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क्या खत्म होगा सोने का गोल्डन पीरियड? ब्रिक्स और ट्रंप के फैसले से धड़ाम होगा बुलियन मार्केट? जानिए क्या है 'वेल मछली' का खेल 

Impact of geopolitical tensions on gold: सोने में निवेश करने वालों के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है. वैश्विक भू-राजनीतिक बदलाव और बड़े खिलाड़ियों की चालों के कारण गोल्ड की कीमतों में बड़ी गिरावट की आशंका है. आम निवेशक इस जाल में फंसने से कैसे बचें, पूरी खबर पढ़ें.

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क्या खत्म होगा सोने का गोल्डन पीरियड? ब्रिक्स और ट्रंप के फैसले से धड़ाम होगा बुलियन मार्केट? जानिए क्या है 'वेल मछली' का खेल 

डॉलर, ट्रंप और ईरान... क्या यही है सोने की कीमतों में भारी गिरावट की असली वजह? (फोटो एआई)

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  • सोने की कीमतों में भारी गिरावट
  • वैश्विक राजनीति से गोल्ड पर दबाव
  • आम निवेशकों के लिए बड़ा जोखिम
  • स्मार्ट मनी का बाजार से निकास
  • पोर्टफोलियो बचाने का सही तरीका

Gold-Silver Today's Rate: क्या आपने भी हाल ही में सोने को सुरक्षित निवेश मानकर इसमें पैसा लगाया है? अगर हां, तो यह खबर आपको सावधान करने के लिए है. बाजार के गलियारों में चर्चा है कि गोल्ड की कीमतों में वह सुनामी आने वाली है, जिसके बारे में बड़े निवेशक पहले ही भांप चुके हैं. हम अक्सर यह सोचते हैं कि सोना कभी घाटा नहीं देता, लेकिन इस बार मामला कुछ अलग है. आइए जानते हैं कि आखिर पर्दे के पीछे क्या चल रहा है और इसका आपकी जेब पर क्या असर होगा. चलिए आज के सोने-चांदी के भाव के साथ एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय से समझते हैं कि ये सराफा बाजार में ये हलचल क्या संकेत दे रही है.

प्रमुख राज्यों और महानगरों में खुदरा सोने का भाव

विभिन्न राज्यों और शहरों में लोकल टैक्स, एक्साइज ड्यूटी और मेकिंग चार्ज के कारण सोने के दामों में थोड़ा अंतर देखने को मिलता है। आज का अनुमानित खुदरा भाव:

राज्य / शहर 22 कैरेट सोना (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट सोना (प्रति 10 ग्राम)
दिल्ली ₹1,32,500 ₹1,39,130
उत्तर प्रदेश (UP) ₹1,31,500 ₹1,43,560
मुंबई / महाराष्ट्र ₹1,31,510 ₹1,43,470
चेन्नई / तमिलनाडु ₹1,32,410 ₹1,39,030 / ₹14,346 (अलग-अलगgetSource के अनुसार)
कोलकाता / पश्चिम बंगाल ₹1,32,410 ₹1,43,460
हैदराबाद / तेलंगाना ₹1,32,410 ₹1,43,460
बेंगलुरू / कर्नाटक ₹1,32,410 ₹1,39,030

चांदी का खुदरा भाव (प्रति किलोग्राम)

भारत में औसत खुदरा चांदी दर: लगभग ₹2,18,900 से ₹2,20,800 प्रति किलोग्राम के आसपास ट्रेड कर रही है.  (नोट: सोने और चांदी के ये खुदरा मूल्य बिना कर (GST) और मेकिंग चार्ज के हैं. आभूषण खरीदते समय इन पर जीएसटी और ज्वेलर का शुल्क अलग से जोड़ा जाता है, इसलिए आपके स्थानीय सर्राफा बाजार के भाव में मामूली अंतर हो सकता है.)

