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एक से ज्यादा LIC पॉलिसी लेना समझदारी है या पैसों की बर्बादी? जानिए कब बनती है ताकत और कब बढ़ सकता है बोझ

Is it beneficial or disadvantageous to hold more than one LIC policy?: क्या आपके पास भी एक से ज्यादा LIC पॉलिसी हैं? या फिर कोई एजेंट आपको दूसरी-तीसरी पॉलिसी लेने की सलाह दे रहा है? तो क्या ये फायदेमंद सौदा होगा या हानिकारक? चलिए समझते हैं.

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एक से ज्यादा LIC पॉलिसी लेना समझदारी है या पैसों की बर्बादी? जानिए कब बनती है ताकत और कब बढ़ सकता है बोझ

एक से ज्यादा LIC पॉलिसी लेने से क्या मिलता है? (फोटो एआई)

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अक्सर लोग सोचते हैं कि कई पॉलिसियां लेने का मतलब सिर्फ ज्यादा प्रीमियम भरना है. लेकिन वित्तीय योजना के नजरिए से देखें तो सही तरीके से चुनी गई एक से अधिक LIC पॉलिसियां भविष्य की अलग-अलग जरूरतों को पूरा करने का मजबूत जरिया बन सकती हैं. हालांकि बिना योजना के कई पॉलिसियां लेना उल्टा नुकसान भी पहुंचा सकता है.

एक पॉलिसी से हर जरूरत पूरी नहीं होती

हर परिवार की आर्थिक जरूरतें अलग-अलग समय पर सामने आती हैं. बच्चे की पढ़ाई, शादी, रिटायरमेंट और परिवार की सुरक्षा जैसी जिम्मेदारियां एक साथ नहीं आतीं. यही वजह है कि कई वित्तीय सलाहकार अलग-अलग लक्ष्यों के लिए अलग-अलग पॉलिसियों की रणनीति अपनाने की सलाह देते हैं. उदाहरण के तौर पर एक पॉलिसी बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए हो सकती है, दूसरी रिटायरमेंट फंड के लिए और तीसरी परिवार की वित्तीय सुरक्षा के लिए. इससे हर लक्ष्य के लिए अलग फंड तैयार करने में आसानी होती है.

परिवार की सुरक्षा का दायरा बढ़ सकता है

महंगाई लगातार बढ़ रही है और जीवन की लागत पहले की तुलना में काफी ज्यादा हो चुकी है. ऐसे में केवल एक बीमा पॉलिसी से मिलने वाली राशि हर परिस्थिति में पर्याप्त साबित हो, यह जरूरी नहीं है. यदि किसी व्यक्ति के पास एक से अधिक पॉलिसियां हैं तो आकस्मिक स्थिति में परिवार को मिलने वाला कुल बीमा कवर बड़ा हो सकता है. इसका सीधा असर परिवार की आर्थिक सुरक्षा पर पड़ता है. यही कारण है कि कई लोग अपनी आय और जिम्मेदारियों के अनुसार अतिरिक्त पॉलिसियां जोड़ते हैं.

जरूरत पड़ने पर पॉलिसी बन सकती है आर्थिक सहारा

बहुत से लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि कुछ LIC पॉलिसियों पर लोन की सुविधा भी उपलब्ध होती है. यदि अचानक मेडिकल इमरजेंसी, बिजनेस की जरूरत या किसी अन्य कारण से पैसों की आवश्यकता पड़ जाए तो पॉलिसी की सरेंडर वैल्यू के आधार पर ऋण लिया जा सकता है. एक से अधिक पॉलिसियां होने पर जरूरत के समय ज्यादा राशि जुटाने की संभावना बढ़ जाती है. यह विकल्प कई बार महंगे निजी कर्ज की तुलना में अधिक सुविधाजनक साबित हो सकता है.

 अलग-अलग समय पर मिल सकती है रकम

कई लोग केवल एक बड़ी पॉलिसी लेते हैं और उसकी मैच्योरिटी का इंतजार करते हैं. लेकिन कुछ निवेशक अलग-अलग अवधि वाली पॉलिसियां चुनते हैं ताकि समय-समय पर धनराशि प्राप्त होती रहे. मान लीजिए एक पॉलिसी 10 साल में परिपक्व होती है और दूसरी 20 साल में. ऐसे में जीवन के अलग-अलग चरणों में आर्थिक सहायता मिल सकती है. इसे वित्तीय योजना का एक व्यवस्थित तरीका माना जाता है, क्योंकि जरूरत पड़ने पर पूरा पैसा एक साथ निकालने की आवश्यकता नहीं होती.

 टैक्स और बोनस का भी मिल सकता है फायदा

आयकर रिटर्न भरने वाले लोगों के लिए बीमा पॉलिसियां कर योजना का हिस्सा भी बनती हैं. पॉलिसियों पर जमा किए गए प्रीमियम पर आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत उपलब्ध नियमों के अनुसार कर लाभ मिल सकता है. इसके अलावा, कई पारंपरिक LIC योजनाओं में समय-समय पर बोनस भी जुड़ता है. यदि किसी व्यक्ति के पास कई पात्र पॉलिसियां हैं तो प्रत्येक पॉलिसी में अलग-अलग बोनस जमा हो सकता है, जिससे परिपक्वता राशि बढ़ सकती है.

 लेकिन हर किसी के लिए कई पॉलिसियां सही नहीं

एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि केवल ज्यादा पॉलिसियां होने से फायदा तय नहीं हो जाता. यदि प्रीमियम आपकी आय का बड़ा हिस्सा खा रहा है या सभी पॉलिसियां एक जैसी हैं, तो यह वित्तीय दबाव भी पैदा कर सकता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि किसी भी नई पॉलिसी से पहले अपनी आय, खर्च, मौजूदा बीमा कवर और भविष्य की जरूरतों का आकलन करना जरूरी है. लक्ष्य आधारित योजना हमेशा संख्या आधारित योजना से बेहतर मानी जाती है.

असली सवाल पॉलिसियों की संख्या नहीं, उनकी जरूरत है

वित्तीय योजना का मूल सिद्धांत यह नहीं है कि आपके पास कितनी LIC पॉलिसियां हैं, बल्कि यह है कि वे किस उद्देश्य को पूरा कर रही हैं. यदि अलग-अलग पॉलिसियां आपके जीवन के अलग-अलग वित्तीय लक्ष्यों से जुड़ी हैं, तो वे भविष्य की सुरक्षा मजबूत कर सकती हैं. लेकिन बिना योजना के सिर्फ सलाह या दबाव में खरीदी गई पॉलिसियां आपकी मासिक आय पर अतिरिक्त बोझ भी बन सकती हैं. यानी एक से ज्यादा LIC पॉलिसी फायदेमंद भी हो सकती है और नुकसानदायक भी. फर्क इस बात से पड़ता है कि उन्हें किस सोच और किस उद्देश्य के साथ लिया गया है.

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