बिजनेस
PMEGP margin money subsidy calculation: बिजनेस शुरू करने के लिए बड़ी पूंजी नहीं है तो पीएमईजीपी योजना मददगार हो सकती है. मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट के लिए 50 लाख और सर्विस या ट्रेडिंग के लिए 20 लाख तक की परियोजना लागत पर मार्जिन मनी सब्सिडी मिल सकती है. लेकिन बैंक की मंजूरी जरूरी है.
Government subsidy scheme for new business: बिजनेस शुरू करने में सबसे बड़ी रुकावट अक्सर आइडिया नहीं बल्कि पैसा होता है. कई लोगों के पास काम शुरू करने की समझ और अनुभव तो होता है, लेकिन मशीन, जगह, कच्चा माल और शुरुआती खर्च के लिए लाखों रुपये जुटाना मुश्किल होता है.
ऐसे लोगों के लिए प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम यानी पीएमईजीपी एक अहम विकल्प बन सकता है. हालांकि इसे सीधे सरकार से मिलने वाला लोन समझना सबसे बड़ी गलती होगी. यह बैंक लोन से जुड़ी सब्सिडी योजना है, जिसमें सरकार परियोजना की लागत के एक हिस्से पर मार्जिन मनी सब्सिडी देती है. मुताबिक बैंक परियोजना का करीब 90 से 95 फीसदी तक वित्त पोषण कर सकता है.
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के अनुसार पीएमईजीपी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय यानी एमएसएमई मंत्रालय के अंतर्गत खादी और ग्रामोद्योग आयोग यानी केवीआईसी द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर लागू की जाती है. राज्य स्तर पर इसे केवीआईबी और जिला उद्योग केंद्र यानी डीआईसी के जरिए लागू किया जाता है.
यह योजना साल 2008 में प्रधानमंत्री रोजगार योजना यानी पीएमआरवाई और ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम यानी आरईजीपी को मिलाकर शुरू की गई थी. इसका मुख्य मकसद नए सूक्ष्म उद्यमों को शुरू करने के लिए बैंक वित्त और सरकारी सब्सिडी का रास्ता उपलब्ध कराना है.
पीएमईजीपी की सबसे खास बात परियोजना लागत और मिलने वाली सब्सिडी का गणित है. मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए अधिकतम 50 लाख रुपये और सर्विस या ट्रेडिंग यूनिट के लिए अधिकतम 20 लाख रुपये की परियोजना लागत पर मार्जिन मनी सब्सिडी मिलती है. अगर परियोजना की लागत इस सीमा से ज्यादा है तो अतिरिक्त रकम पर सब्सिडी नहीं मिलेगी. बाकी राशि बैंक बिना सब्सिडी के वित्त पोषित कर सकता है.
सब्सिडी की दर हर व्यक्ति के लिए एक जैसी नहीं है. सामान्य श्रेणी के आवेदक को शहरी क्षेत्र में 15 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्र में 25 फीसदी सब्सिडी मिलती है. इस श्रेणी में खुद का योगदान 10 फीसदी बताया गया है.
विशेष श्रेणी के आवेदकों के लिए तस्वीर और ज्यादा अलग है. शहरी क्षेत्र में 25 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्र में 35 फीसदी मार्जिन मनी सब्सिडी का प्रावधान स्रोत में दिया गया है. विशेष श्रेणी में एससी, एसटी, ओबीसी, महिला, अल्पसंख्यक, दिव्यांग, पूर्व सैनिक और पूर्वोत्तर, पहाड़ी तथा सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़े आवेदक शामिल हैं. इन मामलों में खुद का योगदान 5 फीसदी बताया गया है.
इस योजना का असर समझने के लिए स्रोत में दिया गया उदाहरण काफी अहम है. मान लीजिए ग्रामीण क्षेत्र में एक महिला उद्यमी 20 लाख रुपये की फूड प्रोसेसिंग यूनिट शुरू करना चाहती हैं. यह विशेष श्रेणी और ग्रामीण क्षेत्र का मामला होगा. इसमें खुद का योगदान 5 फीसदी यानी 1 लाख रुपये होगा. सरकार की मार्जिन मनी सब्सिडी 35 फीसदी यानी 7 लाख रुपये होगी. बाकी 12 लाख रुपये यानी 60 फीसदी बैंक टर्म लोन के रूप में देगा.
यहां एक ऐसा पहलू है जिसे बहुत से लोग पहली नजर में मिस कर सकते हैं. सब्सिडी का मतलब यह नहीं है कि शुरुआत से ही आपके ऊपर केवल 12 लाख रुपये का लोन रहेगा. स्रोत के अनुसार तीन साल तक ईएमआई पूरी लोन राशि पर बनती है और तीसरे साल के अंत में सब्सिडी की रकम लोन में एडजस्ट होकर मूलधन को कम करती है.
यानी बिजनेस शुरू करने वाले व्यक्ति को शुरुआती सालों में कैश फ्लो का हिसाब बहुत सावधानी से रखना होगा. सिर्फ सब्सिडी मिलने की उम्मीद में बड़ी ईएमआई वाला प्रोजेक्ट चुनना जोखिम भरा हो सकता है.
