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Gold investment buy or wait in September: एमसीएक्स गोल्ड सोमवार को वीकेंड के बाद खुलने वाला है. शुक्रवार को सोना 0.57 फीसदी गिरकर ₹1,54,300 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ. अब ₹1,52,500 का सपोर्ट और ₹1,56,000 का रेजिस्टेंस अहम रहेगा. डॉलर, बॉन्ड यील्ड, फेड और मिडिल ईस्ट तनाव दिशा तय करेंगे.
सोने में सोमवार की सुबह सिर्फ कीमत नहीं देखनी होगी, बल्कि उसकी पहली चाल को समझना होगा. शुक्रवार को एमसीएक्स गोल्ड 0.57 फीसदी गिरकर ₹1,54,300 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था. अब वीकेंड के बाद बाजार खुलेगा तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि सोना पहले संभलेगा या फिर गिरावट का नया दौर शुरू होगा.
यूनिवेस्ट के 7 सितंबर के एमसीएक्स गोल्ड आउटलुक के मुताबिक ₹1,52,500 तत्काल सपोर्ट है, जबकि ₹1,56,000 अहम रेजिस्टेंस है. यानी मौजूदा स्तर से दोनों तरफ करीब ₹1,800-₹1,700 का जोन बाजार की अगली दिशा का संकेत दे सकता है. लेकिन इस बार कहानी सिर्फ चार्ट के दो स्तरों तक सीमित नहीं है. डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, फेड की ब्याज दर नीति और मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव सोमवार के कारोबार को अचानक पलट सकते हैं. चलिए कमोडिटी एंड शेयर मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय से समझते हैं सराफा बाजार क्या संकेत दे रहा है.
यूनिवेस्ट के अनुसार शुक्रवार को एमसीएक्स गोल्ड का कारोबार ₹1,53,700 से ₹1,55,433 प्रति 10 ग्राम के बीच रहा और अंत में यह ₹1,54,300 पर बंद हुआ. अब ₹1,52,500 का स्तर सबसे अहम सपोर्ट माना जा रहा है. इसके नीचे कमजोरी बढ़ने पर अगला मजबूत आधार ₹1,50,800 के आसपास देखा जा रहा है.
कमोडिटी एंड शेयर मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय कहते हैं इसका सीधा मतलब आम निवेशक के लिए यह है कि सोमवार को सिर्फ सोना महंगा या सस्ता होने पर फैसला लेने के बजाय यह देखना ज्यादा जरूरी होगा कि ₹1,52,500 का स्तर टिकता है या नहीं. अगर यह स्तर मजबूती से बना रहता है तो गिरावट को बाजार में खरीदारी के मौके के तौर पर देखा जा सकता है. लेकिन अगर यह सपोर्ट टूटता है तो जल्दबाजी में खरीदारी करने वालों को और नीचे का भाव देखने को मिल सकता है.
दूसरी तरफ ₹1,56,000 सोने के लिए बड़ा रेजिस्टेंस है. यूनिवेस्ट के मुताबिक सोमवार के कारोबार में अगर एमसीएक्स गोल्ड इस स्तर के ऊपर 15 मिनट की कैंडल पर टिकाऊ क्लोज देता है तो रुख बुलिश यानी तेजी वाला हो सकता है.
यही वह स्तर है जहां सोमवार की शुरुआती तेजी और वास्तविक मजबूती में अंतर समझ आएगा. अगर सोना केवल कुछ मिनट के लिए ₹1.56 लाख के ऊपर जाता है और फिर नीचे आ जाता है तो इसे मजबूत ब्रेकआउट नहीं माना जाएगा. यानी निवेशक के लिए असली संकेत सिर्फ ₹1.56 लाख छूना नहीं, बल्कि उसके ऊपर टिकना होगा.
सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमत डॉलर में तय होती है, इसलिए अमेरिकी डॉलर की मजबूती सोने पर दबाव डाल सकती है. इसके साथ अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड भी बेहद अहम है.
हाल में यही दोनों फैक्टर सोने की तेजी के लिए चुनौती बने हैं. रॉयटर्स के मुताबिक 1 सितंबर को अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और मजबूत डॉलर की वजह से सोना 2 फीसदी से ज्यादा गिरा था. उस समय ऊंची यील्ड ने बिना ब्याज देने वाली एसेट यानी सोने को रखने की लागत को निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक नहीं रहने दिया.
इसके उलट 2 सितंबर को डॉलर और अमेरिकी यील्ड में नरमी आई तो सोना करीब 1 फीसदी उछल गया. यह बताता है कि आने वाले दिनों में सोने की चाल को समझने के लिए सिर्फ घरेलू भाव देखना काफी नहीं होगा.
