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हर तीन महीने में 25 हजार चाहिए तो जानिए कितने रुपये करने होंगे जमा? SCSS का ये हिसाब रिटायरमेंट प्लान बदल सकता है

How much investment needed in SCSS for 25000 interest: रिटायरमेंट के बाद हर तीन महीने में 25 हजार रुपये की तय आमदनी चाहिए तो एससीएसएस में करीब 12.20 लाख रुपये निवेश करने होंगे. जुलाई से सितंबर 2026 तिमाही में 8.2 प्रतिशत ब्याज दर के हिसाब से सालाना 1,00,040 रुपये ब्याज मिलेगा.

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हर तीन महीने में 25 हजार चाहिए तो जानिए कितने रुपये करने होंगे जमा? SCSS का ये हिसाब रिटायरमेंट प्लान बदल सकता है

रिटायरमेंट के बाद कमाई बंद, खर्च जारी... एससीएसएस में 12.20 लाख लगाकर हर तिमाही पाएं 25 हजार (फोटो एआई)

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  • 12.20 लाख निवेश पर तिमाही 25 हजार
  • 8.2 प्रतिशत सालाना ब्याज दर लागू
  • पांच साल में 5 लाख ब्याज
  • हर तिमाही चार बार भुगतान
  • अधिकतम 30 लाख रुपये निवेश सीमा

रिटायरमेंट के बाद हर महीने की आमदनी बंद हो जाती है तो सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि घर के खर्च लगातार कैसे चलते रहें. ऐसे में अगर हर तीन महीने में 25 हजार रुपये की तय रकम खाते में आए, तो यह काफी राहत दे सकती है. लेकिन इसके लिए आपको पहले कितनी रकम लगानी होगी, इसका गणित जानना भी उतना ही जरुरी है.

केंद्र सरकार की सीनियर सिटीजंस सेविंग्स स्कीम यानी एससीएसएस इसी तरह की नियमित आमदनी देने वाली बचत योजना है. जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही के लिए इस पर 8.2 प्रतिशत सालाना ब्याज मिल रहा है. खास बात यह है कि एक बार खाता खुलने के बाद 5 साल की अवधि के लिए लागू ब्याज दर फिक्स रहती है.

25 हजार रुपये तिमाही ब्याज के लिए कितना पैसा लगेगा?

अगर आपका टारगेट एससीएसएस से हर तीन महीने में करीब 25 हजार रुपये ब्याज हासिल करना है, तो 8.2 प्रतिशत की सालाना ब्याज दर के हिसाब से करीब 12,19,512 रुपये का निवेश चाहिए.

एससीएसएस में निवेश 1,000 रुपये के गुणक में किया जाता है. इसलिए व्यवहारिक तौर पर आपको 12.20 लाख रुपये जमा करने होंगे. इस रकम पर 8.2 प्रतिशत की दर से हर तिमाही करीब 25,010 रुपये ब्याज मिलेगा.

यानी रिटायरमेंट के बाद हर तीन महीने में 25 हजार रुपये की जरूरत है तो 12.20 लाख रुपये का शुरुआती कोष बनाना होगा. यही इस स्कीम का सबसे अहम पहलू है. रकम छोटी नहीं है, लेकिन इसके बदले मिलने वाली आमदनी पहले से तय और नियमित रहती है.

पैसा कब और कैसे मिलता है?

एससीएसएस में ब्याज का हिसाब तिमाही आधार पर किया जाता है. ब्याज 31 मार्च, 30 जून, 30 सितंबर और 31 दिसंबर को जुड़ता है. इसके बाद इसका भुगतान अप्रैल, जुलाई, अक्टूबर और जनवरी के पहले कामकाजी दिन किया जाता है.

इसका मतलब यह हुआ कि निवेशक को साल में चार बार ब्याज की रकम मिलती है. जिन लोगों के पास पेंशन के अलावा आय का दूसरा नियमित जरिया नहीं है, उनके लिए यह व्यवस्था रोजमर्रा के खर्च मैनेज करने में उपयोगी हो सकती है.

एक अहम बात यह भी है कि तिमाही ब्याज मूलधन में जुड़कर कम्पाउंड नहीं होता. अगर निवेशक ब्याज की रकम हर तिमाही निकाल लेता है, तो वह रकम अलग से खर्च के लिए इस्तेमाल की जा सकती है.