पीएमईजीपी का नाम सुनकर यह मान लेना ठीक नहीं है कि आवेदन करते ही 50 लाख रुपये मिल जाएंगे. स्रोत साफ करता है कि यह सीधा सरकारी लोन नहीं है. बैंक को आपका प्रोजेक्ट व्यावसायिक रूप से व्यवहारिक लगना जरूरी है.
यही वजह है कि प्रोजेक्ट रिपोर्ट इस योजना में बेहद महत्वपुर्ण हो जाती है. बिक्री और मुनाफे के ऐसे आंकड़े दिखाने से बचना होगा जो जमीन पर संभव ही न हों. स्रोत के मुताबिक मजबूत और यथार्थवादी प्रोजेक्ट रिपोर्ट आवेदन की मंजूरी की सबसे बड़ी कुंजी है.
आम आदमी के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि बिजनेस आइडिया जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी उसका पूरा आर्थिक मॉडल है. बैंक यह देखेगा कि कारोबार से आमदनी कैसे आएगी और लोन चुकाने की क्षमता कहां से बनेगी.
पीएमईजीपी के अनुसार आवेदक की न्यूनतम आयु 18 साल होनी चाहिए. 10 लाख रुपये से अधिक की मैन्युफैक्चरिंग परियोजना और 5 लाख रुपये से अधिक की सर्विस परियोजना के लिए कम से कम 8वीं पास होना जरूरी है.
आवेदन पीएमईजीपी ई-पोर्टल के जरिए ऑनलाइन किया जाता है. इसमें परियोजना रिपोर्ट, पहचान प्रमाण, श्रेणी प्रमाण पत्र और शैक्षणिक योग्यता से जुड़े दस्तावेज अपलोड करने होते हैं.
एक और जरुरी शर्त ईडीपी यानी उद्यमिता विकास कार्यक्रम का प्रशिक्षण है. स्रोत के अनुसार 2 लाख रुपये से अधिक की परियोजनाओं के लिए ईडीपी प्रशिक्षण पूरा करना अनिवार्य है. इसे नजरअंदाज करने पर सब्सिडी जारी होने में देरी हो सकती है.
पीएमईजीपी के तहत सब्सिडी का फायदा लेने की प्रक्रिया केवल लोन मंजूर होने तक खत्म नहीं होती. स्रोत में बताया गया है कि सब्सिडी क्लेम करने से पहले यूनिट का उद्यम यानी एमएसएमई पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है.
यानी आवेदन करने वाले व्यक्ति को शुरुआत से ही दस्तावेज, प्रशिक्षण, बैंक प्रक्रिया और पंजीकरण का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखना चाहिए. छोटी सी लापरवाही आगे सब्सिडी जारी होने में अड़चन बन सकती है.
पीएमईजीपी के अनुसार उन लोगों के लिए ज्यादा उपयोगी हो सकती है जिनके पास कारोबार का स्पष्ट मॉडल है लेकिन शुरुआती पूंजी सीमित है. खासकर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू करने वाले व्यक्ति के लिए 50 लाख रुपये तक की परियोजना लागत वाली सीमा बड़ा अवसर दे सकती है.
लेकिन इस योजना को मुफ्त पैसा समझना सही नहीं होगा. लोन बैंक से जुड़ा है और उसे चुकाने की जिम्मेदारी भी रहती है. सब्सिडी आपके बिजनेस की बिक्री, कैश फ्लो या मुनाफे की गारंटी नहीं देती.
इसका सबसे बड़ा छिपा हुआ पहलू यही है कि सब्सिडी से प्रोजेक्ट की शुरुआती वित्तीय जरूरत आसान हो सकती है, लेकिन गलत बिजनेस मॉडल को सब्सिडी भी सफल नहीं बना सकती. इसलिए पहले बाजार की मांग, कच्चे माल की लागत, कर्मचारियों का खर्च, बिक्री का अनुमान और ईएमआई चुकाने की क्षमता देखना ज्यादा जरूरी है.
पीएमईजीपी के जरिए नया बिजनेस शुरू करने वालों को बैंक लोन के साथ मार्जिन मनी सब्सिडी का फायदा मिल सकता है. मैन्युफैक्चरिंग के लिए 50 लाख और सर्विस या ट्रेडिंग के लिए 20 लाख रुपये तक की परियोजना लागत पर यह सुविधा महत्वपूर्ण हो सकती है. लेकिन बैंक की मंजूरी, व्यवहारिक प्रोजेक्ट रिपोर्ट, जरूरी प्रशिक्षण और दस्तावेजी प्रक्रिया को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
बिजनेस शुरू करने वाले व्यक्ति के लिए असली सवाल यह नहीं होना चाहिए कि सरकार कितनी सब्सिडी देगी. असली सवाल यह होना चाहिए कि सब्सिडी मिलने के बाद भी क्या कारोबार अपनी ईएमआई और रोजमर्रा के खर्च निकालते हुए टिकाऊ मुनाफा कमा पाएगा.
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