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Top 5 Hosiery Wholesale Markets: केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय और विभिन्न व्यापारिक सर्वे के आंकड़ों के आधार पर तैयार यह रिपोर्ट भारत के टॉप 5 होजरी मार्केट की हकीकत को उजागर करती है. यह लेख बताता है कि कैसे इन मैन्युफैक्चरिंग हब्स से बेहद कम दामों में कपड़े खरीदकर लोग अपना बिजनेस खड़ा कर सकते हैं.
How to start clothing business with low investment: क्या आप भी हर महीने वही बंधी-बंधाई सैलरी पाकर थक चुके हैं और खुद का कुछ काम शुरू करने की सोच रहे हैं? कपड़ा एक ऐसा बिजनेस है जो कभी मंदी का शिकार नहीं होता, बशर्ते आपको सही जगह से सही दाम पर माल उठाना आता हो. आज हम सरकारी डेटा और व्यापारिक सर्वे के आधार पर भारत के उन 5 सबसे बड़े होजरी मार्केट की हकीकत बताने जा रहे हैं, जहां कपडे़ इतने सस्ते मिलते हैं कि आप उन्हें रिटेल बाजार में अच्छे मुनाफे के साथ बेचकर अपनी किस्मत बदल सकते हैं.
बड़े-बड़े रिटेलर्स और शोरूम मालिक भी इन्हीं बाजारों से सोर्सिंग करते हैं. खास बात ये है कि आप चाहें तो खुद का शोरूम लें या घर बैठे ऑनलाइन बिजनेस से भी कमाई कर सकते हैं. तो चलिए जानें कौन से हैं वो होलसेल मार्केट जहां से सबसे ज्यादा होजरी- या अन्य कपड़े उठाए जाते हैं.
पंजाब का लुधियाना शहर पूरे भारत में होजरी और ऊनी कपड़ों की राजधानी माना जाता है. एमएसएमई डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (MSME Development Institute) की रिपोर्ट और लुधियाना होजरी एसोसिएशन का डेटा यह साबित करता है कि भारत में बनने वाले कुल ऊनी (Woolen) होजरी कपड़ों का अकेले 85 से 90 फीसदी उत्पादन लुधियाना में होता है. विंटर वियर के मामले में यह देश का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब है.
इस बाजार का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है. अगर आप छोटे स्तर पर भी रेडीमेड कपड़ों का काम शुरू करना चाहते हैं, तो यहाँ मात्र 20 से 30 रुपये की शुरुआती कीमत पर इनरवियर्स और स्वेटर मिल जाते हैं. यहाँ से माल उठाकर आप अपने स्थानीय बाजार में डबल मार्जिन पर बेच सकते हैं.
पूर्वी भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र कोलकाता का बड़ा बाजार होजरी आइटम्स के लिए एक स्वर्ग की तरह है. वेस्ट बंगाल होजरी एसोसिएशन (WBHA) और फेडरेशन ऑफ होजरी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सर्वे के अनुसार, देश के कुल कॉटन इनरवियर (सूती अंडरगारमेंट्स और बच्चों के कपड़े) के मार्केट शेयर में कोलकाता का योगदान करीब 30 से 35 फीसदी है.
अगर आप कम बजट में अपना बिजनेस प्लान कर रहे हैं, तो बड़ा बाजार आपके लिए सबसे सटीक जगह है. यहाँ मैन्युफैक्चरर्स से सीधे डील करने पर कौड़ियों के दाम सामान मिल जाता है. इसका छुपा हुआ पहलू यह है कि यहाँ से खरीदे गए माल पर रिस्क फैक्टर न के बराबर होता है क्योंकि सूती कपड़ों की मांग साल के बारह महीने बनी रहती है.
देश की राजधानी दिल्ली का गांधी नगर एशिया के सबसे बड़े रेडीमेड गारमेंट और होजरी मार्केट में से एक है. दिल्ली चैंबर ऑफ कॉमर्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह असंगठित कपड़ा क्षेत्र में रोजगार देने वाला सबसे बड़ा हब है, जहां रोजाना का टर्नओवर करोड़ों रुपये में है. इस मार्केट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ हर लेटेस्ट फैशन की कॉपी बहुत तेजी से तैयार होकर थोक भाव में बिकने आ जाती है.
नए कारोबारियों के लिए यह मार्केट सबसे ज्यादा मददगार है क्योंकि यहाँ ट्रांसपोर्ट की सुविधा बहुत आसान है. आप देश के किसी भी कोने में बैठे हों, यहाँ से माल सीधे आपके शहर पहुंच जाता है. कम लागत में ज्यादा वैरायटी खरीदने के लिए यह जगह सबसे बेस्ट मानी जाती है.
गुजरात का सूरत शहर अपनी आधुनिक टेक्सटाइल मिलों के लिए जाना जाता है. सिल्क एंड आर्ट सिल्क मिल्स रिसर्च एसोसिएशन (SASMIRA) और सूरत टेक्सटाइल काउंसिल के आधिकारिक डेटा के अनुसार, देश में मैन-मेड फाइबर (MMF) यानी सिंथेटिक कपड़ों और होजरी ब्लेंड के मामले में सूरत की हिस्सेदारी 40 फीसदी से भी ज्यादा है. बड़े पैमाने पर उत्पादन होने के कारण यहाँ कपड़ो की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट बहुत कम आती है.
सूरत से जुड़कर बिजनेस करने का फायदा यह है कि आपको क्वॉलिटी के साथ कोई समझौता नहीं करना पड़ता. यहाँ कम कीमत में भी फिनिशिंग बहुत शानदार मिलती है, जिससे जब आप इसे अपने ग्राहकों को बेचते हैं, तो वे आपकी दुकान के स्थायी कस्टमर बन जाते हैं.
साउथ इंडिया का तिरुपुर शहर भारत का आधिकारिक 'निटवियर कैपिटल' है. केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय (Ministry of Textiles) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत से होने वाले कुल रेडीमेड गारमेंट्स और होजरी के एक्सपोर्ट में अकेले तिरुपुर की हिस्सेदारी लगभग 45% से 50% है. बड़े-बड़े इंटरनेशनल ब्रांड्स भी तिरुपुर की मिलों से ही अपने कपड़े तैयार करवाते हैं.
आम लोगों और छोटे दुकानदारों के लिए तिरुपुर में 'सरप्लस स्टॉक' का एक बहुत बड़ा मार्केट है. यहाँ बड़े ब्रांड्स के रिजेक्टेड या एक्स्ट्रा बचे हुए कपड़े बेहद सस्ते दामों पर मिल जाते हैं. इन कपड़ों को आप अपने शहर में ले जाकर किसी अच्छे शोरूम जैसी कीमत पर बेच सकते हैं, जिससे आपका प्रॉफिट मार्जिन कई गुना बढ़ जाता है.
केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय और विभिन्न व्यापारिक सर्वे के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, भारत के कुल कपड़ा निर्यात में अकेले तिरुपुर का योगदान लगभग 50 फीसदी है, जबकि सर्दियों के कपड़ों के मामले में लुधियाना का देश के 85 फीसदी से ज्यादा बाजार पर कब्जा है.
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