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चांदी 2.35 लाख पर भी नहीं थमी तो अगला ठिकाना क्या होगा? 40 फीसदी गिरावट के बाद भी खरीदने से पहले जान लें ये रिस्क

Silver Buying Level: चांदी ₹2.35 लाख प्रति किलो के आसपास आने के बाद भी खरीदारों की दिलचस्पी कमजोर है. जनवरी के ₹4 लाख के शिखर से 40 फीसदी से ज्यादा गिरावट के बावजूद बाजार में ओवरस्टॉकिंग का डर है. 2,000 टन चांदी का ऑर्डर नई चिंता बन गया है.

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चांदी 2.35 लाख पर भी नहीं थमी तो अगला ठिकाना क्या होगा? 40 फीसदी गिरावट के बाद भी खरीदने से पहले जान लें ये रिस्क

चांदी में ₹2.35 लाख पर भी खरीदारी का खतरा (फोटो एआई)

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  • ₹2.35 लाख पर भी खरीदारी सुस्त
  • ₹4 लाख से 40 फीसदी गिरावट
  • 2,000 टन चांदी का बड़ा स्टॉक
  • इंडस्ट्रियल डिमांड में कमजोरी का डर
  • अभी पूरी खरीदारी करना जोखिम भरा

चांदी की कीमत जिस स्तर पर पहुंचने के बाद आमतौर पर खरीदार टूट पड़ते हैं, वहां इस बार कहानी कुछ अलग दिखाई दे रही है. करीब ₹2.35 लाख प्रति किलो के भाव पर आने के बाद भी निवेशकों और कारोबारियों की खरीदारी में वह उत्साह नहीं दिख रहा, जिसकी उम्मीद की जा रही थी.

सबसे बड़ी चिंता सिर्फ कीमत की नहीं है. जनवरी के 4 लाख रुपये प्रति किलो से ज्यादा के शिखर से चांदी 40 फीसदी से अधिक नीचे आ चुकी है, फिर भी मांग कमजोर बनी हुई है. इसके ऊपर भारतीय डीलरों की तरफ से करीब 2,000 टन चांदी का ऑर्डर पहले से दिया जा चुका है. अगर मांग नहीं बढ़ी तो यह स्टॉक बाजार पर आगे भी दबाव बना सकता है. 

₹2.35 लाख पर सस्ती दिख रही चांदी में असली खतरा क्या है?

पहली नजर में ₹2.35 लाख का भाव काफी आकर्षक लग सकता है. जनवरी में जब चांदी ₹4 लाख के पार पहुंची थी, तब इस स्तर की कीमत पर खरीदारी करने वाले निवेशक को यह भाव बहुत सस्ता दिखाई देगा. लेकिन बाजार में केवल यह देखना काफी नहीं है कि कीमत कितनी गिर चुकी है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी के 4 लाख रुपये से ज्यादा के उच्च स्तर से चांदी में 40 फीसदी से अधिक की गिरावट आ चुकी है और इसके बाद भी निवेश की मांग में अपेक्षित तेजी नहीं आई है. कारोबारियों को चिंता है कि अगर खरीदारी वापस नहीं आती तो पहले से मंगाई गई चांदी का स्टॉक बाजार में दबाव बढ़ा सकता है.  

कमोडिटी और शेयर मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय कहते हैं कि आम खरीदार के लिए असली सवाल यह नहीं है कि चांदी 40 फीसदी गिर चुकी है, बल्कि यह है कि क्या गिरावट का दौर खत्म हो गया है. यही वह जगह है जहां जल्दबाजी नुकसान करा सकती है.

2,000 टन चांदी का ऑर्डर क्यों बन गया है बड़ा खतरा?

सराफा बाजार में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा करीब 2,000 टन चांदी के उस ऑर्डर को लेकर है, जो भारतीय डीलरों ने किया हुआ है. अगर बाजार में मांग उसी रफ्तार से नहीं लौटती है, तो इतनी बड़ी मात्रा में आने वाली चांदी का कुछ हिस्सा बिना बिके रह सकता है.

