बिजनेस
Mega infrastructure projects: भारत में लाखों करोड़ रुपये के मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं. बुलेट ट्रेन से लेकर सेमीकंडक्टर हब तक करीब 10 बड़े प्रोजेक्ट्स सिर्फ देश की तस्वीर ही नहीं बदल रहे, बल्कि आम जनता की जेब, रोजगार और रोजाना की जिंदगी पर भी सीधा असर डालने वाले हैं.
क्या आपने कभी सोचा है कि देश में जो लाखों करोड़ रुपये के हाइवे, ट्रेन कॉरिडोर और चमचमाते एयरपोर्ट बन रहे हैं, उनका आपकी रोजमर्रा की जिंदगी से क्या कनेक्शन है? जब सरकार किसी प्रोजेक्ट पर बजट का एक बड़ा हिस्सा लगाती है, तो उसका सीधा असर आपकी जेब, आपके बच्चों की नौकरी और आपके सफर करने के तरीके पर पड़ता है. भारत इस समय इतिहास के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर बदलाव के दौर से गुजर रहा है. आइए जानते हैं उन 10 सबसे बड़े और महंगे प्रोजेक्ट्स के बारे में, जिन पर इस समय देश का सबसे बड़ा दांव लगा हुआ है.
नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) और रेल मंत्रालय की प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (MAHSR) पर काम तेजी से चल रहा है. इस प्रोजेक्ट का कुल अनुमानित बजट ₹1.1 लाख करोड़ से अधिक है, जिसे जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) के सहयोग से पूरा किया जा रहा है. मुंबई से अहमदाबाद के बीच दौड़ने वाली बुलेट ट्रेन सिर्फ एक हाई-स्पीड ट्रेन नहीं है, बल्कि यह भारत के तकनीकी कदम का एक बड़ा उदाहरण है. इस प्रोजेक्ट की लागत एक लाख करोड़ रुपये से भी अधिक बैठ रही है. आम आदमी के लिए इसका मतलब सिर्फ यह नहीं है कि सफर का समय आधा हो जाएगा, बल्कि इसके गलियारे के आसपास नए बिजनेस हब और रीयल एस्टेट के दाम आसमान छूने वाले हैं.
वेस्टर्न और ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) देश के इंफ्रास्ट्रक्चर की रीढ़ बन रहे हैं. डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, ईस्टर्न (EDFC) और वेस्टर्न (WDFC) कॉरिडोर के बड़े हिस्से को चालू कर दिया गया है. करीब ₹1.24 लाख करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट से मालगाड़ियों की रफ्तार 25 किमी/घंटा से बढ़कर 60 किमी/घंटा से अधिक हो चुकी है. अब तक पैसेंजर ट्रेनों के चक्कर में मालगाड़ियां लेट होती थीं, जिससे फैक्ट्रियों तक सामान देर से पहुंचता था और चीजें महंगी हो जाती थीं. इस बेहद महंगे प्रोजेक्ट के पूरी तरह चालू होने से माल ढुलाई की लागत बहुत कम हो जाएगी, जिसका सीधा फायदा आम कंजयूमर को रोजमर्रा के सामान की कम कीमतों के रूप में मिलेगा.
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और 'इण्डिया सेमीकंडक्टर मिशन' (ISM) के आधिकारिक नीति दस्तावेजों के अनुसार, सरकार ने देश में चिप मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित करने के लिए ₹76,000 करोड़ (लगभग 10 बिलियन डॉलर) का इंसेंटिव बजट जारी किया है, जिसके तहत टाटा और माइक्रोन जैसी कंपनियां गुजरात और असम में प्लांट लगा रही हैं. गुजरात और अन्य राज्यों में बन रहे सेमीकंडक्टर प्लांट्स पर सरकार और प्राइवेट कंपनियां पानी की तरह पैसा बहा रही हैं. आज मोबाइल से लेकर कार तक हर चीज में चिप की जरूरत होती है. इस प्रोजेक्ट की कामयाबी का सीधा मतलब है कि आने वाले समय में देश के लाखों युवाओं को अपने ही देश में हाई-टेक नौकरियां मिलेंगी और इलेक्ट्रॉनिक्स सामान सस्ते होंगे.
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के वार्षिक बजट और प्रोग्रेस डेटा के अनुसार, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (लागत लगभग ₹1 लाख करोड़) समेत देश के शीर्ष 10 एक्सप्रेसवे ग्रिड पर भारतमाला परियोजना के तहत काम किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य लॉजिस्टिक्स लागत को जीडीपी के 14% से घटाकर 9% पर लाना है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी सड़क परियोजनाएं देश के कौने-कोने को आपस में जोड़ रही हैं. इन एक्सप्रेसवे पर लाखों करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं. जमीन स्तर पर इसका असर यह हो रहा है कि छोटे कस्बों और गांवों के किसानों की पहुंच बड़े बाजारों तक आसान हो गई है. जमीन के दाम बढ़ रहे हैं और सफर में लगने वाला पेट्रोल-डीजल का खर्च भी घट रहा है.
समुद्री व्यापार को बढ़ावा देने के लिए सागरमाला और देश के हर गांव तक इंटरनेट पहुंचाने के लिए भारतनेट जैसे प्रोजेक्ट्स पर चुपचाप बहुत बड़ा निवेश किया जा रहा है. जहां एक तरफ बंदरगाहों के सुधरने से विदेशी व्यापार बढ़ रहा है, वहीं गांवों में इंटरनेट पहुंचाने से वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन पढ़ाई अब शहरों तक सीमित नहीं रह गई है. ये सभी प्रोजेक्ट मिलकर देश की इकोनोमी को एक नया बूस्टर डोज दे रहे हैं, जिसका असर आने वाले सालों में हर भारतीय के लाइफस्टाइल पर दिखेगा.
डिसक्लेमर: यह विश्लेषणात्मक रिपोर्ट रेल मंत्रालय (Ministry of Railways), सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH), इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY), नीति आयोग (NITI Aayog) तथा पीआईबी (PIB) द्वारा जारी आधिकारिक प्रगति रिपोर्ट और बजटीय आवंटन के आंकड़ों पर आधारित है.
अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारे गूगल, फेसबुक, x, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से.