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Gold- Silver Price Prediction: 20 जुलाई 2026 को सराफा बाजार में अनिश्चितता का माहौल है. एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय के अनुसार, वैश्विक तनाव और आर्थिक नीतियों के कारण सोने-चांदी की कीमतों में बड़ा बदलाव दिख रहा है. गहनों के बजाय डिजिटल निवेश बेहतर है.
आज 20 जुलाई 2026 की सुबह जब आप सोने के भाव देख रहे होंगे, तो मन में एक सवाल जरूर आया होगा कि क्या हमारी बचत सुरक्षित है? बाजार में इस वक्त जो खलबली मची है, वह महज एक दिन का उतार-चढ़ाव नहीं है. सोने और चांदी के तेवर जिस तरह से 2026 में बदल रहे हैं, उसने हर छोटे-बड़े निवेशक को सोच में डाल दिया है. क्या यह घबराहट में सोना बेचने का समय है या फिर यह निवेश करने का सुनहरा अवसर है? इसका सीधा जवाब बाजार की उन गहराइयों में छिपा है जिसे आम आदमी अक्सर अनदेखा कर देता है.
| शहर | 24K सोना (प्रति 10 ग्राम) | 22K सोना (प्रति 10 ग्राम) | चांदी (प्रति 1 किलोग्राम) |
| दिल्ली | ₹1,41,610 | ₹1,29,809 | ₹2,16,860 |
| मुंबई | ₹1,41,610 | ₹1,29,809 | ₹2,16,860 |
| बेंगलुरु | ₹1,41,610 | ₹1,29,809 | ₹2,16,860 |
| कोलकाता | ₹1,41,610 | ₹1,29,809 | ₹2,16,860 |
| हैदराबाद | ₹1,41,610 | ₹1,29,809 | ₹2,16,860 |
| अहमदाबाद | ₹1,41,610 | ₹1,29,809 | ₹2,16,860 |
(स्रोत: बुलियन मार्केट और बाजार संकेतकों के आधार पर अनुमानित दरें
मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय का मानना है कि इस साल सोने के दाम में जो बदलाव आए हैं, वे ऐतिहासिक हैं. पांडेय बताते हैं कि वैश्विक राजनीति और डॉलर की चाल ही आज सराफा बाजार की असली ड्राइवर है. उनका कहना है कि बाजार में जो खलबली दिख रही है, वह मुख्य रूप से केंद्रीय बैंकों की बदलती ब्याज दरों की रणनीति का नतीजा है. देवकृष्ण पांडेय के मुताबिक, इस समय सोना और चांदी दोनों ही दिशाहीन होकर एक बड़े सुधार की ओर बढ़ रहे हैं. जो निवेशक आज बिना सोचे-समझे बाजार में कूद रहे हैं, वे शायद बड़ी भूल कर रहे हैं, क्योंकि मार्केट के हर छोटे कदम पर नजर रखना इस वक्त अनिवार्य है.
ज्यादातर भारतीय परिवारों में सोना खरीदने का मतलब गहने बनवाना होता है, लेकिन निवेश की दृष्टि से देवकृष्ण पांडेय इसे बिल्कुल अलग नजरिए से देखते हैं. उनका साफ मानना है कि मौजूदा हालात में गहनों में निवेश करना सीधा घाटे का सौदा हो सकता है. मेकिंग चार्जेस और जीएसटी की मार आपकी पूंजी को सीधे 15 से 20 फीसदी तक कम कर देती है. यदि आप निवेश के उद्देश्य से सोना ले रहे हैं, तो डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसे विकल्पों पर विचार करना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है, जो आपको सुरक्षित रिटर्न दे सकते हैं.
क्या आपने कभी सोचा है कि जब दुनिया में तनाव बढ़ता है, तो आपकी तिजोरी में रखा सोना अचानक क्यों उछलने लगता है? आज 20 जुलाई 2026 को बुलियन मार्केट में जो हलचल है, वह सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि वैश्विक अनिश्चितता का आईना है. आम आदमी को लगता है कि सोना सिर्फ गहनों का जरिया है, लेकिन असल में यह दुनिया भर की सरकारों के डर का बैरोमीटर है. जब भी कहीं जंग या आर्थिक मंदी की आहट होती है, तो बड़े निवेशक सुरक्षित ठिकाने के तौर पर सोने को चुनते हैं, जिससे आम खरीदार के लिए भाव आसमान छूने लगते हैं.
बुलियन मार्केट में एक पुराना नियम है कि चांदी हमेशा सोने की तुलना में ज्यादा 'रिस्की' होती है. इस समय भी वही हो रहा है, जहां चांदी की कीमतों में सोने से कहीं ज्यादा तेज उछाल और गिरावट देखी जा रही है. एक्सपर्ट पांडेय कहते हैं कि चांदी सिर्फ एक कीमती धातु नहीं, बल्कि एक औद्योगिक धातु भी है, इसलिए इसकी मांग दुनिया भर की फैक्ट्रियों के उत्पादन से जुड़ी है. अगर आप चांदी में पैसा लगाने की सोच रहे हैं, तो बहुत सावधानी बरतें क्योंकि एक छोटी सी वैश्विक घटना रातों-रात इसकी कीमत को क्रैश कर सकती है. यह जोखिम का खेल है जहां समझदारी ही आपका सबसे बड़ा हथियार है.
क्या आप जानते हैं कि हजारों मील दूर हो रही कोई राजनीतिक घटना आपके शहर के सराफा बाजार की कीमत क्यों बदल देती है? 20 जुलाई 2026 के इस दौर में, देश-दुनिया में छिड़े व्यापारिक युद्ध और डॉलर की बदलती साख सीधे बुलियन मार्केट को प्रभावित कर रही है. जब डॉलर कमजोर होता है, तो सोना महंगा हो जाता है, क्योंकि पूरी दुनिया की ट्रेड में सोना डॉलर के मुकाबले मापा जाता है. एक आम आदमी के तौर पर, आपके लिए यह समझना जरूरी है कि सोना सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति का एक हथियार है.
निवेशकों के लिए इस वक्त सबसे बड़ी सावधानी यह है कि वे 'पैनिक बाइंग' से बचें. देवकृष्ण पांडेय के अनुसार, 2026 के इस दौर में नया नियम यह है कि बाजार के हर एक प्रतिशत के उतार-चढ़ाव पर न उलझें, बल्कि अपने पोर्टफोलियो में सोने को एक निश्चित अनुपात में ही रखें. सोना और चांदी कभी भी आपकी पूरी बचत का आधार नहीं होने चाहिए. अगर आप सुरक्षित रहना चाहते हैं, तो बाजार के गिरावट वाले दिनों में ही निवेश की शुरुआत करें और इसे एक लंबे नजरिए यानी कम से कम तीन से पांच साल के लिए रखें. सतर्कता और धैर्य ही आज बुलियन बाजार में पैसा बनाने का एकमात्र सफल तरीका है.
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