क्या बीआरिक्स का सपना सिर्फ एक छलावा है?

पिछले कुछ समय से पूरी दुनिया में डी-डॉलराइजेशन यानी डॉलर को छोड़कर स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करने की खूब चर्चा रही है. बीआरिक्स देशों का यह समूह मजबूत होने का दावा कर रहा था, लेकिन हकीकत कुछ और ही निकलकर सामने आ रही है. लीक हुई रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस खुद प्रतिबंध हटते ही दोबारा अमेरिकी डॉलर में ट्रेड करने के लिए तैयार है. इसका सीधा मतलब यह है कि जिन देशों ने सोने को डॉलर के विकल्प के तौर पर जमा किया था, उनकी रणनीति बदल सकती है. जब बड़े देश अपनी पुरानी मुद्रा पर लौटेंगे, तो गोल्ड की डिमांड अचानक कम हो जाएगी और कीमतों में भारी गिरावट देखी जा सकती है.

ट्रंप और ईरान के बीच का नया समीकरण क्या है?

बाजार में सोने के दाम बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक अस्थिरता और डर का माहौल रहा है. डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दिए गए 10 दिनों के अल्टीमेटम ने पूरे समीकरण बदल दिए हैं. अगर परमाणु डील पर सहमति बनती है, तो दुनिया में युद्ध का खतरा कम हो जाएगा. युद्ध के डर से ही लोग सोना खरीदते हैं, जिसे निवेश की भाषा में फियर प्रीमियम कहा जाता है. जैसे ही तनाव कम होगा, यह फियर प्रीमियम गायब हो जाएगा और सोने की कीमतें रातों-रात गिर सकती हैं. यह उन लोगों के लिए झटका होगा जिन्होंने हाल ही में महंगे दाम पर सोना खरीदा है.

वेल मछली का खेल क्या है और इससे आम आदमी का नुकसान कैसे होता है?

मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय कहते है कि शेयर बाजार और कमोडिटी मार्केट में एक पुराना नियम है, जो हमेशा सच साबित होता है. जब तक आम आदमी किसी चीज को खरीदने के लिए दौड़ता है, तब तक बड़े इंस्टीट्यूशंस यानी वेल्स अपना मुनाफा घर ले जा चुके होते हैं. अभी जो गिरावट आप देख रहे हैं, उसे बहुत से लोग सिर्फ एक मामूली सुधार या डिप समझ रहे हैं. सच्चाई यह है कि स्मार्ट मनी पहले ही मार्केट से बाहर निकल चुकी है. वे अब बस उस समय का इंतजार कर रहे हैं जब आम जनता इस जाल में पूरी तरह फंस जाए. यह स्थिति केवल कुछ दिनों की नहीं, बल्कि आने वाले कई सालों के करेक्शन की शुरुआत हो सकती है.

अपने पैसे को कैसे बचाएं?

सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि एक सामान्य आदमी अपनी मेहनत की कमाई को कैसे सुरक्षित रखे. पहली बात तो यह है कि सिर्फ खबरों की हेडिंग देखकर निवेश का फैसला न लें. बाजार में डर का माहौल है, इसलिए अपने पोर्टफोलियो को हेज करना यानी बचाव के उपाय करना बहुत जरूरी है. अपने निवेश को केवल एक जगह न रखें, बल्कि उसे अलग-अलग एसेट्स में बांटें. आने वाला समय आर्थिक रूप से काफी उठापटक भरा हो सकता है. समझदारी इसी में है कि आप भीड़ का हिस्सा न बनें और अपनी निवेश की रणनीति को दोबारा परखें.

याद रखें, निवेश में सबसे बड़ा जोखिम तब होता है जब आप हकीकत को नजरअंदाज कर भावनाओं में बहकर फैसले लेते हैं. सोना हमेशा से ही भरोसेमंद रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार की हलचल के बीच सावधानी बरतना ही आपकी सबसे बड़ी जीत है.

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