5 साल में ब्याज से कितनी कमाई होगी?

12.20 लाख रुपये के निवेश पर 8.2 प्रतिशत सालाना ब्याज के हिसाब से एक साल में कुल 1,00,040 रुपये ब्याज मिलेगा. पांच साल तक यही ब्याज दर बनी रहने और हर तिमाही ब्याज निकालते रहने पर कुल ब्याज 5,00,200 रुपये होगा.

पांच साल पूरे होने पर 12.20 लाख रुपये का मूलधन वापस मिल जाएगा. इस तरह पांच साल के दौरान ब्याज से मिलने वाली कुल रकम 5,00,200 रुपये होगी, जबकि मूल निवेश अलग रहेगा.

हालांकि यहां एक बात समझना जरुरी है. यह कैलकुलेशन 8.2 प्रतिशत ब्याज दर को पूरे पांच साल के लिए आधार मानकर किया गया है. ब्याज दर में बदलाव होने की स्थिति में नए निवेश पर लागू दर अलग हो सकती है, इसलिए सिर्फ ब्याज की रकम देखकर फैसला करना ठीक नहीं होगा.

कौन खोल सकता है एससीएसएस खाता?

सीनियर सिटीजंस सेविंग्स स्कीम में सामान्य तौर पर 60 साल या उससे अधिक उम्र के नागरिक निवेश कर सकते हैं. इसके अलावा 55 से 60 साल की उम्र के रिटायर्ड सिविल कर्मचारी और 50 से 60 साल के रिटायर्ड रक्षा कर्मी भी तय शर्तों के तहत इस योजना में निवेश कर सकते हैं.

इसमें न्यूनतम 1,000 रुपये और अधिकतम 30 लाख रुपये तक जमा किए जा सकते हैं. खाता अकेले या जीवनसाथी के साथ संयुक्त रूप से खोला जा सकता है.

योजना की सामान्य अवधि पांच साल है. अवधि पूरी होने के बाद खाते को तीन साल के लिए आगे बढ़ाने का विकल्प भी मिलता है. हालांकि समय से पहले खाता बंद करने पर कुछ नियम और कटौती लागू हो सकती है.

25 हजार की कमाई सुनकर ये बात न भूलें 

एससीएसएस से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स फ्री नहीं है. ब्याज पर टैक्स लागू होता है और तय सीमा से अधिक ब्याज मिलने पर टीडीएस भी कट सकता है. इसलिए 25,010 रुपये तिमाही ब्याज मिलने का मतलब यह नहीं है कि पूरी रकम हर निवेशक के हाथ में टैक्स के बाद भी उतनी ही रहेगी.

यही इस कैलकुलेशन का छिपा हुआ पहलू है. अगर किसी रिटायर्ड व्यक्ति का लक्ष्य खर्च के लिए हर तीन महीने में 25 हजार रुपये की नेट रकम हासिल करना है, तो उसे सिर्फ 12.20 लाख रुपये के निवेश का हिसाब नहीं देखना चाहिए. टैक्स और टीडीएस के असर को भी अपनी आय और टैक्स स्थिति के हिसाब से समझना होगा.

रिटायरमेंट प्लान में इसका असली फायदा क्या है?

एससीएसएस का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों के लिए हो सकता है जिन्हें अपने रिटायरमेंट फंड से नियमित कैश फ्लो चाहिए और वे बाजार के उतार चढ़ाव से बचना चाहते हैं. 12.20 लाख रुपये लगाने पर हर तिमाही करीब 25 हजार रुपये की रकम मिलने का ढांचा पहले से समझा जा सकता है.

लेकिन पूरी रिटायरमेंट बचत को किसी एक स्कीम में डालना हर व्यक्ति के लिए सही रणनीति नहीं हो सकती. मेडिकल खर्च, महंगाई, इमरजेंसी फंड और अन्य नियमित जरूरतों को भी ध्यान में रखना जरूरी है.

इसलिए एससीएसएस को रिटायरमेंट इनकम के एक हिस्से के तौर पर देखना ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है. खासकर तब, जब आपकी प्राथमिकता ज्यादा रिटर्न के बजाय पूंजी की सुरक्षा और तय अंतराल पर आमदनी हो.

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