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Share Market New Closing Rules: सोमवार को बाजार बंद होने के ठीक बाद निफ्टी में आए अचानक 200 अंकों के उछाल और नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) नियमों पर निवेशकों में फैले भ्रम को दूर करते हुए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी तरह एक पारदर्शी और स्वाभाविक प्रक्रिया है.
NSE closing auction session impact: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार का सत्र एक ऐसा अनूठा अनुभव लेकर आया जिसने स्थापित ट्रेडिंग आदतों को झकझोर कर रख दिया. जब दिनभर के सामान्य कारोबार के बाद घंटी बजने वाली थी, ठीक उसी समय सूचकांक में अचानक आई एक जोरदार छलांग ने सबको सकते में डाल दिया. निवेशकों को लगा कि बाजार में कोई तकनीकी खराबी आ गई है या कोई बड़ा उलटफेर हुआ है, क्योंकि देखते ही देखते निफ्टी ने महज कुछ पलों में 200 अंकों की बड़ी छलांग लगा दी.
यह पूरा विवाद और भ्रम असल में सेबी के मार्गदर्शन में लागू किए गए एक बिल्कुल नए बदलाव की वजह से पैदा हुआ है. बाजार नियामक ने वायदा और विकल्प (F&O) सेगमेंट में आने वाले शेयरों के लिए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन यानी सीएएस व्यवस्था की शुरुआत की है. इस नई व्यवस्था के तहत, एफएंडओ श्रेणी के शेयरों में सामान्य निरंतर कारोबार दोपहर 3:15 बजे ही बंद हो जाता है. इसके बाद 3:15 बजे से 3:35 बजे तक एक विशेष नीलामी सत्र चलाया जाता है, जिसमें खरीदार और बिक्रेता अपने ऑर्डर जमा करते हैं. चूंकि पहले यह नियम नहीं था और लोग पुराने 3:30 बजे वाले आखिरी तीस मिनट के औसत मूल्य (VWAP) के आदी थे, इसलिए इस बदलाव ने intraday और सामान्य निवेशकों को पूरी तरह हैरान कर दिया.
जी हां, इस पूरे विवाद और भ्रम के पीछे असल वजह शेयर बाजार की टाइमिंग में हुआ वह बदलाव है जिसे सेबी के मार्गदर्शन में लागू किया गया है. बाजार नियामक ने वायदा और विकल्प (F&O) सेगमेंट में आने वाले शेयरों के लिए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) की शुरुआत की है. इस नए नियम के तहत, एफएंडओ श्रेणी के शेयरों में सामान्य निरंतर कारोबार दोपहर 3:15 बजे ही बंद हो जाता है. इसके बाद 3:15 बजे से 3:35 बजे तक एक विशेष नीलामी सत्र चलाया जाता है, जिसमें खरीदार और विक्रेता अपने ऑर्डर जमा करते हैं. चूंकि पहले ऐसा कोई नियम नहीं था और लोग पुराने 3:30 बजे वाले आखिरी तीस मिनट के औसत मूल्य (VWAP) के आदी थे, इसलिए इस बदलाव ने निवेशकों को पूरी तरह हैरान कर दिया. इसके साथ ही, डेरिवेटिव्स यानी एफएंडओ की ट्रेडिंग का समय शाम 3:40 बजे तक बढ़ा दिया गया है ताकि ट्रेडर्स को नई क्लोजिंग प्रक्रिया के बाद संभलने का मौका मिल सके.
इस अचानक आए उछाल पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने विस्तृत सफाई जारी करते हुए बताया कि यह किसी गड़बड़ी का परिणाम नहीं है, बल्कि नई मूल्य खोज प्रणाली का हिस्सा है. एनएसई के अनुसार, दोपहर 3:15 से 3:30 बजे के बीच जब ऑर्डर मिलान और संतुलन मूल्य तय करने की प्रक्रिया चल रही थी, तब सूचकांक के सांकेतिक मान लगातार अपडेट हो रहे थे. चूंकि रिलायंस, आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक जैसे दिग्गज शेयरों के क्लोजिंग भाव इस नीलामी के जरिए तय हुए और वे पिछले कारोबार से ऊपर निकले, तो उसका सीधा असर निफ्टी के आधिकारिक बंद होने वाले स्तर पर पड़ा. इस नई पारदर्शी प्रक्रिया के तहत निफ्टी 50 इंडेक्स 24,774.30 के स्तर पर जाकर बंद हुआ.
लोगों के मन में यह सवाल भी था कि अलग-अलग एक्सचेंजों पर कीमतों में अंतर क्यों दिखाई दे रहा है. इस पर एक्सचेंज का साफ कहना है कि बीएसई और एनएसई दोनों की अपनी स्वतंत्र और अलग ऑर्डर बुक होती हैं. चूँकि दोनों जगहों पर भाग लेने वाले निवेशकों के खरीदने और बेचने के ऑर्डर अलग-अलग मात्रा में होते हैं, इसलिए व्यक्तिगत शेयरों और अंततः सूचकांक के मूल्यों में भिन्नता आना पूरी तरह से स्वाभाविक और गणितीय रूप से तय है. पहले दिन ही इस सत्र में हजारों की संख्या में पैन (PAN) और ट्रेडिंग सदस्यों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जो यह बताता है कि यह प्रणाली आने वाले समय में बाजार को और अधिक पारदर्शी बनाएगी.
हर आम निवेशक के जेहन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह नई व्यवस्था उनकी जेब पर भारी पड़ेगी. वित्तीय जानकारों का मानना है कि चूंकि यह नया नियम पहली बार लागू हुआ है, इसलिए शुरुआती दिनों में इस तरह की असमंजस की स्थिति बनना लाजमी था. हालांकि लंबे समय में यह नीलामी सत्र बाजार में किसी भी आखिरी मिनट की धांधली या कृत्रिम उतार-चढ़ाव को रोकने में मददगार साबित होगा. निवेशकों को अब बाजार बंद होने के अंतिम पलों के इस नए मैकेनिज्म को अपनी रणनीति में शामिल करना होगा, ताकि वे भविष्य में इस तरह के मूल्य बदलावों के लिए पूरी तरह तैयार रह सकें.
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