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में भी बताया गया है कि कीमतों में 40 फीसदी से ज्यादा गिरावट के बाद निवेश की मांग कमजोर होने से कोलकाता के सिल्वर रिफाइनरों और बुलियन डीलरों में ओवरस्टॉकिंग को लेकर चिंता बढ़ी है.  

इसका सीधा असर आम खरीदार पर पड़ सकता है. यदि डीलरों के पास स्टॉक ज्यादा और खरीदार कम हुए, तो बाजार में कीमतों पर दबाव बना रह सकता है. इसलिए केवल यह सोचकर पूरी रकम एक साथ लगाना कि भाव बहुत गिर गया है, फिलहाल सही रणनीति नहीं मानी जा सकती.

इंडस्ट्रियल डिमांड कमजोर हुई तो चांदी को दूसरा झटका

चांदी को केवल गहने या निवेश की धातु समझना गलती होगी. इसकी बड़ी मांग इंडस्ट्रियल इस्तेमाल से भी आती है. लेकिन यहीं से फिलहाल एक अहम चिंता निकल रही है.

सिल्वर इंस्टीट्यूट के 2026 आउटलुक के मुताबिक, इस साल इंडस्ट्रियल डिमांड में लगातार दूसरी साल गिरावट का अनुमान है. यह मांग करीब 639.6 मिलियन औंस रहने का अनुमान है. फोटोवोल्टिक यानी सोलर सेक्टर में चांदी की खपत घटने का दबाव है और इलेक्ट्रिकल तथा इलेक्ट्रॉनिक्स सेगमेंट में भी 6 फीसदी गिरावट का अनुमान दिया गया है.  

हालांकि पूरी तस्वीर नकारात्मक नहीं है. एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोबाइल और पावर ग्रिड में इस्तेमाल चांदी की मांग को सहारा दे सकते हैं. सिल्वर इंस्टीट्यूट के मुताबिक 2026 में कुल चांदी बाजार लगातार छठे साल डेफिसिट में रह सकता है.  

यही विरोधाभास चांदी को दिलचस्प बनाता है. शॉर्ट टर्म में डिमांड कमजोर पड़ सकती है, लेकिन लम्बी अवधि में इसकी इंडस्ट्रियल उपयोगिता अभी भी बड़ा सपोर्ट दे रही है.

गोल्ड-सिल्वर रेशियो क्या बता रहा है?

चांदी को समझने के लिए सिर्फ उसका भाव देखना पर्याप्त नहीं है. गोल्ड-सिल्वर रेशियो भी अहम संकेत देता है. हाल की बाजार रिपोर्ट के मुताबिक सोना करीब 4,400 डॉलर प्रति औंस और चांदी करीब 66 डॉलर प्रति औंस के आसपास रही, जिससे यह रेशियो लगभग 66 बनता है. ऐतिहासिक तौर पर 60 से 70 के बीच का स्तर सामान्य दायरे में माना जाता है. 

अगर यह रेशियो बहुत ऊपर जाता है तो इसका मतलब हो सकता है कि सोने की तुलना में चांदी अपेक्षाकृत कमजोर है. दूसरी तरफ रेशियो नीचे आने पर चांदी के बेहतर प्रदर्शन की संभावना बन सकती है.

इसलिए ₹2.35 लाख का भाव अकेला खरीदारी का सिग्नल नहीं है. निवेशक को चांदी की कीमत के साथ गोल्ड-सिल्वर रेशियो, डॉलर, ब्याज दरों और इंडस्ट्रियल डिमांड को भी देखना चाहिए.

एमसीएक्स पर कौन से स्तर अहम रहेंगे?

