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Gold-Silver return in one year: सोने-चांदी को लेकर पिछले एक साल में सिर्फ भाव नहीं बदले, निवेशकों की कमाई का गणित भी पूरी तरह बदल गया. जिस सोने को आमतौर पर सुरक्षित निवेश माना जाता है, उसने करीब 50 फीसदी का रिटर्न दिया, जबकि चांदी ने 100 फीसदी से ज्यादा की छलांग लगा दी.
सोने और चांदी में पैसा लगाने वालों के लिए पिछला एक साल सिर्फ कमाई का नहीं, बल्कि खतरे की घंटी का भी रहा है. सोने ने करीब 50 फीसदी रिटर्न दिया, जबकि चांदी करीब दोगुनी हो गई. लेकिन सवाल अब यह नहीं है कि कितना चढ़ा, असली सवाल यह है कि क्या इतनी तेज रफ्तार दोबारा दिखेगी?
यानी अगर किसी निवेशक ने एक साल पहले 1 लाख रुपये सोने में लगाए थे तो उसकी कीमत करीब 1.50 लाख रुपये के आसपास पहुंच गई. वहीं इतनी ही रकम चांदी में लगाने वाले निवेशक के निवेश का मूल्य करीब 2 लाख रुपये से ऊपर पहुंच गया. हालांकि यह गणना धातु के बाजार भाव पर आधारित है, इसमें खरीद-बिक्री के खर्च, टैक्स और ज्वेलरी की मेकिंग चार्ज शामिल नहीं हैं.
11 अगस्त 2025 के आसपास 24 कैरेट सोने का भाव करीब 1.01 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी करीब 1.14 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर थी. मौजूदा बाजार में 24 कैरेट सोना करीब 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच चुका है, जबकि चांदी 2.30 लाख रुपये प्रति किलो के ऊपर कारोबार कर रही है. इस हिसाब से देखें तो सोने में करीब 50 फीसदी की तेजी आई है, जबकि चांदी ने करीब 100 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न दिया है. ताजा बाजार में भी तेजी का मूड बना हुआ है. 10 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 4,356 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया था. इसी दौरान चांदी करीब 65 डॉलर प्रति औंस पर पहुंची.
मान लीजिए किसी निवेशक ने 11 अगस्त 2025 के आसपास 1 लाख रुपये का सोना खरीदा था. करीब 50 फीसदी तेजी के हिसाब से उसका बाजार मूल्य लगभग 1.50 लाख रुपये हो गया. यानी करीब 50 हजार रुपये का मुनाफा. अब यही गणित चांदी में लगाइए. 100 फीसदी से ज्यादा की तेजी का मतलब है कि 1 लाख रुपये का निवेश करीब 2 लाख रुपये से ऊपर पहुंच गया. यानी चांदी ने करीब 1 लाख रुपये या उससे अधिक का फायदा दिया.
यहीं से सोने और चांदी की कहानी अलग हो जाती है. सोना अपेक्षाकृत स्थिर तरीके से ऊपर बढ़ा, जबकि चांदी ने बहुत ज्यादा तेज चाल दिखाई. लेकिन ज्यादा रिटर्न के साथ ज्यादा जोखिम भी आया.
11 अगस्त 2025 से 11 अगस्त 2026 तक उपलब्ध बाजार भाव के आधार पर अनुमानित गणना
| निवेश | एक साल पहले | आज का भाव | आज ₹1 लाख की कीमत | मुनाफा | रिटर्न |
|---|---|---|---|---|---|
| 24K सोना | ₹1,01,060/10 ग्राम | ₹1,52,644/10 ग्राम | ₹1,51,000 | ₹51,000 | लगभग 51% |
| चांदी | ₹1,14,390/किलो | ₹2,44,900/किलो | ₹2,14,000 | ₹1,14,000 | लगभग 114% |
नोट: गणना बाजार भाव के आधार पर है। इसमें GST, मेकिंग चार्ज, ब्रोकरेज और खरीद-बिक्री के अन्य खर्च शामिल नहीं हैं.
चांदी सिर्फ कीमती धातु नहीं है. इसका बड़ा इस्तेमाल उद्योगों में होता है. सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरी औद्योगिक गतिविधियों में चांदी की मांग रहती है. यानी चांदी की कीमत पर निवेशकों की खरीदारी के साथ इंडस्ट्रियल डिमांड का भी असर पड़ता है. इसी वजह से जब बाजार में निवेश मांग और औद्योगिक मांग दोनों एक साथ मजबूत होती हैं तो चांदी की कीमत सोने की तुलना में ज्यादा तेज भाग सकती है. लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है. अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ती है और औद्योगिक मांग घटती है तो चांदी पर दबाव सोने की तुलना में ज्यादा हो सकता है.
सोने की अगली चाल के लिए अमेरिकी ब्याज दर और महंगाई सबसे अहम संकेत बन गए हैं. कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद हाल में सोने को सपोर्ट मिला है और बाजार अब अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों का इंतजार कर रहा है.
अगर अमेरिकी महंगाई नरम पड़ती है और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ती है तो सोने को फायदा मिल सकता है. इसके उलट अगर महंगाई ज्यादा रहती है और फेडरल रिजर्व दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखता है तो सोने पर दबाव आ सकता है. यानी अगले एक साल में सोने की कहानी सिर्फ भारत की मांग से तय नहीं होगी. अमेरिका का ब्याज दर फैसला भारतीय निवेशक की जेब पर भी असर डालेगा.
यहीं निवेशकों को सावधान रहने की जरूरत है. पिछले एक साल में 50 फीसदी या 100 फीसदी से ज्यादा रिटर्न मिलना इस बात की गारंटी नहीं है कि अगले 12 महीने में भी इतनी ही तेजी मिलेगी. सोने और चांदी दोनों में इस साल बड़ी गिरावट भी देखने को मिली है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना जनवरी के रिकॉर्ड स्तर से करीब 20 फीसदी तक नीचे आया था, जबकि चांदी अपने जनवरी के रिकॉर्ड से 40 फीसदी से ज्यादा फिसली थी. इसलिए मौजूदा तेजी को देखकर यह मान लेना कि कीमतें बिना रुके ऊपर जाएंगी, खतरनाक हो सकता है.
कमोडिटी और मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय कहते हैं कि पिछले एक साल का आंकड़ा साफ है. सोने ने पैसा बढ़ाया और चांदी ने उससे भी ज्यादा तेज रफ्तार दिखाई. लेकिन अब निवेशक के सामने सबसे बड़ा सवाल रिटर्न का नहीं, रिस्क का है. अगर सोना आगे बढ़ता है तो अमेरिकी ब्याज दर, डॉलर, केंद्रीय बैंकों की खरीद और भू-राजनीतिक तनाव इसके बड़े कारण होंगे. चांदी के लिए इन सबके अलावा सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरी इंडस्ट्री की मांग भी अहम रहेगी. इसलिए पिछले एक साल के शानदार रिटर्न को देखकर पूरी रकम एक साथ लगाने के बजाय निवेश की अवधि, जोखिम और खरीद का स्तर देखना ज्यादा जरूरी है.
सोने ने करीब 50 फीसदी और चांदी ने 100 फीसदी से ज्यादा रिटर्न देकर निवेशकों को चौंकाया है. अब असली परीक्षा यह होगी कि ये दोनों धातुएं इस तेजी को कितने समय तक कायम रख पाती हैं.
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