अब नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व पर भी है. अगस्त की महंगाई के आंकड़े इस सप्ताह आने वाले हैं और 15-16 सितंबर की फेड बैठक से पहले इन आंकड़ों को बाजार काफी गंभीरता से देख रहा है.
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त की हेडलाइन महंगाई दर 3.4 फीसदी और कोर महंगाई 2.4 फीसदी रहने का अनुमान है. मजबूत महंगाई फेड पर ब्याज दर बढ़ाने का दबाव बढ़ा सकती है, जबकि नरम आंकड़े दरों को स्थिर रखने की उम्मीद मजबूत कर सकते हैं.
यही वजह है कि अगर बाजार को फेड की तरफ से ब्याज दरों को लेकर नरम संकेत मिलते हैं तो सोने को सहारा मिल सकता है. इसके उलट महंगाई ज्यादा रहने पर यील्ड और डॉलर में तेजी सोने की कीमत पर दबाव डाल सकती है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव आम तौर पर सोने के लिए सकारात्मक माना जाता है, क्योंकि अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक सुरक्षित निवेश की तरफ जाते हैं. लेकिन इस बार एक पेच भी है.
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद तेल की कीमतों में तेजी आई है. रॉयटर्स के मुताबिक 7 सितंबर को ब्रेंट क्रूड बढ़कर करीब 96.80 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जबकि डब्ल्यूटीआई 92.14 डॉलर तक गया. स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से जुड़े घटनाक्रम ने सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ाई है.
महंगा तेल महंगाई का दबाव बढ़ा सकता है. इससे अमेरिकी फेड के लिए ब्याज दरों में नरमी करना मुश्किल हो सकता है. यानी मिडिल ईस्ट तनाव एक तरफ सोने की सेफ हेवन डिमांड बढ़ा सकता है, लेकिन दूसरी तरफ महंगाई और ऊंची यील्ड के रास्ते सोने पर दबाव भी बना सकता है. यही इस सोमवार के सोने की सबसे दिलचस्प और छिपी हुई कहानी है.
देव कहते हैं अगर आपका मकसद निवेश है तो सोमवार की शुरुआती हलचल देखकर पूरा पैसा एक साथ लगाना जोखिम भरा हो सकता है. ₹1,52,500 के आसपास सोने की चाल और ₹1,56,000 के ऊपर टिकने की क्षमता ज्यादा महत्वपूर्ण संकेत देगी.
₹1,52,500 के ऊपर स्थिरता बनी रहती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार से भी सपोर्ट मिलता है तो धीरे-धीरे खरीदारी की रणनीति पर विचार किया जा सकता है. वहीं अगर सपोर्ट टूटता है तो अगले स्तरों पर भाव मिलने का इंतजार करना ज्यादा सावधानी भरा रास्ता हो सकता है.
सबसे अहम बात यह है कि सोने में सिर्फ मिडिल ईस्ट तनाव देखकर तेजी की उम्मीद करना सही नहीं होगा. इस समय डॉलर, बॉन्ड यील्ड और फेड की नीति भी उतनी ही ताकत से कीमत को ऊपर-नीचे कर सकती है.
देवकृष्ण पांडेय कहते हैं कि 7 सितंबर को सोने की दिशा समझने के लिए सबसे पहले ₹1,52,500 का सपोर्ट देखना होगा. इसके बाद ₹1,56,000 के रेजिस्टेंस पर नजर रहेगी. तीसरा संकेत डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का होगा. चौथा संकेत फेड की ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें होंगी और पांचवां मिडिल ईस्ट में तनाव तथा उससे जुड़ी तेल कीमतों की चाल होगी.
फिलहाल एमसीएक्स गोल्ड के लिए तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं है. शुक्रवार का ₹1,54,300 का बंद भाव इन दोनों अहम स्तरों के बीच है. इसलिए सोमवार का पहला मजबूत ब्रेकआउट ही अगले बड़े मूव का संकेत दे सकता है. यूनिवेस्ट ने भी वीकेंड के दौरान कॉमेक्स, एलएमई और रुपया-डॉलर की चाल को सोमवार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण बताया है.
आम खरीदार के लिए इसका मतलब साफ है. अगर आप शादी, ज्वेलरी या निवेश के लिए सोना खरीदने की तैयारी में हैं तो सोमवार की पहली तेजी देखकर घबराकर खरीदारी करने के बजाय सपोर्ट और ग्लोबल संकेतों को साथ देखकर फैसला लेना ज्यादा समझदारी होगी.
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