरिकी सरकारी बॉन्ड्स में लगाने लगते हैं. इसी 'फोर्स्ड लिक्विडेशन' यानी मजबूरी की बिकवाली की वजह से सोने में तेज उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है.
इस महंगाई और रेट्स की उठापटक का सबसे व्यावहारिक असर आपके घरेलू बजट पर पड़ रहा है.देव कहते है कि यदि आप अपनी बेटी या बहन की शादी के लिए गहने बनवाने की सोच रहे हैं, तो लोकल ज्वैलर्स आपसे मेकिंग चार्ज और 3 फीसदी जीएसटी अलग से वसूलेंगे, जिससे 24 कैरेट सोने का प्रभावी रेट ₹1.48 लाख के पार पहुंच जाता है.
लेकिन यहां एक छुपा हुआ पहलू भी है जिसे बहुत कम लोग नोटिस कर रहे हैं. पश्चिमी देशों के आम लोग जहां इस समय महंगे सोने को बेचकर नकदी बटोर रहे हैं, वहीं चीन और रूस जैसे देशों के केंद्रीय बैंक बैंक चुपके से भारी मात्रा में फिजिकल सोने की जमाखोरी कर रहे हैं. वे अपनी करेंसी को वैश्विक मंदी और अमेरिकी डॉलर के दबाव से बचाने के लिए सोने का बैकअप मजबूत कर रहे हैं. यही वजह है कि जब भी रेट्स थोड़े नीचे आते हैं, वैश्विक स्तर पर बड़ी खरीदारी शुरू हो जाती है और कीमतें दोबारा उछल जाती हैं.
सोने-चांदी को टक्कर दे रहा ये लाल सोना, जानिए दुनिया के इस कीमती मेटल पर किस देश का है कब्जा
बाजार के जानकारों का कहना है कि आगामी दिनों में दो बड़ी घटनाएं सोने और चांदी के बाजार को पूरी तरह प्रभावित करेंगी. पहली घटना मिडिल ईस्ट यानी ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव है. इस विवाद के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, जिससे पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ रही है.
दूसरी तरफ, वैश्विक रेटिंग एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि दुनिया इस समय स्टैगफ्लेशन यानी ऐसी आर्थिक स्थिति की तरफ बढ़ रही है जहां विकास दर रुक जाती है और महंगाई बढ़ती रहती है. इतिहास गवाह है कि जब कागजी नोट और शेयर बाजार डूबने लगते हैं, तब दुनिया को सिर्फ सोने पर भरोसा होता है. एचएसबीसी और जेपी मॉर्गन जैसी दिग्गज वित्तीय संस्थाओं का अनुमान है कि 2026 के आखिरी महीनों तक सोना एक बार फिर नई ऊंचाई को छू सकता है.
ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक जैसे HSBC और J.P. Morgan का मानना है कि भले ही शॉर्ट-टर्म में फेडरल रिजर्व की नीतियों के कारण सोने पर दबाव है, लेकिन लॉन्ग-टर्म स्ट्रक्चरल रिस्क (दुनिया भर के देशों पर बढ़ता कर्ज) सोने को दोबारा ऊपर ले जाएगा. वहीं, The Playbook एक्सपर्ट्स इस समय "Buy on Dips" (हर गिरावट पर धीरे-धीरे खरीदारी) की सलाह दे रहे हैं. चांदी में गिरावट ज्यादा हुई है क्योंकि वह एक इंडस्ट्रियल मेटल भी है, इसलिए उसमें रिकवरी भी सोने की तुलना में ज्यादा तेज (V-Shaped) आ सकती है.
मार्केट एक्सपर्ट्स देव के अनुसार, MCX पर सोने के लिए ₹1,43,500 - ₹1,45,000 का स्तर एक बेहतरीन सपोर्ट जोन है. वह कहते हैं कि अगर आप केवल निवेश के लिहाज से सोना या चांदी खरीदना चाहते हैं, तो रणनीति इस समय बहुत साफ है. इस समय एक बार में बड़ा पैसा फंसाने के बजाय "बाय ऑन डिप्स" यानी जब भी बाजार में कोई बड़ी गिरावट आए, तब थोड़ा-थोड़ा सोना खरीदना सबसे समझदारी भरा कदम होगा.
वहीं, चांदी में औद्योगिक मांग (जैसे सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक गाड़ियां) बहुत मजबूत है, इसलिए आने वाले समय में चांदी में सोने से भी ज्यादा तेज रिकवरी देखने को मिल सकती है. आम लोगों के लिए सलाह यही है कि वे फिलहाल हड़बड़ी में खरीदारी करने से बचें और बाजार की इस जंग को करीब से देखें, क्योंकि यह उतार-चढ़ाव अभी कुछ और हफ्तों तक जारी रहने की उम्मीद है.
डिस्क्लेमर: इस लेख में दिए गए सोने और चांदी के रेट, वैश्विक आर्थिक आंकड़े और बाजार के अनुमान केवल शैक्षणिक और सूचनात्मक उद्देश्यों (Informational Purposes) के लिए हैं. यह किसी भी प्रकार की वित्तीय सलाह, निवेश की सिफारिश या व्यापारिक गाइडलाइन नहीं है. सर्राफा बाजार और कमोडिटी ट्रेडिंग में भारी जोखिम होता है, और कीमतें वैश्विक परिस्थितियों के अनुसार लगातार बदलती रहती हैं. पाठक या निवेशक सोने-चांदी में किसी भी तरह का निवेश, खरीद या बिक्री करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें. किसी भी तरह के आर्थिक लाभ या हानि के लिए लेखक या प्रकाशक जिम्मेदार नहीं होंगे.
अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारे गूगल, फेसबुक, x, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से.