तकनीकी तस्वीर भी फिलहाल पूरी तरह मजबूत नहीं कही जा सकती. हालिया बाजार विश्लेषण में एमसीएक्स सिल्वर के लिए ₹2.26 लाख से ₹2.27 लाख के आसपास तत्काल रेजिस्टेंस और ₹2.30 लाख से ₹2.31 लाख के ऊपर टिकने पर ₹2.34 लाख से ₹2.35 लाख की तरफ रिकवरी की संभावना बताई गई थी. दूसरी तरफ ₹2.21 लाख से ₹2.20 लाख का क्षेत्र अहम सपोर्ट माना गया था. इसके नीचे जाने पर ₹2.15 लाख से ₹2.14 लाख तक कमजोरी का खतरा बताया गया था. 

इसका मतलब साफ है. ₹2.35 लाख के आसपास पहुंची चांदी को देखकर यह मान लेना कि अब गिरावट खत्म हो गई है, अभी जल्दबाजी होगी. बाजार को पहले ऊपरी स्तरों पर मजबूती दिखानी होगी.

अभी चांदी खरीदें या थोड़ा इंतजार करें?

देव कहते हैं कि अगर मकसद शादी, गिफ्ट या लंबे समय के इस्तेमाल के लिए फिजिकल चांदी खरीदना है तो पूरी खरीदारी एक ही भाव पर करने के बजाय हिस्सों में खरीदना ज्यादा संतुलित तरीका हो सकता है. इससे अगर बाजार और नीचे जाता है तो औसत खरीद भाव कम करने का मौका मिल सकता है.

वहीं अगर मकसद केवल शॉर्ट टर्म इन्वेस्टमेंट है तो ₹2.35 लाख के आसपास आकर तुरंत पूरी रकम लगाना जोखिम भरा हो सकता है. खासकर तब, जब बाजार में ओवरस्टॉकिंग की चिंता, कमजोर निवेश मांग और इंडस्ट्रियल डिमांड में कमी जैसे संकेत एक साथ दिखाई दे रहे हैं.

दूसरी तरफ लंबी अवधि के निवेशक के लिए तस्वीर पूरी तरह डराने वाली भी नहीं है. लगातार छठे साल बाजार में डेफिसिट की संभावना, एआई, ऑटो और पावर ग्रिड से जुड़ी मांग और फिजिकल इन्वेस्टमेंट में बढ़ोतरी चांदी को लंबी अवधि में सपोर्ट दे सकती है. सिल्वर इंस्टीट्यूट ने 2026 में फिजिकल इन्वेस्टमेंट में 20 फीसदी बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है.  

असल गेम भाव से ज्यादा टाइमिंग का है

चांदी में मौजूदा स्थिति का सबसे अहम सबक यही है कि बड़ी गिरावट हमेशा खरीदारी का आखिरी मौका नहीं होती. कई बार कीमत गिरने के बाद भी बाजार में नई कमजोरी बन सकती है.

₹2.35 लाख के आसपास चांदी उन खरीदारों के लिए आकर्षक जरूर दिख रही है, जो जनवरी के ₹4 लाख से ज्यादा के भाव को देख रहे हैं. लेकिन 2,000 टन के संभावित स्टॉक, कमजोर निवेश मांग और इंडस्ट्रियल डिमांड की चिंता को नजरअंदाज करना ठीक नहीं होगा.  

इसलिए मौजूदा स्तर पर सबसे संतुलित रणनीति एकमुश्त खरीदारी के बजाय चरणबद्ध खरीदारी और एमसीएक्स के अहम सपोर्ट स्तरों पर नजर रखने की हो सकती है. अगर चांदी ₹2.20 लाख के आसपास के सपोर्ट को बचाए रखती है और ऊपर ₹2.30 से ₹2.31 लाख के क्षेत्र के ऊपर मजबूती दिखाती है, तो बाजार का रुख ज्यादा भरोसेमंद हो सकता है. इसके उलट सपोर्ट टूटने पर नीचे के स्तरों का जोखिम खुल सकता है.

लॉन्ग टर्म के नजरिए से चांदी की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है, लेकिन शॉर्ट टर्म में सस्ते भाव का लालच नुकसान भी करा सकता है. इसलिए इस समय सवाल यह नहीं कि चांदी सस्ती है या महंगी, बल्कि यह है कि खरीदारी किस हिस्से में और कितनी मात्रा में की जाए.

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